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शरीर · अंग

हृदय (दिल)

आपका दिल मुट्ठी के बराबर एक मांसपेशी है, जो बिना एक दिन की छुट्टी लिए रोज़ लगभग 1 लाख बार धड़कता है। यह अपनी ख़ुद की बिजली से चलता है, अपनी निजी धमनियों से अपना पेट भरता है, और वह थकान वाला रसायन भी जला लेता है जिसे बाक़ी मांसपेशियाँ फेंक देती हैं।

परिचय

दिल क्या है?

आपका दिल अंदर से खोखला, मांसपेशियों से बना एक पंप है, जिसका आकार लगभग आपकी मुट्ठी जितना है। यह छाती के बीच में रहता है और ज़िंदगी के हर सेकंड ख़ून को रक्त-नलियों के ज़रिए शरीर के हर हिस्से तक धकेलता है।

दिल आपके रक्त-संचार तंत्र का केंद्र है — यानी दिल, ख़ून और रक्त-नलियाँ, जो मिलकर काम करते हैं। यह अपनी अंदरूनी बिजली से रोज़ लगभग 1 लाख बार धड़कता है, और दिमाग़ से आने वाली एक नस लगातार इसकी रफ़्तार को घटाती-बढ़ाती रहती है।

दिल की बीमारी भारत और पूरी दुनिया में मौत की सबसे बड़ी वजहों में से एक है, फिर भी इसकी कई वजहें — हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ी शुगर, बढ़ा कोलेस्ट्रॉल, तंबाकू — जल्दी जाँची और संभाली जा सकती हैं।

दिल, सामने से: चार कक्ष, ऊपर बड़ी रक्त-नलियाँ, और वे कोरोनरी धमनियाँ जो ख़ुद दिल की मांसपेशी को ख़ून देती हैं। इसका आकार लगभग आपकी अपनी बंद मुट्ठी जितना है।

काम

दिल क्या काम करता है?

दिल असल में दो पंप हैं जो साथ-साथ जुड़े हैं। दायाँ हिस्सा थका हुआ, इस्तेमाल हो चुका ख़ून ऑक्सीजन लेने फेफड़ों में भेजता है। बायाँ हिस्सा ताज़ा, ऑक्सीजन वाला ख़ून पूरे शरीर में भेजता है। हर तरफ़ एक छोटा ऊपरी कमरा (एट्रियम) होता है जो ख़ून इकट्ठा करता है, और एक मज़बूत निचला कमरा (वेंट्रिकल) जो उसे बाहर धकेलता है।

  • ऑक्सीजन से भरा ख़ून हर अंग, मांसपेशी और कोशिका तक पंप करता है।
  • इस्तेमाल हुआ ख़ून फेफड़ों में भेजता है, ताकि वह कार्बन डाइऑक्साइड छोड़कर ताज़ी ऑक्सीजन ले सके।
  • पोषक तत्व, हॉर्मोन और पानी ऊतकों तक पहुँचाता है, और गंदगी को साफ़ होने के लिए किडनी और लिवर तक ले जाता है।
  • ब्लड प्रेशर बनाए रखता है — वह धक्का जिससे ख़ून पूरे शरीर में चलता है।
  • आप क्या कर रहे हैं — आराम, चलना, सीढ़ियाँ चढ़ना या खाना पचाना — उसके हिसाब से कुछ ही सेकंड में तेज़ या धीमा हो जाता है।
  1. इस्तेमाल हुआ ख़ून घर लौटता है

    जो ख़ून अपनी ऑक्सीजन दे चुका है, वह दो बड़ी शिराओं (वेन) से दाएँ एट्रियम में लौटता है।

  2. फेफड़ों की ओर

    दायाँ वेंट्रिकल सिकुड़कर इस ख़ून को थोड़ी दूर फेफड़ों तक भेजता है, जहाँ यह कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ता है और ऑक्सीजन ले लेता है।

  3. ताज़ा ख़ून लौटता है

    चमकीला लाल, ऑक्सीजन से भरा ख़ून फेफड़ों से बाएँ एट्रियम में लौटता है, फिर नीचे बाएँ वेंट्रिकल में उतरता है।

  4. सबसे बड़ा धक्का

    बायाँ वेंट्रिकल — दिल का सबसे मोटा और मज़बूत हिस्सा — ख़ून को एओर्टा में धकेलता है, जो शरीर की मुख्य धमनी है, और वहाँ से दिमाग़ से पैर के अँगूठे तक हर अंग में।

  5. वह चिंगारी जो सबका समय तय करती है

    हर चक्र का समय SA नोड की चिंगारी तय करती है। वह पहले ऊपरी कमरों को सिकोड़ती है, AV नोड पर पल भर रुकती है, फिर निचले कमरों को सिकोड़ती है।

  6. लब-डब: दरवाज़ों के बंद होने की आवाज़

    डॉक्टर को जो 'लब-डब' सुनाई देता है, वह मांसपेशी की आवाज़ नहीं है। यह दिल के एक-तरफ़ा वाल्वों के खटाक से बंद होने की आवाज़ है — पहले ऊपरी और निचले कमरों के बीच, फिर बाहर निकलने के रास्तों पर।

दिल दूसरे अंगों के साथ कैसे काम करता है?

  • रक्त-नलियाँ (धमनियाँ और शिराएँ) — धमनियाँ ख़ून को दिल से दूर ले जाती हैं; शिराएँ उसे वापस लाती हैं; बारीक केशिकाएँ ऊतकों में लेन-देन करती हैं।
  • फेफड़े — दिल का दायाँ हिस्सा ख़ून को ऑक्सीजन भरने के लिए फेफड़ों से गुज़ारता है; बायाँ हिस्सा उसे आगे शरीर में भेजता है।
  • ख़ून (रक्त) — ख़ून वही है जिसे दिल चलाता है — लाल कोशिकाएँ ऑक्सीजन ढोती हैं, प्लाज़्मा भोजन और हॉर्मोन।
  • वेगस नस — वेगस नस दिल को धीमा करती है; दूसरी नसें और एड्रिनलिन उसे तेज़ करते हैं।
  • किडनी (गुर्दे) — किडनी दिल के पंप किए ख़ून का लगभग पाँचवाँ हिस्सा छानती हैं और नमक-पानी के ज़रिए ब्लड प्रेशर संभालती हैं।
  • हृदय, ख़ून और रक्त-संचार — दिल, ख़ून और रक्त-नलियाँ मिलकर रक्त-संचार तंत्र बनाते हैं।

बनावट

दिल के कौन-कौन से हिस्से हैं?

