साँस लेने में तकलीफ़ (साँस फूलना)
साँस लेने में तकलीफ़ का मतलब है कि पूरी हवा अंदर लेना मुश्किल या बेचैनी भरा लगता है। यह फेफड़ों, दिल, ख़ून या घबराहट से भी हो सकती है — और कभी-कभी यह इमरजेंसी होती है।

- आराम की हालत में एक स्वस्थ वयस्क एक मिनट में लगभग 12 से 18 साँसें लेता है
- उँगली वाले मीटर पर ख़ून की सामान्य ऑक्सीजन 95 से 100 प्रतिशत होती है
- होंठ नीले या स्लेटी पड़ना, या इतनी हाँफ कि बोल न निकलें — यह इमरजेंसी है
स्रोत: MedlinePlus; Cleveland Clinic; NHS
साँस लेने में तकलीफ़ क्या है?
शरीर की हर कोशिका को ऑक्सीजन चाहिए। आप हवा अंदर लेते हैं, फेफड़े ऑक्सीजन ख़ून में डालते हैं, और दिल वह ख़ून पूरे शरीर में पहुँचाता है। साथ ही आप कार्बन डाइऑक्साइड — बेकार गैस — बाहर छोड़ते हैं। पूरी हवा न मिलने के एहसास को डॉक्टर डिस्पनिया (dyspnoea) कहते हैं।
साँस फूलना अचानक आकर कुछ घंटे या दिन रह सकता है, या हफ़्तों तक रहकर बार-बार लौट सकता है। तेज़ी से सीढ़ियाँ चढ़ने के बाद थोड़ी साँस फूलना सामान्य है। जो साँस फूलना नया हो, आराम करते हुए भी हो, या बढ़ता ही जाए, उसकी वजह डॉक्टर से पता करवानी ज़रूरी है।
इसके लक्षण क्या हैं?
- लगना कि पूरी हवा नहीं मिल रही
- छाती में जकड़न या भारीपन
- साँस लेने में ज़्यादा ज़ोर लगाना, या तेज़-तेज़ साँस
- साँस लेते समय सीटी जैसी आवाज़
- थोड़ी-सी मेहनत पर या सीधे लेटने पर साँस फूलना
यह क्यों होता है, और किसे होने की संभावना ज़्यादा है?
फेफड़े और साँस की नलियाँ
- अस्थमा (दमा)
- छाती का संक्रमण या निमोनिया
- ब्रॉन्काइटिस
- फेफड़ों की पुरानी बीमारी (COPD) या फेफड़ों में निशान पड़ना
रोज़मर्रा की वजहें
- घबराहट या पैनिक अटैक
- एलर्जी, या बंद नाक
- ज़्यादा वज़न
- धूम्रपान
- बहुत ज़्यादा कसरत, या ऊँचाई वाली जगह
इसका पता कैसे चलता है?
साँस फूलना एक लक्षण है, बीमारी नहीं, इसलिए डॉक्टर उसकी वजह ढूँढते हैं — सबसे पहले फेफड़ों और दिल में।
पल्स ऑक्सीमीटर
उँगली पर लगने वाली छोटी क्लिप, जो कुछ ही सेकंड में ऑक्सीजन और दिल की धड़कन दिखा देती है। इसमें दर्द नहीं होता।
छाती का एक्स-रे या CT स्कैन
फेफड़ों और दिल की तस्वीरें, संक्रमण, पानी या निशान देखने के लिए।
फेफड़ों की कार्यक्षमता की जाँच
आप एक मशीन में साँस छोड़ते हैं, जो मापती है कि आप कितनी हवा और कितनी तेज़ी से अंदर-बाहर करते हैं।
ख़ून की जाँच और दिल का स्कैन
ख़ून की जाँच से एनीमिया और संक्रमण का पता चलता है। इकोकार्डियोग्राम (दिल का अल्ट्रासाउंड) दिखाता है कि दिल कितनी अच्छी तरह पंप कर रहा है।
उँगली वाले मीटर पर ऑक्सीजन (SpO2)
स्रोत: MedlinePlus (pulse oximetry)
न्यूरोथेरेपिस्ट सबसे पहले देखता है कि कहीं यह इमरजेंसी तो नहीं। फिर वह आपके इनहेलर, दिल, ब्लड प्रेशर, शुगर और हीमोग्लोबिन के बारे में पूछता है और रिपोर्टें देखता है — क्योंकि इनमें से हर एक से यह बदलता है कि कौन-से पॉइंट दिए जा सकते हैं।
न्यूरोथेरेपी की नज़र से साँस लेने में तकलीफ़
LMNT पद्धति साँस के कंट्रोल सिस्टम को देखती है। साँस का केंद्र गर्दन के ऊपरी हिस्से में, मेडुला में होता है, और यह एक रासायनिक संदेशवाहक — एसिटिलकोलीन — की मदद से काम करता है। इसलिए साँस की तकलीफ़ के मुख्य ट्रीटमेंट Medulla पर दिए जाते हैं — और कौन-सा नंबर दिया जाए, यह इस पर निर्भर करता है कि साँस फूलना किस तरह का है।
