हाइपोथायरॉइडिज़्म (थायरॉइड का धीमा चलना)
हाइपोथायरॉइडिज़्म का मतलब है कि गर्दन में मौजूद थायरॉइड ग्रंथि अपने हार्मोन कम बनाती है, इसलिए पूरा शरीर धीमा पड़ जाता है — थकान और ठंड लगती है, वज़न बढ़ता है, और पेट साफ़ होना सुस्त हो जाता है।

- 12 साल और उससे बड़ी उम्र के लगभग हर 100 में से 5 लोगों को यह है (अमेरिका के आँकड़े) — ज़्यादातर हल्का
- महिलाओं में, और 60 से ज़्यादा उम्र वालों में कहीं ज़्यादा आम
- यह धीरे-धीरे आता है — लक्षण महीनों या सालों तक पता नहीं चलते
स्रोत: US National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases (NIDDK); MedlinePlus
हाइपोथायरॉइडिज़्म क्या है?
थायरॉइड गर्दन के आगे की एक छोटी, तितली के आकार की ग्रंथि है। इसके हार्मोन, T₃ और T₄, तय करते हैं कि आपका शरीर कितनी तेज़ी से ऊर्जा इस्तेमाल करे — दिल की धड़कन, पाचन, शरीर की गर्मी, यहाँ तक कि मन की हालत भी।
दिमाग़ की पिट्यूटरी ग्रंथि थायरॉइड को TSH नाम का आदेश भेजती है। जब थायरॉइड जवाब नहीं देती, तो पिट्यूटरी और TSH भेजती है — इसलिए रिपोर्ट में ज़्यादा TSH का मतलब है धीमी थायरॉइड। सबसे आम कारण हाशिमोटो रोग है, जिसमें शरीर की रक्षा-प्रणाली ही ग्रंथि पर हमला करती है। घेंघा (goitre) सूजी हुई थायरॉइड को कहते हैं।
इसके लक्षण क्या हैं?
- थकान, सोचने में सुस्ती और भूलना
- वज़न बढ़ना और चेहरे पर सूजन
- दूसरों को न लगे, तब भी ठंड लगना
- कब्ज़
- रूखी त्वचा और रूखे, पतले होते बाल
- ज़्यादा या अनियमित माहवारी; कभी-कभी गर्दन के आगे सूजन (घेंघा)
यह क्यों होता है, और किसे होने की संभावना ज़्यादा है?
इम्यून सिस्टम
थायरॉइड पर हुआ इलाज
- ऑपरेशन जिसमें ग्रंथि का हिस्सा या पूरी ग्रंथि निकाली गई
- गर्दन या थायरॉइड पर रेडिएशन का इलाज
- कुछ दवाएँ
दूसरे कारण
- थायरॉइडाइटिस — थायरॉइड में सूजन
- भोजन में बहुत कम आयोडीन
- कभी-कभार, पिट्यूटरी ग्रंथि की तकलीफ़
किसे ज़्यादा ख़तरा
- महिलाएँ, ख़ासकर प्रसव के बाद या 60 के बाद
- परिवार में थायरॉइड की बीमारी का इतिहास
- पहले कोई थायरॉइड की तकलीफ़, जैसे घेंघा
इसका पता कैसे चलता है?
