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न्यूरोथेरेपी (LMNT) गाइड

बहती नदी: हेपरिन और हेपरिन फ़ॉर्मूले

ख़ून तब तक सुरक्षित है जब तक वह बहता रहे। न्यूरोथेरेपी (LMNT) का Heparin परिवार एक ही विचार पर बना है: लिवर और फेफड़े शरीर का अपना ख़ून न जमने देने वाला रसायन बनाते हैं, और पैंक्रियास पुराने थक्के तोड़ने में मदद करता है — इसलिए ख़ून की नदी खुली रखने के लिए इन अंगों को हल्के से सक्रिय किया जाता है।

परिचय

तीन अंग, दो काम: लिवर और फेफड़े नए थक्के बनने से रोकते हैं; पैंक्रियास पुराने थक्के खोलने में मदद करता है।

ख़ून तब तक सुरक्षित है जब तक वह बहता रहे। न्यूरोथेरेपी (LMNT) का Heparin परिवार एक ही विचार पर बना है: लिवर और फेफड़े शरीर का अपना ख़ून न जमने देने वाला रसायन बनाते हैं, और पैंक्रियास पुराने थक्के तोड़ने में मदद करता है — इसलिए ख़ून की नदी खुली रखने के लिए इन अंगों को हल्के से सक्रिय किया जाता है।

ख़ून बहता रहे, तो सुरक्षित है

गुरुजी ने ख़ून के बारे में एक सीधी बात सिखाई। जब तक ख़ून तेज़ी से बहता है, कोई ख़तरा नहीं। अगर वह कहीं रुक जाए या बहुत धीमा हो जाए, तो जमने लगता है। इसे क्लॉटिंग कहते हैं — यानी ख़ून तरल से एक नरम ठोस डाट बन जाता है।

थक्का बनना हमारी रक्षा करता है। इसके बिना छोटा-सा कट भी बहता ही रहता। पर जो थक्का नली के अंदर, बिना ज़रूरत बन जाए, वह भी उतना ही ख़तरनाक है। इसलिए शरीर हर पल दो ख़तरों के बीच खड़ा रहता है: न रुकने वाला ख़ून, और ग़लत जगह जमने वाला ख़ून।

दूसरे ख़तरे के लिए क़ुदरत ने हेपरिन नाम का रसायन बनाया। हेपरिन शरीर का अपना 'ख़ून न जमने दो' वाला रसायन है। इसका काम थक्का बनने से रोकना है। जो थक्का बन चुका है, उसे यह नहीं गलाता; यह अगला थक्का बनने से रोकता है।

लिवर और फेफड़े ही क्यों?

हेपरिन मास्ट सेल में जमा रहता है — ये पहरेदार कोशिकाएँ हैं जो ख़ून की नलियों के आसपास के ऊतक में रहती हैं। गुरुजी की सीख के अनुसार शरीर का ज़्यादातर हेपरिन लिवर और फेफड़ों के मास्ट सेल से आता है, और बाक़ी हर ऊतक में थोड़ा-थोड़ा फैला है।

वहीं क्यों? क्योंकि ये वे दो जगहें हैं जहाँ शरीर जान-बूझकर अपना ख़ून धीमा करता है। लिवर के अंदर ख़ून पतली, घुमावदार नालियों से रेंगता है, ताकि पुरानी लाल कोशिकाएँ और कीटाणु छाँटकर हटाए जा सकें। फेफड़ों में ख़ून छोटी-छोटी हवा की थैलियों में धीमा होता है, ताकि कार्बन डाइऑक्साइड बाहर जाए और ऑक्सीजन अंदर आए। धीमा ख़ून जम सकता है, इसलिए हेपरिन ठीक वहीं बनता है।

एक नदी सोचिए जो कई पतली धाराओं में बँट जाती है, ताकि हर बूँद की जाँच हो सके। पानी लगभग रुक जाता है और गाद बैठने लगती है। इसलिए ठीक उसी हिस्से में पानी में कुछ मिलाया जाता है जो गाद को जमने न दे। वह चीज़ है हेपरिन। इसी से गुरुजी ने मुख्य विचार निकाला: अगर लिवर और फेफड़ों को सक्रिय किया जाए, तो हेपरिन बन सकता है और नए थक्के रोके जा सकते हैं।

