लकवा और स्ट्रोक
स्ट्रोक तब होता है जब दिमाग़ के किसी हिस्से तक ख़ून पहुँचना बंद हो जाता है — कोई थक्का नली बंद कर देता है, या नली फट जाती है। इससे शरीर का एक तरफ़ का हिस्सा कमज़ोर या लकवाग्रस्त हो सकता है। स्ट्रोक इमरजेंसी है; न्यूरोथेरेपी बाद में आती है — स्ट्रोक का इलाज करने वाली टीम के साथ, रिकवरी को सहारा देने के लिए।

- दुनिया में हर साल लगभग 1.19 करोड़ लोगों को नया स्ट्रोक होता है (2021)
- लगभग 80% स्ट्रोक थक्के से होते हैं; बाक़ी ख़ून बहने से
- हर 4 में से 1 वयस्क को जीवन में स्ट्रोक होने का अनुमान है; हाई ब्लड प्रेशर से ख़तरा लगभग तीन गुना हो जाता है
- बिना इलाज के स्ट्रोक में हर मिनट लगभग 19 लाख दिमाग़ी कोशिकाएँ नष्ट होती हैं
स्रोत: World Health Organization (Stroke fact sheet); MedlinePlus (Stroke); Saver, Stroke 2006
लकवा और स्ट्रोक क्या है?
दिमाग़ को ऑक्सीजन और पोषण के लिए लगातार ख़ून चाहिए। स्ट्रोक में दिमाग़ के किसी एक हिस्से की यह सप्लाई कट जाती है — ज़्यादातर किसी थक्के से, कभी-कभी नली फटने से। कुछ ही मिनटों में वहाँ की दिमाग़ी कोशिकाएँ मरने लगती हैं।
दिमाग़ का हर हिस्सा शरीर के उलटे हिस्से को चलाता है, इसलिए बाईं तरफ़ का स्ट्रोक दाएँ हाथ-पैर को लकवाग्रस्त कर सकता है और अक्सर बोली पर असर डालता है। “छोटा स्ट्रोक” (TIA) कुछ मिनटों या घंटों में ठीक हो जाता है, पर यह चेतावनी है कि बड़ा स्ट्रोक आ सकता है। लकवा सिर की चोट, चोट के बाद अंदर जमा ख़ून, या नसों की बीमारी से भी हो सकता है।
इसके लक्षण क्या हैं?
- अचानक चेहरे का एक तरफ़ लटक जाना या सुन्न होना
- अचानक हाथ या पैर में कमज़ोरी या सुन्नपन, आम तौर पर एक तरफ़
- अटकती बोली, शब्द न मिलना या बात न समझ पाना
- अचानक नज़र चली जाना या धुँधली हो जाना
- अचानक संतुलन बिगड़ना, चक्कर या बहुत तेज़ सिरदर्द
- बाद में: एक तरफ़ का कमज़ोर, अकड़ा या मुड़ा हुआ हाथ या पैर
यह क्यों होता है, और किसे होने की संभावना ज़्यादा है?
थक्का (इस्कीमिक स्ट्रोक)
ख़ून बहना (हेमरेजिक स्ट्रोक)
- हाई BP से कमज़ोर नली का फटना
- चोट के बाद सिर के अंदर ख़ून जमना
आदतें और उम्र
- धूम्रपान, ज़्यादा नमक, शराब और कम शारीरिक मेहनत
- बढ़ती उम्र और परिवार में स्ट्रोक का इतिहास
लकवे के दूसरे कारण
इसका पता कैसे चलता है?
