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रोग · महिलाओं का स्वास्थ्य

बच्चेदानी का नीचे खिसकना (यूटेराइन प्रोलैप्स)

यूटेराइन प्रोलैप्स में बच्चेदानी (गर्भाशय) अपनी जगह से नीचे योनि की ओर खिसक आती है, क्योंकि उसे थामने वाली मांसपेशियाँ और लिगामेंट कमज़ोर या ढीले हो जाते हैं। यह प्रसव के बाद और उम्र के साथ आम है, और अक्सर पेट के निचले हिस्से और कमर में खिंचाव भरा भारीपन देता है।

Two side-view cut-away diagrams of the female pelvis: on the left the uterus sits high, held by ligaments and a firm pelvic floor; on the right the pelvic floor has sagged and the uterus has slipped down into the vaginal canal
पेडू को बगल से बीच में काटकर दिखाया गया है — आगे मूत्राशय, बीच में बच्चेदानी और पीछे मलाशय। बाईं ओर: स्वस्थ — लिगामेंट और पेल्विक फ़्लोर की मांसपेशियों का झूला बच्चेदानी को ऊपर थामे हुए है। दाईं ओर: प्रोलैप्स — झूला ढीला पड़ गया है, और बच्चेदानी नीचे योनि की नली में खिसक आई है।
मुख्य बातें
  • सामान्य प्रसव से बच्चे को जन्म दे चुकी लगभग आधी महिलाओं में किसी न किसी हद तक पेल्विक अंगों का खिसकना होता है
  • पेल्विक अंगों का खिसकना 20–39 साल की लगभग हर 10 में से 1 महिला (9.7%) में और 80 से ऊपर की लगभग आधी महिलाओं (49.7%) में पाया जाता है
  • यह 50 से ऊपर की महिलाओं में आम है

स्रोत: Mayo Clinic Health System; StatPearls (NCBI); NHS

बच्चेदानी का नीचे खिसकना क्या है?

बच्चेदानी पेट के निचले हिस्से में होती है — आगे मूत्राशय और पीछे आँत के बीच। मज़बूत लिगामेंट उसे पेडू के पिछले हिस्से से लटकाए रखते हैं, और मांसपेशियों का एक झूला — पेल्विक फ़्लोर — उसे नीचे से थामे रहता है।

जब प्रसव, उम्र, मेनोपॉज़ के बाद हार्मोन की कमी या लगातार ज़ोर लगाना इन सहारों को कमज़ोर कर देता है, तो बच्चेदानी नीचे योनि में खिसक आती है। हल्के मामले में वह थोड़ा-सा नीचे आती है; गंभीर मामले में बाहर तक आ सकती है। मूत्राशय या मलाशय भी साथ में खिसक सकते हैं।

इसके लक्षण क्या हैं?

  • पेडू में भारीपन, दबाव या नीचे खिंचाव — देर तक खड़े रहने या बैठने के बाद ज़्यादा
  • पेट के निचले हिस्से और कमर में दर्द
  • योनि में उभार महसूस होना या दिखना
  • पेशाब टपकना, या बार-बार या अचानक पेशाब लगना
  • कब्ज़ या शौच पूरा न हो पाना
  • सफ़ेद पानी ज़्यादा आना, और संबंध के समय दर्द

यह क्यों होता है, और किसे होने की संभावना ज़्यादा है?

गर्भावस्था और प्रसव

  • सामान्य प्रसव — जितने ज़्यादा प्रसव, उतना ज़्यादा ख़तरा
  • 9 पाउंड (लगभग 4 किलो) से ज़्यादा वज़न का बच्चा

उम्र और हार्मोन

  • बढ़ती उम्र
  • मेनोपॉज़ के बाद ईस्ट्रोजन की कमी, जिससे पेडू के ऊतक कमज़ोर होते हैं

पेडू पर लगातार दबाव

दूसरे कारण

  • पहले हुई पेडू की सर्जरी, जैसे बच्चेदानी निकालना
  • परिवार में इतिहास, या ऐसी स्थितियाँ जिनमें ऊतक बहुत लचीले होते हैं

इसका पता कैसे चलता है?

