पेशाब की तकलीफ़ें
बहुत ज़्यादा पेशाब, बहुत कम पेशाब, रुका हुआ पेशाब, या छींक आने पर निकल जाने वाला पेशाब — एक ही तंत्र की चार अलग तकलीफ़ें, और हर एक की देखभाल अलग है।

- 20 साल से ऊपर की लगभग 62% महिलाओं को किसी न किसी तरह पेशाब निकल जाने (लीक) की तकलीफ़ होती है; पुरुषों में यह 14% से थोड़ा कम है
- ज़्यादातर वयस्क दिन में कम से कम 500 ml पेशाब करते हैं; दिन में 2.5 लीटर से ज़्यादा को बहुत ज़्यादा पेशाब कहा जाता है
- 70 से ऊपर के लगभग 10% पुरुषों को, और 80 से ऊपर के 30% तक पुरुषों को, मूत्राशय ख़ाली करने में तकलीफ़ होती है
स्रोत: Cleveland Clinic (urinary incontinence; urinary retention); MedlinePlus (urine output; excessive urination volume)
पेशाब की तकलीफ़ें क्या है?
आपकी दोनों किडनी दिन-भर ख़ून छानती हैं और पेशाब बनाती हैं। यह नीचे मूत्राशय में आता है — मांसपेशी की एक थैली, जो इसे जमा रखती है। मूत्राशय के मुँह पर मांसपेशी का एक छल्ला, स्फिंक्टर, तब तक बंद रहता है जब तक आप जाने का फ़ैसला न करें। रीढ़ के निचले सिरे और दिमाग़ की नसें पूरा तंत्र चलाती हैं।
तकलीफ़ किसी भी क़दम पर आ सकती है। शरीर बहुत ज़्यादा या बहुत कम पेशाब बना सकता है। रास्ता सँकरा हो सकता है, जिससे पेशाब न आए। या छल्ले वाली मांसपेशी ढीली हो सकती है, जिससे खाँसी, छींक या हँसी पर पेशाब निकल जाए। बाहर से ये एक जैसी लगती हैं, पर असल में ये उलटी तकलीफ़ें हैं।
इसके लक्षण क्या हैं?
- दिन-रात बहुत ज़्यादा पेशाब आना
- बहुत थोड़ा पेशाब, या गहरे रंग का गाढ़ा पेशाब
- पेशाब शुरू होने में दिक़्क़त, कमज़ोर धार, या पेशाब बिल्कुल न आना
- पेशाब करते समय जलन या दर्द
- खाँसी, छींक, हँसी या वज़न उठाने पर पेशाब निकल जाना
- अचानक तेज़ हाजत, और शौचालय पहुँचने से पहले ही पेशाब निकल जाना
यह क्यों होता है, और किसे होने की संभावना ज़्यादा है?
पानी और आदतें
- बहुत कम पानी पीना, या पानी की जगह चाय और ठंडे पेय
- बहुत ज़्यादा पीना, या बहुत चाय, कॉफ़ी या शराब
- लंबे समय तक पेशाब रोककर रखना
- पुरानी कब्ज़
रास्ता और उसकी मांसपेशियाँ
- प्रसव, मेनोपॉज़ के बाद या उम्र के साथ पेड़ू की ढीली मांसपेशियाँ
- पुरुषों में बढ़ा हुआ प्रोस्टेट या सँकरा रास्ता
- पेशाब का इन्फ़ेक्शन
दवाएँ
- पेशाब बढ़ाने वाली गोलियाँ (डाययूरेटिक) और कुछ दूसरी दवाएँ
इसका पता कैसे चलता है?
