साइटिका (गृध्रसी)
साइटिका वह दर्द है जो कमर से एक टाँग के पीछे नीचे तक दौड़ता है, क्योंकि साइटिक नस दब जाती है या उसमें जलन होती है — सबसे ज़्यादा किसी खिसकी हुई डिस्क से।

- 10% से 40% लोगों को ज़िंदगी में कभी न कभी साइटिका होता है
- ज़्यादातर मामले 4 से 6 हफ़्तों में ठीक हो जाते हैं
- साइटिक नस शरीर की सबसे बड़ी नस है, जो L4 से S3 तक की नस-जड़ों से बनती है
स्रोत: StatPearls (Davis, Taqi & Vasudevan, 2024); MedlinePlus
साइटिका क्या है?
साइटिक नस आपके शरीर की सबसे बड़ी नस है। यह रीढ़ के निचले हिस्से से निकलने वाली कई नस-जड़ों से शुरू होती है, कूल्हे से गुज़रती है, और हर टाँग के पीछे पैर तक जाती है।
साइटिका अपने-आप में कोई बीमारी नहीं — यह संकेत है कि इस नस पर दबाव है या इसमें जलन है। इसका सबसे आम कारण कमर में खिसकी हुई या उभरी हुई डिस्क है। यह आम तौर पर एक ही तरफ़ होता है, और कई मामलों में कोई एक कारण नहीं मिलता।
इसके लक्षण क्या हैं?
- कूल्हे से एक टाँग के पीछे नीचे तक तेज़, जलता हुआ दर्द
- टाँग या पैर में झनझनाहट या सुइयाँ चुभने जैसा लगना
- टाँग या पैर में सुन्नपन
- टाँग या पैर में कमज़ोरी
- हिलने, खाँसने या छींकने पर दर्द बढ़ना
यह क्यों होता है, और किसे होने की संभावना ज़्यादा है?
रीढ़ में सिकुड़न या खिसकन
- स्पाइनल स्टेनोसिस — रीढ़ की नली का सिकुड़ना
- स्पॉन्डिलोलिस्थेसिस — एक मनके का दूसरे पर खिसक जाना
चोट
- कमर की चोट
- कूल्हे की हड्डी या रीढ़ के मनके का टूटना
इसका पता कैसे चलता है?
डॉक्टर पूछता है कि दर्द कहाँ तक जाता है, और टाँगों की ताक़त, संवेदना और रिफ़्लेक्स जाँचता है। स्कैन तब होते हैं जब दर्द ठीक न हो या कोई चेतावनी वाला संकेत हो।
रीढ़ का एमआरआई (MRI) या सीटी (CT) स्कैन
डिस्क और नस की जड़ें दिखाता है, और यह कि नस कहाँ दब रही है।
न्यूरोथेरेपिस्ट हर बार वही कुछ चेतावनी वाले सवाल पूछता है: कूल्हों के बीच सुन्नपन, पेशाब या मल में दिक़्क़त, दोनों टाँगों में दर्द या कमज़ोरी। डिस्क का उभार दिखाने वाला स्कैन अकेले ज़्यादा नहीं बदलता — ऐसे उभार उन कमरों में भी आम हैं जो दुखती नहीं।
न्यूरोथेरेपी की नज़र से साइटिका
न्यूरोथेरेपी साइटिका का इलाज कमर और टाँग, दोनों के ज़रिए साथ-साथ करती है। L5–S1 घिसाई तीन तरह से काम करती है: कमर के L1 से S1 तक के मनकों को अपनी जगह लाती है, दोनों कूल्हों की मांसपेशियों को ढीला करती है, और रीढ़ के दोनों तरफ़ नीचे खिसक आई मांसपेशियों और नसों को ऊपर खींचती है। फिर Sciatica पॉइंट दुखती टाँग पर काम करता है।
बाक़ी इलाज डिस्क का स्तर तय करता है: L4–L5–S1 की खिसकी डिस्क के लिए JJ⁺², L1–L3 के लिए JJ⁺¹। साथ में पाचन का काम चलता है। और हर सेशन चेतावनी वाले सवालों से शुरू होता है, क्योंकि ज़्यादातर कमर ठीक हो जाती हैं — पर कुछ को आज ही अस्पताल जाना होता है।
