किडनी की बीमारी (गुर्दे का रोग)
किडनी की बीमारी का मतलब है कि किडनी ख़ून को उतनी अच्छी तरह साफ़ नहीं कर पा रही, जितना उसे करना चाहिए। यह आम तौर पर धीरे-धीरे और चुपचाप आती है, अक्सर डायबिटीज़ या हाई BP के साथ, और कुछ लोगों में आगे चलकर किडनी फ़ेलियर तक पहुँच जाती है।

- अमेरिका में 10 में से 1 से ज़्यादा (14%) वयस्कों को क्रॉनिक किडनी डिज़ीज़ होने का अनुमान है — और इनमें से लगभग 10 में से 9 को इसका पता ही नहीं
- दुनिया भर में लगभग 13% लोगों को किसी न किसी चरण की क्रॉनिक किडनी डिज़ीज़ है
- क्रॉनिक किडनी डिज़ीज़ सिर्फ़ लगभग 100 में से 2 लोगों में किडनी फ़ेलियर तक पहुँचती है
स्रोत: US Centers for Disease Control and Prevention (CKD in the US); Hill NR et al., PLoS One 2016 (global review); NHS (chronic kidney disease)
किडनी की बीमारी क्या है?
आपकी दो किडनी हैं, हर एक लगभग मुट्ठी जितनी। हर किडनी के अंदर लगभग दस लाख बारीक छलनियाँ हैं, जो ख़ून साफ़ करती हैं। ये यूरिया और क्रिएटिनिन जैसा कचरा और फ़ालतू पानी निकालती हैं, जो पेशाब बनकर बाहर जाता है। ये BP को क़ाबू में रखने और लाल रक्त कोशिकाएँ बनवाने में भी मदद करती हैं।
किडनी की बीमारी में ये छलनियाँ ख़राब हो जाती हैं। क्रॉनिक किडनी डिज़ीज़ सालों में बढ़ती है; एक्यूट किडनी इंजरी अचानक आती है, अक्सर पानी की कमी, ख़ून बहने या संक्रमण के साथ। जब किडनी लगभग पूरी तरह काम करना बंद कर दें, तो डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की ज़रूरत पड़ती है।
इसके लक्षण क्या हैं?
- शुरुआत में आम तौर पर कोई लक्षण नहीं — सिर्फ़ ख़ून और पेशाब की जाँच से पता चलता है
- थकान और कमज़ोरी
- टख़ने, पैर या हाथ सूजना
- साँस फूलना और जी मिचलाना
- सामान्य से कम पेशाब, या पेशाब में ख़ून
यह क्यों होता है, और किसे होने की संभावना ज़्यादा है?
लंबी बीमारियाँ
किडनी की अपनी तकलीफ़ें
- किडनी की छलनियों में सूजन (ग्लोमेरुलोनेफ़्राइटिस) और किडनी का संक्रमण
- परिवार में चलने वाली सिस्ट (पॉलीसिस्टिक किडनी डिज़ीज़)
- पेशाब के बहाव में रुकावट, जैसे पथरी
किडनी पर अचानक बोझ
- पानी की कमी — जैसे उल्टी या पतले मोशन से
- ख़ून बहना या गंभीर संक्रमण
दवाएँ और जोखिम
- कुछ दवाओं का लंबे समय तक इस्तेमाल, कुछ दर्द-निवारकों समेत
- परिवार में किडनी की बीमारी, और 65 से ज़्यादा उम्र
इसका पता कैसे चलता है?
क्योंकि शुरुआती किडनी की बीमारी चुपचाप रहती है, इसका पता साधारण जाँचों से चलता है — ख़ासकर डायबिटीज़ या हाई BP वालों में। नतीजों से चरण भी पता चलता है, यानी किडनी का कितना काम बचा है।
ख़ून की जाँच — क्रिएटिनिन और eGFR
क्रिएटिनिन वह कचरा है जिसे किडनी निकालती हैं। इससे लैब अंदाज़ा लगाती है कि किडनी कितनी अच्छी तरह छान रही हैं (eGFR)। eGFR घटे, तो फ़िल्टर कम साफ़ कर रहा है।
पेशाब की जाँच
देखती है कि पेशाब में प्रोटीन (एल्ब्यूमिन) या ख़ून तो नहीं आ रहा — ख़राब छलनियों का शुरुआती संकेत।
ख़ून की गिनती, BP और स्कैन
हीमोग्लोबिन की जाँच (किडनी की बीमारी से ख़ून की कमी हो सकती है), BP नापना, और कभी-कभी किडनी का अल्ट्रासाउंड।
LMNT पद्धति में किडनी फ़ंक्शन की रिपोर्ट किसी आम फ़ाइल का वह एक पन्ना है, जिसकी वजह से थेरेपिस्ट कोई ट्रीटमेंट रोक सकता है। पिछली रिपोर्ट से बढ़ा हुआ क्रिएटिनिन, या किडनी फ़ेलियर की पहली रिपोर्ट जो अब तक किसी डॉक्टर को नहीं दिखाई गई — ये आज ही डॉक्टर के पास जाती हैं, और तब किडनी वाले पॉइंट रोक दिए जाते हैं।
