चक्कर आना (वर्टिगो)
वर्टिगो वह एहसास है कि आप या कमरा घूम रहा है, जबकि कुछ भी नहीं हिल रहा। यह ज़्यादातर अंदरूनी कान के संतुलन वाले अंग से आता है, और अक्सर इसके साथ जी मिचलाना और लड़खड़ाहट होती है।

- BPPV — अंदरूनी कान में छोटे कणों की गड़बड़ी — वर्टिगो का सबसे आम कारण है
- लगभग 2.4% लोगों को जीवन में कभी न कभी BPPV होता है; एक दौर आम तौर पर लगभग 2 हफ़्ते चलता है
- मेनियर की बीमारी में घूमने के दौरे कुछ मिनटों से 24 घंटे तक चलते हैं
स्रोत: MedlinePlus (Dizziness and Vertigo); von Brevern et al., J Neurol Neurosurg Psychiatry 2007; NHS (Ménière's disease)
चक्कर आना क्या है?
“चक्कर” के कई मतलब हो सकते हैं। डिज़ीनेस यानी सिर हल्का लगना, बेचैनी या लड़खड़ाहट। वर्टिगो ज़्यादा ख़ास है: यह झूठा एहसास कि आप या कमरा घूम रहा है।
संतुलन आँखों, शरीर की अपनी स्थिति की समझ, और अंदरूनी कान के संतुलन वाले अंग से मिलकर बनता है। जब अंदरूनी कान दिमाग़ को ग़लत संदेश भेजता है — ढीले कण (BPPV), ज़्यादा तरल (मेनियर की बीमारी) या सूजी हुई नस — तो दुनिया घूमती लगती है। कभी-कभी कारण ख़ुद दिमाग़ में होता है, और वह इमरजेंसी हो सकती है।
इसके लक्षण क्या हैं?
- घूमने का एहसास — आप या कमरा घूम रहा है
- लड़खड़ाहट और संतुलन बनाए रखने में दिक़्क़त
- जी मिचलाना, उल्टी और पसीना
- सिर घुमाने, लेटने या उठने पर शुरू होने वाले दौरे
- एक कान में घंटी-सी आवाज़, भारीपन या कम सुनाई देना
- दौरे के समय आँखों का झटके से हिलना
यह क्यों होता है, और किसे होने की संभावना ज़्यादा है?
अंदरूनी कान
- BPPV — संतुलन की नलियों में ढीले कण
- मेनियर की बीमारी — अंदरूनी कान में ज़्यादा तरल
- अंदरूनी कान या उसकी नस की सूजन, अक्सर किसी वायरल बीमारी के बाद
ब्लड प्रेशर और ख़ून
दिमाग़ और नसें
दवाएँ
- कुछ दवाओं के साइड इफ़ेक्ट — कई दवाएँ लेने वाले बुज़ुर्गों में ज़्यादा
इसका पता कैसे चलता है?
डॉक्टर पूछते हैं कि चक्कर कैसा लगता है, कब आता है, कितनी देर रहता है और आप कौन-सी दवाएँ लेते हैं, फिर आपका संतुलन, आँखें और सुनने की शक्ति जाँचते हैं।
बिस्तर के पास संतुलन और आँखों की जाँच
आँखें बंद करके खड़े होना, एक जगह क़दमताल करना, और सिर हिलाते समय आँखों को देखना — इनसे पता चलता है कि गड़बड़ी कान में है या दिमाग़ में।
सुनने की जाँच
ख़ास तौर पर जब एक कान में घंटी-सी आवाज़ या भारीपन हो, जैसे मेनियर की बीमारी में।
लेटकर और खड़े होकर ब्लड प्रेशर
दिखाता है कि खड़े होने पर प्रेशर गिरता है या नहीं।
MRI या CT स्कैन
तब किया जाता है जब स्ट्रोक, सिर की चोट या दिमाग़ से जुड़े किसी और कारण का शक हो।
न्यूरोथेरेपिस्ट इलाज से पहले चक्कर की छँटाई करता है। घूमना है, या बेहोशी-सा लगना? सिर्फ़ उठते समय, या पैरों की लड़खड़ाहट के साथ? भारी माहवारी के बाद? कई दवाएँ चल रही हैं? कोई भी ख़तरे का संकेत हो तो सेशन वहीं ख़त्म और मरीज़ को आगे भेजा जाता है। फिर LMNT पूछती है कि कान का तरल किस तरफ़ गया है।
न्यूरोथेरेपी की नज़र से चक्कर आना
LMNT कान के अंदर के तरल के हिसाब से दो तरह के चक्कर बताती है। जब तरल बढ़ता है, तो उस चक्कर को मेनियर की बीमारी कहा जाता है, और Down Arrow — रीढ़ पर नीचे की ओर हथेली का खिंचाव — दिया जाता है। जब तरल घटता है, तो उसे वर्टिगो कहा जाता है, और Up Arrow — वही पट्टी ऊपर की ओर — दी जाती है। एक ही खिंचाव, दो दिशाओं में, दो उलटी हालतों के लिए।