मरीज़ को हमारे इलाज से तुरंत फ़ायदा मिले या न मिले, हमारी लापरवाही से उसे कोई नुक़सान न पहुँचे — इसका ध्यान रखें।
साइटिका का न्यूरोथेरेपी इलाज, क़दम-दर-क़दम
पहले जाँच
थेरेपिस्ट Liv° और Mu° देखता है, पूछता है कि कौन-सी टाँग और कहाँ तक दुखती है, और चेतावनी वाले सवाल पूछता है — हर बार, क्योंकि जवाब बदल सकते हैं।
L5–S1 घिसाई
पेट के बल, तीन चरणों में, अलग-अलग गिनती के साथ — कमर को ठीक बिठाने और कूल्हों की मांसपेशियों को ढीला करने के लिए।
Sciatica पॉइंट — सिर्फ़ दुखती टाँग पर
L5 मनके के दोनों तरफ़ दोनों अँगूठों से हल्का दबाव, फिर एड़ी दुखती टाँग पर कूल्हे से एड़ी तक, दबाते हुए या घुमाते हुए उतरती है। डिस्क के उभार में इसके बाद पैर पर Sciatica setting दी जाती है।
डिस्क के स्तर के हिसाब से
L4–L5–S1 की खिसकी डिस्क के लिए JJ⁺²; L1–L3 की खिसकी डिस्क के लिए JJ⁺¹।
साथ में पाचन
कमर और टाँग के काम के साथ-साथ, हर बार सख़्त मल और कम पानी का भी ध्यान रखा जाता है।
इस्तेमाल होने वाले पॉइंट और फ़ॉर्मूले
यह कभी न करें
- कूल्हों के बीच या जाँघों के अंदर सुन्नपन, पेशाब करने या रोकने में नई दिक़्क़त, मल पर क़ाबू न रहना, या दोनों टाँगों में दर्द या कमज़ोरी हो — तो रुकें और उसी दिन अस्पताल जाएँ। इंतज़ार से स्थायी नुक़सान हो सकता है।
- L1 से S1 के बीच किसी भी हड्डी में फ़्रैक्चर हो, तो (6) L3, 4, 5 कभी नहीं। (6) L3, 4, 5
- घुटने के दर्द वाले को JJ⁺¹ नहीं — उन्हें JJ⁺² दिया जाता है। जहाँ घुटने के दर्द के साथ तलवे में दर्द हो, वहाँ BOF वाले दिन JJ⁺² नहीं। JJ⁺¹
- जहाँ तेज़ कमर दर्द घुटने से नीचे तक जाए या डिस्क का इलाज चल रहा हो, वहाँ ONS (दोनों सीधी टाँगें उठाना) नहीं। Fracture पॉइंट में टाँगें कोई सहायक उठाता है — मरीज़ ख़ुद कभी नहीं — और घुटने के जोड़ पर कुछ नहीं दिया जाता। ONS
- डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें। न्यूरोथेरेपी आपके इलाज के साथ काम करती है, उसकी जगह नहीं।
वीडियो देखें
L5–S1 घिसाई के तीनों हिस्सों का डेमो — पेट के बल लिटाकर, पैर के अगले हिस्से से कमर के सबसे निचले भाग और कूल्हों पर, फिर तकियों पर पैर ऊँचे रखकर Fracture पॉइंट। यह कमर दर्द में राहत के लिए दिया जाता है।
इसमें लिटाकर जाँघों पर JJ⁺¹ और घुटनों के ठीक नीचे JJ⁺² दिखाया गया है — हल्के झटके के साथ, तीन राउंड में धीरे-धीरे दबाव बढ़ाते हुए। कमर दर्द में JJ⁺¹ L1–L3 के पास की नस की तकलीफ़ के लिए और JJ⁺² L4–L5–S1 के लिए है।
इसमें मरीज़ को बिठाकर जाँघों पर JJ⁺¹ और घुटनों के ठीक नीचे JJ⁺² दिखाया गया है — हल्के झटके के साथ, तीन राउंड में बढ़ता दबाव, फिर पिंडली की हल्की मसाज। कमर दर्द में JJ⁺¹ L1–L3 के पास की नस की तकलीफ़ के लिए और JJ⁺² L4–L5–S1 के लिए है।
BK शिवानंद भाई अपना अनुभव बताते हैं — MRI में नस दबी हुई थी, और चार सिटिंग के बाद उन्हें कमर दर्द में अच्छा आराम मिला।
L5–S1 घिसाई अपने तीन हिस्सों में, और खिसकी डिस्क के लिए JJ⁺¹ और JJ⁺²।