न्यूरोथेरेपी की नज़र से किडनी की बीमारी
LMNT पद्धति किडनी को पीठ के दो पॉइंट से पढ़ती है: दाईं किडनी के लिए Liv° और बाईं के लिए Mu°। ये कोड नाम इसलिए रखे गए कि घबराए हुए मरीज़ के सामने “किडनी” शब्द बोलना न पड़े। किडनी की ज़्यादातर बीमारियों को ऑटो-इम्यून माना जाता है, इसलिए इम्यूनिटी वाले पॉइंट रोक दिए जाते हैं।
कचरा क्यों जमा होता है — LMNT पद्धति में यह कड़ी
- किडनी के अंदर कम ख़ूनकिडनी से होकर बहने वाला ख़ून ज़रूरत से कम हो जाता है
- छलनी साफ़ नहीं करतीकिडनी ख़ून को ठीक से छान नहीं पातीं
- कचरा जमा होता हैयूरिया और क्रिएटिनिन ख़ून में जमा होकर शरीर को नुक़सान पहुँचाते हैं
- कम लाल कोशिकाएँकिडनी कम एरिथ्रोपॉइटिन बनाती हैं — नई लाल रक्त कोशिकाओं का संकेत
किडनी फ़ेलियर में LMNT पद्धति थकी हुई किडनी से ज़बरदस्ती और काम नहीं करवाती: किडनी के पॉइंट Liv° और Mu° रोक दिए जाते हैं। उनकी जगह लिवर का पॉइंट Liv दिया जाता है, एरिथ्रोपॉइटिन के लिए, ताकि लाल कोशिकाओं की गिनती बहुत न गिरे — दोनों में फ़र्क बस एक छोटे-से गोले का है।
रोगी को हमारे इलाज से तुरंत फ़ायदा हो या न हो, हमारी लापरवाही से उसे कोई नुक़सान न पहुँचे — इसका ध्यान रखिए।
किडनी की बीमारी का न्यूरोथेरेपी इलाज, क़दम-दर-क़दम
पहले जाँच — और किडनी की रिपोर्ट पढ़ना
थेरेपिस्ट Liv° और Mu° का दर्द आँकता है, फिर क्रिएटिनिन, यूरिया और हीमोग्लोबिन पढ़ता है, और हर गोली, और किडनी के डॉक्टर ने खाने-पीने की जो सीमा बताई है, उसके बारे में पूछता है।
किडनी की तकलीफ़ें — फ़ेलियर के बिना
LMNT पद्धति (2) Pan, (6) Adr, (1) point Liv × 6 ट्रीटमेंट, P. Heparin और T8 देती है। Kidney Clear या Ulta Kidney Clear उस हल्के दर्जे पर जोड़े जा सकते हैं जो शरीर सह ले — पर किडनी फ़ेल हो रही हो, तब कभी नहीं।
किडनी फ़ेलियर — पेशाब बढ़ाने के लिए
किडनी फ़ेलियर, यूरीमिया और नेफ़्रोटिक सिंड्रोम में पेशाब बढ़ाने के लिए (2) Pan दिया जाता है। जहाँ (2) Pan से फ़ायदा न हुआ हो, वहाँ (10) Pan — जिस पर गुरुजी ने अपना सवालिया निशान लगाया, यानी इस पर अभी रिसर्च होनी है।
किडनी फ़ेलियर — ख़ून के लिए
किडनी वाले पॉइंट रोक दिए जाते हैं, और एरिथ्रोपॉइटिन के लिए लिवर का पॉइंट Liv दिया जाता है, ताकि लाल कोशिकाओं की गिनती बहुत न गिरे।
क्या हटा लिया गया
Chole ट्रीटमेंट और (10) Medulla ने कुछ किडनी-फ़ेलियर रोगियों में क्रिएटिनिन और शुगर घटाई, और कुछ में उलटा असर किया। नतीजा दोनों तरफ़ गया, इसलिए इन्हें उम्मीद के भरोसे देने के बजाय सब रोगियों से हटा लिया गया।
इस्तेमाल होने वाले पॉइंट और फ़ॉर्मूले
P. Heparin (प्लाज़्मिन)
Heparin परिवार का मूल फ़ॉर्मूला, जो सब रोगियों को दिया जा सकता है — किडनी की तकलीफ़ों में रक्त संचार को सहारा देने के लिए।
इन पॉइंट्स से काम करता है
खोलें →यह कभी न करें
- किडनी की तकलीफ़ों में कभी नहीं: Th, Th + Ch, Spl, Lymph, Armpits, Ton 'P' और Ton 'T' — किडनी की ज़्यादातर बीमारियाँ ऑटो-इम्यून होती हैं। चोट लगी हो, तो Th + Ch की जगह (8) Ch. Only के साथ (20) Round Arrow दिया जाता है। Th + Ch
