लो ब्लड प्रेशर (निम्न रक्तचाप)
लो ब्लड प्रेशर का मतलब है कि धमनियों में ख़ून का ज़ोर सामान्य से कम है — अक्सर 90/60 से नीचे। बहुत से लोगों को इससे कोई तकलीफ़ नहीं होती। यह तब मायने रखता है जब इससे चक्कर या बेहोशी आए, और सबसे ज़्यादा तब, जब यह अचानक गिरे — जैसे बहुत ज़्यादा ख़ून बहने के बाद।

- 90/60 या उससे कम की रीडिंग को आम तौर पर लो ब्लड प्रेशर कहा जाता है
- खड़े होने पर BP का गिरना 50 की उम्र में लगभग 5% लोगों में होता है — और 70 से ऊपर 30% से ज़्यादा लोगों में
- अपने आप में कम BP अक्सर नुक़सान नहीं करता; तकलीफ़ तब है जब इससे चक्कर, बेहोशी या सबसे बुरी हालत में शॉक हो
स्रोत: MedlinePlus (US National Library of Medicine); Cleveland Clinic (hypotension); NHS (low blood pressure)
लो ब्लड प्रेशर क्या है?
ब्लड प्रेशर धमनियों की दीवारों पर ख़ून का दबाव है। इसे दो अंकों में लिखा जाता है, जैसे 120/80। जब यह लगभग 90/60 से कम हो, तो इसे लो ब्लड प्रेशर या हाइपोटेंशन कहते हैं। कुछ फ़िट, स्वस्थ लोग पूरी उम्र कम रीडिंग के साथ रहते हैं और ठीक महसूस करते हैं।
इसकी दो बिल्कुल अलग तस्वीरें हैं। एक में दबाव बरसों से कम रहता है, या खड़े होते ही पल भर को गिर जाता है। दूसरी में यह अचानक गिरता है — क्योंकि शरीर से बहुत ख़ून या पानी निकल गया, या दिल की तकलीफ़ या किसी गंभीर संक्रमण से। दूसरी तस्वीर शॉक तक ले जा सकती है और यह इमरजेंसी है।
इसके लक्षण क्या हैं?
- अक्सर कोई लक्षण नहीं
- चक्कर या सिर हल्का लगना, ख़ासकर खड़े होते समय
- बेहोश हो जाना
- धुँधला दिखना, जी मिचलाना, कमज़ोरी या थकान
- उलझन, बात समझ न आना
- शॉक के संकेत: ठंडी, पसीने वाली, पीली त्वचा, तेज़ साँस और तेज़ नब्ज़
यह क्यों होता है, और किसे होने की संभावना ज़्यादा है?
खड़े होना और उम्र
- जल्दी खड़े होने पर दबाव गिरना (पोस्चरल या ऑर्थोस्टैटिक हाइपोटेंशन)
- बढ़ती उम्र — 50 और 70 के बाद यह ज़्यादा आम है
ख़ून या पानी की कमी
दिल और नसें
- अनियमित धड़कन या हार्ट फ़ेलियर
- नर्वस सिस्टम की बीमारियाँ, जो BP के नियंत्रण पर असर डालती हैं
दूसरे कारण
- कुछ दवाएँ, हाई BP की गोलियों समेत
- गर्भावस्था, शराब, और बहुत ज़्यादा गर्मी
इसका पता कैसे चलता है?
