दो नरम, स्पंज जैसे अंग, जिनमें लगभग 48 करोड़ नन्हे वायु-कोष हैं, जहाँ ऑक्सीजन काग़ज़ से भी कहीं पतली दीवार पार करके आपके ख़ून में जाती है। ये ब्लड प्रेशर के एक हॉर्मोन को भी चालू करते हैं — और गुरुजी की शिक्षा में ये उन दो जगहों में से एक हैं जहाँ शरीर का ज़्यादातर हेपरिन बनता है।
परिचय
फेफड़े क्या हैं?
आपके फेफड़े दो शंकु जैसे, स्पंजी अंग हैं जो छाती का ज़्यादातर हिस्सा भरते हैं — दिल के दोनों ओर एक-एक। दाएँ फेफड़े में तीन हिस्से होते हैं, जिन्हें लोब कहते हैं; बाएँ में दो, जिससे दिल के लिए जगह बचती है।
अंदर वायु-नलियाँ करोड़ों नन्हे वायु-कोषों में बँट जाती हैं, और हर वायु-कोष केशिकाओं से लिपटा होता है। वहाँ ऑक्सीजन हवा से ख़ून में जाती है और कार्बन डाइऑक्साइड बाहर आती है। फेफड़े ख़ून से छोटे थक्के भी छानते हैं, ब्लड प्रेशर के एक हॉर्मोन को सक्रिय करते हैं, और ख़ून का कुछ भंडार भी रखते हैं।
LMNT शिक्षा में फेफड़ों का महत्व साँस से कहीं आगे है। इनकी केशिकाओं में ख़ून लगभग रुकने जितना धीमा हो जाता है, इसलिए शरीर उसे जमने से रोकने के लिए वहाँ हेपरिन बनाता है — इसीलिए छाती का पॉइंट Ch. Only हर Heparin फ़ॉर्मूले में होता है। तीन ट्रीटमेंट सीधे फेफड़ों तक पहुँचते हैं: Back Arrow, Chest Only और Lu + Sh।
🖼चित्र जल्द आएगासामने से फेफड़ों की जोड़ी: दायाँ तीन लोब वाला, बायाँ दो लोब और दिल के लिए खाँचे वाला, ऊपर बँटती साँस की नली
सामने से फेफड़े: दाईं ओर तीन लोब, बाईं ओर दो, और वह खाँचा जहाँ दिल रहता है।
काम
फेफड़े क्या काम करते हैं?
फेफड़े हवा और ख़ून के बीच का एक बाज़ार हैं। हर लाल कोशिका कार्बन डाइऑक्साइड लेकर आती है, एक सेकंड से भी कम में उसे ऑक्सीजन से बदलती है, और चली जाती है। पर इनके कुछ और शांत काम भी हैं।
ख़ून में ऑक्सीजन लेते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड हवा में छोड़ते हैं।
कार्बन डाइऑक्साइड को तेज़ या धीमा छोड़कर मिनटों में ख़ून की अम्लता ठीक करते हैं।
ख़ून के छोटे थक्कों और हवा के बुलबुलों को दिमाग़ तक पहुँचने से पहले ही पकड़ लेते हैं।
अपनी नलियों की अंदरूनी परत पर मौजूद ACE एंज़ाइम से एंजियोटेंसिन II को चालू करते हैं — एक हॉर्मोन जो ब्लड प्रेशर बढ़ाता है।
ख़ून का एक भंडार रखते हैं — लगभग 450 mL — जिसे ज़रूरत पड़ने पर संचार में भेजा जा सकता है।
बलगम, हिलते सिलिया और वायु-कोषों की सफ़ाई करने वाली कोशिकाओं से कीटाणुओं से बचाव करते हैं।
LMNT शिक्षा में, वायु-कोषों के आसपास की मास्ट कोशिकाओं के ज़रिए शरीर का बहुत-सा हेपरिन बनाते हैं।
हवा पहुँचती है
हर साँस ताज़ी हवा को वायु-नलियों से होकर वायु-कोषों तक ले जाती है।
ख़ून पहुँचता है
दिल का दायाँ हिस्सा कम ऑक्सीजन वाला ख़ून पल्मोनरी धमनियों से वायु-कोषों के आसपास की केशिकाओं में भेजता है।
ऑक्सीजन पार जाती है
ऑक्सीजन एक मिलीमीटर के हज़ारवें हिस्से से भी पतली दीवार पार करती है और हीमोग्लोबिन पर चढ़ जाती है।
कार्बन डाइऑक्साइड निकलती है
उसी पल कार्बन डाइऑक्साइड उलटी दिशा में वायु-कोष में जाती है, ताकि साँस के साथ बाहर निकल सके।
वायु-कोष खुले रहते हैं
सर्फ़ेक्टेंट नाम की साबुन जैसी परत हर वायु-कोष को अंदर से ढकती है, ताकि साँस छोड़ते समय वह पिचककर चिपक न जाए।
ताज़ा ख़ून वापस जाता है
चमकीला लाल ख़ून पल्मोनरी शिराओं से दिल के बाएँ हिस्से में लौटता है, शरीर में जाने को तैयार।
फेफड़े दूसरे अंगों के साथ कैसे काम करते हैं?