स्ट्रोक की पहचान अस्पताल में, तेज़ी से होती है। स्कैन से पता चलता है कि यह थक्का है या ख़ून बहना — और इसी से इमरजेंसी इलाज तय होता है।
सिर का CT या MRI स्कैन
थक्का या ख़ून बहना दिखाता है, और यह कि दिमाग़ का कौन-सा हिस्सा प्रभावित है।
दिल की जाँच (ECG, इको)
दिल की धड़कन की गड़बड़ी या दिल में थक्के का स्रोत देखती हैं।
ब्लड प्रेशर और ख़ून की जाँच
शुगर, कोलेस्ट्रॉल और थक्का बनने की जाँच — वे ख़तरे जिन्हें दूसरे स्ट्रोक से बचने के लिए क़ाबू में रखना ज़रूरी है।
स्ट्रोक के बाद जब कोई न्यूरोथेरेपिस्ट के पास आता है, तो पहले सवाल होते हैं: यह कब हुआ, और क्या न्यूरोलॉजिस्ट का लिखा पत्र है? पत्र बताता है कि दिमाग़ का कौन-सा हिस्सा प्रभावित हुआ और ख़ून पतला करने वाली दवा चल रही है या नहीं — इतने से ही कुछ पॉइंट बाहर हो जाते हैं। लकवे का कोई भी ट्रीटमेंट देने से पहले दोनों पिंडलियों का तापमान और नाप मिलाया जाता है।
न्यूरोथेरेपी की नज़र से लकवा और स्ट्रोक
LMNT पद्धति थक्के के बाद के लकवे को ऐसे ख़ून की समस्या मानती है जो चलना बंद कर चुका है। उसका Heparin फ़ॉर्मूला परिवार शरीर के अपने उस रसायन को जगाने के लिए बना है जो ख़ून को जमने से रोकता है और पुराने थक्के खोलता है — heparin और plasmin। यह व्याख्या LMNT अपने शब्दों में “शायद” के साथ देती है; जो दर्ज है, वह है मरीज़ों का बताया अनुभव।
रसायन के साथ शरीर पर काम भी होता है: हाथ-पैरों पर Paralysis Clockwise, कलाई और टखने पर Shukla, और बोली के लिए सिर पर Hammering। LMNT पद्धति पहले सेशन से पहले ही परिवार को सच्चा अनुमान बताती है: हाल का लकवा जल्दी जवाब दे सकता है; पुराने लकवे में काफ़ी समय लग सकता है। और वह साफ़ कहती है कि यह काम ठीक से चल रहे रिहैबिलिटेशन — फ़िज़ियोथेरेपी और स्पीच थेरेपी — के साथ चलता है, उसकी जगह कभी नहीं।
मरीज़ को हमारे इलाज से तुरंत फ़ायदा हो या न हो, हमारी लापरवाही से उसे कोई नुक़सान न पहुँचे — इसका ध्यान रखें।
लकवा और स्ट्रोक का न्यूरोथेरेपी इलाज, क़दम-दर-क़दम
पहले अस्पताल, फिर जाँच
नया स्ट्रोक तुरंत अस्पताल जाता है। बाद में थेरेपिस्ट पूछता है कि स्ट्रोक कब हुआ, न्यूरोलॉजिस्ट का पत्र पढ़ता है — कौन-सी तरफ़, और ख़ून पतला करने वाली दवा चल रही है या नहीं — और लकवे का कोई भी ट्रीटमेंट देने से पहले दोनों पिंडलियाँ मिलाता है।
पहले तीन महीने: हल्का काम, और गर्दन पर कुछ नहीं
स्ट्रोक के तीन महीने के अंदर गर्दन पर किसी भी तरह का काम नहीं दिया जाता। शुरुआती दिनों में, जब अस्पताल की टीम मरीज़ को स्थिर कर दे, तब Feather Touch — उँगलियों के पोरों से सबसे हल्का सहलाना — ही वह एक ट्रीटमेंट है जो दिया जा सकता है।
Heparin परिवार, हालत देखकर चुना हुआ
हर तरह के लकवे में P. Heparin। जहाँ इन्फ़ार्क्ट (थक्के से ख़राब हुआ हिस्सा) के साथ दर्द हो, वहाँ PT. Heparin। जहाँ इन्फ़ार्क्ट के बाद का लकवा बरसों पुराना हो, वहाँ F. और Anti F. Heparin। जहाँ चोट के बाद जमे ख़ून से लकवा हुआ हो, वहाँ TT. Heparin।
कमज़ोर हाथ-पैरों पर काम