लिवर और फेफड़े जान-बूझकर ख़ून धीमा करते हैं — और हेपरिन वहीं बनता है।

थक्का कैसे बनता है, और कैसे खुलता है

जब कोई नली चोट खाती है, तो एक कड़ी शुरू होती है। लिवर दो जमाने वाले प्रोटीन — प्रोथ्रोम्बिन और फ़ाइब्रिनोजन — उस जगह भेजता है। प्लेटलेट्स, यानी रिसाव बंद करने वाले छोटे कोशिका-टुकड़े, वहाँ टूटते हैं। कैल्शियम और विटामिन K की मदद से यह कड़ी फ़ाइब्रिन पर ख़त्म होती है — एक बारीक जाल, जो लाल कोशिकाओं को पकड़कर छेद बंद कर देता है।

छोटे थक्के रोज़ बनते हैं और रोज़ साफ़ होते हैं। हर थक्के के अंदर प्लाज़्मिनोजन नाम का प्रोटीन इंतज़ार करता है। चोट के कुछ घंटे बाद नली की अंदरूनी परत tPA छोड़ती है — एक धीमा एंज़ाइम — जो प्लाज़्मिनोजन को प्लाज़्मिन में बदल देता है। प्लाज़्मिन फ़ाइब्रिन के जाल को पचा देता है और थक्का घुल जाता है। अगर यह सफ़ाई ठीक से न हो, तो थक्के बढ़कर ख़ून का बहाव रोक सकते हैं, जिससे लकवा या दूसरी बीमारी हो सकती है।

  • हेपरिन नए थक्के बनने से रोकता है।
  • प्लाज़्मिन बन चुके थक्कों को खोलता है।
  • प्लाज़्मिन पैंक्रियास के प्रोटीन पचाने वाले एंज़ाइम ट्रिप्सिन जैसा है — यही सुराग इस परिवार में पैंक्रियास तक ले गया।

P. Heparin: एक फ़ॉर्मूला, दो काम

इसी शरीर-विज्ञान से गुरुजी ने मूल फ़ॉर्मूला P. Heparin बनाया। यह तीन पॉइंट से काम करता है: पैंक्रियास के लिए Pan, लिवर के लिए Liv, और फेफड़ों के लिए Ch. Only। हर एक का तय काम है। पैंक्रियास पुराने थक्के के फ़ाइब्रिन को पचाने में मदद के लिए है। लिवर और फेफड़े हेपरिन बनाने के लिए हैं, ताकि नया थक्का न बने। एक फ़ॉर्मूला, दो काम: जो बंद है उसे खोलना, और बाक़ी को खुला रखना।

पैंक्रियास क्यों? थेरेपी ईमानदारी से कहती है कि यह क़दम एक अनुमान है। प्लाज़्मिन ट्रिप्सिन जैसा दिखता है, और ट्रिप्सिन पैंक्रियास बनाता है। जैसे सड़क पर दो हमशक्ल लड़के शायद भाई हों, वैसे ही शायद पैंक्रियास प्लाज़्मिन बनाने में भी मदद करता हो। यह 'शायद' थेरेपी का अपना है और वहीं रहता है। जो बिना 'शायद' के बताया गया है, वह है मरीज़ों में देखा गया असर।

दो तरह के नतीजों ने फ़ॉर्मूले को नाम दिया — Plasmin Heparin। पहला, माहवारी में थक्के आने वाली कई महिलाओं ने बताया कि एक-दो ट्रीटमेंट के बाद अगली माहवारी में थक्के नहीं आए, और अक्सर सालों तक नहीं आए। यह हेपरिन जैसा असर है। दूसरा, दिल और लकवे के मरीज़ों ने बताया कि साँस आसान हुई और महीनों में लगातार सुधार हुआ, जिसे थेरेपी ने रुकावटें खुलना माना। यह प्लाज़्मिन जैसा असर है। किसी लैब ने किसी के ख़ून में हेपरिन नहीं नापा; नाम मरीज़ों के बताए और देखे गए असर पर टिका है।