हृदय (दिल) — दिल का दायाँ हिस्सा सारा ख़ून फेफड़ों से गुज़ारता है; बायाँ हिस्सा ताज़ा ख़ून आगे भेजता है।
ख़ून (रक्त) — लाल कोशिकाएँ वह ऑक्सीजन ढोती हैं जो फेफड़े भरते हैं; फेफड़े ख़ून की अम्लता को सीमा में रखते हैं।
किडनी (गुर्दे) — किडनी रेनिन छोड़ती हैं; फेफड़े उसके उत्पाद को एंजियोटेंसिन II में बदलते हैं। मिलकर ये एसिड-अल्कली संतुलन भी बनाए रखते हैं।
लिवर (जिगर) — LMNT शिक्षा में लिवर और फेफड़े मिलकर शरीर का लगभग 85% हेपरिन बनाते हैं, और दोनों ख़ून का भंडार रखते हैं।
मेडुला (ब्रेन स्टेम) — मेडुला का श्वसन केंद्र वह लय तय करता है जिस पर फेफड़े चलते हैं।
वेगस नस — वेगस नस वायु-नलियों को कसने वाले संकेत ले जाती है और बताती है कि फेफड़े कितने खिंचे हुए हैं।
नाक — नाक हवा को फेफड़ों तक पहुँचने से पहले तैयार करती है — साफ़, गरम और नम।
फेफड़े और साँस — फेफड़े श्वसन तंत्र का काम करने वाला केंद्र हैं।
बनावट
फेफड़ों के कौन-कौन से हिस्से हैं?
बाहर लोब; अंदर वायु-नलियों और रक्त-नलियों का शाखाओं वाला पेड़; सिरों पर करोड़ों वायु-कोष; और एक फिसलन वाला दोहरा आवरण।
लोब (हिस्से)
दायाँ फेफड़ा — ऊपरी, बीच वाला और निचला लोब, जिन्हें दो गहरी खाँचें (फ़िशर) बाँटती हैं। यह बाएँ से थोड़ा बड़ा है।
बायाँ फेफड़ा — ऊपरी और निचला लोब, और एक मुड़ा हुआ खाँचा (कार्डियक नॉच) जहाँ दिल उसमें धँसता है।
सेगमेंट — हर लोब छोटे-छोटे सेगमेंट से बना है, हर एक की अपनी वायु-नली और ख़ून की सप्लाई — जिससे सर्जन एक हिस्सा निकालकर बाक़ी को बचा सकते हैं।
फेफड़े के अंदर की वायु-नलियाँ
ब्रॉन्काई — मुख्य, लोब वाली और सेगमेंट वाली शाखाएँ, जिन्हें कार्टिलेज खुला रखती है।
ब्रॉन्कियोल — बिना कार्टिलेज की छोटी वायु-नलियाँ, जिन पर चिकनी मांसपेशी लिपटी होती है जो कस सकती है।
एल्वियोलर डक्ट और कोष — आख़िरी रास्ते, जिनकी दीवारों पर वायु-कोष होते हैं।
वायु-कोष (एल्वियोली)
एक वयस्क में लगभग 48 करोड़ — वह जगह जहाँ फेफड़े अपना असली काम करते हैं।
पतली परत वाली कोशिकाएँ — बहुत चपटी कोशिकाएँ जो दीवार का ज़्यादातर हिस्सा बनाती हैं, ताकि गैसें आसानी से पार जा सकें।
सर्फ़ेक्टेंट बनाने वाली कोशिकाएँ — गोल कोशिकाएँ, जो सर्फ़ेक्टेंट बनाती हैं — वह साबुन जैसी परत जो वायु-कोषों को पिचकने नहीं देती।
सफ़ाई करने वाली कोशिकाएँ — मैक्रोफ़ेज, जो अंदरूनी सतह पर घूमते रहते हैं और धूल व कीटाणुओं को निगल जाते हैं।
केशिकाओं का जाल और मास्ट कोशिकाएँ — हर वायु-कोष केशिकाओं से लिपटा होता है। फेफड़े के ऊतक की मास्ट कोशिकाएँ हेपरिन जमा रखती हैं — वही कोशिकाएँ जिन्हें LMNT शिक्षा यहाँ के धीमे ख़ून को जमने से बचाने का श्रेय देती है।
🖼चित्र जल्द आएगाबड़ा करके दिखाया वायु-कोषों का गुच्छा, केशिकाओं से लिपटा, जिसमें एक खुला वायु-कोष अपनी परत की कोशिकाएँ, सफ़ाई करने वाली कोशिका और एक मास्ट कोशिका दिखाता है
जहाँ काम होता है: केशिकाओं से लिपटे वायु-कोष, जिन्हें सर्फ़ेक्टेंट खुला रखता है और सफ़ाई वाली कोशिकाएँ पहरा देती हैं।
ख़ून की सप्लाई
पल्मोनरी धमनियाँ — दाएँ दिल से कम ऑक्सीजन वाला ख़ून लाती हैं — वयस्क में सिर्फ़ यही धमनियाँ हैं जो कम ऑक्सीजन वाला ख़ून ढोती हैं।
पल्मोनरी शिराएँ — ऑक्सीजन वाला ख़ून बाएँ दिल तक ले जाती हैं।
ब्रॉन्कियल धमनियाँ — एओर्टा से निकली छोटी धमनियाँ, जो ख़ुद फेफड़े के ऊतक को ख़ून देती हैं।
आवरण और पहचान-चिह्न
प्ल्यूरा — फेफड़े पर एक पतली अंदरूनी परत और पसलियों पर एक बाहरी परत, जिनके बीच तरल की पतली परत होती है ताकि वे सरक सकें।
एपेक्स (ऊपरी सिरा) — हर फेफड़े का गोल ऊपरी सिरा, जो हँसली के अंदरूनी हिस्से से 2–3 सेमी ऊपर उठता है।
आधार (नीचे का हिस्सा) — चौड़ी निचली सतह, जो डायाफ़्राम पर टिकी है।
जड़ (हाइलम) — अंदर की ओर का दरवाज़ा, जहाँ से ब्रॉन्कस, नलियाँ और नसें अंदर आती हैं।
🖼चित्र जल्द आएगादोनों फेफड़ों के अंदरूनी हिस्से — जड़ जहाँ ब्रॉन्कस और नलियाँ अंदर आती हैं, पीछे हटाया प्ल्यूरा, और हँसली से ऊपर उठता एपेक्स
नलियाँ और वायु-नली जड़ से अंदर आती हैं; फिसलन वाला प्ल्यूरा फेफड़े को सरकने देता है; और ऊपरी सिरा हँसली से ऊपर उठता है।
फेफड़े कहाँ होते हैं?