दिल में दीवारें, चार कक्ष, चार वाल्व, उसमें आने-जाने वाली रक्त-नलियाँ, और उसकी अपनी बिजली की वायरिंग होती है।

दीवारें

दिल की दीवार की तीन परतें होती हैं, और पूरा दिल एक सुरक्षा-थैली में रहता है।

  • एंडोकार्डियम — कक्षों और वाल्वों की पतली, चिकनी अंदरूनी परत, ताकि ख़ून बिना चिपके बहे।
  • मायोकार्डियम — बीच की मोटी परत — दिल की मांसपेशी, जो सिकुड़ती है। बाएँ वेंट्रिकल के चारों ओर यह सबसे मोटी होती है।
  • एपिकार्डियम — पतली बाहरी परत, जिस पर कोरोनरी धमनियाँ और कुछ चर्बी रहती है।
  • पेरिकार्डियम — दिल के चारों ओर दो परतों वाली मज़बूत थैली, जिसके अंदर थोड़ा तरल होता है ताकि दिल बिना रगड़ खाए धड़क सके।

कक्ष (चैंबर)

चार कमरे: ऊपर दो छोटे, ख़ून इकट्ठा करने वाले कमरे (एट्रिया) और नीचे दो मज़बूत, पंप करने वाले कमरे (वेंट्रिकल)। एक मांसपेशी की दीवार — सेप्टम — बाएँ और दाएँ को अलग करती है।

  • दायाँ एट्रियम — शरीर से इस्तेमाल हुआ ख़ून लेता है।
  • दायाँ वेंट्रिकल — वह ख़ून फेफड़ों में पंप करता है।
  • बायाँ एट्रियम — फेफड़ों से ऑक्सीजन वाला ख़ून लेता है।
  • बायाँ वेंट्रिकल — सबसे मज़बूत कक्ष; एओर्टा के ज़रिए ख़ून पूरे शरीर में पंप करता है।
एक में दो पंप: दायाँ हिस्सा (नीला) ख़ून फेफड़ों में भेजता है; बायाँ हिस्सा (लाल) शरीर में। एक-तरफ़ा वाल्व इसे आगे ही बढ़ाते रहते हैं।

वाल्व

चार एक-तरफ़ा दरवाज़े ख़ून को आगे ही बढ़ाते हैं। इन्हीं के बंद होने से 'लब-डब' की आवाज़ आती है।

  • ट्राइकस्पिड वाल्व — दाएँ एट्रियम और दाएँ वेंट्रिकल के बीच।
  • पल्मोनरी वाल्व — दाएँ वेंट्रिकल और फेफड़ों की ओर जाने वाली धमनी के बीच।
  • माइट्रल वाल्व — बाएँ एट्रियम और बाएँ वेंट्रिकल के बीच।
  • एओर्टिक वाल्व — बाएँ वेंट्रिकल और एओर्टा के बीच।
चारों वाल्व ख़ून को आगे जाने देने के लिए खुलते हैं और उसे वापस आने से रोकने के लिए खटाक से बंद हो जाते हैं।

रक्त-नलियाँ

बड़ी नलियाँ ख़ून अंदर लाती और बाहर ले जाती हैं; कोरोनरी धमनियाँ ख़ुद दिल की मांसपेशी को ख़ून देती हैं।

  • सुपीरियर और इन्फ़ीरियर वेना कावा — दो बड़ी शिराएँ, जो शरीर के ऊपरी और निचले हिस्से से इस्तेमाल हुआ ख़ून दाएँ एट्रियम में लाती हैं।
  • पल्मोनरी धमनी — दाएँ वेंट्रिकल से ख़ून फेफड़ों तक ले जाती है।
  • पल्मोनरी शिराएँ — फेफड़ों से ताज़ा, ऑक्सीजन वाला ख़ून बाएँ एट्रियम में लाती हैं।
  • एओर्टा — शरीर की सबसे बड़ी धमनी, जो बाएँ वेंट्रिकल से निकलती है।
  • कोरोनरी धमनियाँ — बाईं और दाईं कोरोनरी धमनियाँ एओर्टा से निकलकर ताज की तरह दिल पर लिपटती हैं और दिल की मांसपेशी को ख़ून देती हैं। यहाँ सिकुड़न से एंजाइना और हार्ट अटैक होते हैं।
दिल की अपनी सप्लाई लाइनें: कोरोनरी धमनियाँ उसके पंप किए ख़ून का सिर्फ़ 4–5% लेती हैं।

बिजली की व्यवस्था

ख़ास कोशिकाएँ वह चिंगारी बनाती और आगे पहुँचाती हैं जो हर धड़कन का समय तय करती है।

  • SA नोड (साइनोएट्रियल नोड) — दाएँ एट्रियम में प्राकृतिक पेसमेकर; यही सबसे पहले चिंगारी देता है और रफ़्तार तय करता है।
  • AV नोड (एट्रियोवेंट्रिकुलर नोड) — ऊपरी और निचले कक्षों के बीच रिले स्टेशन; यह संकेत को पल भर रोकता है ताकि एट्रिया पहले ख़ाली हो जाएँ।
  • बंडल ऑफ़ हिस और उसकी शाखाएँ — वायरिंग जो सेप्टम से होकर बाएँ और दाएँ वेंट्रिकल तक जाती है।
  • पर्किंजे फ़ाइबर — बारीक शाखाएँ, जो संकेत को वेंट्रिकल की दीवारों में फैलाती हैं ताकि वे एक साथ सिकुड़ें।
दिल की अपनी वायरिंग: चिंगारी SA नोड से शुरू होती है, AV नोड पर पल भर रुकती है, फिर तेज़ी से नीचे जाकर निचले कक्षों को सिकोड़ती है।

दिल कहाँ होता है?