- किडनी फ़ेलियर या किडनी के कैंसर में Liv° और Mu° को कभी उत्तेजित नहीं किया जाता — इसलिए Kidney Clear नहीं दिया जाता। किडनी फ़ेलियर में Chole ट्रीटमेंट और (10) Medulla नहीं दिए जाते। Liv°
- BP हाई हो, तो (6) Adr नहीं दिया जाता। (2) Pan ठीक छह सेकंड दिया जाता है, और क़द के लिए इलाज करा रहे बच्चों को नहीं दिया जाता। (6) Adr
- इनमें उसी दिन अस्पताल जाएँ: बहुत कम या बिल्कुल पेशाब न होना; साँस फूलना; सूजन के साथ उलझन या बेसुधी; पेशाब में ख़ून; या पिछली रिपोर्ट से बढ़ा हुआ क्रिएटिनिन।
- डायलिसिस कभी बंद न करें, न छोड़ें; और किडनी की दवाएँ कभी बंद न करें, न ही किडनी के डॉक्टर की बताई पानी और खाने की सीमा बदलें।
- कैंसर: अगर व्यक्ति को कैंसर है, तो (10) Pan, Thymus, Pit, Lu + Sh, Rt. Ov / Lt. Ov और (30) Medulla कभी नहीं दिए जाते — थेरेपिस्ट योजना बदल देता है।
- डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें। न्यूरोथेरेपी आपके इलाज के साथ काम करती है, उसकी जगह नहीं।
वीडियो देखें
इसमें P. Heparin फ़ॉर्मूला दिखाया गया है — जाँघों के ऊपर (8) Pan, जाँघ और बाँह पर (7) Liv, और छाती पर हथेलियाँ रखकर (8) Chest Only। वीडियो में इसे Angina ट्रीटमेंट के आख़िरी हिस्से के रूप में, रक्त संचार को सहारा देने के लिए दिया गया है।
इसमें जाँघों के ऊपर मोड़ (ग्रोइन) पर Pan (पैंक्रियास) पॉइंट खुद को देना सिखाया गया है — 8 Pan, 2 Pan, और एक-एक मिनट के गैप से 2 Pan × 6 — गिनती के साथ ताकि हर दबाव छह सेकंड का रहे।
P. Heparin कैसे दिया जाता है, और Pan पॉइंट — (2) Pan समेत — कैसे ढूँढा और दबाया जाता है। किडनी फ़ेलियर में किडनी वाले पॉइंट Liv° और Mu° नहीं दिए जाते।
आयुर्वेद और रसोई से
ख़ुद को परखें
शोध क्या कहता है
- मज़बूत प्रमाण
दुनिया भर के अध्ययनों को मिलाकर देखा गया कि लगभग 13.4% लोगों को किसी न किसी चरण की क्रॉनिक किडनी डिज़ीज़ है, और लगभग 10.6% को आगे के चरण 3 से 5 — ज़्यादातर बिना किसी लक्षण के।
- मज़बूत प्रमाण
किडनी एरिथ्रोपॉइटिन बनाती हैं — वह हार्मोन जो बोन मैरो को लाल रक्त कोशिकाएँ बनाने को कहता है। किडनी ख़राब हो, तो यह बहुत कम बनता है — इसलिए किडनी की बीमारी में ख़ून की कमी आम है, और डायलिसिस तक पहुँचने वाले कम से कम 90% लोगों को यह हो जाती है। LMNT पद्धति में एरिथ्रोपॉइटिन वाली बात इसी कड़ी पर टिकी है।
किडनी की बीमारी में न्यूरोथेरेपी का कोई क्लिनिकल ट्रायल अभी तक प्रकाशित नहीं हुआ है। न्यूरोथेरेपिस्ट जो सुधार बताते हैं, वे क्लिनिकल अवलोकन हैं।
आपके लिए
डायबिटीज़ या हाई BP वाले
किडनी की बीमारी के ये दो सबसे आम कारण हैं। अच्छा महसूस करें तब भी, डॉक्टर से साल में एक बार ख़ून (क्रिएटिनिन, eGFR) और पेशाब की जाँच करवाने को कहें।
डायलिसिस वाले
न्यूरोथेरेपी डायलिसिस के साथ दी जा सकती है, उसकी जगह कभी नहीं। हर बार अपनी ताज़ा रिपोर्ट साथ लाएँ, और किडनी के डॉक्टर की बताई पानी और खाने की सीमा का पालन करें।
पतले मोशन, उल्टी या गर्मी में
पानी की कमी किडनी पर अचानक बोझ डाल सकती है। पीते रहें, और अगर पेशाब सामान्य से बहुत कम हो रहा हो, तो जल्दी डॉक्टर को दिखाएँ।
यह पेज समझाता है, जाँच नहीं करता। न्यूरोथेरेपी आपके डॉक्टरी इलाज के साथ काम करती है — डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें, और कोई नया या गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर को दिखाएँ।