फेफड़े पसलियों के पिंजरे के अंदर, दिल के दोनों ओर छाती भरते हैं। आगे की ओर ये हँसली से ठीक ऊपर से लगभग छठी पसली तक जाते हैं; पीछे की ओर और नीचे, लगभग दसवीं पसली तक — इसीलिए डॉक्टर पीठ पर इतना नीचे तक सुनते हैं।
इनके निचले हिस्से डायाफ़्राम पर टिके हैं। डायाफ़्राम का दायाँ हिस्सा थोड़ा ऊँचा होता है क्योंकि उसके नीचे लिवर है; बाएँ हिस्से के नीचे पेट है। दोनों फेफड़ों के बीच दिल, बड़ी रक्त-नलियाँ, साँस की नली, खाने की नली और, बच्चों में, थाइमस होते हैं।
LMNT ट्रीटमेंट इसी नक़्शे पर चलते हैं: Chest Only छाती के आगे दिया जाता है, Back Arrow ऊपरी पीठ पर कंधे की ओर, और Lu + Sh हँसली के ठीक नीचे और कंधे के जोड़ के ऊपर — शिक्षा के अनुसार वही एक ट्रीटमेंट जो फेफड़े के सबसे ऊपरी सिरे तक पहुँचता है।
🖼चित्र जल्द आएगाएक पारदर्शी धड़ के आगे और पीछे के दृश्य — फेफड़े कहाँ हैं, उनके सिरे कितने ऊँचे और पीठ पर वे कितने नीचे तक जाते हैं, और Chest Only, Lu + Sh व Back Arrow की जगहें
हँसली के ऊपर से पीठ के निचले हिस्से तक: फेफड़े ज़्यादातर लोगों की सोच से बड़े हैं — और LMNT उन तक आगे से, ऊपर से और पीछे से पहुँचती है।
स्वस्थ फेफड़े गुलाबी, नरम और स्पंजी होते हैं, और प्ल्यूरा की वजह से उनकी सतह चिकनी, चमकदार होती है। इनमें इतनी हवा होती है कि फेफड़े का टुकड़ा पानी पर तैरता है और दबाने पर हल्का-सा चटकता है।
नवजात के फेफड़े चमकीले गुलाबी होते हैं। बरसों की शहरी हवा, चूल्हे के धुएँ या तंबाकू से इनमें फँसी धूल के स्लेटी और काले धब्बे जमते जाते हैं; बहुत ज़्यादा धूम्रपान करने वाले के फेफड़े काफ़ी हद तक गहरे स्लेटी दिख सकते हैं।
फेफड़े कितने बड़े होते हैं?
पूरी तरह भरने पर एक वयस्क पुरुष के फेफड़ों में लगभग 6 लीटर हवा आती है, और महिला में लगभग पाँचवाँ हिस्सा कम। एक शांत साँस सिर्फ़ लगभग आधा लीटर हवा हिलाती है; सबसे गहरी साँस लेने और छोड़ने में लगभग 4.5 लीटर; और लगभग 1.2 लीटर हमेशा अंदर रह जाती है।
लगभग 48 करोड़ वायु-कोष होते हैं, हर एक लगभग एक मिलीमीटर के पाँचवें हिस्से जितना चौड़ा, और इनकी कुल सतह लगभग 70 वर्ग मीटर है। हवा और ख़ून के बीच की दीवार सिर्फ़ लगभग एक मिलीमीटर के 0.2–0.6 हज़ारवें हिस्से जितनी मोटी है। किसी भी पल फेफड़ों में लगभग 450 mL ख़ून रहता है।
🖼चित्र जल्द आएगाफेफड़ों की जोड़ी के बग़ल में नापने के जग — एक शांत साँस, सबसे गहरी साँस, हमेशा अंदर रहने वाली हवा और पूरी क्षमता
एक शांत साँस फेफड़ों की क्षमता का सिर्फ़ छोटा हिस्सा इस्तेमाल करती है — और वे कभी पूरी तरह ख़ाली नहीं होते।
रोग और गड़बड़ियाँ
फेफड़ों को कौन-सी बीमारियाँ और गड़बड़ियाँ प्रभावित करती हैं?
फेफड़ों की तकलीफ़ उनकी वायु-नलियों, वायु-कोषों, रक्त-नलियों या आवरण में हो सकती है — और फेफड़ों की कई तकलीफ़ें सबसे पहले खाँसी या साँस फूलने के रूप में दिखती हैं।
वायु-नलियाँ
अस्थमा (दमा)छोटी वायु-नलियाँ कसती, सूजती और बलगम से भर जाती हैं।
तीन हफ़्ते से ज़्यादा चलने वाली खाँसी, या पुरानी खाँसी में बदलाव
खाँसी में ख़ून
साँस फूलना, घरघराहट या छाती में जकड़न
गहरी साँस लेने पर छाती में चुभने वाला दर्द
बुख़ार के साथ खाँसी और गाढ़ा बलगम
खाँसी के साथ वज़न घटना, रात को पसीना और थकान
अचानक साँस फूलना और छाती में दर्द, ख़ासकर लंबे सफ़र या बिस्तर पर आराम के बाद
फेफड़ों की कौन-सी जाँचें होती हैं?
