ऑटो-इम्यून बीमारियाँ
ऑटो-इम्यून बीमारी में शरीर की रक्षा-व्यवस्था ग़लती से अपनी ही स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला करने लगती है। यह जोड़ों, त्वचा, ग्रंथियों, नसों या लगभग किसी भी अंग पर असर कर सकती है।

- 80 से ज़्यादा तरह की ऑटो-इम्यून बीमारियाँ जानी जाती हैं — कुछ स्रोत 100 से ज़्यादा गिनते हैं
- अमेरिका में लगभग हर 15 में से 1 व्यक्ति को कोई ऑटो-इम्यून बीमारी है
- इनमें से कई बीमारियाँ पुरुषों की तुलना में महिलाओं को कहीं ज़्यादा होती हैं
स्रोत: MedlinePlus (US National Library of Medicine); Cleveland Clinic
ऑटो-इम्यून बीमारियाँ क्या है?
इम्यून सिस्टम शरीर की रक्षा-सेना है। आम तौर पर यह अपनी कोशिकाओं और वायरस-बैक्टीरिया जैसे कीटाणुओं में फ़र्क़ पहचानता है। यह सिर्फ़ कीटाणुओं पर हमला करता है।
ऑटो-इम्यून बीमारी में यह रक्षा गड़बड़ा जाती है और स्वस्थ ऊतक पर हमला करती है। रूमेटॉइड आर्थराइटिस में यह जोड़ों पर हमला करती है; टाइप 1 डायबिटीज़ में पैंक्रियास की इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं पर; एलोपेशिया एरियाटा में बालों की जड़ों पर। ये लंबी चलने वाली बीमारियाँ हैं। लक्षण अक्सर बढ़ते-घटते रहते हैं, और अच्छा डॉक्टरी इलाज इन्हें क़ाबू में रखने में मदद करता है।
इसके लक्षण क्या हैं?
- लालिमा, सूजन, गर्माहट और दर्द — सूजन-जलन के संकेत
- जोड़ों में दर्द, सूजन और जकड़न
- मांसपेशियों की कमज़ोरी
- त्वचा पर लालिमा या चकत्ते
- देखने में परेशानी
- लक्षणों का उभरना — कुछ समय लक्षण बढ़ते हैं, फिर शांत हो जाते हैं
यह क्यों होता है, और किसे होने की संभावना ज़्यादा है?
परिवार और जीन
- ये परिवारों में चलती दिखती हैं
- एक ऑटो-इम्यून बीमारी होने से दूसरी होने की संभावना बढ़ जाती है
बाहर से आने वाले ट्रिगर
- कुछ वायरल इन्फ़ेक्शन
- रसायन और आसपास के वातावरण की दूसरी चीज़ें
- धूम्रपान और तंबाकू
इसका पता कैसे चलता है?
आम तौर पर कोई एक जाँच नहीं होती। डॉक्टर परिवार का इतिहास, समय के साथ आपके लक्षण और कुछ जाँचें मिलाकर देखते हैं — कभी-कभी एक से ज़्यादा विशेषज्ञों की मदद से।
इतिहास और शारीरिक जाँच
डॉक्टर आपके लक्षणों के बारे में पूछते हैं, वे कब बढ़ते-घटते हैं, और क्या परिवार में किसी को ऐसी बीमारी है।
ख़ून की जाँचें
इनसे ऐसे संकेत या मार्कर देखे जाते हैं कि इम्यून सिस्टम शरीर पर हमला कर रहा है।
इमेजिंग
एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, MRI या CT स्कैन से जोड़ या अंग का नुक़सान दिखता है।
पहले सेशन से पहले न्यूरोथेरेपिस्ट पूछता है कि आपको कौन-सी ऑटो-इम्यून बीमारी है, और डायबिटीज़, किडनी की बीमारी, दिल की बीमारी, हाई BP, गर्भावस्था और कैंसर के बारे में भी। फिर जो पॉइंट नहीं देने हैं, उन्हें इलाज शुरू होने से पहले ही आपके कार्ड पर चिह्नित कर दिया जाता है।