आपका दिल छाती के बीच में, सीने की हड्डी (स्टर्नम) के पीछे, एक मज़बूत और चिकनी थैली में रहता है जिसे पेरिकार्डियम कहते हैं। यह ऐसे झुका होता है कि इसका नुकीला निचला सिरा नीचे और बाईं ओर रहता है — इसीलिए धड़कन बीच से थोड़ा बाईं ओर सबसे साफ़ महसूस होती है।

दोनों फेफड़े इसे दोनों तरफ़ से घेरे रहते हैं। इसके नीचे डायाफ़्राम है — गुंबद जैसी साँस वाली मांसपेशी — और उसके ठीक नीचे पेट और लिवर। इसके पीछे खाने की नली और रीढ़ चलती हैं। आगे और ऊपर, बच्चों में, थाइमस ग्रंथि रहती है।

LMNT पद्धति में यह नज़दीकी मायने रखती है। Loveleen और Thymus ट्रीटमेंट जहाँ दिए जाते हैं, वे जगहें दिल के बहुत पास हैं, इसलिए गुरुजी की शिक्षा इन्हें दिल के रोगियों को नहीं देती।

दिल सीने की हड्डी के पीछे, दोनों फेफड़ों के बीच, डायाफ़्राम पर टिका रहता है; ठीक नीचे लिवर और पेट हैं।

इसके पड़ोसी:

दिल दिखता कैसा है?

असली दिल वैलेंटाइन कार्ड वाले दिल जैसा नहीं दिखता। यह लाल-भूरे रंग की, शंकु (कोन) जैसी मांसपेशी है — ऊपर चौड़ी (आधार, जहाँ बड़ी नलियाँ जुड़ती हैं) और नीचे एक कुंद सिरे (एपेक्स) तक पतली, जो नीचे और बाईं ओर होता है।

इसकी सतह चिकनी और चमकदार होती है, जिस पर कोरोनरी धमनियाँ और शिराएँ फैली रहती हैं, और उनकी खाँचों में कुछ पीली चर्बी होती है। बायाँ हिस्सा दाएँ से साफ़ तौर पर मोटा और सख़्त होता है, क्योंकि उसे ख़ून पूरे शरीर में धकेलना पड़ता है।

दिल कितना बड़ा होता है?

एक वयस्क का दिल लगभग उसकी अपनी बंद मुट्ठी जितना होता है — मोटे तौर पर 12 सेमी लंबा, 8–9 सेमी चौड़ा और 6 सेमी मोटा।

इसका वज़न लगभग 250–350 ग्राम होता है — आम तौर पर महिलाओं में पुरुषों से थोड़ा कम। इसमें 4 कक्ष और 4 वाल्व होते हैं, और आराम में यह मिनट में 60 से 100 बार धड़कता है, हर मिनट लगभग 5 लीटर ख़ून आगे बढ़ाता है।

आपकी मुट्ठी जितना, लगभग 12 सेमी लंबा और लगभग 250–350 ग्राम।

रोग और गड़बड़ियाँ

दिल को कौन-सी बीमारियाँ और गड़बड़ियाँ प्रभावित करती हैं?

दिल की तकलीफ़ें उसकी धमनियों, मांसपेशी, वाल्वों, बिजली की लय पर असर डाल सकती हैं, या जन्म से हो सकती हैं। कई तकलीफ़ें लक्षण देने से पहले सालों तक चुपचाप बढ़ती रहती हैं।

जब दिल की अपनी धमनियाँ सिकुड़ें या बंद हों

जब दबाव गड़बड़ हो

जन्म से

  • दिल में छेददिल के कमरों के बीच का एक छेद, जो जन्म से पहले या बाद में बंद नहीं हुआ।

ऐसे लक्षण और बोझ जो दिल तक पहुँचते हैं

  • साँस लेने में तकलीफ़ (साँस फूलना)चलने पर या सीधा लेटने पर साँस फूलना सिर्फ़ फेफड़ों से नहीं, थके हुए दिल से भी हो सकता है।
  • शरीर में सूजन (ओडिमा)टखनों और पैरों की सूजन इस बात का संकेत हो सकती है कि दिल ठीक से पंप नहीं कर रहा।
  • एनीमिया (ख़ून की कमी)हीमोग्लोबिन कम हो तो पूरी ऑक्सीजन पहुँचाने के लिए दिल को तेज़ धड़कना पड़ता है।
  • डायबिटीज़ (मधुमेह / शुगर)सालों तक बढ़ी हुई शुगर रक्त-नलियों को नुक़सान पहुँचाती है — दिल की अपनी नलियों को भी।
  • मोटापाशरीर का ज़्यादा वज़न ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और दिल के रोज़ के काम का बोझ बढ़ाता है।
  • अपच से छाती का दर्दअपच से होने वाला छाती का दर्द दिल के दर्द जैसा लग सकता है — इन्हें सुरक्षित रूप से सिर्फ़ डॉक्टर ही अलग पहचान सकते हैं।

दिल की तकलीफ़ के आम संकेत क्या हैं?

  • छाती में दर्द, दबाव, जकड़न या भारीपन — ख़ासकर मेहनत पर
  • बाएँ हाथ, जबड़े, गर्दन या पीठ तक फैलता दर्द
  • चलने पर, सीधा लेटने पर, या रात को नींद से जगा देने वाला साँस फूलना
  • तेज़, धक-धक करती या बेतरतीब धड़कन (पैल्पिटेशन)
  • पैरों, टखनों या टाँगों में सूजन
  • चक्कर, बेहोशी, असामान्य थकान, या ठंडा पसीना

दिल की सेहत कौन-सी जाँचों से देखी जाती है?