(8) Medulla आठवीं कपाल-नस के ज़रिए काम करता है, जो अर्धवृत्ताकार नलियों से संतुलन का संदेश ले जाती है; LMNT इसे वर्टिगो में और उसके साथ होने वाले जी मिचलाने और उल्टी में देती है। जिन्हें ऊँची इमारतों, बसों या हवाई जहाज़ में चक्कर आते हैं, उन्हें Pit दिया जाता है, और उसके बाद (4) Up Arrow। और हर चक्कर कान का नहीं होता: बहुत भारी माहवारी के बाद कँपकँपी के साथ चक्कर गिरा हुआ ब्लड प्रेशर है, और उसका इलाज उसी रूप में होता है।
न्यूरोथेरेपी शरीर की हालत के अनुसार इलाज करती है।
चक्कर आना का न्यूरोथेरेपी इलाज, क़दम-दर-क़दम
पहले चक्कर की छँटाई
सबसे पहले ख़तरे के संकेत पूछे जाते हैं। फिर: घूमना या कमज़ोरी-सा चक्कर, सिर्फ़ उठते समय या लड़खड़ाहट के साथ, भारी माहवारी, दवाएँ — और ज़रूरत हो तो लेटकर और खड़े होकर ब्लड प्रेशर।
संतुलन की नस के लिए (8) Medulla
अर्धवृत्ताकार नलियों से आने वाले वर्टिगो में, और उससे होने वाले जी मिचलाने और उल्टी में दिया जाता है।
जब तरल घटा हो — वर्टिगो
Up Arrow: हथेली कमर के सबसे निचले हिस्से (L5) से गर्दन के नीचे (T1) तक मज़बूती से ऊपर फिसलती है — हमेशा मरीज़ को लिटाकर। ऊँची इमारतों, बसों या हवाई जहाज़ में आने वाले चक्कर में: Pit, फिर (4) Up Arrow।
जब तरल बढ़ा हो — मेनियर
पहले (8) Thymus + Chest, और उसके बाद (4) Down Arrow — क्रम ही हिदायत है। Down Arrow गर्दन के नीचे से कमर के सबसे निचले हिस्से तक, हल्के दबाव से चलता है।
उठना और नहाना
जागने पर करवट लेकर उठें और खड़े होने से पहले कम से कम तीस सेकंड बिस्तर के किनारे बैठें — सुबह, दोपहर और रात। नहाते समय पहले सिर पर पानी डालें और कानों को धार से बचाएँ। कानों में कुछ भी न डालें।
इस्तेमाल होने वाले पॉइंट और फ़ॉर्मूले
यह कभी न करें
- अचानक चक्कर के साथ दो-दो दिखना, अटकती बोली, कमज़ोरी, चेहरा लटकना, लड़खड़ाकर चलना, या बहुत तेज़ या ज़िंदगी का सबसे बुरा सिरदर्द — यह इमरजेंसी है, 108 / 112 पर फ़ोन करें। गर्दन पर किसी भी तरह का दबाव नहीं। गर्दन
- एक कान में अचानक सुनाई कम होना, या नई घंटी-सी आवाज़ जो न जाए — जल्दी कान के विशेषज्ञ को दिखाएँ। कान की नली में कुछ भी नहीं डाला जाता, और जिस कान से पानी या मवाद आ रहा हो, चोट लगी हो या पर्दे में छेद का शक हो, उसमें कुछ भी नहीं डाला जाता।
- डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर, कैंसर या दौरों में Pit नहीं दिया जाता। Up Arrow सिर्फ़ लिटाकर दिया जाता है। आम तौर पर (4) Down Arrow से ज़्यादा नहीं, और Thymus + Chest की अपनी सारी रोकें लागू रहती हैं। Pit
- बहुत भारी माहवारी के बाद कँपकँपी और भिंचे दाँतों के साथ चक्कर गिरा हुआ ब्लड प्रेशर है, कान की समस्या नहीं। जो भारी ख़ून अभी भी बह रहा हो, उसके लिए अस्पताल ज़रूरी है। लो BP, अचानक
- चक्कर वाले व्यक्ति को वहीं बैठाएँ या लिटाएँ जहाँ वह है, और किसी को साथ रखकर धीरे-धीरे उठाएँ — असली चोट गिरने से लगती है। बार-बार लौटने वाले चक्कर के लिए डॉक्टर से जाँच करवाएँ।
- कैंसर: अगर व्यक्ति को कैंसर है, तो (10) Pan, Thymus, Pit, Lu + Sh, Rt. Ov / Lt. Ov और (30) Medulla कभी नहीं दिए जाते — थेरेपिस्ट योजना बदल देता है।
- डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें। न्यूरोथेरेपी आपके इलाज के साथ काम करती है, उसकी जगह नहीं।
अभ्यास से
वह आदमी जिसका सिर खड़े होते ही घूम जाता था
सिखाने के लिए केस — अभ्यास से जोड़ा गया, किसी एक मरीज़ की फ़ाइल नहीं
68 साल · रिटायर्ड रेलवे क्लर्क · तीन साल से दोनों कानों में कम सुनाई देना, और बिस्तर से उठते ही चक्कर
- क्या मिला
- चक्कर सिर्फ़ खड़े होने के पहले कुछ सेकंड आता था, उठ जाने के बाद वह स्थिर रहता था। कान के विशेषज्ञ के पर्चे में दो बार मैल और सही-सलामत पर्दा दर्ज था। उठने का तरीक़ा पूछने पर उसने बताया: आँख खोलने से फ़र्श पर खड़े होने तक लगभग एक सेकंड। नहाते समय वह पहला मग गर्दन पर डालता था।
- क्या किया गया
- पहले सेशन से पहले दो बातें बदली गईं, कारण ज़ोर से बताकर: हर बार खड़े होने से पहले तीस सेकंड बिस्तर के किनारे बैठना; और नहाते समय पहले सिर पर पानी डालना, कानों को धार से बचाकर। कान साफ़ करना और कान में तेल डालना बंद किया गया। चार दिन के अंदर चक्कर चले गए; तीसरे हफ़्ते में सुनने में बदलाव आने लगा।
- इससे सीख
- पाँचवें हफ़्ते में बेटे ने उसे केमिस्ट से कान की दवा ला दी। यह तभी पता चला जब उससे पूछा गया, “इस हफ़्ते आपने अपने शरीर में या शरीर पर क्या-क्या लगाया या डाला?” — यह सवाल हर मरीज़ से, हर हफ़्ते। पॉइंट चुनने से पहले पूछें कि व्यक्ति उठता और नहाता कैसे है।
आयुर्वेद और रसोई से
नाम से पहले की कड़ी
शास्त्रीय भारतीय चिकित्सा बीमारी के नाम से शुरू नहीं करती थी। वह एक कड़ी खोजती थी: तकलीफ़ किस रास्ते आई, पहले क्या बिगाड़ा, कहाँ तक फैली और कहाँ जाकर बैठी। शुरुआती कड़ियों पर ही बीमारी को मोड़ा जा सकता है — इसीलिए चक्कर को उसके नाम से नहीं, उसके कारण से छाँटा जाता है।
ख़ुद को परखें
शोध क्या कहता है
- मज़बूत प्रमाण
जर्मनी में एक बड़े जनसंख्या अध्ययन में पाया गया कि लगभग 2.4% लोगों को जीवन में कभी न कभी BPPV होता है। ज़्यादातर लोग डॉक्टर के पास गए, पर बहुत कम को वह सीधा सिर घुमाने वाला इलाज मिला जो इसमें काम करता है — इसलिए वर्टिगो का कारण जानना ज़रूरी है।
वर्टिगो या मेनियर की बीमारी में न्यूरोथेरेपी का कोई क्लिनिकल ट्रायल अभी तक प्रकाशित नहीं हुआ है। न्यूरोथेरेपिस्ट जो सुधार बताते हैं, वे क्लिनिकल अवलोकन हैं।
आपके लिए
कई दवाएँ लेने वाले बुज़ुर्ग
नया चक्कर अक्सर दवाओं या ब्लड प्रेशर की वजह से होता है। डॉक्टर को दिखाएँ और लेटकर व खड़े होकर ब्लड प्रेशर नपवाएँ; कोई भी दवा ख़ुद से बंद न करें।
भारी माहवारी वाली महिलाएँ
हर महीने ख़ून जाने से चक्कर और थकान हो सकती है। ख़ून की एक आसान हीमोग्लोबिन जाँच बहुत कुछ बता देती है — और बहुत भारी माहवारी हो तो स्त्री-रोग विशेषज्ञ से जाँच करवाना ठीक है।
डायबिटीज़ वाले लोग
पसीने और कँपकँपी के साथ चक्कर, ख़ास तौर पर ख़ाली पेट, शुगर कम होने की वजह से हो सकता है — तुरंत कुछ मीठा लें और डॉक्टर को बताएँ।
यह पेज समझाता है, जाँच नहीं करता। न्यूरोथेरेपी आपके डॉक्टरी इलाज के साथ काम करती है — डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें, और कोई नया या गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर को दिखाएँ।