पल्स ऑक्सीमीटर — उँगली की क्लिप, जो ख़ून में ऑक्सीजन का स्तर पढ़ती है।
छाती का एक्स-रे — फेफड़ों की पहली तस्वीर — निमोनिया, तरल, टीबी या किसी छाया के लिए।
स्पाइरोमेट्री — नापती है कि आप कितनी हवा और कितनी तेज़ी से बाहर फूँक सकते हैं।
बलगम की जाँच — संक्रमण के लिए, टीबी समेत।
CT स्कैन — बारीक तस्वीरें; डाई वाला CT (CT पल्मोनरी एंजियोग्राफ़ी) फेफड़ों की धमनियों में थक्के पकड़ता है।
D-डाइमर — ख़ून की जाँच, जो थक्के की संभावना हटाने में मदद करती है।
ब्रॉन्कोस्कोपी — एक पतला कैमरा वायु-नलियों में डालकर देखना और नमूने लेना।
फेफड़ों की बीमारियों का इलाज कैसे होता है?
इनहेलर और नेबुलाइज़र — दवा को सीधे वायु-नलियों तक पहुँचाते हैं, ताकि वे खुलें और सूजन शांत हो।
एंटीबायोटिक और टीबी का इलाज — बैक्टीरिया वाले निमोनिया के लिए, और टीबी का पूरा कोर्स।
ख़ून पतला करने वाली दवाएँ — फेफड़ों में थक्के के लिए, डॉक्टरी निगरानी में।
ऑक्सीजन और पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन — स्तर कम रहे तो ऑक्सीजन; लंबी बीमारी में निगरानी में कसरत और साँस का प्रशिक्षण।
धूम्रपान छोड़ना — फेफड़ों की लगभग हर बीमारी का सबसे ज़रूरी इलाज।
विशेषज्ञ का इलाज — फेफड़े के आसपास का तरल निकालना, या फेफड़ों के कैंसर के लिए सर्जरी, रेडियोथेरेपी और दवाएँ।
न्यूरोथेरेपी (LMNT)
LMNT शिक्षा पूछती है कि फेफड़ों और लिवर में इतना ज़्यादा हेपरिन क्यों बनता है, और जवाब देती है: क्योंकि यही दो जगहें हैं जहाँ शरीर जान-बूझकर अपना ख़ून धीमा करता है। फेफड़ों में, जब हर लाल कोशिका एक वायु-कोष से गुज़रती है, उतने में कार्बन डाइऑक्साइड को निकलना और ऑक्सीजन को अंदर आना होता है, इसलिए ख़ून पतला फैलाकर रेंगने जितना धीमा कर दिया जाता है — और धीमा ख़ून जमने के ख़तरे में रहता है। इसलिए वायु-कोषों के आसपास की मास्ट कोशिकाएँ हेपरिन बनाती हैं। इसी से यह शिक्षा निकलती है कि लिवर और फेफड़ों को सक्रिय करने से शरीर को हेपरिन बनाने में मदद मिल सकती है, और हर Heparin फ़ॉर्मूला फेफड़ों के लिए (8) Ch. Only पर ख़त्म होता है। शिक्षा की दूसरी कड़ी ब्लड प्रेशर की है: ACE एंज़ाइम फेफड़ों से आता है और एंजियोटेंसिन I को एंजियोटेंसिन II में बदलता है, इसलिए Angiotensin No. 2 फ़ॉर्मूला लिवर, बाईं किडनी के पॉइंट और फिर फेफड़ों पर काम करता है — Lu + Sh के ज़रिए, जिसे शिक्षा फेफड़े के सबसे ऊपरी सिरे तक पहुँचने वाला अकेला ट्रीटमेंट बताती है। शिक्षा यह भी जोड़ती है कि किसी अंग को सक्रिय करना हुक्म नहीं, न्योता है: शरीर अपनी फ़ीडबैक-व्यवस्था से सिर्फ़ वही बनाता है जिसकी उसे कमी है। तीन ट्रीटमेंट फेफड़ों तक पहुँचते हैं — Back Arrow, Chest Only और Lu + Sh — और Back Arrow के बारे में शिक्षा ख़ुद ईमानदार है: फेफड़ों में ख़ून का बहाव दिल और फेफड़ों की अपनी नलियाँ तय करती हैं; हल्की घिसाई जो कर सकती है, वह है मेहनत करती छाती की दीवार को ढीला करना — इनहेलर के साथ, उसकी जगह कभी नहीं।
पॉइंट
Ch. Only — Chest Only — फेफड़ों के दोनों पंखों को सक्रिय करता है। पूरे परिवार पर एक रोक: फेफड़ों के कैंसर में नहीं दिया जाता।
(2) / (4) Ch. Only — फेफड़ों को साँस के ज़रिए कार्बन डाइऑक्साइड पूरी तरह बाहर निकालने के लिए सक्रिय करता है।
(8) Ch. Only — Oxygen, 1,25 DCC और Heparin फ़ॉर्मूलों में; Round Arrow के साथ देने पर दोनों मिलकर शरीर का एसिड-अल्कली संतुलन बनाए रखते हैं।
Left Chest Only — सिर्फ़ बायाँ फेफड़ा — एसिड के लक्षण और Mu° का दर्द घटाता है।
Right Chest Only — सिर्फ़ दायाँ फेफड़ा — अल्कली के लक्षण और Liv° का दर्द घटाता है।
Lu + Sh — छाती की मांसपेशियाँ खोलता है और फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है। दिन भर लार टपकाने वाले बच्चों की माताओं को सिखाया जाता है; एसिडिटी, आँखों से पानी आने, हिचकी और हाइटस हर्निया में भी। यह ब्लड प्रेशर बढ़ाता है — इसलिए हाई BP या दिल की बीमारी में नहीं।
Back Arrow — Blood supply to lungs — तलवे के नरम हिस्से से (एड़ी से कभी नहीं) पीठ के बीच से कंधे तक और बाँह के ऊपरी हिस्से तक हल्की घिसाई, पहले बाईं ओर; साँस से जुड़ी सभी बीमारियों में।