न्यूरोथेरेपी की नज़र से ऑटो-इम्यून बीमारियाँ
LMNT पद्धति एक नियम से शुरू होती है: जहाँ इम्यून सिस्टम पहले से उलटा चल रहा हो, वहाँ उसे उत्तेजित नहीं किया जाता। LMNT के कई पॉइंट इम्युनिटी बढ़ाते हैं — Thymus, Thymus + Chest, Armpits, Lymph, Ton 'P', Ton 'T' और Spl। किसी भी ऑटो-इम्यून बीमारी में ये सातों रोक दिए जाते हैं। फिर इसी सीमा के भीतर योजना बनती है — सूजन-जलन शांत करने और लिवर व पाचन को सहारा देने के लिए।
ऑटो-इम्यून बीमारी में LMNT की योजना कैसे बनती है
- पहले रोकइलाज शुरू होने से पहले इम्युनिटी के सातों पॉइंट कार्ड पर 'नहीं देने हैं' के रूप में चिह्नित कर दिए जाते हैं
- सूजन-जलन शांत करना(30) Medulla और (6) Adr — वे पॉइंट जो LMNT सूजन-जलन के लिए देती है
- लिवर को सहारा(1) point Liv × 6 treatments — दिन भर में, एक-एक घंटे के अंतर पर
- Spl के बिना पाचनAjay Normal — पाचन का फ़ॉर्मूला जिसमें तिल्ली का पॉइंट नहीं होता
यह रोक फ़ॉर्मूलों के भीतर भी लागू होती है। T. Heparin, TT. Heparin और PT. Heparin में Thymus + Chest शामिल है, इसलिए ये नहीं दिए जाते। चोट लगी हो, तो Thymus + Chest की जगह (8) Ch. Only और (20) Round Arrow दिए जाते हैं। VTF नहीं दिया जाता। आजकल LMNT कुछ सूजन-जलन वाली बीमारियों में Spl देने लगी है — पर इससे ऑटो-इम्यून वाली रोक पर कोई असर नहीं पड़ता। और क्योंकि LMNT लगभग सभी किडनी की बीमारियों को ऑटो-इम्यून मानती है, किडनी की बीमारी में भी Thymus + Chest नहीं दिया जाता।
रोगी को हमारे इलाज से तुरंत फ़ायदा मिले या न मिले, पर हमारी लापरवाही से उसे कोई नुक़सान न पहुँचे — इसका ध्यान रखिए।
ऑटो-इम्यून बीमारियाँ का न्यूरोथेरेपी इलाज, क़दम-दर-क़दम
पहले जाँच
थेरेपिस्ट जाँच वाले पॉइंट Liv° और Mu° देखता है, रिपोर्टें पढ़ता है, और दिल की बीमारी, हाई BP, इन्फ़ेक्शन और कैंसर के बारे में पूछता है — इनमें से हर एक से तय होता है कि कौन-से पॉइंट दिए जा सकते हैं।
कार्ड पर रोक
Thymus, Thymus + Chest, Lymph, Armpits, Ton 'P', Ton 'T' और Spl को 'नहीं देने हैं' चिह्नित किया जाता है — ताकि न थेरेपिस्ट और न कोई सहायक ग़लती से इन्हें दे।
(30) Medulla और (6) Adr
सूजन-जलन के लिए — सिर्फ़ तब, जब इनकी अपनी रोकें लागू न हों।
(1) point Liv × 6 treatments (लिवर)
एक दिन में छह बार लिवर का ट्रीटमेंट, एक-एक घंटे के अंतर पर — LMNT इसे सभी गंभीर या पुरानी बीमारियों में देती है।
Ajay Normal (अजय नॉर्मल)
पाचन का फ़ॉर्मूला, Spl को निकालकर।
इस्तेमाल होने वाले पॉइंट और फ़ॉर्मूले
(30) Medulla
Medulla की वह गिनती जो LMNT सूजन-जलन में देती है। दिल की बीमारी या इन्फ़ेक्शन वाली बीमारियों में नहीं।
खोलें →(6) Adr
सूजन-जलन के लिए एड्रिनल का पॉइंट। यह इम्युनिटी घटाता है, इसलिए जहाँ इम्युनिटी पहले से कम हो, या हाई BP में, नहीं दिया जाता।