पहला काम यह पता करना है कि तकलीफ़ किस तरह की है — बहुत ज़्यादा, बहुत कम, रुका हुआ, या लीक — क्योंकि हर एक के कारण अलग हैं।
मूत्राशय डायरी
कुछ दिन आप लिखते हैं कि क्या पिया, कितनी बार पेशाब किया, कितना, और कब निकल गया।
पेशाब की जाँच
पेशाब में इन्फ़ेक्शन, ख़ून या शुगर देखती है।
ख़ून की जाँच
शुगर और किडनी का काम — बहुत ज़्यादा या बहुत कम पेशाब का कारण ढूँढने के लिए।
मूत्राशय का अल्ट्रासाउंड और पेशाब के बाद की जाँच
किडनी और मूत्राशय दिखाता है, और पेशाब के बाद अंदर कितना पेशाब बचा रह गया।
मूत्राशय की ख़ास जाँचें
धार और दबाव की जाँच, या पतली दूरबीन से अंदर देखना — जब डॉक्टर को ज़्यादा जानकारी चाहिए।
न्यूरोथेरेपिस्ट सबसे पहले पूछता है कि चारों में से कौन-सी तकलीफ़ है — बहुत ज़्यादा, बहुत कम, रुका हुआ या लीक — क्योंकि जो पॉइंट एक में मदद करता है, वही दूसरे में मना है। आपसे पानी, BP, डायबिटीज़ और किडनी की रिपोर्ट के बारे में पूछा जाएगा, और किडनी के पॉइंट Liv° और Mu° जाँचे जाते हैं।
न्यूरोथेरेपी की नज़र से पेशाब की तकलीफ़ें
LMNT पद्धति में मूत्राशय के मुँह पर पेड़ू के पीछे से काम किया जाता है। कुछ पॉइंट छल्ले वाली मांसपेशियों को खोलते हैं, कुछ कसते हैं — और वही पॉइंट उलटी तरफ़ उलटा काम करते हैं। इसलिए पहला सवाल हमेशा यही होता है कि तकलीफ़ किस दिशा में जा रही है।
जब शरीर में पानी कम हो — एक घटना, चार चेहरे
- बहुत कम पानीभोजन के बीच पिया गया — चाय और ठंडे पेय गिनती में नहीं आते
- शरीर अपने नल बंद कर देता हैऔर हर रास्ते पर पानी रोक लेता है — पेशाब, पसीना, लार और मल
- पेशाबकम, गहरे रंग का और जलन वाला हो जाता है
- मल और त्वचामल सख़्त, त्वचा सूखी, मुँह सूखा
इसलिए कम और गहरा पेशाब, सूखा मुँह, सूखी त्वचा और सख़्त मल अक्सर एक ही कहानी होते हैं। LMNT पद्धति चारों के बारे में पूछती है, और कोई भी पॉइंट चुनने से पहले पानी ठीक करती है।
पानी की जगह कोई दूसरा पेय नहीं ले सकता।
पेशाब की तकलीफ़ें का न्यूरोथेरेपी इलाज, क़दम-दर-क़दम
पहले जाँच
थेरेपिस्ट पूछता है कि चारों में से कौन-सी तकलीफ़ है, Liv° और Mu° जाँचता है, और BP, डायबिटीज़, किडनी की रिपोर्ट और हर गोली के बारे में पूछता है — इन्हीं से तय होता है कि कौन-से पॉइंट दिए जा सकते हैं।
पहले पानी
भोजन के आधे घंटे बाद एक गिलास पानी, और फिर हर घंटे — सारा पानी भोजन के समय नहीं, और एक साथ बड़े घूँट में नहीं। पेशाब की हाजत को रोकें नहीं।
पेशाब रुका या कम: (2) S4–S5
पेट के बल लिटाकर, एड़ियों से सैक्रम के बग़ल में काम किया जाता है, ताकि मूत्राशय की छल्ले वाली मांसपेशियाँ ढीली होकर खुलें। जहाँ सँकरे रास्ते के कारण पेशाब जलन के साथ तेज़ धार में आता हो, वहाँ (6) Left Swt जोड़ा जा सकता है।
छींक या हँसी पर लीक: इनकॉन्टिनेंस का ट्रीटमेंट
(15) Right Medulla और (6) Right Swt, तीन बार, बीच में डेढ़ मिनट का अंतर, फिर Triangle for piles। दाईं तरफ़ ढीले मुँह को सँकरा करती है; Triangle पेड़ू की मांसपेशियों को कसता है।
किडनी कमज़ोर होने से कम पेशाब
