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शरीर · अंग

आँखें

आपकी आँखें तरल से भरी दो छोटी गेंदें हैं, जो रोशनी को बिजली के संकेतों में बदलती हैं। ये एक जीवित लेंस का आकार बदलकर फ़ोकस करती हैं, छह नन्ही मांसपेशियों पर घूमती हैं, और हर पलक झपकने के साथ ख़ुद को धो लेती हैं — पर असल में देखने का काम सिर के पीछे, दिमाग़ में होता है।

परिचय

आँखें क्या हैं?

आँखें देखने के अंग हैं। हर आँख लगभग 2.4 सेमी चौड़ी एक मज़बूत, गोल गेंद है, जो खोपड़ी की एक हड्डी वाली कटोरी में रहती है — इसे ऑर्बिट (आँख का गड्ढा) कहते हैं। रोशनी सामने की साफ़ खिड़की से अंदर आती है, लेंस उसे फ़ोकस करता है, और वह पीछे की एक पतली, रोशनी पहचानने वाली परत पर पड़ती है, जिसे रेटिना कहते हैं।

रेटिना रोशनी को बिजली के संकेतों में बदलता है। ऑप्टिक नस — बारह क्रेनियल नसों में से दूसरी, यानी वे नसें जो सीधे दिमाग़ से निकलती हैं — इन संकेतों को दिमाग़ के पिछले हिस्से तक ले जाती है, जहाँ ये वह तस्वीर बनते हैं जो आप देखते हैं। यानी आँख असल में दिमाग़ की ही एक आगे बढ़ी हुई चौकी है।

कमज़ोर नज़र बहुत आम है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का अनुमान है कि दुनिया भर में कम से कम 220 करोड़ लोगों को पास या दूर देखने में कोई न कोई तकलीफ़ है, और इनमें से लगभग आधे मामलों को रोका जा सकता था या उनका अभी तक इलाज नहीं हुआ है — अक्सर चश्मे या मोतियाबिंद के ऑपरेशन जैसी सीधी-सादी चीज़ से।

आँख की गेंद: आगे साफ़ खिड़की, बीच में छेद वाला रंगीन छल्ला, बाहर सख़्त सफ़ेद परत, और पीछे नस की तार।

काम

आँखें क्या काम करती हैं?

आँख काफ़ी हद तक कैमरे जैसी काम करती है, बस यह जीवित कैमरा है। कॉर्निया और लेंस रोशनी को मोड़ते हैं ताकि वह रेटिना पर एकदम साफ़ फ़ोकस हो। आइरिस — रंगीन छल्ला — पुतली को बड़ा या छोटा करके कम-ज़्यादा रोशनी अंदर आने देता है। रेटिना की रोशनी वाली कोशिकाएँ तस्वीर को नस के संकेतों में बदलती हैं, और दिमाग़ दोनों आँखों की तस्वीरों को जोड़कर एक बना देता है।

  • लेंस का आकार बदलकर पास और दूर की चीज़ों की रोशनी फ़ोकस करती हैं।
  • पुतली के ज़रिए एक सेकंड के अंदर तय करती हैं कि कितनी रोशनी अंदर आए।
  • अच्छी रोशनी में बारीक़ी और रंग (कोन कोशिकाएँ), और धीमी रोशनी में आकार और हलचल (रॉड कोशिकाएँ) देखती हैं।
  • दोनों आँखों की थोड़ी अलग-अलग तस्वीरों की तुलना करके गहराई और दूरी का अंदाज़ा लगाती हैं।
  • आँसुओं और पलक झपकने से सामने की सतह को गीला, साफ़ और सुरक्षित रखती हैं।
  • संतुलन में मदद करती हैं: जो आप देखते हैं, वह भीतरी कान के साथ मिलकर आपको स्थिर रखता है।
  1. रोशनी अंदर आती है

    रोशनी आँसू की परत और साफ़, गुंबद जैसे कॉर्निया से गुज़रती है, जो उसे मोड़ने का ज़्यादातर काम करता है।

  2. पुतली मात्रा तय करती है

    तेज़ रोशनी में आइरिस पुतली को छोटा करता है और अँधेरे में बड़ा।

  3. लेंस बारीक़ फ़ोकस करता है

    नन्ही सिलियरी मांसपेशियाँ लेंस का आकार बदलती हैं — पास के काम के लिए ज़्यादा गोल, दूर के लिए ज़्यादा चपटा।

  4. रेटिना तस्वीर पकड़ता है

    तस्वीर रेटिना पर उलटी पड़ती है, जहाँ रॉड और कोन उसे बिजली के संकेतों में बदलते हैं।

  5. दिमाग़ देखता है

    ऑप्टिक नसें संकेतों को दिमाग़ के पिछले हिस्से के 'देखने वाले इलाक़े' तक ले जाती हैं, जो तस्वीर को सीधा करता है और दोनों आँखों के दृश्य जोड़ता है।

आँखें दूसरे अंगों के साथ कैसे काम करती हैं?