धीमी थायरॉइड का पता ख़ून की जाँच से चलता है। क्योंकि इसके लक्षण आम हैं और धीरे-धीरे आते हैं, फ़ैसला जाँच से ही होता है।
TSH जाँच
मुख्य जाँच। ज़्यादा TSH का मतलब है कि पिट्यूटरी उस थायरॉइड पर ज़ोर डाल रही है जो जवाब नहीं दे रही।
T₄ और T₃
थायरॉइड के अपने हार्मोन। इनका कम होना, साथ में ज़्यादा TSH, धीमी ग्रंथि की पुष्टि करता है।
एंटीबॉडी और स्कैन
थायरॉइड एंटीबॉडी जाँच हाशिमोटो रोग का पता लगाती है। गर्दन में सूजन हो तो अल्ट्रासाउंड या थायरॉइड स्कैन किया जा सकता है।
न्यूरोथेरेपिस्ट आपका TSH, और उसके साथ free T₄, माँगता है — ताकि लगभग तीन महीने में सुधार को इनसे परखा जा सके — और थकान हो तो हीमोग्लोबिन भी। बहुत सख़्त कब्ज़ वाला बच्चा जो पढ़ाई में धीमा हो, उसे थायरॉइड की ख़ून की जाँच के लिए भेजा जाता है।
न्यूरोथेरेपी की नज़र से हाइपोथायरॉइडिज़्म
न्यूरोथेरेपी में थायरॉइड मिस्त्री है — मुख्य कारीगर, जिसके आदेश के बिना बाक़ी ग्रंथियाँ और अंग अपना काम नहीं करते। और कारीगर को कच्चा माल चाहिए: टायरोसिन, थायरॉइड हार्मोन की ईंट, पाचन के दौरान प्रोटीन से बनता है। इसलिए थायरॉइड की रिपोर्ट अक्सर असल में पेट की रिपोर्ट होती है।
थायरॉइड की कड़ी — और उसे बंद करने वाला घेरा
- पाचनआपके खाए प्रोटीन से टायरोसिन निकालता है
- थायरॉइडउससे T₃ और T₄ बनाती है
- पिट्यूटरीथायरॉइड जवाब न दे तो TSH बढ़ा देती है
- आँतग्रंथि धीमी चले तो सुस्त हो जाती है — मल सूखकर सख़्त हो जाता है
- ख़ून का कैल्शियम9 mg/dl से कम हो तो ग्रंथियों के पास की मांसपेशियाँ ठीक काम नहीं कर पातीं — और ग्रंथि और धीमी हो जाती है
इसलिए काम गर्दन से नहीं, रसोई से शुरू होता है। इसी सोच पर गुरुजी ने माना कि कैल्शियम वाला 1,25 DCC फ़ॉर्मूला हाइपोथायरॉइडिज़्म वालों की मदद करेगा — ख़ासकर उन बच्चों की, जिनमें इसकी वजह से मंद बुद्धि के लक्षण हों।
सिर्फ़ प्रोटीन खा लेना काफ़ी नहीं। असली बात यह है कि वह पचे।
हाइपोथायरॉइडिज़्म का न्यूरोथेरेपी इलाज, क़दम-दर-क़दम
पहले जाँच
थेरेपिस्ट जाँच वाले पॉइंट Liv° और Mu° देखता है, नाभि के आसपास Pan और Const को हल्के से दबाकर देखता है, और TSH व free T₄ पढ़ता है।
पहले पाचन
अगर नाभि के पॉइंट दुखते हैं और पेट सुस्त है, तो पहले पाचन पर काम होता है — कभी-कभी किसी भी ग्रंथि के ट्रीटमेंट से पहले कई सेशन तक। धीमी थायरॉइड की कब्ज़ के लिए Const दिया जाता है।
थायरॉइड का पॉइंट
(4) Thrd, T₃ और T₄ के ज़रिए मेटाबॉलिज़्म बढ़ाता है। यह हथेली के सपाट हिस्से से, हल्के दबाव से, तुरंत छोड़कर दिया जाता है। सिखाने वाले केस में एड्रिनल थायरॉइड से पहले दिया गया, बाद में नहीं — क्रम भी इलाज का हिस्सा है।
P. Heparin और 1,25 DCC
हाइपोथायरॉइडिज़्म के लिए P. Heparin दिया गया है। जहाँ हाइपोथायरॉइडिज़्म के साथ मंद बुद्धि हो, ख़ासकर बच्चों में, वहाँ 1,25 DCC फ़ॉर्मूला दिया जाता है।