एक माता-पिता, कई संतानें

बाक़ी हर Heparin फ़ॉर्मूला मूल फ़ॉर्मूले में एक बदलाव है: आगे एक पॉइंट जोड़ना, आख़िरी क़दम बदलना, या पैंक्रियास वाले क़दम की ताक़त बदलना। हर नाम के आगे का अक्षर बताता है कि वह किस लिए है। जो थेरेपिस्ट ये अक्षर जानता है, वह कार्ड एक नज़र में पढ़ लेता है।

फ़ॉर्मूला मरीज़ की जाँच के नतीजों से चुना जाता है, बीमारी के नाम से नहीं। एक काम का सुराग है 'लौटते दर्द' की जाँच: अगर सेशन के बाद दर्द घटे पर कुछ घंटों बाद या अगली सुबह लौट आए, तो थेरेपी इसे उस जगह थक्के का संकेत मानती है, और अगली बार सही Heparin फ़ॉर्मूला चुना जाता है। सही चुनाव, पॉइंट और तरीक़ा कोर्स में हाथों-हाथ सिखाया जाता है।

  • P — Plasmin: मूल फ़ॉर्मूला, जो तब सबको दिया जा सकता है जब कोई और संकेत न हो।
  • A — Acid: Mu° पर दर्द वाले मरीज़ के लिए, जैसे कुछ घुटने के दर्द और डायबिटीज़ वाले पैर की तकलीफ़ें।
  • G — प्रोस्टाग्लैंडिन: सूजन, और माहवारी के कुछ थक्के व दर्द।
  • J — जोड़: रात की ऐंठन, और कमज़ोरी के साथ दर्द।
  • M — Medulla: बार-बार सिरदर्द, आँख, नाक और दिमाग़ की तकलीफ़ें।
  • T और TT — Thymus: पुरानी चोट, जब घाव भर चुका हो।
  • X — दसवीं क्रेनियल नस: बार-बार पेट और पाचन की तकलीफ़।
  • F, Anti F और Multi: पुराने थक्के, फ़ाइब्रॉइड या सिस्ट जैसी अनचाही गाँठें, और कई पुरानी रुकावटें।

किडनी, जो दबाव बढ़ा देती है

गुरुजी ने P. Heparin को ब्लड-प्रेशर के निचले अंक, यानी डायस्टोलिक, के बढ़ने में भी इस्तेमाल किया। जब किडनी को कम ख़ून मिलता है, तो वह रेनिन छोड़ती है — एक रसायन जो पूरे शरीर की नलियाँ सिकोड़ देता है ताकि उसके अंदर ज़्यादा ख़ून आए। फिर पूरा शरीर बढ़े दबाव की क़ीमत चुकाता है। गुरुजी का तर्क था कि किडनी की धमनी को सँकरा करने वाला थक्का इसका एक कारण हो सकता है, और उसे खोलने से यह संकेत शांत हो सकता है। कई मरीज़ों में कुछ सेशन के बाद डायस्टोलिक अंक कम देखा गया। इस आधार पर दवा कभी बंद नहीं की जाती; यह फ़ैसला डॉक्टर का ही रहता है।

मुख्य बातें

  • ख़ून बहता रहे तो सुरक्षित है; धीमा या रुका ख़ून जमने लगता है।
  • हेपरिन, शरीर का अपना ख़ून न जमने देने वाला रसायन, ज़्यादातर लिवर और फेफड़ों के मास्ट सेल बनाते हैं — वही दो जगहें जहाँ ख़ून जान-बूझकर धीमा होता है।
  • प्लाज़्मिन बन चुके थक्के घोलता है; पैंक्रियास इसलिए शामिल है क्योंकि प्लाज़्मिन ट्रिप्सिन जैसा है — एक अनुमान, जिसे थेरेपी 'शायद' कहती है।
  • P. Heparin, Pan, Liv और Ch. Only से काम करता है: पुराने थक्के खोलना और नए रोकना।
  • बाक़ी हर Heparin फ़ॉर्मूला मूल फ़ॉर्मूले में एक बदलाव है; नाम का अक्षर उसका मक़सद बताता है।
  • जाँच के नतीजे फ़ॉर्मूला चुनते हैं — जैसे Mu° पर दर्द, या कुछ घंटे की राहत के बाद लौटता दर्द।
  • जब तक ख़ून बह रहा हो या घाव खुला हो, कोई Heparin ट्रीटमेंट नहीं दिया जाता।