(6) Right Swt — ब्रॉन्कियल अस्थमा के लिए: फेफड़ों का संक्रमण इओसिनोफ़िल बढ़ाता है, जिनके रसायन वायु-नलियों को सिकोड़ते हैं। हाई ब्लड प्रेशर में नहीं।
(7) Liv (7) Mu° (6) Lu + Sh — एंजियोटेंसिनोजन के लिए लिवर, बाईं किडनी, फिर ACE के लिए फेफड़े। ख़ून जाने के बाद अचानक गिरे दबाव में, और डबल निमोनिया में।
(8) Ch. Only से छाती खोलकर, फिर Stretch, Back Arrow और H Arrow, रीढ़ की घिसाइयाँ, और वही क़दम फिर से — ऊतकों तक ऑक्सीजन बढ़ाने के लिए। शिक्षा कहती है कि साफ़ और बेहतर ख़ून वाले फेफड़े हर ग्रंथि को ज़्यादा ऑक्सीजन वाला ख़ून भेजते हैं।
“अगर आमाशय, फेफड़े और गुर्दे ठीक से काम करें, तो बीमारी आ ही नहीं सकती।”
— डॉ. लाजपतराय मेहरा
“जहाँ भी सवाल का निशान है, वह इस बात का संकेत है कि यह मेरी अपनी सोच है, जिस पर अब दूसरे लोग रिसर्च कर सकते हैं।”
— डॉ. लाजपतराय मेहरा
“हमारे इलाज से रोगी को तुरंत फ़ायदा मिले या न मिले, हमारी लापरवाही से उसे कोई नुक़सान न पहुँचे — इसका ध्यान रखें।”
— डॉ. लाजपतराय मेहरा
यह कभी न करें
इमरजेंसी: अचानक साँस फूलना, छाती में दर्द या खाँसी में ख़ून — ख़ासकर लंबे सफ़र, ऑपरेशन, बिस्तर पर आराम या प्रसव के बाद — फेफड़ों में थक्के का संकेत हो सकता है। तुरंत 108/112 पर फ़ोन करें। थ्रॉम्बोसिस (ख़ून का थक्का)
तीन हफ़्ते से ज़्यादा की खाँसी, खाँसी के साथ वज़न घटना या रात को पसीना, या बलगम में ख़ून — डॉक्टर और टीबी की जाँच ज़रूरी। खाँसी और ब्रॉन्काइटिस
Ch. Only, किसी भी रूप में, फेफड़ों के कैंसर में नहीं दिया जाता। Ch. Only
Lu + Sh ब्लड प्रेशर बढ़ाता है: हाई ब्लड प्रेशर या दिल की बीमारी में कभी नहीं। हँसली के नीचे इसका पहला हिस्सा बहुत हल्का और सपाट हथेली से होता है, क्योंकि वहाँ बाँह की बड़ी नलियाँ, नसें और फेफड़े का ऊपरी सिरा हैं — बाँह में झनझनाहट या सुन्नपन हो तो तुरंत रोक दिया जाता है। Lu + Sh
Back Arrow तलवे के नरम हिस्से से और हल्के से दिया जाता है — एड़ी से कभी नहीं। Back Arrow
अस्थमा में Spl, Thrd और Gal नहीं दिए जाते, और (4) Thrd भी नहीं। हाई ब्लड प्रेशर में (6) Right Swt नहीं दिया जाता। अस्थमा (दमा)
Angiotensin No. 2 फ़ॉर्मूले में, किडनी फ़ेल्योर या किडनी के कैंसर में Mu° सक्रिय नहीं किया जाता, और फ़ॉर्मूला तभी दिया जाता है जब ख़ून बहना रुक गया हो। Angiotensin No. 2
छाती के नीचे तकिए रखकर पेट के बल दिए जाने वाले ट्रीटमेंट में गले के पास तीन उँगली की जगह रखी जाती है, ताकि साँस खुली रहे।
कैंसर: अगर व्यक्ति को कैंसर है, तो (10) Pan, Thymus, Pit, Lu + Sh, Rt. Ov / Lt. Ov और (30) Medulla कभी नहीं दिए जाते — थेरेपिस्ट योजना बदल देता है।
डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें, और अपना इनहेलर या ऑक्सीजन साथ रखें। न्यूरोथेरेपी (LMNT) आपके डॉक्टरी इलाज के साथ काम करती है, उसकी जगह कभी नहीं।
देखभाल
मैं अपने फेफड़ों को स्वस्थ कैसे रखूँ?
आपके फेफड़े रोज़ ख़ुद को साफ़ करते हैं — उन्हें साफ़ हवा और फैलने की जगह दीजिए।
धूम्रपान छोड़ें, और दूसरों के धुएँ से बचें
छोड़ने के कुछ ही हफ़्तों में वायु-मार्ग के सफ़ाई वाले रोम ठीक होने लगते हैं और खाँसी अक्सर कम हो जाती है।
साफ़ ईंधन और खुली हवा में खाना पकाएँ
लकड़ी, उपलों और मिट्टी के तेल का धुआँ भारत में फेफड़ों की बीमारी की एक बड़ी वजह है। हो सके तो LPG इस्तेमाल करें और रसोई हवादार रखें।
सीधे बैठें और खड़े हों
झुकी मुद्रा फेफड़ों के निचले हिस्से को दबाती है; सीधे बैठने से डायाफ़्राम खुलकर चलता है।
रोज़ गहरी साँस लें
तेज़ चलना, सीढ़ियाँ चढ़ना या कुछ मिनट धीमी गहरी साँस — फेफड़ों के वे हिस्से खोलते हैं जहाँ शांत साँस कभी नहीं पहुँचती।
बीमारी या ऑपरेशन के बाद जल्दी चलना-फिरना
डॉक्टर की इजाज़त मिलते ही बैठना, चलना और गहरी साँसें लेना छाती के संक्रमण और थक्कों से बचाता है।
सुबह उठते ही ठंडा पानी नहीं
गुरुजी का नियम: सुबह उठकर कमरे के तापमान वाला या गुनगुना पानी पिएँ — उस समय ठंडा पानी बलगम बढ़ाता है।
टीकों के बारे में पूछें
फ़्लू और निमोनिया के टीके बुज़ुर्गों और डायबिटीज़, दिल या फेफड़ों की बीमारी वालों को बचाते हैं।
आम सवाल
बायाँ फेफड़ा दाएँ से छोटा क्यों होता है?