  • दिमाग़ (मस्तिष्क) — असल में देखना दिमाग़ के पिछले हिस्से के देखने वाले इलाक़े में होता है; दिमाग़ के दूसरे हिस्से तय करते हैं कि किस चीज़ को देखना है।
  • क्रेनियल नसें (कपाल-नसें) — बारह क्रेनियल नसों में से छह आँख का काम करती हैं: देखने, घुमाने, छूने का एहसास और आँसुओं के लिए।
  • कान — सिर हिलने पर नज़र को स्थिर रखने के लिए आँखें और भीतरी कान का संतुलन वाला अंग एक टीम की तरह काम करते हैं।
  • नाक — हर आँख के भीतरी कोने से आँसू बहकर नाक में जाते हैं।
  • रक्त-नलियाँ (धमनियाँ और शिराएँ) — रेटिना शरीर के उन ऊतकों में है जिन्हें सबसे ज़्यादा ख़ून चाहिए; बढ़ी शुगर और हाई ब्लड प्रेशर इसकी बारीक नलियों को नुक़सान पहुँचाते हैं।
  • आँख, कान, नाक और मुँह — आँख, कान, नाक और मुँह मिलकर ज्ञानेंद्रियाँ बनाते हैं।

बनावट

आँख के कौन-कौन से हिस्से हैं?

आँख में एक बाहरी रक्षक परत, ख़ून की नलियों और मांसपेशी वाली बीच की परत, अंदर की देखने वाली परत, रोशनी मोड़ने वाले साफ़ हिस्से, और आसपास के सहायक — पलकें, आँसू ग्रंथियाँ और मांसपेशियाँ होती हैं।

आँख का अगला हिस्सा

  • कॉर्निया — सबसे आगे का साफ़ गुंबद। इसमें ख़ून की नलियाँ नहीं होतीं, और फ़ोकस का ज़्यादातर काम यही करता है।
  • आइरिस और पुतली — आइरिस मांसपेशी का रंगीन छल्ला है; पुतली उसके बीच का छेद है, जिससे रोशनी अंदर जाती है।
  • लेंस — आइरिस के पीछे एक साफ़, लचीली टिकिया, जो आकार बदलकर फ़ोकस करती है। जब यह धुँधली हो जाती है, तो उसे मोतियाबिंद कहते हैं।
  • एक्वियस ह्यूमर — आँख के अगले हिस्से में भरा पानी जैसा तरल। यह लगातार बनता और निकलता रहता है; अगर यह बहुत धीरे निकले तो आँख के अंदर दबाव बढ़ता है, जैसा ग्लूकोमा (काला मोतिया) में होता है।
  • कंजंक्टिवा — एक पतली, पारदर्शी झिल्ली, जो आँख के सफ़ेद हिस्से और पलकों के अंदर को ढकती है। इसमें सूजन हो तो आँख गुलाबी-लाल हो जाती है।
आँख के अंदर: कॉर्निया और लेंस रोशनी को मोड़ते हैं और उसे फ़ोविया पर फ़ोकस करते हैं — रेटिना की सबसे साफ़ देखने वाली जगह।

आँख की दीवार और पिछला हिस्सा

  • स्क्लेरा — मज़बूत सफ़ेद बाहरी परत, जो आँख की गेंद का आकार बनाए रखती है।
  • कोरॉइड — गहरे रंग की बीच की परत, ख़ून की नलियों से भरी, जो रेटिना की बाहरी परत को पोषण देती है।
  • विट्रियस — एक साफ़ जेली, जो आँख की गेंद का ज़्यादातर हिस्सा भरती है। आँखों के आगे तैरते छोटे धब्बे इसी जेली के कण होते हैं।
  • रेटिना — रोशनी वाली और नस वाली कोशिकाओं की पतली भीतरी परत — यानी 'फ़िल्म'। इसकी रॉड कोशिकाएँ धीमी रोशनी में काम करती हैं; कोन कोशिकाएँ रंग और बारीक़ी देखती हैं।
  • मैक्युला और फ़ोविया — रेटिना के बीच का छोटा, पीलापन लिए इलाक़ा, जिसमें एक नन्हा गड्ढा (फ़ोविया) कोन कोशिकाओं से ठसाठस भरा है — पढ़ने और चेहरे पहचानने के लिए।
  • ऑप्टिक नस और अंधा बिंदु — लगभग दस लाख नस-तंतु मिलकर ऑप्टिक नस के रूप में आँख से निकलते हैं। जहाँ से ये निकलते हैं, वहाँ रोशनी वाली कोशिकाएँ नहीं होतीं, इसलिए हर आँख में एक छोटा अंधा बिंदु होता है।

आँख के आसपास के सहायक

आँख की गेंद अकेले काम नहीं करती। पलकें, आँसू और मांसपेशियाँ उसकी रक्षा करती हैं और उसे सही दिशा में घुमाती हैं।

  • पलकें और बरौनियाँ — आँख की रक्षा के लिए बंद होती हैं और हर झपक के साथ आँसू फैलाती हैं। पलक के किनारे की नन्ही ग्रंथियाँ एक तैलीय परत जोड़ती हैं, जिससे आँसू जल्दी नहीं सूखते।
  • आँसू (लैक्रिमल) ग्रंथि — हर आँख के बाहरी कोने के ऊपर रहती है और आँसू का पानी वाला हिस्सा बनाती है।
  • आँसू की निकासी — भीतरी कोने पर दो नन्हे छेद एक छोटी थैली में, और फिर एक नली से नीचे नाक में खुलते हैं।
  • आँख की छह मांसपेशियाँ — चार सीधी और दो तिरछी मांसपेशियाँ हर आँख को घुमाती हैं। इनमें से चार को तीसरी क्रेनियल नस चलाती है, एक को चौथी और एक को छठी।
आँसू बाहरी कोने के ऊपर बनते हैं, आँख पर फैलकर उसे धोते हैं, और भीतरी कोने से नाक में बह जाते हैं। छह मांसपेशियाँ आँख को घुमाती हैं।

आँखें कहाँ होती हैं?