एक तकलीफ़, Medulla के तीन नंबर
- (15) Medulla — हमेशा पहलेमाना जाता है कि यह एसिटिलकोलीन को उत्तेजित करता है, जिसकी साँस के केंद्र को ज़रूरत है। ख़ास तौर पर तब, जब सोते समय साँस रुक-रुक कर चलती हो।
- (9) Medulla — ऑक्सीजन कम हैरासायनिक समस्या: गर्दन का ऑक्सीजन सेंसर (कैरोटिड बॉडी) नौवीं नस के ज़रिए ख़बर देता है।
- (11) Medulla — बहुत ज़्यादा साँस फूलनायांत्रिक समस्या: साँस के लिए गर्दन की बड़ी मांसपेशियाँ लगानी पड़ती हैं, और इन्हें ग्यारहवीं नस चलाती है।
- तीन बार, बीच में आराम के साथMedulla का हर ट्रीटमेंट तीन बार दिया जाता है, डेढ़-डेढ़ मिनट के अंतर पर।
Medulla के काम के साथ-साथ, LMNT पद्धति गर्दन, बाँह और पीठ से साँस तक पहुँचती है — Stretch, Electrical Waves और Back Arrow — और Oxygen फ़ॉर्मूला देती है, जिसका एक नामित हिस्सा Stretch है। यह सब शरीर की अपनी साँस को सहारा देता है; यह आपके इनहेलर, ऑक्सीजन या दिल की दवाओं की जगह नहीं लेता।
हमारे ट्रीटमेंट से मरीज़ को तुरंत फ़ायदा हो या न हो, पर हमारी लापरवाही से उसे कोई नुक़सान न पहुँचे — इस पर ध्यान दें।
साँस लेने में तकलीफ़ का न्यूरोथेरेपी इलाज, क़दम-दर-क़दम
पहले जाँच
थेरेपिस्ट पहले यह पक्का करता है कि इमरजेंसी तो नहीं, फिर Liv° और Mu°, ऑक्सीजन की रीडिंग और आपकी रिपोर्टें देखता है, और इनहेलर, दिल, ब्लड प्रेशर व शुगर के बारे में पूछता है।
पहले (15) Medulla
गर्दन के ऊपरी हिस्से में, कानों के नीचे, Medulla के किसी भी दूसरे नंबर से पहले दिया जाता है। इसे ख़ास तौर पर उन लोगों के लिए बताया गया है जिनकी साँस सोते समय रुक-रुक कर चलती है।
Medulla का सही नंबर
जहाँ ऑक्सीजन कम हो, वहाँ (9) Medulla; जहाँ साँस बहुत ज़्यादा फूल रही हो और गर्दन की मांसपेशियाँ साँस में लग रही हों, वहाँ (11) Medulla। हर एक तीन बार, डेढ़-डेढ़ मिनट के अंतर पर।
गर्दन, बाँह और पीठ से
Electrical Waves में कान के पीछे से गर्दन की बगल में नीचे की ओर सहलाया जाता है; Stretch उँगलियों के सिरों से गर्दन को ढीला करता है; Back Arrow, जिसे Blood Supply to Lungs भी कहते हैं, पीठ पर दिया जाता है।
Oxygen फ़ॉर्मूला
उस शरीर के लिए गुरुजी का फ़ॉर्मूला, जिसके ऊतकों को ज़्यादा ऑक्सीजन चाहिए। Stretch इसका एक नामित हिस्सा है।
इस्तेमाल होने वाले पॉइंट और फ़ॉर्मूले
Oxygen फ़ॉर्मूला
ऊतकों और कोशिकाओं तक ऑक्सीजन पहुँचाने की शरीर की अपनी व्यवस्था को सहारा देता है।
खोलें →Medulla, क्रम से बढ़ती शृंखला
गर्दन पर एक ही जगह, अलग-अलग काम के लिए अलग-अलग नंबर — साँस के लिए (15), (9) और (11) बताए गए हैं।
इन पॉइंट्स से काम करता है
खोलें →यह कभी न करें
- पहले इमरजेंसी: होंठ नीले या स्लेटी पड़ना, इतनी हाँफ कि पूरा वाक्य न बोल पाएँ, छाती में दर्द या भारीपन (ख़ासकर बाँह, गर्दन या जबड़े तक जाता हुआ), अचानक उलझन, या ऑक्सीजन 88% या उससे कम — 108/112 पर फ़ोन करें। इसकी जगह कोई ट्रीटमेंट नहीं दिया जाता।
- बहुत कम हीमोग्लोबिन के साथ बैठे-बैठे साँस फूलना, या टखनों की सूजन के साथ साँस फूलना, या जिससे सीधे लेट न पाएँ — आज ही डॉक्टर को दिखाएँ।