  • ब्लड प्रेशर और नब्ज़ — सबसे आसान जाँचें, जो हर बार होती हैं।
  • ECG (इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम) — छाती पर चिपकाए स्टिकर दिल का बिजली वाला संकेत रिकॉर्ड करते हैं, जिससे लय की गड़बड़ और नुक़सान के निशान मिलते हैं।
  • ईकोकार्डियोग्राम (ईको) — अल्ट्रासाउंड स्कैन, जो दिल को चलते हुए, उसके वाल्व और उसकी पंप करने की ताक़त (इजेक्शन फ़्रैक्शन) दिखाता है।
  • स्ट्रेस टेस्ट (TMT) — ट्रेडमिल पर चलते हुए लिया गया ECG, यह देखने के लिए कि मेहनत में दिल कैसे संभलता है।
  • ख़ून की जाँचें — कोलेस्ट्रॉल (लिपिड प्रोफ़ाइल), शुगर, और ट्रोपोनिन — जो दिल की मांसपेशी को नुक़सान होने पर निकलता है।
  • होल्टर मॉनिटर — एक छोटा रिकॉर्डर, जो एक दिन या ज़्यादा पहना जाता है, ताकि आती-जाती लय की गड़बड़ पकड़ में आए।
  • कोरोनरी एंजियोग्राफ़ी / CT एंजियोग्राफ़ी — डाई और एक्स-रे या CT से पता चलता है कि कोरोनरी धमनियाँ सिकुड़ी या बंद तो नहीं।

दिल की बीमारियों का इलाज कैसे होता है?

  • जीवनशैली में बदलाव — तंबाकू छोड़ना, कम नमक, नियमित गतिविधि, वज़न और शुगर पर क़ाबू — हर दिल के इलाज की नींव।
  • दवाएँ — जैसे ब्लड प्रेशर या कोलेस्ट्रॉल घटाने, ख़ून पतला करने, लय स्थिर करने या दिल का बोझ कम करने के लिए — डॉक्टर लिखते और बदलते हैं।
  • एंजियोप्लास्टी और स्टेंट — गुब्बारे वाली पतली नली सिकुड़ी कोरोनरी धमनी को खोलती है, और एक छोटी जालीदार नली (स्टेंट) उसे खुला रखती है।
  • बायपास सर्जरी (CABG) — सर्जन शरीर की किसी दूसरी जगह की नली से बंद धमनियों के आसपास ख़ून का नया रास्ता बनाते हैं।
  • पेसमेकर और दूसरे उपकरण — त्वचा के नीचे लगा छोटा उपकरण धड़कन को नियमित रखता है, जब प्राकृतिक पेसमेकर या वायरिंग ठीक से काम न करे।
  • वाल्व की मरम्मत या बदलाव — रिसते या सिकुड़े वाल्व की मरम्मत या बदलाव सर्जरी से या कैथेटर के ज़रिए हो सकता है।
  • कार्डियक रिहैबिलिटेशन — हार्ट अटैक या सर्जरी के बाद कसरत, खानपान और जानकारी का निगरानी वाला कार्यक्रम।

न्यूरोथेरेपी (LMNT)

LMNT पद्धति में दिल के रोगी की योजना इस बात से शुरू होती है कि क्या नहीं देना है। पॉइंट्स की पूरी एक सूची रोकी जाती है, और ज़्यादातर रोक के साथ उसकी जगह देने वाला पॉइंट लिखा होता है। फिर Angina / Athero ट्रीटमेंट दिया जाता है — जो गर्दन और ऊपरी पीठ के T1/T2 स्तर से शुरू होता है, क्योंकि दिल अपना दर्द वहीं से 'बताता' है। गुरुजी की शिक्षा एक दरवाज़ा भी तय करती है: दिल के रोगी को पहले दो से चार दिन सिर्फ़ Angina ट्रीटमेंट मिलता है, जब तक उसकी हालत थोड़ी न सुधरे; उसके बाद ही Vater ट्रीटमेंट का दिल वाला रूप दिया जा सकता है। यह उस दिल के रोगी के लिए सहारा है जिसकी हालत स्थिर है और जिसका डॉक्टरी इलाज चल रहा है — दिल के डॉक्टर के साथ, उनकी जगह कभी नहीं।

पॉइंट

  • Thoracic T1/T2 — गर्दन के नीचे का स्टेशन। दिल की दर्द वाली नसें इसी ऊपरी पीठ के स्तर पर रीढ़ की नस में पहुँचती हैं, इसलिए Angina ट्रीटमेंट सबसे पहले यहीं काम करता है।
  • (4) Medulla — घड़ी की दिशा में दिया जाता है, T1/T2 पर Up Arrow, Raman, (10) Pan और (2) Thrd के साथ — Angina ट्रीटमेंट का भाग I।
  • (10) Medulla — वेगस नस दिल की रफ़्तार धीमी करती है, इसलिए दिल के रोगियों में (10) Medulla कभी दोनों तरफ़ नहीं दिया जाता — सिर्फ़ (10) Left Medulla दिया जाता है।
  • Sulta Ulta — Sulta छाती के आगे का दर्द कम करता है; Ulta उसके पीछे पीठ का। दिल के रोगियों में बाँहें 135° तक उठाई जाती हैं, पहले बाईं तरफ़, फिर दाईं। शिक्षा कहती है कि इससे छाती का दर्द या घुटन कम होती है।
  • Raman — Angina ट्रीटमेंट के पहले भाग का हिस्सा, कंधों पर दिया जाता है।
  • (2) Thrd — (4) Thrd की जगह दिया जाता है। (4) Thrd मेटाबॉलिज़्म बढ़ाकर दिल पर बोझ डालता है; एंजाइना में कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद के लिए (2) Thrd दिया जाता है।
  • (1) point Liv × 6 treatments — (3) Gal (7) Liv की जगह दिया जाता है। वे पॉइंट चर्बी का पाचन तेज़ करते हैं, जिसे शिक्षा ज़्यादा कोलेस्ट्रॉल से जोड़ती है — जो दिल की बीमारी में बोझ है।
  • (4) Para — अकेले, अलग से दिए जाने पर LMNT पद्धति इसे दिल की बीमारी में अनचाहे थक्के खोलने के लिए इस्तेमाल करती है, ख़ासकर जहाँ ख़ून में कैल्शियम कम हो।
  • Folic — शिक्षा दर्ज करती है कि जन्म से दिल की तकलीफ़ वाले बच्चों — जैसे दिल में छेद — में Folic acid पॉइंट पर दर्द पाया गया है। यह एक अवलोकन है, कारण के बारे में दावा नहीं।

फ़ॉर्मूले

Angina / Athero ट्रीटमेंट

चार भागों वाला दिल का ट्रीटमेंट: I — T1/T2 के साथ घड़ी की दिशा में (4) Medulla, Raman, (10) Pan (2) Thrd; II — (1) Single point liver × 2; III — 135° पर Sulta Ulta के साथ P. Heparin (या जहाँ Mu° पर दर्द और सख़्त मल हो, वहाँ Mild ATF); IV — 135° पर Sulta Ulta के साथ A. Heparin। दिल की बीमारी, एथेरोस्क्लेरोसिस, बढ़े कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड, और कार्डियक अस्थमा के लिए।

