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साइनस, बंद नाक और ज़ुकाम

साइनसाइटिस नाक के आसपास की हड्डियों में बनी हवा की खाली जगहों की सूजन है। नाक बंद हो जाती है या बहती है, चेहरा भारी और दुखता लगता है, और एक मामूली ज़ुकाम हफ़्तों की तकलीफ़ बन सकता है।

Front view of a face-shaped skull model showing the sinuses: on the left side the air spaces are clear; on the right side their lining is swollen and they are filled with mucus
साइनस, सामने से। बायाँ हिस्सा: स्वस्थ — माथे (फ़्रंटल) और गाल (मैक्सिलरी) के साइनस साफ़ हवा वाली जगहें हैं, जो छोटे छेदों से नाक में खुलती हैं। दायाँ हिस्सा: साइनसाइटिस — परत सूजी हुई है, छेद बंद हैं और बलगम अंदर फँसा है।
मुख्य बातें
  • अचानक हुआ (एक्यूट) साइनसाइटिस 4 हफ़्ते से कम रहता है; 12 हफ़्ते या उससे ज़्यादा रहे तो उसे पुराना (क्रॉनिक) कहते हैं
  • ज़्यादातर मामले वायरस से होते हैं — वही वायरस जो आम ज़ुकाम करते हैं
  • आम तौर पर यह 4 हफ़्ते के अंदर अपने आप ठीक हो जाता है

स्रोत: MedlinePlus (Sinusitis); Cleveland Clinic (Sinusitis); NHS (Sinusitis)

साइनस, बंद नाक और ज़ुकाम क्या है?

साइनस चेहरे की हड्डियों के अंदर बनी छोटी-छोटी हवा की जगहें हैं — माथे में, गालों में और आँखों के बीच। इनकी परत पतला बलगम बनाती है, जो पेंसिल की नोक जितने छोटे छेदों से नाक में बह जाता है।

साइनसाइटिस में यह परत सूज जाती है, अक्सर ज़ुकाम या एलर्जी के बाद। छेद बंद हो जाते हैं, बलगम अंदर फँस जाता है, और चेहरे में दबाव बनने लगता है। ज़्यादातर तकलीफ़ कुछ हफ़्तों में चली जाती है; कुछ लोगों में यह बार-बार लौटती है या महीनों चलती है।

इसके लक्षण क्या हैं?

  • बंद या बहती नाक
  • गाढ़ा पीला या हरा बलगम, या गले के पीछे बलगम टपकना
  • गालों, आँखों या माथे के आसपास दर्द, दबाव या छूने पर दुखना
  • सूँघने की शक्ति कम होना
  • सिरदर्द, या ऊपर के दाँतों या कानों में दर्द
  • खाँसी, थकान और कभी-कभी बुख़ार

यह क्यों होता है, और किसे होने की संभावना ज़्यादा है?

इन्फ़ेक्शन

नाक की बनावट

  • नाक की बीच की दीवार का टेढ़ा होना, या अंदर छोटे मस्से (पॉलिप)

कमज़ोर रक्षा-शक्ति

  • धुआँ, और कमज़ोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता

इसका पता कैसे चलता है?

ज़्यादातर साइनसाइटिस की पहचान लक्षणों और नाक व चेहरे की जाँच से हो जाती है। जाँचें तब करवाई जाती हैं जब यह बार-बार लौटे, लंबा चले, या कुछ असामान्य दिखे।

नाक और चेहरे की जाँच

डॉक्टर नाक के अंदर देखते हैं और साइनस के ऊपर दबाकर सूजन और दर्द देखते हैं।

नेज़ल एंडोस्कोपी

रोशनी और कैमरे वाली पतली नली से नाक के अंदर और साइनस के छेद दिखते हैं।

सीटी (CT) स्कैन

साइनस को बारीकी से दिखाता है — लंबे चलने वाले साइनसाइटिस में या ऑपरेशन से पहले।

एलर्जी की जाँच

पता लगाती हैं कि कहीं कोई एलर्जी तो बार-बार सूजन शुरू नहीं कर रही।

न्यूरोथेरेपिस्ट पहले ख़तरे वाले सवाल पूछता है — चेहरे के दर्द के साथ बुख़ार, आँख के आसपास सूजन, नज़र में कोई बदलाव। फिर वह सवाल आता है जिसे LMNT पद्धति बीच में रखती है: नाक बंद है, या बह रही है? कौन-से पॉइंट दिए जाएँगे, यह इसी जवाब पर टिका है, और उसी दिन जाँच वाले पॉइंट Liv° और Mu° देखे जाते हैं।