खोलें →(1) point Liv × 6 treatments
एक दिन में छह बार लिवर ट्रीटमेंट, एक-एक घंटे के अंतर पर — गंभीर या पुरानी बीमारी के लिए।
खोलें →यह कभी न करें
- किसी भी ऑटो-इम्यून बीमारी में कभी नहीं: Thymus, Thymus + Chest, Lymph, Armpits, Ton 'P', Ton 'T' और Spl — और न वे फ़ॉर्मूले जिनमें ये शामिल हैं, जैसे T., TT. और PT. Heparin। Th + Ch
- चोट लगी हो, तो Thymus + Chest की जगह (8) Ch. Only और (20) Round Arrow दिए जाते हैं। VTF नहीं दिया जाता। Round Arrow
- (30) Medulla दिल की बीमारी या इन्फ़ेक्शन में नहीं दिया जाता। (6) Adr हाई BP में या जहाँ इम्युनिटी पहले से कम हो, वहाँ नहीं दिया जाता। (30) Medulla
- साँस लेने में तकलीफ़, छाती में तेज़ दर्द, अचानक बहुत तेज़ सिरदर्द, या अचानक कमज़ोरी या लकवा हो, तो तुरंत अस्पताल जाएँ।
- कैंसर: अगर व्यक्ति को कैंसर है, तो (10) Pan, Thymus, Pit, Lu + Sh, Rt. Ov / Lt. Ov और (30) Medulla कभी नहीं दिए जाते — थेरेपिस्ट योजना बदल देता है।
- डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें। न्यूरोथेरेपी आपके इलाज के साथ काम करती है, उसकी जगह नहीं।
आयुर्वेद और रसोई से
विरुद्ध — सही चीज़ें, पर साथ में ग़लत
प्राचीन भारतीय चिकित्सा कुछ भोजन-जोड़ियों को विरुद्ध कहती है: अलग-अलग हर चीज़ ठीक है, पर साथ में या ग़लत समय पर नुक़सान करती है। LMNT की रोक-सूचियाँ भी ऐसे ही काम करती हैं — जो पॉइंट बहुत लोगों की मदद करता है, वह इस शरीर के लिए ग़लत हो सकता है, और नियम के साथ उसका कारण भी लिखा होता है।
ख़ुद को परखें
शोध क्या कहता है
- मज़बूत प्रमाण
इम्यूनोलॉजी की मानक जानकारी बताती है कि थाइमस शरीर के ख़िलाफ़ प्रतिक्रिया करने वाली ज़्यादातर इम्यून कोशिकाओं को हटा देता है, पर कुछ बच निकलती हैं। जीन और बाहरी ट्रिगर बाद में इन्हें सक्रिय करके ऑटो-इम्यून बीमारी पैदा कर सकते हैं।
ऑटो-इम्यून बीमारियों में न्यूरोथेरेपी का कोई क्लिनिकल ट्रायल अभी तक प्रकाशित नहीं हुआ है। न्यूरोथेरेपिस्ट जो सुधार बताते हैं, वे क्लिनिकल अवलोकन हैं।
आपके लिए
डायबिटीज़, रूमेटॉइड आर्थराइटिस या किडनी की बीमारी वाले
आपके लिए भी यही इम्युनिटी वाले पॉइंट रोके जाते हैं। पहले सेशन से पहले थेरेपिस्ट को अपनी हर बीमारी के बारे में बताएँ।
महिलाएँ
कई ऑटो-इम्यून बीमारियाँ महिलाओं में ज़्यादा आम हैं। बार-बार लौटने वाला जोड़ों का दर्द, चकत्ते या थकान डॉक्टर को दिखाने लायक़ हैं।
जिनके लक्षण उभरे हुए हों
अपनी दवाएँ ख़ुद न बदलें, न बंद करें। लक्षण कब बढ़ते-घटते हैं, इसकी डायरी रखें और डॉक्टर व थेरेपिस्ट को दिखाएँ।
यह पेज समझाता है, जाँच नहीं करता। न्यूरोथेरेपी आपके डॉक्टरी इलाज के साथ काम करती है — डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें, और कोई नया या गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर को दिखाएँ।