घेंघा, और धीमी थायरॉइड से होने वाली तकलीफ़ें
घेंघा के लिए LMNT पद्धति (2) Pan देती है, और जिन्हें उससे फ़ायदा न हो उन्हें (10) Pan — इस बात पर LMNT पद्धति ने ख़ुद सवालिया निशान लगाया है। जहाँ डायबिटीज़ या दिल की बीमारी हाइपोथायरॉइडिज़्म से आई हो, वहाँ (10) Pan; दिल के रोगियों में (4) Thrd की जगह (2) Thrd।
इस्तेमाल होने वाले पॉइंट और फ़ॉर्मूले
P. Heparin (प्लाज़्मिन)
Heparin परिवार का मूल फ़ॉर्मूला, जिसके बारे में लिखा है कि यह सब रोगियों को दिया जा सकता है; हाइपोथायरॉइडिज़्म के लिए दिया गया है।
इन पॉइंट्स से काम करता है
खोलें →यह कभी न करें
- घेंघा हो, या थायरॉइड तेज़ चल रहा हो: गर्दन पर कोई भी काम नहीं। गर्दन के आगे या बग़ल में कभी भी दबाव नहीं — न पैर से, न हाथ से। गर्दन
- दिल के रोगियों में (4) Thrd नहीं — उसकी जगह (2) Thrd। दमे में भी नहीं, क्योंकि खाँसी बढ़ती है, और बैम्बू स्पाइन या स्पर में भी नहीं। (4) Thrd
- Thrd हथेली के सपाट हिस्से से, हल्का और तुरंत छोड़कर दिया जाता है — उँगली के सिरे से कभी नहीं, पकड़कर रखना कभी नहीं। Thrd
- गर्दन की सूजन के साथ साँस लेने में तकलीफ़ या साँस में घरघराहट हो, तो इमरजेंसी में मदद लें। नया गर्दन दर्द या अलग तरह का सिरदर्द, साथ में धुँधला दिखना, ज़बान लड़खड़ाना या सुन्नपन: रुकिए, और तुरंत डॉक्टर को दिखाइए।
- कैंसर: अगर व्यक्ति को कैंसर है, तो (10) Pan, Thymus, Pit, Lu + Sh, Rt. Ov / Lt. Ov और (30) Medulla कभी नहीं दिए जाते — थेरेपिस्ट योजना बदल देता है।
- थायरॉइड धीमा है, यह ख़ून की जाँच से पता चलता है और इसका इलाज गोली से होता है। डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें — किसी दर्द वाले पॉइंट का दर्द शांत हो गया, सिर्फ़ इस वजह से गोली कभी बंद न करें। न्यूरोथेरेपी आपके इलाज के साथ काम करती है, उसकी जगह नहीं।
वीडियो देखें
हाइपोथायरॉइड के एक फ़ॉर्मूले की स्टेप-बाय-स्टेप ट्रेनिंग — कुर्सी के किनारे बिठाकर 40 सेकंड Half Kundli, गर्दन के दोनों तरफ़ (6) Medulla, कोहनी और कंधे के पास 4 Thyroid-P, और गर्दन के निचले हिस्से पर 4 Thyroid। धीमी थायरॉइड को सहारा देने के लिए यह बिना गैप के लगातार दिया जाता है।
ध्यान दें: LMNT में Thrd हथेली के सपाट हिस्से से दिया जाता है, उँगली की नोक से नहीं, और गॉइटर में गर्दन पर कोई काम नहीं। थायरॉइड की गोली लेते रहें।
इसमें दिखाया गया है कि जाँघ और बाँह पर 1 पॉइंट Gal, 1 पॉइंट Liv और 1 पॉइंट Mucus छह बार, हर बार एक मिनट के गैप से, खुद को कैसे दें — भोजन से पहले और बाद में। इसे थायरॉइड में बढ़ते वज़न और थकान के लिए घर पर सहारे के रूप में बताया गया है।
ध्यान दें: यह तरीका पाचन को सहारा देता है; थायरॉइड की गोली की जगह नहीं लेता।
थायरॉइड के एक ट्रीटमेंट का क़दम-दर-क़दम प्रशिक्षण प्रदर्शन, हिंदी में।