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P. Heparin (प्लाज़्मिन)

(8) Pan (7) Liv (8) Ch. Only — Angina ट्रीटमेंट का भाग III, और उन दो रूपों में से एक जो दिल के रोगियों को (30) Medulla और G. Heparin की जगह दिए जाते हैं।

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J. Heparin (जोड़)

दूसरा रूप, जो दिल के रोगियों को (30) Medulla और G. Heparin की जगह दिया जाता है।

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A. Heparin (एसिड)

Angina ट्रीटमेंट का भाग IV, 135° पर Sulta Ulta के साथ।

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Mild ATF

भाग III की जगह, जहाँ Mu° पर दर्द और सख़्त कब्ज़ हो।

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Vater ट्रीटमेंट

सिर्फ़ दो से चार दिन अकेले Angina ट्रीटमेंट के बाद, और अपने दिल वाले रूप में: (10) Medulla की जगह (10) Left Medulla, और Gal व Liv घटाकर (1)।

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गुरुजी कहते हैं

“जब भी शरीर के किसी हिस्से के ख़ून के बहाव में रुकावट या अड़चन आती है, तब उस हिस्से में दर्द या सुन्नपन महसूस होता है।”
— डॉ. लाजपतराय मेहरा
“हमारे इलाज से रोगी को तुरंत फ़ायदा मिले या न मिले, हमारी लापरवाही से उसे कोई नुक़सान न पहुँचे — इसका ध्यान रखें।”
— डॉ. लाजपतराय मेहरा
“इस थेरेपी में हम बीमारी का इलाज नहीं करते; बल्कि हम शरीर को सुधारते हैं।”
— डॉ. लाजपतराय मेहरा

यह कभी न करें

  • इमरजेंसी: छाती का दर्द या दबाव जो कुछ मिनट से ज़्यादा रहे, बाँह, गर्दन, जबड़े या पीठ तक फैले, या पसीने, साँस फूलने, जी मिचलाने या बेहोशी जैसी हालत के साथ हो — तुरंत 108/112 पर फ़ोन करें और ख़ुद गाड़ी न चलाएँ। हार्ट अटैक में LMNT कभी फ़र्स्ट-एड नहीं है। हार्ट अटैक (दिल का दौरा)
  • खाने के बाद या मेहनत पर आने वाली छाती की बेचैनी, जबड़े या बाँह का दर्द, या साँस फूलना — पहले डॉक्टर का सवाल है; इसे पाचन की शिकायत मानकर चटाई पर नहीं संभाला जाता। How to say it
  • दिल के रोगियों में कभी नहीं: दोनों तरफ़ (10) Medulla (उसकी जगह (10) Left Medulla), (20) Medulla (उसकी जगह (2), (4) या (6) Medulla), (30) Medulla और G. Heparin (उनकी जगह J. या P. Heparin), (4) Thrd (उसकी जगह (2) Thrd), और (3) Gal (7) Liv (उनकी जगह (1) Single point liver × 6 treatments)। The master index
  • दिल के रोगियों में यह भी कभी नहीं: Lu + Sh, Swt और Katka, क्योंकि इनमें ज़ोर लगता है जिसका दबाव दिल पर पड़ता है (और Swt से BP बढ़ सकता है); Loveleen और Thymus, क्योंकि ये दिल के बहुत पास दिए जाते हैं। Lu + Sh
  • दिल के रोगी में Sulta Ulta: सिर्फ़ बाँहें 135° तक उठाकर, एक बार में एक तरफ़, पहले बाईं — कभी कंधों के बराबर बाँहों से नहीं, कभी दोनों तरफ़ एक साथ नहीं। Sulta Ulta
  • Vater ट्रीटमेंट रुकता है: पहले दो से चार दिन सिर्फ़ Angina ट्रीटमेंट, और मरीज़ की हालत थोड़ी सुधरने पर ही Vater का दिल वाला रूप दिया जाता है। Vater ट्रीटमेंट
  • Multivitamin formula 2 दिल के रोगियों और हाई BP वालों को नहीं दिया जाता; हाई ब्लड प्रेशर में (6) Adr नहीं दिया जाता। Multivitamin फ़ॉर्मूला 2
  • जब तक कोई घाव खुला हो, कोई Heparin ट्रीटमेंट नहीं — एंजियोग्राफ़ी या ऑपरेशन की ताज़ा जगह भी। P. Heparin (प्लाज़्मिन)
  • कैंसर: अगर व्यक्ति को कैंसर है, तो (10) Pan, Thymus, Pit, Lu + Sh, Rt. Ov / Lt. Ov और (30) Medulla कभी नहीं दिए जाते — थेरेपिस्ट योजना बदल देता है।
  • डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें, और दिल की दवा या ख़ून पतला करने वाली दवा अपने-आप कभी बंद या कम न करें। न्यूरोथेरेपी (LMNT) आपके इलाज के साथ काम करती है, उसकी जगह कभी नहीं।

देखभाल

मैं अपने दिल को स्वस्थ कैसे रखूँ?