न्यूरोथेरेपी की नज़र से साइनस, बंद नाक और ज़ुकाम

LMNT पद्धति “ज़ुकाम” का इलाज नहीं करती। वह पूछती है कि नाक किस दिशा में जा रही है। बंद नाक और बहती नाक को अलग-अलग पॉइंट दिए जाते हैं — और जो पॉइंट बंद नाक खोलता है, वही बहती नाक को और बहा देगा। इसलिए एक ही व्यक्ति को अलग दिन अलग योजना मिल सकती है।

ख़ुद साइनस के लिए LMNT में Sinus Point दिया जाता है — अंगूठों से गालों, नाक के दोनों तरफ़ और भौंहों पर चार चरणों वाला एक घेरा — और गाल (मैक्सिलरी) व माथे (फ़्रंटल) के साइनस के लिए (5) Medulla। LMNT पद्धति साफ़ बताती है कि यह घेरा क्या है: गाल पर रखा अंगूठा साइनस को ख़ाली नहीं कर सकता, जो हड्डी के अंदर गहरे खुलता है। यह घेरा उन छोटे छेदों के ऊपर से गुज़रता है, जहाँ से चेहरे की नसें हड्डी से बाहर आती हैं।

गुरुजी कहते हैं
मरीज़ को स्वयं आज़माकर देखना है। हर चीज़ का असर हर व्यक्ति पर एक जैसा नहीं होता।
— डॉ. लाजपतराय मेहरा

साइनस, बंद नाक और ज़ुकाम का न्यूरोथेरेपी इलाज, क़दम-दर-क़दम

  1. पहले जाँच-पड़ताल, फिर परीक्षण

    सबसे पहले ख़तरे के संकेत पूछे जाते हैं। फिर थेरेपिस्ट देखता है कि नाक बंद है या बह रही है, और Liv° व Mu° पॉइंट जाँचता है।

  2. Sinus Point और Medulla

    Sinus Point का घेरा अंगूठों से दिया जाता है — हर चरण से पहले मरीज़ को बताकर, और आख़िरी दो चरणों के बीच ऊतक को छोड़े बिना। गाल और माथे के साइनस के लिए (5) Medulla दिया जाता है।

  3. जब नाक बंद हो

    Mu और (6) Adr, जो बंद नाक खोलने में मदद करता है। ATF — Acid Treatment Formula — जोड़ा जा सकता है, पर सिर्फ़ तब, जब उस दिन Mu° में दर्द हो।

  4. जब नाक बह रही हो

    (4) Down Arrow — और चार से ज़्यादा नहीं। हल्के ज़ुकाम और खाँसी में (12) Armpits, और (4) Thrd। Mu, (6) Adr और Spl नहीं दिए जाते।

  5. घर पर

    बहती नाक में दस मिनट बाईं करवट लेटें। नाक धीरे से, दोनों नथुने खुले रखकर साफ़ करें, ताकि बलगम कान की नली में न जाए। सुबह उठते ही ठंडा पानी नहीं, और ठंडे फ़र्श पर पैर रखने से पहले चप्पल।

इस्तेमाल होने वाले पॉइंट और फ़ॉर्मूले

ATF, रूप (a)

Acid Treatment Formula — शरीर को बढ़ा हुआ एसिड घटाने में मदद करता है; LMNT में यह बंद (बहती नहीं) नाक में दिया जाता है, और सिर्फ़ तब, जब Mu° में दर्द हो।