अभ्यास से
टीचर, जिसकी थायरॉइड रिपोर्ट ठीक नहीं हो रही थी
सिखाने के लिए केस — अभ्यास से जोड़ा गया, किसी एक मरीज़ की फ़ाइल नहीं
44 साल · थकान, बढ़ता वज़न और तीन साल से बढ़ा हुआ TSH
- क्या मिला
- “वे गोली बढ़ाते जाते हैं और मैं और थकती जाती हूँ।” ठंडे हाथ, पतले होते बाल, पिंडलियों की रूखी त्वचा — और सीधे पूछने पर, दो-तीन दिन में एक बार सख़्त मोशन, “पर मेरे लिए तो यही सामान्य है।” Pan और Const पर दर्द मिला, और दोनों पर वह चौंक गई: “मेरे पेट में तो कोई ख़राबी नहीं है।”
- क्या किया गया
- “हाइपोथायरॉइडिज़्म का ट्रीटमेंट” नहीं। किसी ग्रंथि का ट्रीटमेंट जोड़ने से पहले नौ सेशन तक पाचन पर काम हुआ — ताकि जो प्रोटीन वह खाती थी, उससे वह निकले जो थायरॉइड को चाहिए। ग्रंथि का काम शुरू हुआ तो एड्रिनल थायरॉइड से पहले दिया गया। दूसरे हफ़्ते तक रोज़ पेट साफ़ होने लगा; सातवें हफ़्ते में उसके अपने डॉक्टर ने TSH कम पाया और दवा की मात्रा नहीं बदली।
- इससे सीख
- नौवें हफ़्ते में दो हफ़्ते के लिए वह पीछे चली गई। पूछा गया कि अब उसकी सुबह कैसी होती है, तो पता चला कि स्कूल खुल गया था और वह ग्यारह मिनट में गलियारे में खड़े-खड़े दोपहर का खाना खा रही थी। ट्रीटमेंट में कुछ ग़लत नहीं था — जिन तकलीफ़ों को वह छोटी समझती थी (बाल, त्वचा, पेट), वही सबसे पहले बताती थीं कि इलाज असर कर रहा है या नहीं।
आयुर्वेद और रसोई से
ख़ुद को परखें
शोध क्या कहता है
- मज़बूत प्रमाण
हाइपोथायरॉइडिज़्म पर एक बड़ी समीक्षा: यह आम है, इसका पता TSH और free T₄ की ख़ून की जाँच से चलता है, और दुनिया भर में इसका मुख्य कारण आयोडीन की कमी है, और जहाँ आयोडीन पूरा है वहाँ ऑटो-इम्यून थायरॉइड रोग।
Chaker L, Bianco AC, Jonklaas J, Peeters RP. Hypothyroidism. Lancet. 2017.
हाइपोथायरॉइडिज़्म में न्यूरोथेरेपी का कोई क्लिनिकल ट्रायल अभी तक प्रकाशित नहीं हुआ है। न्यूरोथेरेपिस्ट जो सुधार बताते हैं, वे क्लिनिकल अवलोकन हैं।
आपके लिए
महिलाएँ
हाइपोथायरॉइडिज़्म महिलाओं में कहीं ज़्यादा आम है, ख़ासकर प्रसव के बाद और 60 के बाद। थकान के साथ ज़्यादा या अनियमित माहवारी हो, तो थायरॉइड की जाँच करवाना ठीक है।
बच्चे
बहुत सख़्त कब्ज़ वाले बच्चे की, जिसकी स्कूल रिपोर्ट कहे कि वह धीमा है, थायरॉइड की आसान ख़ून की जाँच होनी चाहिए — ठीक हो सकने वाला कारण छूटना नहीं चाहिए।
थायरॉइड की गोली लेने वाले
इसे वैसे ही लें जैसे डॉक्टर ने बताया है, और जब डॉक्टर कहें तब TSH दोबारा जँचवाएँ। दवा की मात्रा सिर्फ़ आपके डॉक्टर बदलते हैं।
यह पेज समझाता है, जाँच नहीं करता। न्यूरोथेरेपी आपके डॉक्टरी इलाज के साथ काम करती है — डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें, और कोई नया या गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर को दिखाएँ।