दिल की ज़्यादातर बीमारी धीरे-धीरे बनती है, इसलिए रोज़ की छोटी आदतें सालों में बड़ा फ़र्क़ डालती हैं।

खाने के बाद 20 मिनट बैठें

गुरुजी की शिक्षा: खाने के बाद बीस मिनट तक न घूमें और न भारी काम करें; वज्रासन में बैठना बहुत अच्छा है। खाने के तुरंत बाद पाचन को ज़्यादा ख़ून चाहिए, और चलने से दिल को टाँगों को भी ख़ून देना पड़ता है। यह सबसे ज़्यादा दिल के रोगियों और चलने पर साँस फूलने वालों के लिए ज़रूरी है।

ज़्यादातर दिन चलें-फिरें

WHO की सलाह के मुताबिक़ हफ़्ते में कम से कम 150 मिनट तेज़ चाल या ऐसी ही गतिविधि रखें। दिल के रोगी अपने डॉक्टर से पूछें कि उनके लिए कितना ठीक है।

नमक कम रखें

WHO रोज़ 5 ग्राम से कम नमक की सलाह देता है — लगभग एक समतल चम्मच, जिसमें अचार, पापड़, नमकीन और पैकेट वाले खाने का नमक भी शामिल है।

तंबाकू से दूर रहें

सिगरेट, बीड़ी और चबाने वाला तंबाकू — सब दिल को ख़ून देने वाली धमनियों को नुक़सान पहुँचाते हैं। छोड़ना किसी भी उम्र में दिल की मदद करता है।

अपने आँकड़े जानें

ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जाँच कराएँ। बढ़े हुए आँकड़े अक्सर तब तक कोई लक्षण नहीं देते, जब तक दिल पर असर न पड़ चुका हो।

अच्छी नींद लें

ज़्यादातर वयस्कों को 7 से 9 घंटे की नींद चाहिए। साँस रुकने के साथ ज़ोर का ख़र्राटा हो तो डॉक्टर को बताएँ, क्योंकि यह दिल पर ज़ोर डालता है।

आम सवाल

क्या दिल छाती के बाईं तरफ़ होता है?

ज़्यादातर बीच में। दिल सीने की हड्डी के पीछे होता है, पर ऐसा झुका होता है कि उसका सिरा बाईं ओर रहता है और उसका लगभग दो-तिहाई हिस्सा बीच की रेखा के बाईं तरफ़ होता है। इसीलिए धड़कन बीच से थोड़ा बाईं ओर महसूस होती है।

सामान्य धड़कन कितनी होती है?

ज़्यादातर वयस्कों में आराम के समय मिनट में 60 से 100 धड़कन। फ़िट लोगों और खिलाड़ियों में यह कम हो सकती है। आराम में नब्ज़ अक्सर 100 से ऊपर या 50 से नीचे रहे, या बेतरतीब लगे, तो डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

क्या दिल का दर्द एसिडिटी जैसा लग सकता है?

हाँ। दिल का दर्द पेट के ऊपरी हिस्से या छाती में जलन या भारीपन जैसा लग सकता है, और अपच दिल के दर्द जैसी लग सकती है। इन्हें सुरक्षित रूप से सिर्फ़ ECG जैसी जाँचें ही अलग कर सकती हैं — कभी यह मानकर न चलें कि गैस है।

क्या ख़राब हुआ दिल ख़ुद ठीक हो सकता है?

बहुत थोड़ा। दिल की मांसपेशी-कोशिकाएँ बहुत धीरे नई होती हैं — जवान वयस्कों में साल में लगभग 1% — इसलिए हार्ट अटैक में गई मांसपेशी की जगह निशान (स्कार) बन जाता है। इसीलिए जल्दी इलाज और बचाव इतने ज़रूरी हैं।

क्या दिल की दवाओं के साथ न्यूरोथेरेपी (LMNT) ली जा सकती है?

LMNT डॉक्टरी इलाज के साथ दी जाती है, उसकी जगह कभी नहीं। प्रशिक्षित थेरेपिस्ट पहले आपकी रिपोर्ट पढ़ता है, फिर कोई योजना बनाने से पहले वे पॉइंट रोकता है जो दिल के रोगियों को नहीं दिए जाते। दिल की दवा अपने-आप कभी बंद या कम न करें।

दिल के रोगियों को खाने के तुरंत बाद क्यों नहीं चलना चाहिए?

खाने के बाद पाचन को ज़्यादा ख़ून चाहिए। तुरंत चलने से दिल को साथ में टाँगों को भी ख़ून देना पड़ता है। गुरुजी की शिक्षा बीस मिनट बैठने की सलाह देती है — वज्रासन बहुत अच्छा है — ख़ासकर दिल के रोगियों और चलने पर साँस फूलने वालों के लिए।

मुझे अपने डॉक्टर या थेरेपिस्ट से क्या पूछना चाहिए?

  • मेरा ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल कितना है, और कितना होना चाहिए?
  • ईको में मेरे दिल की पंप करने की ताक़त (इजेक्शन फ़्रैक्शन) कितनी है?
  • किन लक्षणों पर मुझे तुरंत 108/112 पर फ़ोन करना चाहिए?
  • मेरे लिए कितनी और किस तरह की कसरत सुरक्षित है?
  • मेरी कौन-सी दवाएँ कभी नहीं छूटनी चाहिए, और कौन-सी आपस में असर डालती हैं?
  • (थेरेपिस्ट से) मेरे दिल की वजह से कौन-से पॉइंट और फ़ॉर्मूले रोके गए हैं, और उनकी जगह क्या दिया जा रहा है?

हैरान करने वाली बातें

1यह रोज़ लगभग 1 लाख बार धड़कता है

60 से 100 धड़कन प्रति मिनट की रफ़्तार से आपका दिल रोज़ लगभग 1 लाख बार धड़कता है। पूरी ज़िंदगी में यह 250 करोड़ से ज़्यादा धड़कनें बन जाती हैं — और इसे एक दिन की भी छुट्टी नहीं मिलती।

आपके दिल का कामकाजी दिन — एक स्वस्थ वयस्क के आराम के समय के मोटे आँकड़े।

स्रोत: Cleveland Clinic, 'Heart' (about 100,000 beats a day); lifetime figure is simple arithmetic (100,000 × 365 × ~70 years).

2यह रोज़ लगभग 7,000 लीटर ख़ून पंप करता है

आराम में दिल हर मिनट लगभग 5 लीटर ख़ून आगे बढ़ाता है। यह रोज़ का लगभग 7,000 लीटर हुआ — 20-20 लीटर की क़रीब 350 बाल्टियाँ, जिन्हें मुट्ठी भर की एक मांसपेशी हर दिन उठाती है।

हर मिनट लगभग 5 लीटर, यानी रोज़ लगभग 7,000 लीटर — क़रीब 350 बाल्टियाँ।

स्रोत: NHLBI, 'How the Heart Works' (about 2,000 gallons a day); Guyton & Hall, cardiac output about 5 L/min at rest.