इस गाइड के विषय

और गहराई से जानिए

P. Heparin (प्लाज़्मिन)

मूल फ़ॉर्मूला, पूरे विस्तार से

A. Heparin (एसिड)

Mu° पर दर्द वाले मरीज़ का Heparin

Multi Heparin

सबसे भारी सदस्य, कई पुरानी रुकावटों के लिए

थ्रॉम्बोसिस (ख़ून का थक्का)

नलियों के अंदर थक्के

लकवा और स्ट्रोक

लकवा और स्ट्रोक

Pan

पैंक्रियास का पॉइंट

लिवर (जिगर)

लिवर — शरीर का बड़ा छन्ना

सावधानी: कब नहीं दिया जाता

  • अगर अभी ख़ून बह रहा हो या कोई खुला घाव हो, तो घाव भरने तक कोई Heparin ट्रीटमेंट नहीं दिया जाता। घाव भरना
  • न रुकने वाला ख़ून — बहुत ज़्यादा माहवारी, या घंटों बहता छोटा कट — डॉक्टर से जँचवाना ज़रूरी है ताकि कारण पता चले। न्यूरोथेरेपी (LMNT) उस इलाज के साथ चलती है, उसकी जगह कभी नहीं। माहवारी की तकलीफ़ें (अनियमित, ज़्यादा या दर्द वाली)
  • अगर आप ख़ून पतला करने की दवा लेते हैं, तो थेरेपिस्ट को बताइए। दवा ठीक वैसे ही लेते रहिए; काम हल्का दिया जाता है, और कोई नया नील या ख़ून आए तो बताना ज़रूरी है।
  • Pan सामान्य रूप से दौरे या झटकों में नहीं दिया जाता — उसके अपने नियम में इसकी छूट सिर्फ़ Heparin फ़ॉर्मूले के अंदर है। स्किज़ोफ़्रेनिया में Pan कभी नहीं दिया जाता। Pan
  • लिवर कैंसर में Liv और फेफड़ों के कैंसर में Ch. Only नहीं दिया जाता। किसी भी कैंसर में (10) Pan, Thymus, Pit, Lu+Sh, Rt.Ov/Lt.Ov या (30) Medulla कभी नहीं — इसलिए (30) Medulla वाला G. Heparin कैंसर में कभी इस्तेमाल नहीं होता। कैंसर देखभाल: न्यूरोथेरेपी (LMNT) का सहारा
  • दिल की बीमारी में G. Heparin नहीं दिया जाता। जहाँ Adr जोड़ा जाता है, उसके अपने नियम भी साथ आते हैं: सेप्टीसीमिया, HIV/AIDS या कैंसर में नहीं, और हाई ब्लड प्रेशर में नहीं। ADR
  • अगर सेशन के बाद ब्लड प्रेशर घटे, तो अपनी गोलियाँ न बंद करें, न कम करें। अपनी रीडिंग लिखते रहिए और फ़ैसला अपने डॉक्टर को करने दीजिए। हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप)

गुरुजी कहते हैं

“ख़ून का यह गुण है कि जब तक वह तेज़ी से बहता रहता है, कोई ख़तरा नहीं। पर अगर वह कहीं रुक जाए, या उसकी रफ़्तार बहुत धीमी हो जाए, तो वह जमने लगेगा।”
— डॉ. लाजपतराय मेहरा — हेपरिन पर उनकी सीख से
“अगर हम लिवर और फेफड़े को उत्तेजित करें, तो हेपरिन बन सकता है, और आगे थक्के बनने से बचा जा सकता है।”
— डॉ. लाजपतराय मेहरा

आम सवाल

तकलीफ़ दिमाग़ में है, तो आप जाँघ और छाती पर क्यों दबाते हैं?