प्रोलैप्स का पता डॉक्टर की पेडू की एक आसान जाँच से चलता है। कुछ महिलाओं को इसका पता किसी और चीज़ की जाँच के दौरान ही चलता है।

पेडू की जाँच

डॉक्टर देखते और छूकर जाँचते हैं कि बच्चेदानी कितनी नीचे आई है, अक्सर आपको लिटाकर।

ज़ोर लगाना या खाँसना

आपसे ज़ोर लगाने या खाँसने को कहा जाता है, ताकि डॉक्टर देख सकें कि बच्चेदानी कितनी खिसकती है और पेडू की मांसपेशियाँ कितनी मज़बूत हैं।

मूत्राशय और आँत की जाँच

डॉक्टर यह भी देखते हैं कि कहीं मूत्राशय या मलाशय भी खिसककर योनि में उभार तो नहीं बना रहे।

यूटेराइन प्रोलैप्स के चार चरण

स्रोत: Cleveland Clinic (stages of uterine prolapse)

न्यूरोथेरेपिस्ट सोनोग्राफ़ी की रिपोर्ट माँगता है, क्योंकि LMNT पद्धति में P point तभी दिया जाता है जब सोनोग्राफ़ी में प्रोलैप्स दिखे। वह नाभि के आसपास Liv°, Mu° और Const देखता है, शौच के बारे में पूछता है, यह पूछता है कि आप कितना और कितनी बार वज़न उठाती हैं, पेशाब खुलकर आता है या नहीं — और क्या आप आगे बच्चा चाहती हैं, क्योंकि एक ट्रीटमेंट इसी से तय होता है।

न्यूरोथेरेपी (LMNT) की नज़र से बच्चेदानी का नीचे खिसकना

गुरुजी की शिक्षा तीन स्थितियों को साथ रखती है: बच्चेदानी का खिसकना, मलाशय का खिसकना और हर्निया। तीनों में Mu° पर दर्द मिलता है, और तीनों इसलिए होते हैं कि मांसपेशियाँ ढीली हो गई हैं। LMNT पद्धति में यह ढीलापन एसिड वाली तरफ़ का है — ऐसा शरीर जिसमें पानी की कमी है, और जिसके पीछे सख़्त कब्ज़ और रोज़ का ज़ोर लगाना है।

LMNT पद्धति खिसकी हुई बच्चेदानी को कैसे समझाती है

  1. पानी की कमीशरीर और ख़ून में पानी कम — एसिड वाली तरफ़
  2. सख़्त कब्ज़मल आँत में सूख जाता है, और हर सुबह ज़ोर लगाना पड़ता है
  3. ढीली मांसपेशियाँअंगों को जगह पर थामने वाली मांसपेशियाँ ढीली पड़ जाती हैं
  4. बच्चेदानी खिसकती हैढीली मांसपेशियों से थमा अंग अपनी जगह से खिसक जाता है
  5. Mu° पर दर्दवह निशानी जो थेरेपिस्ट को मिलती है, जिसके पीछे यही ढीलापन है

इसलिए काम दो तरफ़ा है: पेडू को मज़बूत करना, और रोज़ का ज़ोर लगाना रोकना। गुरुजी की शिक्षा P point देती है, जिसके तुरंत बाद हमेशा (6) WD; पेडू की मांसपेशियों को मज़बूत करने के लिए Triangle for Piles; Mu° पर दर्द हो तो (1) या (2) Acid; आँत के लिए Round Normal और Round Arrow। LMNT पद्धति में खिसकी बच्चेदानी के लिए Ton 'P' को बहुत ऊँचा माना गया है, पर जो महिला आगे बच्चे चाहती है, उसे यह नहीं दिया जाता। Gas Only और (10) Medulla नहीं दिए जाते।

गुरुजी कहते हैं
अभी रिसर्च करनी है।
— डॉ. लाजपतराय मेहरा — उस ट्रीटमेंट के पास लिखा, जिसे उन्होंने गर्भनिरोधक कहने से इनकार किया

बच्चेदानी का नीचे खिसकना का न्यूरोथेरेपी (LMNT) इलाज, क़दम-दर-क़दम

  1. पहले जाँच

    थेरेपिस्ट सोनोग्राफ़ी की रिपोर्ट पढ़ता है, Liv°, Mu° और Const देखता है, और शौच, पेशाब, भारी वज़न उठाने और आगे बच्चे की इच्छा के बारे में पूछता है।

  2. P point, फिर तुरंत (6) WD

    सिर्फ़ तब, जब सोनोग्राफ़ी में प्रोलैप्स दिखे। P point बच्चेदानी की मांसपेशियों को और ढीला करता है, इसलिए उसके तुरंत बाद (6) WD ज़रूरी है — दोनों कार्ड पर एक ही लाइन में लिखे जाते हैं, और P point कभी सेशन के आख़िर में जल्दबाज़ी में शुरू नहीं किया जाता।