3यह अपनी बिजली ख़ुद बनाता है

हर धड़कन दिल के अपने प्राकृतिक पेसमेकर से उठी एक छोटी-सी बिजली की चिंगारी से शुरू होती है — इसे SA नोड (साइनोएट्रियल नोड) कहते हैं, जो ऊपर के दाएँ कक्ष में ख़ास कोशिकाओं का एक छोटा-सा हिस्सा है। हर धड़कन के लिए दिमाग़ को आदेश नहीं भेजना पड़ता। इसीलिए डॉक्टर जब दिल को दूसरे व्यक्ति में लगाते हैं, तब भी वह धड़कता रहता है।

स्रोत: Guyton & Hall, Textbook of Medical Physiology — rhythmical excitation of the heart (SA node as pacemaker); NHLBI, 'How the Heart Beats'.

4एक नस लगातार ब्रेक दबाए रखती है

अगर दिल के पेसमेकर को अकेला छोड़ दें, तो वह आराम की सामान्य नब्ज़ से तेज़ चलेगा। वेगस नस — दिमाग़ के निचले हिस्से (ब्रेन स्टेम) से आने वाली एक लंबी नस — पूरे दिन उस पर हल्का ब्रेक लगाए रखती है। दिल बदलने (ट्रांसप्लांट) में ये नस-जोड़ कट जाते हैं — इसलिए लगाया गया नया दिल आम तौर पर आराम में भी तेज़ धड़कता है, लगभग 90 से 110 प्रति मिनट (औसतन क़रीब 93)।

स्रोत: Moscato F et al., Frontiers in Physiology 2020;11:579449 (pooled resting rate of transplanted hearts about 93 bpm, due to loss of vagal tone); OpenAnesthesia, 'Denervated heart'; Guyton & Hall on vagal tone.

5दिल का दर्द अक्सर कहीं और महसूस होता है

जब दिल को ख़ून कम मिलता है, तो उसके दर्द के संकेत ऊपरी पीठ के स्तर पर रीढ़ की नस (स्पाइनल कॉर्ड) में पहुँचते हैं — उसी स्तर पर, जहाँ से छाती की दीवार और बाँह के अंदरूनी हिस्से की अनुभूति भी आती है। दिमाग़ पता पहचानने में गड़बड़ा जाता है। इसलिए दिल का दर्द अक्सर छाती, बाएँ हाथ, जबड़े या पीठ में महसूस होता है। डॉक्टर इसे 'रेफ़र्ड पेन' यानी कहीं और महसूस होने वाला दर्द कहते हैं।

दिल ऊपरी पीठ के रास्ते ख़बर भेजता है। इसीलिए उसका दर्द छाती, बाएँ हाथ, जबड़े या पीठ में दिख सकता है — और इसीलिए ऐसे किसी भी दर्द पर डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है।

स्रोत: Foreman RD, Qin C. Cleveland Clinic Journal of Medicine 2009 (convergence of cardiac and somatic pain signals in upper thoracic spinal cord); Guyton & Hall, referred pain.

6यह 'थकान वाले एसिड' को ही खाना बना लेता है

मेहनत करती बाँहों और टाँगों की मांसपेशियाँ लैक्टिक एसिड छोड़ती हैं — वही रसायन जिसे भारीपन और थकान से जोड़ा जाता है। ज़्यादातर मांसपेशियाँ इसे काम में नहीं ले पातीं। दिल की मांसपेशी ले लेती है: वह ख़ून से लैक्टिक एसिड खींचकर उसे पाइरुविक एसिड में बदलती है और ऊर्जा के लिए जला देती है। गुरुजी की शिक्षा यही कहानी सुनाकर समझाती है कि सीढ़ियाँ चढ़ते हुए हम बीच में क्यों रुकते हैं।

जो टाँग फेंक देती है, उसे दिल जला लेता है: लैक्टिक एसिड दिल की मांसपेशी का ईंधन बन जाता है।

स्रोत: Gertz EW et al., J Clin Invest 1988 (myocardial lactate uptake during exercise); Guyton & Hall — cardiac metabolism. LMNT story: heart.md §35.9.

7यह सारा ख़ून पंप करता है — पर अपने लिए थोड़ा ही रखता है

दिल की मांसपेशी अपने कक्षों से गुज़रते ख़ून से पानी नहीं पीती। उसकी अपनी निजी सप्लाई लाइनें हैं — कोरोनरी धमनियाँ — जो ताज की तरह उसकी सतह पर लिपटी रहती हैं। ये दिल के पंप किए ख़ून का सिर्फ़ 4 से 5 प्रतिशत लेती हैं। जब इनमें से कोई सिकुड़ जाए या बंद हो जाए, तो एंजाइना या हार्ट अटैक होता है।

स्रोत: Guyton & Hall — coronary blood flow about 225 mL/min, about 4–5% of cardiac output at rest.

8इसकी मांसपेशी-कोशिकाएँ लगभग आपकी ही उम्र की हैं

त्वचा और आँत की परत कुछ दिनों या हफ़्तों में ख़ुद को नया कर लेती हैं। दिल की मांसपेशी-कोशिकाएँ ऐसा नहीं करतीं। एक मशहूर शोध में पाया गया कि 25 की उम्र में इनमें से हर साल सिर्फ़ लगभग 1 प्रतिशत बदलती हैं, और 75 तक यह आधे प्रतिशत से भी कम रह जाता है। अभी जो दिल की कोशिकाएँ आपके पास हैं, उनमें से ज़्यादातर उम्र भर साथ रहेंगी — इसीलिए दिल की मांसपेशी को बचाना इतना ज़रूरी है।

स्रोत: Bergmann O et al., 'Evidence for cardiomyocyte renewal in humans', Science 2009.