हर आँख अपने ऑर्बिट में रहती है — खोपड़ी के सामने शंकु जैसा हड्डी का गड्ढा, जिसमें चर्बी की गद्दी होती है। ऑर्बिट की पतली हड्डियों के ऊपर, नीचे और अंदर की तरफ़ साइनस (हवा भरी गुफाएँ) हैं, और ठीक पीछे और ऊपर दिमाग़ है।

ऑप्टिक नसें आँखों से पीछे की ओर जाती हैं, पिट्यूटरी ग्रंथि के ठीक ऊपर आंशिक रूप से एक-दूसरे को पार करती हैं, और सिर के एकदम पिछले हिस्से के देखने वाले इलाक़े तक पहुँचती हैं। इसीलिए दिमाग़ के पिछले हिस्से में चोट या स्ट्रोक से, आँखें ठीक होने पर भी, नज़र पर असर पड़ सकता है।

LMNT पद्धति में सिर के पीछे के इसी इलाक़े पर सीधे काम होता है: (2) Medulla के बाद खोपड़ी के पीछे Brodmann's area 17 और 18 की घिसाई की जाती है — आँखों और बोलने की तकलीफ़ों के लिए।

आँखें सामने हैं, पर देखना पीछे होता है: ऑप्टिक नसें तस्वीर को पूरे रास्ते देखने वाले इलाक़े तक ले जाती हैं।

इसके पड़ोसी:

आँखें दिखती कैसी हैं?

बाहर से आँख की गेंद का सिर्फ़ लगभग छठा हिस्सा दिखता है: सफ़ेद स्क्लेरा, रंगीन आइरिस और काली पुतली — और इन सब पर चमकदार, पारदर्शी कॉर्निया। बाक़ी हिस्सा गड्ढे में छिपा रहता है।

आइरिस का रंग — गहरे भूरे से, जो भारत में सबसे आम है, हल्के भूरे, हरे या नीले तक — इस पर निर्भर है कि आइरिस में कितना भूरा रंजक (मेलेनिन) है। पुतली काली इसलिए दिखती है क्योंकि अंदर गई रोशनी पीछे सोख ली जाती है और बाहर नहीं आती।

आँखें कितनी बड़ी होती हैं?

वयस्क की आँख की गेंद आगे से पीछे तक लगभग 24 मिमी होती है — टेबल-टेनिस की गेंद से थोड़ी छोटी — और इसका वज़न लगभग 7 से 8 ग्राम होता है। नवजात की आँख पहले से ही लगभग 16–17 मिमी होती है और पहले कुछ सालों में लगभग वयस्क आकार तक पहुँच जाती है।

कॉर्निया बीच में सिर्फ़ लगभग आधा मिलीमीटर मोटा होता है। फ़ोविया — सबसे साफ़ देखने की जगह — लगभग 1.5 मिमी चौड़ी होती है। अगर आँख थोड़ी ज़्यादा लंबी हो तो दूर का कम दिखता है (मायोपिया); थोड़ी छोटी हो तो पास का।

लगभग 24 मिमी और 7–8 ग्राम: टेबल-टेनिस की गेंद से छोटी।

रोग और गड़बड़ियाँ

आँखों को कौन-सी बीमारियाँ और गड़बड़ियाँ प्रभावित करती हैं?

आँखों की तकलीफ़ें फ़ोकस, सतह, लेंस, अंदर के दबाव, रेटिना और नस, या मांसपेशियों और पलकों पर असर डाल सकती हैं। कुछ सबसे गंभीर तकलीफ़ें — जैसे ग्लूकोमा और डायबिटीज़ से आँख की बीमारी — न दर्द देती हैं, न शुरू में कोई चेतावनी। इसीलिए आँखों की नियमित जाँच ज़रूरी है।

आँख की सतह

लेंस और देखने वाली परतें

मांसपेशियाँ, नसें और पलकें

कहीं और की तकलीफ़ के संकेत आँख में

आँख की तकलीफ़ के आम संकेत क्या हैं?

  • दूर या पास का धुँधला, मद्धम या धुंध भरा दिखना
  • लाल, दर्द भरी, खुजलाती या किरकिरी आँखें
  • पानी आना, या आँखों का सूखा और जलता महसूस होना
  • दोहरा दिखना, रोशनी के चारों ओर घेरे, या रात में चौंध
  • नए तैरते धब्बे, रोशनी की चमक, या नज़र के किसी हिस्से पर परछाईं या पर्दा
  • लटकी पलक, टेढ़ी आँख, या रोशनी से चुभन

आँखों की सेहत कौन-सी जाँचों से देखी जाती है?

  • नज़र का चार्ट (विज़ुअल एक्युइटी) — चार्ट पर अक्षर पढ़ना, एक बार में एक आँख से — इससे पता चलता है कि आप कितना साफ़ देखते हैं।
  • रिफ़्रैक्शन (चश्मे का नंबर) — पता लगाता है कि आपको कितने नंबर का चश्मा या लेंस चाहिए।
  • स्लिट-लैम्प जाँच — तेज़ रोशनी वाली माइक्रोस्कोप पलकें, कॉर्निया, आइरिस और लेंस को बारीक़ी से दिखाती है।
  • आँख का दबाव (टोनोमेट्री) — आँख के अंदर का दबाव नापती है — ग्लूकोमा की एक ज़रूरी जाँच।
  • पुतली फैलाकर रेटिना की जाँच (फ़ंडस जाँच) — ड्रॉप्स पुतली को फैलाते हैं ताकि डॉक्टर रेटिना, ऑप्टिक नस और उसकी नलियाँ देख सकें — डायबिटीज़ में हर साल ज़रूरी।
  • OCT स्कैन और विज़ुअल फ़ील्ड टेस्ट — OCT रेटिना की परतों का बिना दर्द का रोशनी वाला स्कैन है; फ़ील्ड टेस्ट नज़र के किनारों का नक़्शा बनाता है।

आँखों की बीमारियों का इलाज कैसे होता है?