- Electrical Waves गर्दन की बड़ी पट्टीनुमा मांसपेशी के पीछे नीचे की ओर दिया जाता है — कभी आगे उसके सामने वाले किनारे पर नहीं, जहाँ दिमाग़ तक जाने वाली बड़ी धमनी है। Electrical Waves
- अगर साँस फूलना अस्थमा की वजह से है, तो Spl, Thrd और Gal नहीं दिए जाते — इनसे तकलीफ़ बढ़ सकती है। अस्थमा
- पेट के बल किसी भी ट्रीटमेंट में, जब छाती के नीचे तकिये हों, तो गले के पास तीन उँगली की जगह छोड़ी जाती है, ताकि साँस आराम से चलती रहे।
- कैंसर: अगर व्यक्ति को कैंसर है, तो (10) Pan, Thymus, Pit, Lu + Sh, Rt. Ov / Lt. Ov और (30) Medulla कभी नहीं दिए जाते — थेरेपिस्ट योजना बदल देता है।
- डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें, और इनहेलर या ऑक्सीजन हमेशा साथ रखें। न्यूरोथेरेपी आपके इलाज के साथ काम करती है, उसकी जगह नहीं।
वीडियो देखें
इसमें LMNT Oxygen फ़ॉर्मूला दिखाया गया है — दमा, साँस फूलने और कम ऑक्सीजन में डॉक्टर के इलाज के साथ सहारे के रूप में।
ध्यान दें: इनहेलर साथ रखें और डॉक्टर की सलाह के अनुसार लें।
LMNT Oxygen फ़ॉर्मूला — डॉक्टरी इलाज के साथ सहारे के रूप में।
आयुर्वेद और रसोई से
अनुलोम-विलोम (नाड़ी-शुद्धि प्राणायाम)
योग का नाड़ी-शुद्धि प्राणायाम — एक नथुने से और फिर दूसरे से शांत, बराबर साँस। पुराने गुरुओं ने देखा कि दोनों नथुने अलग-अलग काम करते हैं, और संतुलन वापस लाने के लिए यह अभ्यास बनाया।
धीमी साँस, लंबी छोड़ी हुई साँस
धीरे-धीरे पाठ करने या धीमी साँस लेने से साँस लगभग छह साँस प्रति मिनट पर आ जाती है, और छोड़ी हुई साँस लंबी हो जाती है। यह उन गिनी-चुनी चीज़ों में है जो इंसान अकेले, एक मिनट में कर सकता है और जिससे शरीर शांत होता है।
ख़ुद को परखें
शोध क्या कहता है
- मज़बूत प्रमाण
साँस की लय मेडुला और पोंस के नस-समूह तय करते हैं। गर्दन की कैरोटिड बॉडी के सेंसर कम ऑक्सीजन पहचानते हैं और ग्लोसोफ़ैरिंजियल (नौवीं) नस से ख़बर भेजते हैं; आम तौर पर साँस को सबसे ज़्यादा कार्बन डाइऑक्साइड चलाती है।
Brinkman JE, Toro F, Sharma S. Physiology, Respiratory Drive. StatPearls. 2023.
साँस की तकलीफ़ में न्यूरोथेरेपी का कोई क्लिनिकल ट्रायल अभी तक प्रकाशित नहीं हुआ है। न्यूरोथेरेपिस्ट जो सुधार बताते हैं, वे क्लिनिकल अवलोकन हैं।
आपके लिए
अस्थमा या फेफड़ों की पुरानी बीमारी वाले
इनहेलर साथ रखें, अपना एक्शन प्लान जानें, और थेरेपिस्ट को बताएँ कि आपके लिए कौन-से पॉइंट मना हैं।
दिल के मरीज़ और बुज़ुर्ग
नया साँस फूलना, टखनों की सूजन या लेटने पर साँस फूलना दिल की वजह से हो सकता है। पहले डॉक्टर को दिखाएँ, और रिपोर्टें साथ लाएँ।
जिनकी साँस सोते समय रुक-रुक कर चलती है
डॉक्टर और थेरेपिस्ट दोनों को बताएँ — अक्सर घर का कोई सदस्य आपसे पहले ये रुकावटें देख लेता है।
घबराहट वाली साँस
धीरे साँस लें और साँस लंबी छोड़ें। अगर साँस फूलना नया है या बहुत ज़्यादा है, तो जाँच करवाएँ — यह न मान लें कि यह सिर्फ़ घबराहट है।
यह पेज समझाता है, जाँच नहीं करता। न्यूरोथेरेपी आपके डॉक्टरी इलाज के साथ काम करती है — डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें, और कोई नया या गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर को दिखाएँ।