आपके दिल का एक दिन

~100,00024 घंटे में धड़कनें
~7,000लीटर ख़ून पंप
~70 mLआराम में हर धड़कन के साथ बाहर धकेला गया ख़ून
~5 Lआराम में हर मिनट पंप — शरीर का लगभग पूरा ख़ून
~1 minआराम में ख़ून को शरीर का एक पूरा चक्कर लगाने में
0पूरी ज़िंदगी में छुट्टी के दिन

योग

खाने के बाद वज्रासन Vajrāsana

वज्रासन: घुटनों के बल बैठें, एड़ियों पर टिकें, रीढ़ सीधी रखें।

फ़ायदे

  • गुरुजी की शिक्षा खाने के बाद बीस मिनट बैठने के लिए इसे अच्छा तरीक़ा बताती है।
  • जब पाचन ख़ून का बड़ा हिस्सा लेता है, तब यह आपको शांत रखता है, ताकि दिल को साथ में टाँगों को भी ख़ून न देना पड़े।
  • सीधी, ढीली मुद्रा और शांत साँस में मदद करता है।

कैसे करें

  1. ज़मीन पर कंबल मोड़कर बिछाएँ और घुटने साथ रखकर उस पर घुटनों के बल बैठें।
  2. पैर के अँगूठे आपस में छुएँ और एड़ियाँ थोड़ी खुली रहें; पीछे एड़ियों पर बैठ जाएँ।
  3. पीठ सीधी रखें और हाथ जाँघों पर रखें।
  4. सामान्य साँस लें। 5 मिनट से शुरू करें और धीरे-धीरे खाने के बाद 20 मिनट तक ले जाएँ।
  5. बाहर आने के लिए हाथों पर आगे झुकें, एक-एक करके टाँग सीधी करें; धीरे से खड़े हों।

ध्यान रखें

अगर घुटने या टखने में दर्द हो, घुटने में हाल की चोट या ऑपरेशन हो, या नसें फूलकर दुखती हों, तो इसे छोड़ दें या कुर्सी पर बैठें। बाद में धीरे से उठें — कुछ बुज़ुर्गों को खाने के बाद खड़े होने पर चक्कर आता है।

धीमी साँस — मिनट में लगभग छह साँसें Anuloma-Viloma (slow)

धीमी साँस: लगभग 4 सेकंड अंदर, लगभग 6 सेकंड बाहर — बिना ज़ोर, बिना रोके।

फ़ायदे

  • मिनट में लगभग छह साँसों पर दिल की लय ज़्यादा लचीली और ब्लड प्रेशर संभालने वाला रिफ़्लेक्स ज़्यादा चुस्त होता है।
  • मन को शांत करती है और तनाव की प्रतिक्रिया को कम करती है।
  • आसान और हल्की: इसे कुर्सी पर बैठकर भी किया जा सकता है।

कैसे करें

  1. ज़मीन या कुर्सी पर सीधी पीठ के साथ आराम से बैठें।
  2. नाक से लगभग 4 सेकंड धीरे साँस अंदर लें।
  3. लगभग 6 सेकंड में धीरे-धीरे साँस बाहर छोड़ें — नाक से या हल्के सिकुड़े होंठों से।
  4. चाहें तो इसे अनुलोम-विलोम की तरह करें: अँगूठे से एक नथुना बंद करें, साँस लें, बदलें, छोड़ें — इसी धीमी रफ़्तार से।
  5. 5 से 10 मिनट तक करें।

ध्यान रखें

साँस पर कभी ज़ोर न डालें और न रोकें। दिल के रोगी और हाई ब्लड प्रेशर वाले, डॉक्टर की सहमति के बिना साँस रोकने (कुंभक) और कपालभाति व भस्त्रिका जैसी तेज़ क्रियाओं से बचें। चक्कर आए तो रुक जाएँ, और छाती में दर्द के समय इसे कभी न करें — 108/112 पर फ़ोन करें।

शवासन — आराम की मुद्रा Śavāsana

शवासन: 5 से 10 मिनट शांत लेटें और हर मांसपेशी को ढीला छोड़ दें।

फ़ायदे

  • दिल को कुछ मिनट सबसे हल्का काम देता है।
  • मांसपेशियों को ढीला और साँस को शांत करता है; दिल की रिहैबिलिटेशन और योग की कई कक्षाएँ इसी से ख़त्म होती हैं।

कैसे करें

  1. चटाई पर पीठ के बल लेटें; ज़रूरत हो तो सिर के नीचे पतला तकिया रखें।
  2. हाथ शरीर से थोड़ा दूर, हथेलियाँ ऊपर रखें; पैर ढीले छोड़ दें।
  3. आँखें बंद करें और धीरे साँस लें।
  4. शरीर को पैर की उँगलियों से चेहरे तक हिस्सा-हिस्सा ढीला छोड़ें।
  5. 5 से 10 मिनट बाद दाईं करवट लें और धीरे से उठें।

ध्यान रखें

अगर सीधा लेटने से साँस फूलती हो, या गर्भ के आख़िरी महीने हों, तो सिर और कंधे तकियों से ऊँचे रखकर या बाईं करवट लेटें। सीधा लेटने पर साँस फूलना अपने-आप में दिल के डॉक्टर को दिखाने की वजह है।

वीडियो

How to Give 4 Medulla, Raman & T1 T2 in Neurotherapy | LMNT Cervical, Shoulder pain & Numbness

इसमें गर्दन-कंधे के दर्द और सुन्नपन के लिए (4) Medulla, Raman और T1–T2 पॉइंट देने का सही तरीका दिखाया गया है।

P HAPARIN FORMULA

इसमें P. Heparin फ़ॉर्मूला दिखाया गया है — जाँघों के ऊपर (8) Pan, जाँघ और बाँह पर (7) Liv, और छाती पर हथेलियाँ रखकर (8) Chest Only। वीडियो में इसे Angina ट्रीटमेंट के आख़िरी हिस्से के रूप में, रक्त संचार को सहारा देने के लिए दिया गया है।

ख़ुद को परखें

1. आपका दिल एक दिन में लगभग कितनी बार धड़कता है?

2. दिल का कौन-सा हिस्सा ख़ून को पूरे शरीर में पंप करता है?

3. कौन-सी नस दिल पर ब्रेक की तरह काम करके उसकी रफ़्तार धीमी करती है?

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यह पेज समझाता है कि शरीर कैसे काम करता है; यह जाँच नहीं करता। न्यूरोथेरेपी (LMNT) आपके डॉक्टरी इलाज के साथ काम करती है — डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें, और कोई नया या गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर को दिखाएँ।

Neurotherapy.Life टीम द्वारा, डॉ. लाजपतराय मेहरा की शिक्षाओं पर आधारित

समीक्षा: डॉ. दिवाकर शुक्ला, वरिष्ठ न्यूरोथेरेपिस्ट

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