लो BP का पता नापकर ही चलता है। डॉक्टर यह भी पूछते हैं कि यह कैसे आया — सालों में धीरे-धीरे, सिर्फ़ खड़े होने पर, या अचानक — क्योंकि इसी से तय होता है कि आगे क्या जाँचना है।
BP नापने का कफ़
ऊपरी बाँह पर कफ़। रीडिंग लेटकर और फिर खड़े होने के बाद ली जा सकती है, यह देखने के लिए कि खड़े होने पर दबाव गिरता है या नहीं।
ख़ून और पेशाब की जाँच
इनसे कारण ढूँढे जाते हैं — जैसे ख़ून की कमी, पानी की कमी या शुगर की गड़बड़ी।
दिल की जाँच
ECG, और कभी-कभी टिल्ट-टेबल टेस्ट — जिसमें आपको एक टेबल पर लिटाकर उसे सीधा खड़ा किया जाता है और BP व नब्ज़ देखी जाती है।
न्यूरोथेरेपिस्ट पहले Liv° और Mu° दबाकर देखता है, फिर वह एक सवाल पूछता है जिस पर सब कुछ टिका है: BP बरसों से कम है, या अचानक गिरा — किसी दुर्घटना, गर्भपात या माहवारी में बहुत ज़्यादा ख़ून बहने के बाद? यहाँ आपकी हीमोग्लोबिन की रिपोर्ट मायने रखती है।
न्यूरोथेरेपी की नज़र से लो ब्लड प्रेशर
LMNT पद्धति में लो BP दो अलग-अलग हालतें हैं, और इनका इलाज उलटे तरीक़ों से होता है। बरसों से कम रहने वाले BP को ख़ून में पानी की कमी, या शरीर के एसिड की तरफ़ झुकाव से जोड़ा जाता है। अचानक गिरे BP को ख़ून का नुक़सान माना जाता है — और यह कि उस नुक़सान पर शरीर का अपना जवाब नहीं आया।
जब BP अचानक गिरे — गुरुजी की शिक्षा में यह कड़ी
- ख़ून निकलाचोट, दुर्घटना, गर्भपात या माहवारी में बहुत ज़्यादा ख़ून
- मात्रा घटीशरीर में ख़ून की मात्रा एकदम कम हो जाती है (हाइपोवोलीमिया)
- दिल कम ख़ून भेजता हैदिल से कम ख़ून निकलता है, और दबाव गिरता जाता है
- शरीर का जवाबएंजियोटेंसिन II छोटी धमनियों को कसता है, ताकि दबाव बना रहे
- जब जवाब न आएज़रा-सा काम करते ही चक्कर, कँपकँपी, दाँत भिंचना, बोलने की ताक़त न रहना, तापमान और नब्ज़ गिरना
एसिड–अल्कली वाला हिसाब भी यही दिखाता है: LMNT पद्धति में Mu° एसिड घटाता है और इस तरह कम BP ठीक करता है, जबकि अल्कली वह दिशा है जो दबाव बढ़ाती है। सब कुछ इस पर टिका है कि कम BP आया कैसे — “अचानक” शब्द हटा दीजिए, तो हर नियम आधे समय सही और आधे समय नुक़सानदेह हो जाता है।
ऐसा ही होना चाहिए। और यही न्यूरोथेरेपी की सफलता का राज़ है।
लो ब्लड प्रेशर का न्यूरोथेरेपी इलाज, क़दम-दर-क़दम
पहले जाँच
थेरेपिस्ट Liv° और Mu° का दर्द आँकता है, हीमोग्लोबिन और BP की रीडिंग देखता है, और पूछता है कि BP कैसे कम हुआ — बरसों में, या ख़ून बहने के बाद अचानक।
अचानक गिरा BP और ख़ून अब भी बह रहा हो: आज ही अस्पताल
ठंडी-चिपचिपी त्वचा, पीलापन, तेज़ नब्ज़, उठते ही बेहोशी, उलझन, बहुत कम पेशाब, ख़ून अब भी बहना — ऐसे व्यक्ति का इलाज चटाई पर नहीं होता। उसे आज ही ऐसी जगह ले जाया जाता है जहाँ ड्रिप और ब्लड बैंक हो।