खोलें →

यह कभी न करें

  • चेहरे के दर्द के साथ बुख़ार, गाढ़ा स्राव, आँख या पलक के आसपास सूजन, आँख का बाहर उभरना, दो-दो दिखना या नज़र में कोई भी बदलाव: Sinus Point नहीं दिया जाता — उसी दिन डॉक्टर को दिखाएँ। बहुत तेज़ बुख़ार, बेहोशी-सी उलझन, अकड़ी गर्दन या दौरा — यह इमरजेंसी है। Sinus Point
  • जब नाक बह रही हो, तो Mu, (6) Adr और Spl नहीं दिए जाते। (6) Adr बंद नाक खोलता है और बहती नाक को और बहा देगा; कुछ लोगों में Spl से भी नाक और बहती है। (6) Adr
  • (4) Down Arrow से ज़्यादा नहीं — इसका असर दिमाग़ के आसपास के तरल (CSF) तक पहुँच सकता है। ATF सिर्फ़ तब, जब उस दिन Mu° में दर्द हो। Down Arrow
  • नथुनों में तेल की बूँद सिर्फ़ बड़ों के लिए है। शिशु या छोटे बच्चे की नाक में कभी तेल न डालें — वह फेफड़ों में खिंच सकता है।
  • कैंसर: अगर व्यक्ति को कैंसर है, तो (10) Pan, Thymus, Pit, Lu + Sh, Rt. Ov / Lt. Ov और (30) Medulla कभी नहीं दिए जाते — थेरेपिस्ट योजना बदल देता है।
  • डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें। न्यूरोथेरेपी आपके इलाज के साथ काम करती है, उसकी जगह नहीं।

आयुर्वेद और रसोई से

द्वारों पर तेल — शास्त्रीय सुबह

आयुर्वेद की शास्त्रीय दिनचर्या में तेल नहाने से पहले आता है: हर नथुने में एक बूँद (जिसे नस्य कहते हैं), थोड़ा कानों में, नाभि पर और पूरे शरीर पर, फिर सादे पानी से धोना। LMNT पद्धति भी यही क्रम बताती है — पहले तेल, फिर पानी — बड़ों के लिए।

ख़ुद को परखें

1. LMNT में ज़ुकाम के पॉइंट किस बात से तय होते हैं?

2. चेहरे का कौन-सा दर्द उसी दिन डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है?

3. बंद नाक कैसे साफ़ करनी चाहिए?

शोध क्या कहता है

  • मज़बूत प्रमाण

    बड़ों के साइनसाइटिस के लिए डॉक्टरों की मुख्य गाइडलाइन कहती है कि इलाज चुनने से पहले वायरस वाला साइनसाइटिस — जो ज़ुकाम के बाद आम है — बैक्टीरिया वाले से अलग पहचाना जाए, और लंबे चलने वाले साइनसाइटिस की पुष्टि सिर्फ़ लक्षणों से नहीं, जाँच या स्कैन से की जाए।

    Rosenfeld RM, Piccirillo JF, Chandrasekhar SS, et al. Clinical practice guideline (update): adult sinusitis. Otolaryngol Head Neck Surg. 2015.

साइनसाइटिस में न्यूरोथेरेपी का कोई क्लिनिकल ट्रायल अभी तक प्रकाशित नहीं हुआ है। न्यूरोथेरेपिस्ट जो सुधार बताते हैं, वे क्लिनिकल अवलोकन हैं।

आपके लिए

बच्चे

11 साल या उससे छोटे बच्चे में साइनस के लक्षण हों तो डॉक्टर को दिखाएँ। शिशु की नाक में कभी तेल न डालें।

जिनका साइनस बार-बार लौटता है

अगर यह साल में कई बार लौटे, या लगभग तीन हफ़्ते में ठीक न हो, तो डॉक्टर को दिखाएँ — इसके पीछे कोई एलर्जी या नाक की बनावट हो सकती है।

कमज़ोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग

आपके लिए साइनसाइटिस ज़्यादा गंभीर हो सकता है। इंतज़ार करने के बजाय जल्दी डॉक्टर की सलाह लें।

यह पेज समझाता है, जाँच नहीं करता। न्यूरोथेरेपी आपके डॉक्टरी इलाज के साथ काम करती है — डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें, और कोई नया या गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर को दिखाएँ।

Neurotherapy.Life टीम द्वारा, डॉ. लाजपतराय मेहरा की शिक्षाओं पर आधारित

समीक्षा: डॉ. दिवाकर शुक्ला, वरिष्ठ न्यूरोथेरेपिस्ट

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