Paralysis Clockwise: हाथ-पैर की भीतरी तरफ़ से नीचे, बाहरी तरफ़ से ऊपर, और आख़िर में उसकी लिफ़्ट। कलाई और टखने पर Shukla — परिवार को सिखाया जा सकता है, ताकि घर पर दिन में दो बार हो। जहाँ टाँग उठती न हो, वहाँ Lt. Parkhoo, और लकवे के साथ अक्सर होने वाली कब्ज़ के लिए Const।
बोली, और बाद का काम
जहाँ बोली पर असर हो, वहाँ माथे की बाईं तरफ़ Hammering, और Speech Point। सिर्फ़ पुराने लकवे में — स्ट्रोक के तीन महीने के अंदर कभी नहीं — LMNT गर्दन पर Necklace और Medulla जोड़ती है।
इस्तेमाल होने वाले पॉइंट और फ़ॉर्मूले
P. Heparin (प्लाज़्मिन)
मूल Heparin फ़ॉर्मूला — शरीर को ख़ून जमने से रोकने और पुराने थक्के खोलने में मदद के लिए बना; LMNT इसे हर तरह के लकवे में देती है।
इन पॉइंट्स से काम करता है
खोलें →F. Heparin (Fibrinolysin)
इन्फ़ार्क्ट के बाद के बरसों पुराने लकवे के लिए; Anti F. Heparin के साथ दिया जाता है।
इन पॉइंट्स से काम करता है
खोलें →यह कभी न करें
- स्ट्रोक के संकेत — FAST: चेहरा लटकना (Face), बाँह में कमज़ोरी (Arm), बोलने में दिक़्क़त (Speech) → समय (Time) है तुरंत 108 / 112 पर फ़ोन करने का। अचानक नज़र जाना, संतुलन बिगड़ना या ज़िंदगी का सबसे तेज़ सिरदर्द भी इन्हीं में गिने जाते हैं। हर मिनट क़ीमती है। स्ट्रोक में LMNT कभी प्राथमिक उपचार नहीं है।
- स्ट्रोक, या थोड़ी देर की कमज़ोरी, सुन्नपन या नज़र जाने के तीन महीने के अंदर: गर्दन पर कोई भी काम नहीं। इन मरीज़ों के लिए गर्दन पर प्रेशर का कोई भी रूप ठीक नहीं है। गर्दन
- ख़ून पतला करने वाली दवा चल रही हो: कोई ज़ोरदार पॉइंट नहीं — Katka और Motor Neuron Point नहीं दिए जाते। ख़ून पतला करने वाली दवा ख़ुद से कभी बंद न करें। Katka
- कमज़ोर बाँह को हत्था मत बनाइए — उसे नीचे से सहारा दीजिए, और मरीज़ को कभी बाँहें पकड़कर न उठाएँ। ऑस्टियोपोरोसिस में Shukla नहीं; हाई BP की वजह से लकवे वालों को Multivitamin 2 नहीं; दिल की बीमारी में G. Heparin कभी नहीं। Shukla
- यह काम ठीक से चल रहे रिहैबिलिटेशन — फ़िज़ियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी और स्ट्रोक टीम की फ़ॉलो-अप — के साथ-साथ चलता है, उसकी जगह कभी नहीं।
- कैंसर: अगर व्यक्ति को कैंसर है, तो (10) Pan, Thymus, Pit, Lu + Sh, Rt. Ov / Lt. Ov और (30) Medulla कभी नहीं दिए जाते — थेरेपिस्ट योजना बदल देता है।
- डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें। न्यूरोथेरेपी आपके इलाज के साथ काम करती है, उसकी जगह नहीं।
वीडियो देखें
इसमें P. Heparin फ़ॉर्मूला दिखाया गया है — जाँघों के ऊपर (8) Pan, जाँघ और बाँह पर (7) Liv, और छाती पर हथेलियाँ रखकर (8) Chest Only। वीडियो में इसे Angina ट्रीटमेंट के आख़िरी हिस्से के रूप में, रक्त संचार को सहारा देने के लिए दिया गया है।
P. Heparin फ़ॉर्मूला कैसे दिया जाता है — वह मूल फ़ॉर्मूला जिसे LMNT लकवे में देती है।
अभ्यास से
वह हाथ जो तीन साल से बंद था
सिखाने के लिए केस — अभ्यास से जोड़ा गया, किसी एक मरीज़ की फ़ाइल नहीं
64 साल · रिटायर्ड स्टोरकीपर · स्ट्रोक के तीन साल बाद, दायाँ हाथ मुड़कर बंद, दाईं टाँग घुमाकर चलना
- क्या मिला