अभ्यास से
वह महिला, जिसे लगा कि यह इलाज का असर है
सिखाने के लिए केस — अभ्यास से जोड़ा गया, किसी एक मरीज़ की फ़ाइल नहीं
57 साल · पाँच महीने से कमर दर्द और दाईं टाँग में नीचे तक दर्द
- क्या मिला
- ग्यारह दिन अच्छे गए — सिर्फ़ दाईं टाँग पर Sciatica पॉइंट, L5–S1 घिसाई, साथ में पाचन का काम। बारहवें दिन, रोज़ के सवाल पूछने पर उसने बताया कि पेशाब शुरू करने के लिए रुकना और ज़ोर लगाना पड़ता है, टॉयलेट सीट “अपनी त्वचा जैसी नहीं” लगती है, और दूसरी टाँग भी दुखने लगी है।
- क्या किया गया
- उस दिन कोई ट्रीटमेंट नहीं दिया गया। उसे शांति से बताया गया कि उसे उसी दिन डॉक्टर को दिखाना है, और इलाज व तीन नए लक्षणों का नोट देकर भेजा गया। छत्तीस घंटे के अंदर उसका ऑपरेशन हुआ।
- इससे सीख
- उसके स्कैन के डिस्क उभार से न पहले दिन कुछ बदला, न बारहवें दिन। तीन आसान सवालों के तीन जवाबों ने सब कुछ बदल दिया। चेतावनी वाले सवाल हर सेशन में पूछे जाते हैं, सिर्फ़ पहले में नहीं।
आयुर्वेद और रसोई से
कटि और वात — ठहरी हुई गर्माहट
आयुर्वेद कमर और कूल्हों को कटि कहता है, जहाँ बिगड़ा हुआ वात जम जाता है — जकड़न, अटकता दर्द और ठंड में बढ़ता दर्द लेकर। इसका पुराना उपाय है आटे के घेरे में कमर पर गरम तेल ठहराकर रखना, बिना दबाए। न्यूरोथेरेपी भी यही सोच रखती है: किसी भी ज़ोरदार काम से पहले कमर को धीरे-धीरे नरम करना।
ख़ुद को परखें
शोध क्या कहता है
- मज़बूत प्रमाण
साइटिक नस L4 से S3 तक की नस-जड़ों से बनती है। कमर की उभरी या खिसकी डिस्क साइटिका का सबसे आम कारण है, और ज़्यादातर मामले 4 से 6 हफ़्तों में ठीक हो जाते हैं।
- मज़बूत प्रमाण
जिन लोगों को कमर दर्द बिल्कुल नहीं है, उनके स्कैन में भी अक्सर डिस्क का उभार दिखता है — 20 की उम्र में 30% और 80 की उम्र में 84% में। स्कैन में दिखा उभार अकेले दर्द की वजह नहीं बताता।
साइटिका में न्यूरोथेरेपी का कोई क्लिनिकल ट्रायल अभी तक प्रकाशित नहीं हुआ है। न्यूरोथेरेपिस्ट जो सुधार बताते हैं, वे क्लिनिकल अवलोकन हैं।
आपके लिए
दोनों टाँगों में दर्द
दोनों तरफ़ साइटिका एक चेतावनी वाला संकेत है। तुरंत अपने थेरेपिस्ट या डॉक्टर को बताएँ, और पेशाब, मल या कूल्हों के बीच की संवेदना में कोई बदलाव हो तो ज़रूर बताएँ।
देर तक बैठने वाले
देर तक बैठे या लेटे रहने से बचें। रोज़ हल्की-फुल्की गतिविधि जारी रखें — इससे आराम से ज़्यादा जल्दी सुधार होता है।
जिनके पास स्कैन रिपोर्ट है
रिपोर्ट में डिस्क का उभार आम बात है, और अकेले घबराने की वजह नहीं। आप कैसा महसूस करते हैं, और चेतावनी वाले संकेत — ये ज़्यादा मायने रखते हैं।
यह पेज समझाता है, जाँच नहीं करता। न्यूरोथेरेपी आपके डॉक्टरी इलाज के साथ काम करती है — डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें, और कोई नया या गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर को दिखाएँ।