क्योंकि दिल बाईं ओर झुका होता है और वहाँ जगह ले लेता है। बाएँ फेफड़े में दिल के लिए एक खाँचा और दो लोब होते हैं; दाएँ में तीन।
क्या फेफड़ों की अपनी मांसपेशियाँ होती हैं?
साँस के लिए नहीं। फेफड़ों को डायाफ़्राम और पसलियों की मांसपेशियाँ खींचकर खोलती हैं, और वे अपने-आप वापस सिकुड़ते हैं। सिर्फ़ छोटी वायु-नलियों में चिकनी मांसपेशी होती है — वही जो अस्थमा में कसती है।
क्या धूम्रपान छोड़ने के बाद मेरे फेफड़े ठीक हो सकते हैं?
कुछ हद तक, और यह जल्दी शुरू होता है। खाँसी और बलगम अक्सर कुछ हफ़्तों से महीनों में सुधरते हैं, और फेफड़ों के कैंसर और दिल की बीमारी का ख़तरा साल-दर-साल घटता है। एम्फ़ाइसीमा जैसा नुक़सान वापस नहीं जाता — इसीलिए जल्दी छोड़ना सबसे ज़्यादा मायने रखता है।
क्या कोई एक फेफड़े के साथ जी सकता है?
हाँ। जिनका एक फेफड़ा निकाला गया हो, वे सामान्य जीवन जी सकते हैं, हालाँकि भारी मेहनत पर उनकी साँस जल्दी फूल सकती है।
LMNT किसी और जगह के थक्के के लिए फेफड़ों पर काम क्यों करती है?
LMNT शिक्षा में फेफड़े और लिवर शरीर का लगभग 85% हेपरिन — थक्का-रोधी रसायन — बनाते हैं, इसलिए हर Heparin फ़ॉर्मूले में फेफड़ों के लिए Ch. Only होता है। यह डॉक्टरी इलाज के साथ सहारा है — थक्के की आशंका हो तो हमेशा पहले डॉक्टर।
मुझे अपने डॉक्टर या थेरेपिस्ट से क्या पूछना चाहिए?
मेरे छाती के एक्स-रे या फेफड़ों की कार्य-क्षमता जाँच में क्या आया?
मेरी खाँसी या साँस फूलना फेफड़ों से है या दिल से?
क्या मुझे टीबी की जाँच या CT स्कैन की ज़रूरत है?
मुझे कौन-से टीके लगवाने चाहिए?
(थेरेपिस्ट से) मेरे ब्लड प्रेशर, दिल या किसी गाँठ को देखते हुए, क्या Lu + Sh या Ch. Only मेरे लिए सुरक्षित है?
हैरान करने वाली बातें
1लगभग 48 करोड़ वायु-कोष
वयस्क फेफड़ों की सावधान गिनती में औसतन लगभग 48 करोड़ वायु-कोष मिले — जो व्यक्ति-व्यक्ति में काफ़ी अलग होते हैं, और बड़े फेफड़ों में ज़्यादा। मिलकर ये ऑक्सीजन के पार जाने के लिए लगभग 70 वर्ग मीटर की सतह देते हैं।
स्रोत: Ochs M et al. The number of alveoli in the human lung. Am J Respir Crit Care Med 2004;169:120–124 (mean 480 million, range 274–790 million); Guyton & Hall (respiratory membrane about 70 m²).
2काग़ज़ से सौ गुना पतली दीवार
वायु-कोष की हवा और उसकी केशिका के ख़ून के बीच की दीवार सिर्फ़ लगभग एक मिलीमीटर के 0.2–0.6 हज़ारवें हिस्से जितनी मोटी है — काग़ज़ की एक शीट से सौ गुना से भी ज़्यादा पतली। इसीलिए ऑक्सीजन पल भर में पार जा सकती है।
स्रोत: Guyton & Hall — respiratory membrane average about 0.6 µm, in places as thin as 0.2 µm; printer paper about 0.1 mm (100 µm).
3आपके फेफड़े ब्लड प्रेशर के एक हॉर्मोन को चालू करते हैं
1967 में शोधकर्ताओं ने दिखाया कि निष्क्रिय एंजियोटेंसिन I मुख्य रूप से फेफड़ों से गुज़रते समय शक्तिशाली एंजियोटेंसिन II में बदलता है — फेफड़ों की नलियों की परत पर मौजूद एक एंज़ाइम (ACE) से। ब्लड प्रेशर की कई गोलियाँ इसी एंज़ाइम को रोककर काम करती हैं। LMNT का Angiotensin No. 2 फ़ॉर्मूला इसी कारण फेफड़ों पर ख़त्म होता है।
🖼चित्र जल्द आएगाएक रास्ता: किडनी के रेनिन से एंजियोटेंसिन I, जिसे फेफड़े की केशिका में ACE एंजियोटेंसिन II में बदलता है, जो धमनी को सिकोड़कर दबाव बढ़ाता है
किडनी शुरू करती है, फेफड़े पूरा करते हैं: फेफड़ों की परत एंजियोटेंसिन I को दबाव बढ़ाने वाले एंजियोटेंसिन II में बदलती है।
स्रोत: Ng KKF, Vane JR. Conversion of angiotensin I to angiotensin II. Nature 1967;216:762–766. LMNT: lungs.md §35.13.