- एक साल बाद फ़िज़ियोथेरेपी बंद हो गई थी। न्यूरोलॉजिस्ट के पत्र से पता चला कि वह ख़ून पतला करने वाली दवा ले रहा था — इससे हर ज़ोरदार पॉइंट बाहर हो गया। दोनों पिंडलियाँ बराबर थीं। उसका दायाँ कंधा जोड़ में ढीला था और कोई दूसरा बाँह हिलाए तो दुखता था।
- क्या किया गया
- हाथ और पैर पर लिफ़्ट के साथ Paralysis Clockwise, कलाई और टखने पर Shukla, और हर सेशन के आख़िर में Feather Touch। चौथे हफ़्ते तक टखना ज़्यादा हिलने लगा, पर उँगलियाँ मुश्किल से खुलीं — तो उसकी बेटी को सुबह-शाम के लिए Shukla सिखाया गया। हाथ में जो सुधार आया, वह उसकी बेटी की मेहनत से आया, क्लिनिक से नहीं।
- इससे सीख
- छठे हफ़्ते में उसका कंधा दुखने लगा। कुर्सी से उठाने का तरीक़ा दिखाने को कहा गया, तो परिवार ने उसे दोनों बाँहों के नीचे से उठाया — किसी ने बताया ही नहीं था, क्योंकि यह “इलाज” नहीं था। उसी दिन यह बदला गया। पत्र पढ़ें, परिवार को सिखाएँ, और पूछें कि मरीज़ को उठाया और नहलाया कैसे जाता है।
आयुर्वेद और रसोई से
दूसरे के लिए किया गया आसन
योग आसन की सीधी परिभाषा देता है — ऐसी मुद्रा जो स्थिर और आरामदायक हो — और यह मांसपेशियों और नसों को लचीला रखता है। लकवे वाला व्यक्ति ख़ुद अपना खिंचाव नहीं कर सकता। LMNT पद्धति इसे ऐसे कहती है: जब थेरेपिस्ट का दबाव अकड़ी मांसपेशियों को खिंचाव देता है, तो जो योग अपने लिए करता है, वह यह थेरेपी दूसरे के लिए करती है।
ख़ुद को परखें
शोध क्या कहता है
- मज़बूत प्रमाण
इस अध्ययन ने हिसाब लगाया कि बिना इलाज के आम स्ट्रोक में दिमाग़ को कितनी तेज़ी से नुक़सान होता है: हर मिनट लगभग 19 लाख दिमाग़ी कोशिकाएँ नष्ट होती हैं। यही कारण है कि स्ट्रोक इमरजेंसी है — इलाज से पहले का हर मिनट मायने रखता है।
- मज़बूत प्रमाण
स्ट्रोक रिहैबिलिटेशन की एक समीक्षा में अच्छे प्रमाण मिले कि अच्छी तरह से संगठित टीमें — स्ट्रोक यूनिट में, या जल्दी घर भेजकर वहाँ सहारा देकर — रिकवरी में मदद करती हैं। इसीलिए न्यूरोथेरेपी इस देखभाल के साथ दी जाती है, उसकी जगह कभी नहीं।
Langhorne P, Bernhardt J, Kwakkel G. Stroke rehabilitation. Lancet. 2011.
स्ट्रोक या लकवे में न्यूरोथेरेपी का कोई क्लिनिकल ट्रायल अभी तक प्रकाशित नहीं हुआ है। न्यूरोथेरेपिस्ट जो सुधार बताते हैं, वे क्लिनिकल अवलोकन हैं।
आपके लिए
परिवार और देखभाल करने वाले
कमज़ोर बाँह को नीचे से सहारा दें और व्यक्ति को कभी बाँहें पकड़कर न उठाएँ। थेरेपिस्ट के बताए घर के व्यायाम सीखें — रोज़ का अभ्यास किसी एक सेशन से ज़्यादा मायने रखता है।
जिन्हें चेतावनी वाला “छोटा स्ट्रोक” हुआ
जो कमज़ोरी, सुन्नपन या नज़र का जाना अपने आप ठीक हो गया, उसे भी उसी दिन डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है — यह बड़े स्ट्रोक से पहले आ सकता है।
हाई BP या डायबिटीज़ वाले लोग
ये सबसे बड़े ख़तरे हैं जिन्हें आप क़ाबू में रख सकते हैं। ब्लड प्रेशर और शुगर की जाँच करवाते रहें, और दी हुई दवाएँ लेते रहें।
यह पेज समझाता है, जाँच नहीं करता। न्यूरोथेरेपी आपके डॉक्टरी इलाज के साथ काम करती है — डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें, और कोई नया या गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर को दिखाएँ।