किडनी फ़ेलियर में LMNT पद्धति पेशाब बढ़ाने के लिए (2) Pan देती है, और किडनी के पॉइंट रोक देती है — हमेशा किडनी डॉक्टर के इलाज के साथ।
इस्तेमाल होने वाले पॉइंट और फ़ॉर्मूले
इनकॉन्टिनेंस का ट्रीटमेंट
छींक, हँसी या वज़न उठाने पर निकल जाने वाले पेशाब के लिए — ढीले मुँह को सँकरा करता है और पेड़ू की मांसपेशियों को कसता है।
इन पॉइंट्स से काम करता है
खोलें →(2) S4 – S5
मूत्राशय की छल्ले वाली मांसपेशियों को ढीला करके खोलता है — रुके या कम पेशाब को लाने के लिए। बहुत ज़्यादा पेशाब में कभी नहीं।
खोलें →(6) Left Swt
सँकरे रास्ते को खोलता है, जहाँ पेशाब जलन के साथ तेज़ धार में आता है। डायबिटीज़ वालों के लिए नहीं।
खोलें →यह कभी न करें
- जिसे बहुत ज़्यादा पेशाब आता हो, उसे (2) S4–S5 कभी नहीं दिया जाता — यह छल्ले वाली मांसपेशियाँ खोलता है और पेशाब बढ़ाता है। पेशाब की मात्रा ठीक हो जाए, तो यह रोक हट जाती है। (2) S4 – S5
- जब पेशाब बहुत कम आता हो, तो Triangle for piles (यह छल्ले वाली मांसपेशियाँ कसता है) और Gal नहीं दिए जाते। मात्रा ठीक हो जाए, तो दोनों रोकें हट जाती हैं। Triangle for Piles
- हाई BP में (6) Right Swt नहीं दिया जाता, और डायबिटीज़ में (6) Left Swt नहीं दिया जाता। (6) Right Swt
- किडनी: किडनी फ़ेलियर में किडनी के पॉइंट Liv° और Mu° नहीं दबाए जाते और (10) Medulla नहीं दिया जाता। दुखती कमर (बग़ल) पर ज़ोर से दबाव नहीं, और ट्रांसप्लांट की हुई किडनी, हाल की बायोप्सी, या नली/स्टेंट हो तो बिल्कुल नहीं। किडनी (गुर्दे)
- बच्चे: बच्चे को बड़ों की आधी ख़ुराक और सिर्फ़ हल्का ट्रीटमेंट दिया जाता है, और वह भी प्रशिक्षित थेरेपिस्ट के हाथ से। बच्चों का बिस्तर गीला करना
- उसी दिन डॉक्टर को दिखाएँ — या अस्पताल जाएँ — अगर पेशाब बिल्कुल न आए या 8 घंटे से न आया हो; पेशाब में ख़ून हो; कमर के दर्द या पेशाब की जलन के साथ बुख़ार या कँपकँपी हो; या अचानक पेशाब या मल पर क़ाबू छूट जाए और बैठने की जगह के आस-पास सुन्नपन या पैरों में कमज़ोरी हो। मूत्र रुकना
- कैंसर: अगर व्यक्ति को कैंसर है, तो (10) Pan, Thymus, Pit, Lu + Sh, Rt. Ov / Lt. Ov और (30) Medulla कभी नहीं दिए जाते — थेरेपिस्ट योजना बदल देता है।
- डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें। न्यूरोथेरेपी आपके इलाज के साथ काम करती है, उसकी जगह नहीं।
वीडियो देखें
हिंदी में प्रदर्शन — जब पेशाब का इन्फ़ेक्शन लंबा चलकर सूजन में बदल जाए, तब दिया जाने वाला ट्रीटमेंट: Liv° और Mu°, Chest Only, रीढ़ पर 20 Round Arrow, फिर पीठ पर (6) Adr।
पेशाब का इन्फ़ेक्शन — ख़ासकर बुख़ार, कमर के दर्द या पेशाब में ख़ून के साथ — पहले डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है। हाई BP या पहले से कमज़ोर इम्यूनिटी में (6) Adr नहीं दिया जाता; वीडियो में यह नहीं बताया गया।
लंबे चले पेशाब के इन्फ़ेक्शन में दिए जाने वाले ट्रीटमेंट का प्रदर्शन।
अभ्यास से
वह दर्ज़ी, जिसके पेशाब में जलन थी