4आपके फेफड़े आपके ख़ून की छलनी हैं
शरीर से लौटने वाला सारा ख़ून दिमाग़ तक जाने से पहले फेफड़ों की केशिकाओं से गुज़रता है। छोटे थक्के और हवा के बुलबुले वहीं फँसकर साफ़ हो जाते हैं, जिससे दिमाग़ सुरक्षित रहता है। LMNT शिक्षा जोड़ती है कि वायु-कोषों के आसपास की मास्ट कोशिकाएँ हेपरिन बनाती हैं, ताकि यह धीमा बहता ख़ून जमे नहीं।
स्रोत: Guyton & Hall / West's Respiratory Physiology — the pulmonary circulation as a filter for small emboli; mast cells in lung tissue contain heparin. LMNT: lungs.md §33.3, wiki_db §33.1.
5आपके फेफड़े प्लेटलेट्स बनाने में मदद कर सकते हैं
2017 में जीवित चूहों के फेफड़ों की फ़िल्म बनाते वैज्ञानिकों ने देखा कि प्लेटलेट बनाने वाली बड़ी कोशिकाएँ बोन मैरो से आकर फेफड़ों की नलियों के अंदर प्लेटलेट्स छोड़ती हैं — चूहों के लगभग आधे प्लेटलेट्स। इंसानों में भी ऐसा होता है या नहीं, इस पर अभी शोध चल रहा है।
स्रोत: Lefrançais E et al. The lung is a site of platelet biogenesis and a reservoir for haematopoietic progenitors. Nature 2017;544:105–109 (mouse study).
6आपके फेफड़े कभी ख़ाली नहीं होते
सबसे ज़ोर से साँस छोड़ने के बाद भी लगभग 1.2 लीटर हवा फेफड़ों में रह जाती है, जो वायु-कोषों को खुला रखती है। इसीलिए फेफड़े पानी पर तैरते हैं — और इसीलिए हर साँस अंदर की हवा का सिर्फ़ एक हिस्सा ही बदलती है।
स्रोत: Guyton & Hall — residual volume about 1.2 L; total lung capacity about 5.8 L.
7पहली साँस आपकी ज़िंदगी की सबसे कठिन साँस होती है
जन्म से पहले फेफड़े तरल से भरे होते हैं और बच्चे को ऑक्सीजन नाल से मिलती है। पहली चीख़ों को पिचके वायु-कोषों में ज़ोर लगाकर हवा भरनी पड़ती है, जिसके लिए बड़ी मेहनत और पर्याप्त सर्फ़ेक्टेंट चाहिए। समय से पहले जन्मे बच्चों में अक्सर सर्फ़ेक्टेंट कम होता है, और 1959 में पता चला कि उनकी साँस की तकलीफ़ इसी वजह से होती है।
स्रोत: Avery ME, Mead J. Surface properties in relation to atelectasis and hyaline membrane disease. Am J Dis Child 1959;97:517–523; Guyton & Hall on the first breath. Links to Guruji's cord teaching (blood.md §40.11).
8आपके फेफड़े का ऊपरी सिरा हँसली से ऊपर होता है
ज़्यादातर लोग सोचते हैं कि फेफड़े हँसली के नीचे से शुरू होते हैं, पर उनके गोल ऊपरी सिरे हँसली के अंदरूनी हिस्से से लगभग 2–3 सेमी ऊपर, गर्दन की जड़ तक उठते हैं। इसीलिए वहाँ दबाव बहुत हल्का होना चाहिए — और इसीलिए LMNT, Lu + Sh को फेफड़े के सबसे ऊपरी सिरे तक पहुँचने वाला ट्रीटमेंट बताती है।
स्रोत: Gray's Anatomy — the cervical pleura and lung apex rise 2–3 cm above the medial third of the clavicle. LMNT: lungs.md §17.11-2, §35.13.