  • चश्मा और कॉन्टैक्ट लेंस — दूर-पास की कमज़ोर नज़र, एस्टिग्मैटिज़्म, और 40 के बाद पढ़ने में आने वाली दिक़्क़त को ठीक करते हैं।
  • आई ड्रॉप्स — सूखी आँखों के लिए चिकनाई वाले ड्रॉप्स, एंटीबायोटिक या एलर्जी के ड्रॉप्स, और ग्लूकोमा में दबाव घटाने वाले रोज़ के ड्रॉप्स — ठीक वैसे ही जैसे लिखे गए हों।
  • मोतियाबिंद का ऑपरेशन — धुँधला लेंस निकालकर उसकी जगह साफ़ कृत्रिम लेंस लगाया जाता है — दुनिया के सबसे आम और सबसे सफल ऑपरेशनों में से एक।
  • लेज़र इलाज — कुछ तरह के ग्लूकोमा, डायबिटिक रेटिनोपैथी और रेटिना के छेद में इस्तेमाल होता है; लेज़र से कॉर्निया का आकार बदलकर चश्मे की ज़रूरत भी कम की जा सकती है।
  • आँख में इंजेक्शन — गीले मैक्युलर डीजेनरेशन और डायबिटीज़ से आँख की कुछ बीमारियों में, आँख के विशेषज्ञ देते हैं।
  • कारण का इलाज — शुगर, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल पर क़ाबू रेटिना को उतना ही बचाता है जितना कोई भी आँख का इलाज।

न्यूरोथेरेपी (LMNT)

LMNT पद्धति आँख को उसकी नसों के ज़रिए पढ़ती है। छह क्रेनियल नसें आँख का काम करती हैं, और कानों के नीचे गर्दन के किनारे दिया जाने वाला Medulla ट्रीटमेंट उन्हीं से मेल खाती संख्याओं में दिया जाता है — इसलिए संख्या शिकायत से नहीं, जाँच में मिली बात से चुनी जाती है। शिक्षा की तीन पंक्तियाँ 'दोहरा दिखना' कहती हैं और तीन अलग संख्याएँ देती हैं, क्योंकि फ़ैसला इस बात से होता है कि आँख असल में किस स्थिति में है: पुतली फैली है, आँख ऊपर-बाहर मुड़ी है, या नीचे-बाहर। नज़र के लिए शिक्षा (2) Medulla देती है, और उसके बाद सिर के पीछे देखने वाले इलाक़ों पर घिसाई। आँख के आसपास यह आँसुओं के लिए और थकी आँखों वाले सिरदर्द के लिए हल्के स्थानीय पॉइंट जोड़ती है। यह सब आँख के डॉक्टर के साथ दिया जाता है — ग्लूकोमा के बारे में तो शिक्षा ख़ुद यह बात सबसे ज़ोर से कहती है।

पॉइंट

  • (2) Medulla — ऑप्टिक नस वाला ट्रीटमेंट: कम दिखने या न दिखने और रेटिना की नस-कोशिकाओं की तकलीफ़ों के लिए। दोनों तरफ़ दो बार दिया जाता है — Medulla परिवार का सबसे छोटा ट्रीटमेंट।
  • Brodmann's Area 17 & 18 Ghisai — सिर के पीछे दो घेरों पर अँगूठे की धार से घिसाई। शिक्षा कहती है कि (2) Medulla के बाद इससे आँखों और बोलने की तकलीफ़ों में बहुत लाभ देखा गया — और क्रम, पहले (2) Medulla, निर्देश का हिस्सा है।
  • Medulla — आँख के लिए दूसरी संख्याएँ: (3) — अंदर, ऊपर और नीचे घुमाने वाली सीधी मांसपेशियाँ, लटकी पलक, लेंस का तालमेल और फैली पुतली; (4) — नीचे-बाहर अटकी आँख; (6) — ऊपर-बाहर या बाहर मुड़ी आँख; (5) — कॉर्निया, कंजंक्टिवा, पलकें, आँख का दर्द, और पानी के साथ लाली; (7) — आँसू और ठीक से बंद न होने वाली पलकें, जैसे बेल्स पाल्सी में।
  • Lacrimal Point — (30) Lacrimal duct: नरम कपड़े में लिपटे अँगूठे और दूसरी उँगली से आँख के भीतरी कोने पर, नाक के बगल में, तीस बार दबाकर छोड़ना। सूखी आँखों और लगातार पानी आने वाली आँखों के लिए। शिक्षा ग्लूकोमा का भी नाम लेती है — पर हमेशा आँख के डॉक्टर के ड्रॉप्स के साथ, उनकी जगह कभी नहीं।
  • Satnam — पीछे खड़े होकर दिया जाने वाला सिरदर्द का ट्रीटमेंट, जिसमें ऊतक को भौंहों से कनपटी तक और फिर गर्दन तक खींचा जाता है। शिक्षा कहती है कि यह सिरदर्द और आँखों के लिए बहुत लाभदायक है।
  • (6) Adr — कंजंक्टिवाइटिस में ((5) Medulla के साथ (6) Adr × 3 treatments) और लगातार पानी वाली लाली में जोड़ा जाता है। यह दवाओं के बुरे असर के लिए भी शिक्षा का ट्रीटमेंट है: दर्ज एक महिला की आँखों से एक इंजेक्शन के अगले दिन से महीनों तक पानी आता रहा था।
  • Necklace — रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा के लिए शिक्षा के तीन हिस्सों वाले फ़ॉर्मूले का भाग II, जो (2) Medulla × 12 के बाद दिया जाता है।
  • (10) Pan — Pan की इंसुलिन वाली गिनती; शिक्षा इसे मोतियाबिंद और आँखों की बीमारियों के लिए भी गिनाती है।