  3. पेडू को ऊपर उठाना और मज़बूत करना

    Triangle for Piles ऊतकों को सिर की ओर उठाता है और मूत्राशय, बच्चेदानी और गुदा की गोल मांसपेशियों को कसता है। Mu° पर दर्द हो तो (1) या (2) Acid जोड़ा जाता है।

  4. आँत को आसान करना

    Round Normal और Round Arrow, साथ में कब्ज़ के लिए पाचन का काम — जो महिला हर सुबह ज़ोर लगाती है, वह हर सुबह पेडू पर हुए काम को बिगाड़ देती है।

  5. Ton 'P' और Raman — सोच-समझकर

    Ton 'P' सिर्फ़ उस महिला के लिए सोचा जाता है जो आगे बच्चे नहीं चाहती। LMNT पद्धति में बच्चेदानी की तकलीफ़ों के लिए Raman का भी इस्तेमाल होता है।

इस्तेमाल होने वाले पॉइंट और फ़ॉर्मूले

Round Normal

पूरी बड़ी आँत को, शुरू से आख़िर तक, उसकी लहरों की दिशा में चलाता है — ताकि मल बिना ज़ोर लगाए आए।

इन पॉइंट्स से काम करता है

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यह कभी न करें

  • बच्चेदानी खिसकने में कभी नहीं: Gas Only और (10) Medulla। Gas Only
  • P point सिर्फ़ तब, जब सोनोग्राफ़ी में प्रोलैप्स दिखे, और उसके तुरंत बाद हमेशा (6) WD — ढीली की गई मांसपेशी अगर ढीली ही छोड़ दी जाए, तो पहले से बुरी हालत होती है। P point
  • जो महिला आगे बच्चे चाहती है, उसे Ton 'P' नहीं दिया जाता — इससे गर्भ ठहरने पर असर पड़ सकता है। यह भी साबित नहीं है कि इससे गर्भ रुकता है, इसलिए इसे कभी गर्भनिरोधक नहीं कहा जाता। Ton 'P'
  • Triangle for Piles उन्हें नहीं दिया जाता जिन्हें पेशाब कम आता है, और उसका दबाव हमेशा सिर की ओर जाता है, ज़मीन की ओर कभी नहीं। (1) और (2) Acid पतले मोशन में या Mu° पर दर्द न होने पर नहीं दिए जाते। Triangle for Piles
  • अगर बच्चेदानी योनि के मुँह से बाहर आने लगे, या कोई भी ख़ून आए — ख़ासकर मेनोपॉज़ के बाद — तो जल्दी डॉक्टर को दिखाएँ। अगर पेशाब बिल्कुल न उतरे, तो उसी दिन जाएँ। प्रोलैप्स की दोबारा जाँच आपके डॉक्टर करते हैं, थेरेपिस्ट नहीं।
  • कैंसर: अगर व्यक्ति को कैंसर है, तो (10) Pan, Thymus, Pit, Lu + Sh, Rt. Ov / Lt. Ov और (30) Medulla कभी नहीं दिए जाते — थेरेपिस्ट योजना बदल देता है।
  • डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें। न्यूरोथेरेपी (LMNT) आपके इलाज के साथ काम करती है, उसकी जगह नहीं।

अभ्यास से

वह महिला जो एक और बच्चा चाहती थी

सिखाने के लिए केस — अभ्यास से जोड़ा गया, किसी एक मरीज़ की फ़ाइल नहीं

29 साल · गाँव की आँगनवाड़ी कार्यकर्ता · दूसरी डिलीवरी के आठ महीने बाद सोनोग्राफ़ी में दूसरे दर्जे का प्रोलैप्स