सिखाने के लिए केस — अभ्यास से जोड़ा गया, किसी एक मरीज़ की फ़ाइल नहीं
52 साल · दर्ज़ी · सरसों के तेल जैसे पीले पेशाब में जलन, और कमर में पुराना दर्द
- क्या मिला
- उसे ज़्यादा पानी पीने को कहा गया था, पर वह उसकी जगह मीठा ठंडा पेय पी रहा था। मल सख़्त था, हर तीसरे दिन; त्वचा सूखी थी; Mu° दुखता था। किसी भी चीज़ से पहले थेरेपिस्ट ने देखा कि पेशाब में ख़ून, कमर के दर्द के साथ बुख़ार, या रुका हुआ पेशाब तो नहीं — इनमें से कुछ नहीं था, इसलिए इलाज किया जा सका।
- क्या किया गया
- पहले पानी और पाचन, क्योंकि सख़्त मल और गहरा पेशाब दोनों ऐसे शरीर के संकेत थे जो पानी रोक रहा था। दस दिन में पेशाब साफ़ हो गया और मल नरम हो गया।
- इससे सीख
- ठंडा पेय पानी नहीं है। और थेरेपिस्ट को पता होना चाहिए कि किन बातों पर मरीज़ को उसी सुबह डॉक्टर के पास भेजना है — पेशाब में ख़ून, कमर के दर्द के साथ बुख़ार, या रुका हुआ पेशाब।
आयुर्वेद और रसोई से
वे वेग, जिन्हें रोका नहीं जाता
पुरानी भारतीय चिकित्सा उन प्राकृतिक वेगों की सूची देती है जिन्हें रोकना नहीं चाहिए — पेशाब और मल भी उनमें हैं — और कहती है कि इन्हें आदतन रोकने से रोग आते हैं। यह सलाह आज भी काम की है: जब शरीर कहे, तब जाइए।
मूत्र — तीन मलों में से एक
आयुर्वेद पेशाब (मूत्र) को, मल और पसीने के साथ, तीन मलों में गिनता है। इनका ठीक से बनना और निकलना अपने आप में सेहत की निशानी है — इसीलिए वैद्य पहले इन्हीं के बारे में पूछते हैं।
ख़ुद को परखें
शोध क्या कहता है
- मज़बूत प्रमाण
मूत्राशय का भरना, रोकना और ख़ाली होना रीढ़ की हड्डी और दिमाग़ की नसें चलाती हैं। नसों के संकेत मुँह की छल्ले वाली मांसपेशी को बंद रखते हैं, और जाने पर उसे खुलने देते हैं।
Fowler CJ, Griffiths D, de Groat WC. The neural control of micturition. Nat Rev Neurosci. 2008.
- मज़बूत प्रमाण
1,817 महिलाओं पर 31 अध्ययनों की समीक्षा: पेड़ू की मांसपेशियों की ट्रेनिंग से खाँसी या छींक पर लीक वाली महिलाओं को मदद मिली — ट्रेनिंग न करने वालों के मुक़ाबले उनमें सुधार या पूरी तरह सूखा रहना कई गुना ज़्यादा था।
पेशाब की तकलीफ़ों में न्यूरोथेरेपी का कोई क्लिनिकल ट्रायल अभी तक प्रकाशित नहीं हुआ है। न्यूरोथेरेपिस्ट जो सुधार बताते हैं, वे क्लिनिकल अनुभव हैं।
आपके लिए
महिलाएँ
प्रसव के बाद और अधेड़ उम्र में, नाभि के नीचे की मांसपेशियाँ ढीली होने से छींक या हँसी पर पेशाब निकलना आम है। इसका इलाज करवाना चाहिए — डॉक्टर और थेरेपिस्ट को बताइए।
बुज़ुर्ग पुरुष
कमज़ोर धार या शुरू होने में दिक़्क़त अक्सर प्रोस्टेट से होती है। जाँच करवाइए; पेशाब पूरी तरह रुक जाना इमरजेंसी है।
डायबिटीज़ या हाई BP वाले
इनमें से कुछ पॉइंट आपके लिए मना हैं। थेरेपिस्ट को हमेशा बताइए, और शुगर व BP जाँचते रहिए।
यह पेज समझाता है, जाँच नहीं करता। न्यूरोथेरेपी आपके डॉक्टरी इलाज के साथ काम करती है — डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें, और कोई नया या गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर को दिखाएँ।