क्योंकि काम उन अंगों पर होता है जो शरीर के अपने थक्का-नियंत्रक रसायन बनाते हैं — लिवर, फेफड़े और पैंक्रियास। शरीर जो बनाता है, ख़ून उसे ज़रूरत की जगह पहुँचा देता है। जैसे नहर को खेत के बीच से नहीं, फाटक से साफ़ किया जाता है।

मेरी माहवारी में थक्के और दर्द आते हैं। सब कहते हैं यह सामान्य है।

यह आम है, पर आम का मतलब सामान्य नहीं। Heparin परिवार जिन तकलीफ़ों के लिए बना है, यह उनमें से एक है, और कई महिलाओं ने बताया कि अगले चक्र में थक्के रुक गए। फिर भी डॉक्टर से जँचवाइए, क्योंकि ज़्यादा या बदलता ख़ून जानने लायक़ कारण माँगता है।

डॉक्टर ने मुझे ख़ून पतला करने की दवा दी है। क्या मैं फिर भी यह ले सकता हूँ?

थेरेपिस्ट को ठीक-ठीक बताइए कि आप क्या लेते हैं, और लेते रहिए। काम हल्का दिया जाता है, और किसी नए नील के बारे में पूछा जाएगा। अगर कहीं से ख़ून बह रहा हो, तो इलाज उसके भरने तक रुकता है।

मेरे पिता को सालों पहले स्ट्रोक हुआ था। क्या अब देर हो चुकी है?

ज़रूरी नहीं। लकवा इस परिवार का मुख्य क्षेत्र है, और पुराने लकवे वाले मरीज़ों ने फ़ायदा बताया है। सुधार धीमा होता है और हफ़्तों में आँका जाता है, उनके डॉक्टर के इलाज और फ़िज़ियोथेरेपी के साथ।

वीडियो

Pancreas (Pan) Point का सही तरीका और Location | Self Practice - LMNT Neurotherapy Training

इसमें जाँघों के ऊपर मोड़ (ग्रोइन) पर Pan (पैंक्रियास) पॉइंट खुद को देना सिखाया गया है — 8 Pan, 2 Pan, और एक-एक मिनट के गैप से 2 Pan × 6 — गिनती के साथ ताकि हर दबाव छह सेकंड का रहे।

How to Give 1, 2, and 8 PAN Point in Neurotherapy | Practical Demo for Students - Dr. Diwakar Shukla

डॉ. दिवाकर शुक्ला का प्रैक्टिकल डेमो — कमज़ोर पैंक्रियास को सहारा देने के लिए 1, 2 और 8 Pan पॉइंट देने का सही तरीका।

How to Stimulate Pancreas Naturally? | LMNT Pan Point | Diabetes और Indigestion का जादुई इलाज

इसमें दोनों जाँघों के ऊपर मोड़ (ग्रोइन) पर Pan (पैंक्रियास) पॉइंट ढूँढना, और कुर्सियों का सहारा लेकर पैरों से 1 Pan, 2 Pan, 2 Pan × 6 और 8 Pan देना दिखाया गया है। यह डायबिटीज़ और अपच में पैंक्रियास को सहारा देने के लिए है।

ख़ुद को परखें

1. लिवर ज़्यादा हेपरिन क्यों बनाता है?

2. हेपरिन और प्लाज़्मिन में क्या फ़र्क़ है?

3. कब कोई Heparin ट्रीटमेंट नहीं दिया जाता?

शोध

  • मज़बूत प्रमाण

    मास्ट सेल पर एक समीक्षा। यह बताती है कि ये कोशिकाएँ, जो लगभग हर ऊतक में ख़ून की नलियों के पास मिलती हैं, हेपरिन और दूसरे रसायन दानों में जमा रखती हैं और ज़रूरत पड़ने पर छोड़ती हैं।

    Krystel-Whittemore M, Dileepan KN, Wood JG. Mast Cell: A Multi-Functional Master Cell. Frontiers in Immunology. 2016;6:620.

और जानिए

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यह पेज बताता है कि न्यूरोथेरेपी (LMNT) का यह ट्रीटमेंट किसलिए है; यह ख़ुद इलाज करने की गाइड नहीं है और जाँच नहीं करता। न्यूरोथेरेपी (LMNT) आपके डॉक्टरी इलाज के साथ काम करती है — डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें।

Neurotherapy.Life टीम द्वारा, डॉ. लाजपतराय मेहरा की शिक्षाओं पर आधारित

समीक्षा: डॉ. दिवाकर शुक्ला, वरिष्ठ न्यूरोथेरेपिस्ट

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