ख़ून बहना रुकने के बाद
दुर्घटना, गर्भपात या बहुत ज़्यादा माहवारी के बाद जिसे फिर से ताक़त दी जा रही हो, उसे LMNT पद्धति सिर्फ़ Angiotensin No. 2 फ़ॉर्मूला देती है। (2) Para इस व्यक्ति को नहीं दिया जाता।
बरसों पुराना लो BP
यहाँ उलटा है: सिर्फ़ (2) Para — Vasopressin फ़ॉर्मूला — और शरीर में कमज़ोरी हो तो Multivitamin 4। Angiotensin No. 2 फ़ॉर्मूला नहीं दिया जाता।
एसिड वाली तरफ़ काम
Mu° और Acid पॉइंट, साथ में (2) Adr, और जहाँ ज़रूरत हो वहाँ पाचन (अनपचे भोजन) का काम। Acid पॉइंट तभी दिया जाता है जब Mu° पर दर्द हो, और पतले मोशन में कभी नहीं।
इस्तेमाल होने वाले पॉइंट और फ़ॉर्मूले
Angiotensin No. 2
ख़ून बहने के बाद अचानक गिरे BP के लिए, जब ख़ून बहना रुक चुका हो — गिरावट पर शरीर को जवाब देने में मदद करता है। बरसों पुराने लो BP के लिए नहीं।
इन पॉइंट्स से काम करता है
खोलें →Vasopressin फ़ॉर्मूला
(2) Para — बरसों पुराने लो BP के लिए, जो हमेशा सामान्य से नीचे रहे और व्यक्ति जल्दी थक जाए। अचानक गिरे BP के लिए नहीं।
इन पॉइंट्स से काम करता है
खोलें →Multivitamin फ़ॉर्मूला 4
शरीर में कमज़ोरी के साथ लो BP के लिए — वह इकलौता लंबा फ़ॉर्मूला जिसके भीतर (2) Para आता है।
इन पॉइंट्स से काम करता है
खोलें →यह कभी न करें
- लो BP में कभी नहीं: Ku किसी भी रूप में (इससे एसिड बढ़ता है), Gas 'I' और (30) Medulla (ये BP घटाते हैं)। (30) Medulla
- दोनों तरह कभी मिलाई नहीं जातीं: बरसों पुराना लो BP — Angiotensin No. 2 नहीं; अचानक आया लो BP — (2) Para नहीं। (2) Para
- Heparin फ़ॉर्मूले डायस्टोलिक दबाव घटाते हैं, इसलिए ये कम BP को और नीचे ले जा सकते हैं — ज़रूरत हो तो ही, सोच-समझकर। P. Heparin (प्लाज़्मिन)
- इमरजेंसी — तुरंत मदद बुलाएँ: छाती में दर्द के साथ बेहोशी; काला मल, ख़ून की उल्टी या न रुकने वाला ख़ून; उलझन या बेसुधी; तेज़ साँस के साथ ठंडी, पसीने वाली, पीली त्वचा। गर्भ की उम्र वाली महिला को पेट दर्द के साथ बेहोशी हो, तो जब तक डॉक्टर कुछ और न कहें, यह इमरजेंसी है।
- कैंसर: अगर व्यक्ति को कैंसर है, तो (10) Pan, Thymus, Pit, Lu + Sh, Rt. Ov / Lt. Ov और (30) Medulla कभी नहीं दिए जाते — थेरेपिस्ट योजना बदल देता है।
- डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें। न्यूरोथेरेपी आपके इलाज के साथ काम करती है, उसकी जगह नहीं।
वीडियो देखें
Angiotensin No. 2 फ़ॉर्मूले का प्रदर्शन — (7) Liv, (7) Mu° और (6) Lu + Sh — माहवारी में बहुत ज़्यादा ख़ून जाने के बाद अचानक गिरे BP के लिए।
वीडियो बेहोशी के समय ही यह फ़ॉर्मूला देने की बात करता है। LMNT पद्धति में जिसका ख़ून अब भी बह रहा हो, जो ठंडा, पीला हो या बेहोश हो रहा हो, उसे पहले अस्पताल ले जाया जाता है; यह फ़ॉर्मूला ख़ून बहना रुकने के बाद के लिए है। कैंसर में Lu + Sh नहीं दिया जाता।