आपके फेफड़ों का एक दिन
~20,000साँसें
~7,000 Lख़ून फेफड़ों की केशिकाओं से गुज़रता है — दिल का सारा पंप किया ख़ून
~350 Lऑक्सीजन ख़ून में भरी जाती है
~450 mLख़ून किसी भी पल फेफड़ों में रहता है
<1 sहर लाल कोशिका को कार्बन डाइऑक्साइड के बदले ऑक्सीजन लेने में
योग
तीन हिस्सों वाली (विभागीय) साँस Vibhāgīya Prāṇāyāma
🖼चित्र जल्द आएगाबग़ल से दिखता एक स्लेटी पुतला, सीधा बैठा, हाथ पसलियों और ऊपरी छाती पर, बारी-बारी से पेट, पसलियों और ऊपरी छाती में साँस भरता
विभागीय प्राणायाम: पहले पेट, फिर पसलियाँ, फिर ऊपरी छाती भरें — और उलटे क्रम में ख़ाली करें।
फ़ायदे
फेफड़ों का पूरा हिस्सा इस्तेमाल करती है — निचले हिस्से और ऊपरी सिरे भी, जिन्हें शांत साँस ख़ाली छोड़ देती है।
डायाफ़्राम और पसलियों की मांसपेशियों को काम करते महसूस करना सिखाती है।
साँस को धीमा और गहरा करती है, जिससे मन शांत होता है।
कैसे करें
ज़मीन या कुर्सी पर, सीधी पीठ के साथ आराम से बैठें।
पेट: नाभि पर हाथ रखें और ऐसे साँस लें कि पेट उठे; छोड़ें तो नीचे आए। पाँच साँसें।
पसलियाँ: हाथ निचली पसलियों की बग़ल में; ऐसे साँस लें कि पसलियाँ हाथों के नीचे फैलें। पाँच साँसें।
ऊपरी छाती: एक हाथ हँसली के ठीक नीचे; धीरे से साँस लें ताकि ऊपरी छाती उठे। पाँच साँसें।
फिर तीनों को एक धीमी साँस में जोड़ें — पेट, पसलियाँ, छाती — और उलटे क्रम में छोड़ें। पाँच से दस चक्र।
ध्यान रखें
कभी ज़ोर न लगाएँ और साँस न रोकें। चक्कर या झनझनाहट लगे तो रुक जाएँ — हो सकता है आप बहुत तेज़ साँस ले रहे हों। अस्थमा के दौरे में इसकी जगह रिलीवर इनहेलर लें।
सहारे वाला मत्स्यासन Matsyāsana (supported)
🖼चित्र जल्द आएगाबग़ल से दिखता एक स्लेटी पुतला, ऊपरी पीठ के नीचे मुड़े कंबल पर पीछे लेटा, छाती धीरे से खुली और सिर को सहारा
सहारे वाला मत्स्यासन: ऊपरी पीठ के नीचे मुड़ा कंबल छाती को बिना खिंचाव के खुलने देता है।
फ़ायदे
छाती के अगले हिस्से और पसलियों के बीच की मांसपेशियों को धीरे से खोलता है।
मेज़ या फ़ोन पर लंबे घंटों की झुकी मुद्रा को ठीक करता है।
ऊपरी छाती में गहरी साँस लेना आसान बनाता है।
कैसे करें
एक मज़बूत कंबल को लंबी पट्टी में मोड़कर चटाई पर आड़ा बिछाएँ।
उसके आगे बैठें और पीछे लेटें ताकि वह आपकी ऊपरी पीठ के नीचे, कंधे की हड्डियों के ठीक नीचे आए।
सिर को एक पतले मुड़े कंबल पर रखें ताकि गर्दन लंबी रहे, पीछे न मुड़े।
बाँहें बग़ल में, हथेलियाँ ऊपर रखें, और 2–5 मिनट धीरे साँस लें।
बाहर आने के लिए करवट लें और हाथों के सहारे धीरे से उठें।
ध्यान रखें
सिर को बिना सहारे के पीछे न गिराएँ। गर्दन की तकलीफ़, छाती या पीठ की हाल की चोट, या हाई ब्लड प्रेशर में, डॉक्टर की सहमति के बिना न करें। दर्द, चक्कर या बाँहों में झनझनाहट हो तो तुरंत रुक जाएँ।
वीडियो
LMNT Oxygen Formula — Drugless Support for Asthma & Low Oxygen
इसमें LMNT Oxygen फ़ॉर्मूला दिखाया गया है — दमा, साँस फूलने और कम ऑक्सीजन में डॉक्टर के इलाज के साथ सहारे के रूप में।
ध्यान दें: इनहेलर साथ रखें और डॉक्टर की सलाह के अनुसार लें।
LOW BP DUE TO HEADY BLEEDING DURING PERIODS
Angiotensin No. 2 फ़ॉर्मूले का प्रदर्शन — (7) Liv, (7) Mu° और (6) Lu + Sh — माहवारी में बहुत ज़्यादा ख़ून जाने के बाद अचानक गिरे BP के लिए।
वीडियो बेहोशी के समय ही यह फ़ॉर्मूला देने की बात करता है। LMNT पद्धति में जिसका ख़ून अब भी बह रहा हो, जो ठंडा, पीला हो या बेहोश हो रहा हो, उसे पहले अस्पताल ले जाया जाता है; यह फ़ॉर्मूला ख़ून बहना रुकने के बाद के लिए है। कैंसर में Lu + Sh नहीं दिया जाता।
P HAPARIN FORMULA
इसमें P. Heparin फ़ॉर्मूला दिखाया गया है — जाँघों के ऊपर (8) Pan, जाँघ और बाँह पर (7) Liv, और छाती पर हथेलियाँ रखकर (8) Chest Only। वीडियो में इसे Angina ट्रीटमेंट के आख़िरी हिस्से के रूप में, रक्त संचार को सहारा देने के लिए दिया गया है।
ख़ुद को परखें
शोध
मज़बूत प्रमाण
छह वयस्क फेफड़ों में सावधान नमूना-विधि से वायु-कोष गिनने पर औसतन लगभग 48 करोड़ मिले, लोगों के बीच बड़े अंतर के साथ, और बड़े फेफड़ों में ज़्यादा।
इस मशहूर प्रयोग ने दिखाया कि एंजियोटेंसिन I मुख्य रूप से फेफड़ों में सक्रिय एंजियोटेंसिन II में बदलता है — आज की ACE-इनहिबिटर ब्लड प्रेशर गोलियों के पीछे यही खोज है, और LMNT के Angiotensin No. 2 फ़ॉर्मूले में फेफड़ों के उपयोग के पीछे भी।
जीवित चूहों के फेफड़ों की फ़िल्म में प्लेटलेट बनाने वाली कोशिकाएँ फेफड़ों की नलियों के अंदर प्लेटलेट्स छोड़ती दिखीं — इन चूहों के सारे प्लेटलेट्स का लगभग आधा। इंसानों पर अध्ययन अभी बाक़ी हैं।
यह पेज समझाता है कि शरीर कैसे काम करता है; यह जाँच नहीं करता। न्यूरोथेरेपी (LMNT) आपके डॉक्टरी इलाज के साथ काम करती है — डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें, और कोई नया या गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर को दिखाएँ।
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