फ़ॉर्मूले

Formula No. 4

(10) Medulla (4) Thrd 'P' (20) Round arrow (8) Pan। Pan पर और नाभि के आसपास के उस बहुत तेज़ दर्द के लिए बना, जो बाक़ी सब कुछ देने के बाद भी बना रहे; शिक्षा आँखों की बीमारियाँ — जैसे मोतियाबिंद, रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा और रतौंधी — भी गिनाती है, और साथ ही लिखती है कि सभी आँख के रोगियों को एक जैसा लाभ नहीं हुआ।

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Medulla, क्रम से बढ़ती शृंखला

(2) Medulla × 12, फिर (3) Necklace, फिर Formula No. 4 — रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा के लिए शिक्षा की तीन हिस्सों वाली योजना; यह रेटिना की रोशनी वाली कोशिकाओं का धीरे-धीरे होने वाला, विरासत में मिला क्षय है।

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(6) Adr × 3 treatments

एड्रिनल ट्रीटमेंट, जो कंजंक्टिवाइटिस में (5) Medulla के साथ दिया जाता है और शिक्षा में दवाओं के बुरे असर के लिए इस्तेमाल होता है।

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Chole Treatment

चर्बी के पाचन का एक फ़ॉर्मूला; शिक्षा इसके इस्तेमालों में मोतियाबिंद, रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा और रतौंधी भी गिनाती है।

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गुरुजी कहते हैं

“जहाँ भी सवाल का निशान लगा है, वह इस बात का इशारा है कि यह मेरी अपनी सोच है, जिस पर अब दूसरे लोग शोध कर सकते हैं।”
— डॉ. लाजपतराय मेहरा
“हमारे इलाज से रोगी को तुरंत फ़ायदा मिले या न मिले, हमारी लापरवाही से उसे कोई नुक़सान न पहुँचे — इसका ध्यान रखें।”
— डॉ. लाजपतराय मेहरा
“न्यूरोथेरेपी (LMNT) शरीर की हालत के अनुसार इलाज करती है।”
— डॉ. लाजपतराय मेहरा

यह कभी न करें

  • उसी दिन इमरजेंसी: अचानक नज़र जाना या धुँधली होना, नज़र पर पर्दा या परछाईं, एक साथ बहुत-से नए धब्बे या चमक, या धुँधलेपन, रोशनी के चारों ओर घेरे, सिरदर्द और उल्टी के साथ अचानक आँख में तेज़ दर्द (संभवतः तीव्र ग्लूकोमा)। आँख के अस्पताल जाएँ या 108/112 पर फ़ोन करें — कोई पॉइंट नहीं दिया जाता।
  • ग्लूकोमा: अपने ड्रॉप्स और अपॉइंटमेंट कभी न छोड़ें। इससे गई रोशनी बिना दर्द के जाती है और कभी वापस नहीं आती। Lacrimal point आँख के डॉक्टर के इलाज के साथ जोड़ा जाता है, उसकी जगह कभी नहीं। Lacrimal Point
  • मोतियाबिंद का इलाज एक असरदार ऑपरेशन है। किसी ट्रीटमेंट से आराम लगने की वजह से मोतियाबिंद का ऑपरेशन न टालें। मोतियाबिंद (मोतिया)
  • आँख के आसपास: साफ़ हाथ, छोटे नाख़ून, सचमुच नरम कपड़ा, और आँख की गेंद पर कभी कोई दबाव नहीं। लाल और दुखती आँख में, आँख की चोट या हाल के आँख के ऑपरेशन के बाद, या भीतरी कोने पर गर्म, लाल, दुखती सूजन हो तो आँख का कोई पॉइंट नहीं।
  • धुँधली नज़र या रोशनी से तेज़ चुभन के साथ लाल, दुखती आँख — ख़ासकर एंकिलोज़िंग स्पॉन्डिलाइटिस वाले व्यक्ति में — के लिए जल्दी आँख के डॉक्टर के पास जाना ज़रूरी है, चटाई पर नहीं। How to say it
  • आँखों के सफ़ेद हिस्से का पीला पड़ना, ख़ासकर भूख न लगने या गहरे पेशाब के साथ, पहले डॉक्टर का मामला है।
  • आँख के डॉक्टर की सलाह के बिना केमिस्ट से लेकर स्टेरॉयड या कोई दूसरी आँख की दवा अपनी आँखों में कभी न डालें।
  • (6) Adr रोग-प्रतिरोधक शक्ति घटाता है और हाई ब्लड प्रेशर में नहीं दिया जाता; Formula No. 4 का (10) Medulla डायबिटीज़ या कैंसर में नहीं दिया जाता, और दिल के रोगियों में सिर्फ़ (10) Left Medulla। (6) Adr
  • Medulla की गिनती ही ट्रीटमेंट है: दूसरी संख्या एक अलग ट्रीटमेंट है, ज़्यादा या कम ताक़त वाला वही ट्रीटमेंट नहीं। संख्या सिर्फ़ प्रशिक्षित थेरेपिस्ट उसी दिन आपकी जाँच करके चुनता है। Medulla, क्रम से बढ़ती शृंखला
  • कैंसर: अगर व्यक्ति को कैंसर है, तो (10) Pan, Thymus, Pit, Lu + Sh, Rt. Ov / Lt. Ov और (30) Medulla कभी नहीं दिए जाते — थेरेपिस्ट योजना बदल देता है।
  • डॉक्टर की दी हुई दवाएँ, ड्रॉप्स और इलाज जारी रखें, और उन्हें अपने-आप कभी बंद या कम न करें। न्यूरोथेरेपी (LMNT) आपके डॉक्टरी इलाज के साथ काम करती है, उसकी जगह कभी नहीं।