क्या मिला
नाभि के नीचे और कमर में दिन भर दर्द, सफ़ेद पानी, और माहवारी कभी बीस तो कभी चालीस दिन में। जाते-जाते उसने कहा: “हमें एक और बच्चा चाहिए। वे ऑपरेशन की बात कर रहे हैं।” उसे Mu° और Const पर दर्द था, Liv° पर नहीं; डिलीवरी के बाद से कब्ज़ थी, हाथ ठंडे रहते थे — और वह रोज़ भारी बोझ उठाती थी।
क्या किया गया
Ton 'P' नहीं दिया गया, और उसे साफ़ बताया गया कि क्यों: इससे गर्भ ठहरने पर असर पड़ सकता है, और यह पक्का कोई नहीं जानता। उसकी जगह P point और तुरंत बाद (6) WD, Triangle for Piles, (1) Acid, Raman और कब्ज़ के लिए पाचन का काम दिया गया। दो हफ़्ते में कमर का दर्द शांत हुआ और शौच बदला; छह हफ़्ते तक सफ़ेद पानी कम हुआ; दस हफ़्ते पर माहवारी उनतीस दिन पर आई। प्रोलैप्स की दोबारा जाँच उन्हीं डॉक्टर ने की, जिन्होंने रिपोर्ट बनाई थी।
इससे सीख
पाँचवें हफ़्ते में उसका सुधार रुक गया। उससे यह नहीं पूछा गया कि “कुछ बदला है?”, बल्कि यह कि “आप क्या उठाती हैं, और कितनी बार?” — तब उसने बताया कि बेहतर महसूस होने पर वह फिर से हर सुबह चार बार बाहर की सीढ़ी पर पानी से भरा घड़ा चढ़ाने लगी थी। कार्ड पर कुछ नहीं बदला। सीढ़ी बदली।

आयुर्वेद और रसोई से

ख़ुद को परखें

1. आम तौर पर बच्चेदानी को उसकी जगह पर क्या थामे रखता है?

2. LMNT पद्धति में P point के तुरंत बाद क्या ज़रूरी है?

3. केस वाली महिला को Ton 'P' क्यों नहीं दिया गया?

शोध क्या कहता है

  • मज़बूत प्रमाण

    प्रोलैप्स वाली 447 महिलाओं को दो समूहों में बाँटा गया। जिन्हें 16 हफ़्तों में पेल्विक फ़्लोर की कसरतें सिखाई गईं, उनमें एक साल बाद प्रोलैप्स के लक्षण कम थे, और उनमें से कम ने आगे प्रोलैप्स का दूसरा इलाज ढूँढ़ा (24% बनाम 50%)। पेडू के झूले को मज़बूत करना मदद करता है।

    Hagen S, Stark D, Glazener C, et al. Individualised pelvic floor muscle training in women with pelvic organ prolapse (POPPY): a multicentre randomised controlled trial. Lancet. 2014.

  • मज़बूत प्रमाण

    बच्चेदानी पेडू के पिछले और बगल वाले हिस्सों से लिगामेंट की दो व्यवस्थाओं के सहारे लटकी रहती है। जब ये कमज़ोर होते हैं, तो वह नीचे उतरती है। ख़तरा हर गर्भावस्था के साथ, ज़्यादा वज़न के साथ और सबसे ज़्यादा उम्र के साथ बढ़ता है।

    Chen CJ, Thompson H. Uterine Prolapse. StatPearls [Internet]. Treasure Island (FL): StatPearls Publishing; 2022.

यूटेराइन प्रोलैप्स में न्यूरोथेरेपी (LMNT) का कोई क्लिनिकल ट्रायल अभी तक प्रकाशित नहीं हुआ है। न्यूरोथेरेपिस्ट जो सुधार बताते हैं, वे क्लिनिकल अवलोकन हैं।

आपके लिए

प्रसव के बाद

पेल्विक फ़्लोर (कीगल) की कसरतें सीखें और करती रहें। पहले कुछ महीनों में भारी वज़न उठाने से बचें, और कब्ज़ को जमने न दें।

हर महिला

पर्याप्त पानी पिएँ, शौच नरम रखें, लंबी खाँसी का इलाज करवाएँ, और वज़न सही रखें — इनमें से हर चीज़ पेडू से रोज़ का दबाव कम करती है।

प्रोलैप्स के साथ जी रही महिलाएँ

डॉक्टर से पेसरी नाम के सहारा देने वाले उपकरण और कसरतों के बारे में पूछें। थेरेपिस्ट को बताएँ कि क्या आप आगे बच्चे चाहती हैं, और रोज़ कितना वज़न उठाती हैं।

यह पेज समझाता है, जाँच नहीं करता। न्यूरोथेरेपी (LMNT) आपके डॉक्टरी इलाज के साथ काम करती है — डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें, और कोई नया या गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर को दिखाएँ।

Neurotherapy.Life टीम द्वारा, डॉ. लाजपतराय मेहरा की शिक्षाओं पर आधारित

समीक्षा: डॉ. दिवाकर शुक्ला, वरिष्ठ न्यूरोथेरेपिस्ट

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