यह वीडियो Para पॉइंट समझाता है — (2) Para और (4) Para में क्या फ़र्क है, कैल्शियम की कमी, हड्डियों के दर्द और BP के संदर्भ में।
इसमें Acid Treatment फ़ॉर्मूला क्रम से दिखाया गया है — (8) Pan, (3) Gal, (5) Mu°, दाईं जाँघ के किनारे पर 3 Acid, (4) Chest Only, और पीठ के ऊपरी हिस्से पर (6) Adr, बिना रुके। एसिड बढ़ा हो तो यह शरीर के एसिड–अल्कली संतुलन को सहारा देने के लिए दिया जाता है।
ध्यान दें: Acid Treatment फ़ॉर्मूला तभी दिया जाता है जब Mu° पॉइंट दुखता हो, और हाई BP, डायबिटीज़, कैंसर या HIV में (6) Adr नहीं दिया जाता — थेरेपिस्ट पहले जाँच करता है।
भारी ख़ून बहने के बाद लो BP के लिए Angiotensin No. 2 फ़ॉर्मूला, (2) Para और (4) Para का फ़र्क, और Acid Treatment फ़ॉर्मूला। ख़ून बहने से बेहोशी इमरजेंसी है — पहले अस्पताल; फ़ॉर्मूला ख़ून रुकने के बाद के लिए है।
आयुर्वेद और रसोई से
ख़ुद को परखें
शोध क्या कहता है
- मज़बूत प्रमाण
विशेषज्ञों की सहमति, जो खड़े होने पर BP गिरने, और शरीर के दबाव वाले रिफ़्लेक्स से होने वाली बेहोशी की मानक परिभाषाएँ तय करती है — वही परिभाषाएँ जिनसे डॉक्टर लेटकर और खड़े होकर ली गई रीडिंग परखते हैं।
- मज़बूत प्रमाण
जब किडनी तक ख़ून का बहाव घटता है, तो शरीर एंजियोटेंसिन II बनाता है। यह छोटी धमनियों को कसता है, नमक और पानी रोकने के लिए एल्डोस्टेरोन छुड़वाता है, और वैसोप्रेसिन छुड़वाता है — गिरे हुए दबाव को उठाने का शरीर का अपना तरीक़ा, वही तंत्र जिसकी बात LMNT पद्धति अचानक गिरे BP में करती है।
लो ब्लड प्रेशर में न्यूरोथेरेपी का कोई क्लिनिकल ट्रायल अभी तक प्रकाशित नहीं हुआ है। न्यूरोथेरेपिस्ट जो सुधार बताते हैं, वे क्लिनिकल अवलोकन हैं।
आपके लिए
अगर खड़े होते ही चक्कर आए
धीरे उठें — पहले लेटे से बैठें, फिर खड़े हों। दिन भर पर्याप्त पानी पिएँ। चक्कर या बेहोशी बार-बार हो, तो डॉक्टर को दिखाएँ।
जिन महिलाओं की माहवारी बहुत भारी है
माहवारी के बाद कई दिन चक्कर आना कम हीमोग्लोबिन का संकेत हो सकता है। ख़ून की जाँच करवाएँ, और थेरेपिस्ट को बताएँ कि ख़ून कितना ज़्यादा जाता है।
BP की गोली लेने वाले और बुज़ुर्ग
BP की गोलियाँ और कुछ दूसरी दवाएँ दबाव को ज़रूरत से ज़्यादा घटा सकती हैं, और 70 के बाद खड़े होते समय गिरना ज़्यादा आम है। डॉक्टर को बताएँ — ख़ुद कभी ख़ुराक न बदलें।
यह पेज समझाता है, जाँच नहीं करता। न्यूरोथेरेपी आपके डॉक्टरी इलाज के साथ काम करती है — डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें, और कोई नया या गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर को दिखाएँ।