देखभाल

मैं अपनी आँखें स्वस्थ कैसे रखूँ?

नज़र चुराने वाला ज़्यादातर नुक़सान चुपचाप बनता है, इसलिए किसी एक उपाय से ज़्यादा आदतें और नियमित जाँच मायने रखती हैं।

आँखों को आराम: 20-20-20

पढ़ते समय या स्क्रीन पर, हर 20 मिनट में 20 सेकंड के लिए लगभग 20 फ़ुट (6 मीटर) दूर किसी चीज़ को देखें, और पलक झपकाना याद रखें।

बच्चों को बाहर खेलने भेजें

दिन की रोशनी में बिताया समय बच्चे के दूर की नज़र कमज़ोर होने की संभावना घटाता है। ज़्यादातर दिनों कम से कम एक-दो घंटे बाहर रहने का लक्ष्य रखें।

आँखों पर कपड़ा रखें, बाँह नहीं

गुरुजी का नींद वाला नियम: रात को रोशनी परेशान करे तो आँखों पर कपड़ा रखें। आँखों पर बाँह रखकर या हाथ सिर के ऊपर रखकर न सोएँ, क्योंकि इससे बाँह की नलियों पर दबाव पड़ता है।

अपने आँकड़े जानें

शुगर और ब्लड प्रेशर पर क़ाबू रेटिना की रक्षा करता है। डायबिटीज़ वालों को, अच्छी नज़र होने पर भी, हर साल पुतली फैलाकर आँखों की जाँच करानी चाहिए।

40 के बाद जाँच कराएँ

40 के बाद हर एक-दो साल में आँखों की पूरी जाँच कराएँ, जिसमें आँख का दबाव भी हो — परिवार में ग्लूकोमा हो तो और पहले।

इनकी रक्षा करें

तेज़ धूप में UV रोकने वाला धूप का चश्मा, पीसने के काम या पटाख़ों के समय सुरक्षा चश्मा पहनें, और आँखों को ज़ोर से न मलें।

आम सवाल

क्या आँखों के व्यायाम से चश्मे की ज़रूरत ख़त्म हो जाती है?

कोई भी अच्छा अध्ययन यह नहीं दिखाता कि व्यायाम आँख का आकार बदलते हैं, और आँख का आकार ही तय करता है कि दूर का कम दिखेगा या पास का। व्यायाम और पामिंग थकी आँखों को आराम दे सकते हैं और अच्छे लगते हैं। जिस चश्मे की ज़रूरत है, उसे पहनें — चश्मा आँखों को कमज़ोर नहीं करता।

क्या कम रोशनी में पढ़ने या टीवी के पास बैठने से आँखें ख़राब होती हैं?

इससे आँखें थक सकती हैं और सिरदर्द हो सकता है, पर वयस्कों में इससे स्थायी नुक़सान नहीं होता। बच्चों में बहुत देर तक पास का काम और बाहर कम समय बिताना दूर की कमज़ोर नज़र से जुड़ा है।

40 के बाद पढ़ने का चश्मा क्यों चाहिए?

उम्र के साथ लेंस धीरे-धीरे सख़्त होता जाता है और पास के काम के लिए पूरा गोल नहीं हो पाता। इसे प्रेसबायोपिया कहते हैं और यह लगभग सबको होता है। गुरुजी की शिक्षा इसमें अपनी एक सोच जोड़ती है — 'शायद' के साथ लिखी — कि आँख की अकड़ी मांसपेशियों का भी इसमें हाथ हो सकता है।

क्या ग्लूकोमा महसूस होता है?

आम तौर पर नहीं। इसका आम प्रकार कोई दर्द नहीं देता और धीरे-धीरे पहले किनारे की नज़र छीनता है, इसलिए लोगों को देर से पता चलता है। इसे जल्दी सिर्फ़ वह जाँच पकड़ सकती है जो दबाव नापे और ऑप्टिक नस को देखे।

क्या आई ड्रॉप्स के साथ या आँख के ऑपरेशन के बाद न्यूरोथेरेपी (LMNT) ली जा सकती है?

हाँ, उनके साथ — उनकी जगह कभी नहीं। आँख के डॉक्टर का हर ड्रॉप जारी रखें। आँख के ऑपरेशन के बाद, जब तक सर्जन न कहें कि आँख ठीक हो गई है, आँख के आसपास कोई पॉइंट नहीं दिया जाता; शरीर के दूसरे हिस्सों के पॉइंट आपका थेरेपिस्ट तय कर सकता है।

मुझे अपने डॉक्टर या थेरेपिस्ट से क्या पूछना चाहिए?

  • मेरी हर आँख की नज़र कितनी है, और मेरी आँख का दबाव कितना है?
  • क्या मेरी आँखों में ग्लूकोमा, मोतियाबिंद या डायबिटीज़ का कोई संकेत है?
  • मुझे कितने समय बाद आँखों की जाँच करानी चाहिए?
  • किन लक्षणों पर मुझे उसी दिन वापस आना चाहिए?
  • ये ड्रॉप्स कितने समय तक डालने हैं, और छूट जाएँ तो क्या होगा?
  • (थेरेपिस्ट से) आप मेरी आँखों के लिए Medulla की कौन-सी संख्या दे रहे हैं, और जाँच में ऐसा क्या दिखा जिससे यह चुनी गई?

हैरान करने वाली बातें

1हर आँख में एक अंधा बिंदु है, जो आपको कभी पता नहीं चलता

जहाँ से ऑप्टिक नस आँख से निकलती है, वहाँ रोशनी वाली एक भी कोशिका नहीं होती, इसलिए हर आँख की नज़र में एक छोटा-सा छेद है। आपको यह कभी दिखता नहीं, क्योंकि दूसरी आँख उस जगह को ढक लेती है और दिमाग़ चुपचाप ख़ाली जगह भर देता है।

स्रोत: Guyton & Hall, Textbook of Medical Physiology — the optic disc and the physiological blind spot; Purves, Neuroscience.

2आपके रेटिना पर तस्वीर उलटी बनती है

किसी भी लेंस की तरह, आँख का लेंस रेटिना पर उलटी और दाएँ-बाएँ पलटी तस्वीर बनाता है। दिमाग़ उसे सीधा कर देता है और आपको कभी पता भी नहीं चलता।

स्रोत: Guyton & Hall — optics of the eye (the retinal image is inverted).

3हर आँख में लगभग 10 करोड़ रोशनी वाली कोशिकाएँ

इंसानी रेटिना की सावधान गिनती में हर आँख में औसतन लगभग 9.2 करोड़ रॉड कोशिकाएँ (धीमी रोशनी के लिए) और लगभग 46 लाख कोन कोशिकाएँ (रंग और बारीक़ी के लिए) मिलीं। इनके संदेश ऑप्टिक नस के सिर्फ़ लगभग दस लाख तंतुओं में समेटकर भेजे जाते हैं।

अँधेरे के लिए रॉड, रंग के लिए कोन: हर आँख में लगभग दस करोड़ रोशनी वाली कोशिकाएँ।

स्रोत: Curcio CA et al., 'Human photoreceptor topography', J Comp Neurol 1990 (≈92 million rods, ≈4.6 million cones); Guyton & Hall (≈1 million optic nerve fibres).

4कॉर्निया हवा से साँस लेता है

कॉर्निया को बिल्कुल साफ़ रहना होता है, इसलिए उसमें ख़ून की एक भी नली नहीं होती। वह अपनी ज़्यादातर ऑक्सीजन सीधे हवा से लेता है, जो आँसू की परत में घुल जाती है — इसीलिए कॉन्टैक्ट लेंस पहनकर सोने से उसे ऑक्सीजन की कमी हो सकती है।

स्रोत: Gray's Anatomy (avascular cornea); Adler's Physiology of the Eye — corneal oxygen supply from the atmosphere via the tear film.

5रोने पर नाक बहने की एक वजह है

आँसू गालों पर बहने के लिए नहीं बनते। वे आँख को धोकर भीतरी कोने के दो नन्हे छेदों से निकल जाते हैं, एक नली से होकर जो नाक के अंदर खुलती है। ज़ोर से रोने पर यह नाली छलक जाती है: कुछ आँसू पलक पर से बह निकलते हैं, और बाक़ी तेज़ी से नाक में उतर जाते हैं।

स्रोत: Gray's Anatomy — lacrimal apparatus and nasolacrimal duct (opens under the inferior turbinate). LMNT story: eyes.md §19.4-4.

6बारह में से दो नसें सिर्फ़ एक-एक मांसपेशी पर ख़र्च होती हैं

हर आँख को छह छोटी मांसपेशियाँ घुमाती हैं। चार को तीसरी क्रेनियल नस चलाती है — और चौथी व छठी क्रेनियल नस सिर्फ़ एक-एक मांसपेशी चलाती हैं। इसीलिए डॉक्टर, या LMNT थेरेपिस्ट, सिर्फ़ यह देखकर कि आँख किस दिशा में नहीं घूम पा रही, बता सकता है कि कौन-सी नस कमज़ोर है।

आँख किस दिशा में नहीं घूम पाती, इससे पता चलता है कि कौन-सी नस कमज़ोर है।

स्रोत: Gray's Anatomy — extraocular muscles and their nerve supply (III, IV, VI). LMNT: eyes.md §37.20.

7आपकी आँखें त्वचा से पहले पीली होती हैं

पीलिया में पीला रंजक बिलीरुबिन ख़ून में जमा होता है। आँख का सफ़ेद हिस्सा इसे आसानी से पकड़ लेता है, इसलिए आँखों में पीलापन त्वचा से पहले दिखता है। इसीलिए डॉक्टर सबसे पहले दिन की रोशनी में आँखें देखते हैं — और इसीलिए पीली आँखें हमेशा डॉक्टर का मामला हैं।

स्रोत: StatPearls, 'Jaundice' (scleral icterus is usually visible at lower bilirubin levels than skin jaundice). LMNT story: eyes.md §12.9.

82050 तक आधी दुनिया को दूर का कम दिख सकता है

दुनिया भर के आँकड़े जोड़कर किए गए एक बड़े अध्ययन का अनुमान है कि 2050 तक लगभग आधे लोग — क़रीब 500 करोड़ — दूर की कमज़ोर नज़र वाले होंगे, जबकि 2000 में यह लगभग एक-चौथाई था। घर के अंदर ज़्यादा समय और पास का ज़्यादा काम इस बढ़त की एक बड़ी वजह मानी जाती है।

स्रोत: Holden BA et al., Ophthalmology 2016;123:1036–1042 (projected 4.76 billion with myopia, 49.8% of the world, by 2050).

आँकड़ों में आपकी आँखें

~24 mmआँख की गेंद, आगे से पीछे
6मांसपेशियाँ हर आँख को घुमाती हैं
~92 millionहर रेटिना में रॉड कोशिकाएँ
~1 millionहर ऑप्टिक नस में तंतु
6 of 12क्रेनियल नसें आँख का काम करती हैं
(30)Lacrimal point पर दबाव

योग

पामिंग — आँखों को अँधेरे में आराम Netra-viśrānti (palming)

पामिंग: बंद आँखों पर गर्म, कटोरी जैसी हथेलियाँ — अँधेरा और शांति, आँख की गेंद पर कोई दबाव नहीं।

फ़ायदे

  • स्क्रीन या पढ़ाई के बीच थकी आँखों को कुछ मिनट अँधेरा और आराम देता है।
  • चेहरे और माथे को ढीला करता है और साँस को शांत करता है।

कैसे करें

  1. ज़मीन या कुर्सी पर सीधी पीठ के साथ आराम से बैठें।
  2. हथेलियों को तेज़ी से आपस में रगड़ें, जब तक वे गर्म न हो जाएँ।
  3. आँखें बंद करें और हथेलियों को कटोरी की तरह उन पर रखें, उँगलियाँ माथे पर — आँख की गेंद को छुए या दबाए बिना।
  4. धीरे साँस लें और 1 से 2 मिनट अँधेरे का आनंद लें।
  5. हाथ नीचे करें और धीरे से आँखें खोलें।

ध्यान रखें

पहले हाथ धोएँ और आँखों पर कभी दबाव न डालें। आँख के ऑपरेशन के बाद कुछ हफ़्ते, या आँख लाल और संक्रमित हो तो, इसे न करें।

त्राटक — एकटक देखना Trāṭaka

त्राटक: छोटी लौ पर कोमल, स्थिर नज़र, फिर आराम के लिए आँखें बंद।

फ़ायदे

  • स्थिर ध्यान का अभ्यास कराता है; योग ग्रंथ इसे एकाग्रता के लिए महत्त्व देते हैं।
  • एक शांत, धीमा अभ्यास, जो बहुत लोगों को आराम देता है।

कैसे करें

  1. एक धीमी रोशनी वाले, शांत कमरे में बैठें; छोटी मोमबत्ती आँखों की ऊँचाई पर, लगभग एक हाथ की दूरी पर रखें।
  2. बिना ज़ोर डाले लौ को कोमलता से देखें; जब भी ज़रूरत हो, पलक झपकाएँ।
  3. 30 सेकंड से 1 मिनट बाद आँखें बंद करें और भीतर दिखती छवि को धीरे-धीरे मिटते देखें।
  4. दो-तीन बार दोहराएँ, फिर आँखों पर हथेलियाँ रखकर आराम करें।

ध्यान रखें

आँखें जलने या पानी आने तक कभी न घूरें। मिर्गी (टिमटिमाती लौ से दौरा पड़ सकता है), सूखी आँखें या हाल का आँख का ऑपरेशन हो तो इससे बचें, और ग्लूकोमा हो तो पहले आँख के डॉक्टर से पूछें।

आँखों की गतियाँ Netra-sañcālana

सिर स्थिर रखें और सिर्फ़ आँखें घुमाएँ — धीरे, बिना ज़ोर।

फ़ायदे

  • आँख की छहों मांसपेशियों को धीरे-धीरे पूरी हद तक चलाता है।
  • लंबी पढ़ाई या स्क्रीन के काम के बीच एक अच्छा विराम।

कैसे करें

  1. सीधे बैठें, सिर स्थिर, सामने देखते हुए।
  2. धीरे से ऊपर, फिर नीचे देखें — पाँच बार।
  3. धीरे से बाएँ, फिर दाएँ देखें — पाँच बार।
  4. आँखों से धीरे-धीरे घेरे बनाएँ — हर दिशा में पाँच।
  5. आँखें बंद करें, उन पर हथेलियाँ रखें, और आराम करें।

ध्यान रखें

चक्कर या जी मिचलाए तो रुक जाएँ। दोहरा दिखता हो, भेंगापन हो या हाल में आँख का ऑपरेशन हुआ हो, तो ये करने से पहले आँख के डॉक्टर से पूछें।

ख़ुद को परखें

1. किसी तस्वीर का असली 'देखना' कहाँ होता है?

2. रोने पर नाक क्यों बहती है?

3. LMNT पद्धति में दोहरा दिखने के लिए Medulla की संख्या किससे तय होती है?

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यह पेज समझाता है कि शरीर कैसे काम करता है; यह जाँच नहीं करता। न्यूरोथेरेपी (LMNT) आपके डॉक्टरी इलाज के साथ काम करती है — डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें, और कोई नया या गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर को दिखाएँ।

Neurotherapy.Life टीम द्वारा, डॉ. लाजपतराय मेहरा की शिक्षाओं पर आधारित

समीक्षा: डॉ. दिवाकर शुक्ला, वरिष्ठ न्यूरोथेरेपिस्ट

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