Neurotherapy.Life
रोग · दिमाग़, नसें और मन

पोलियो और उसके बाद के असर

पोलियो एक वायरस का संक्रमण है, जो रीढ़ की नस (spinal cord) की उन नस-कोशिकाओं को नुक़सान पहुँचा सकता है जो मांसपेशियों को चलाती हैं — इससे बाँह या टाँग कमज़ोर और पतली रह जाती है। यह कमज़ोरी आम तौर पर ज़िंदगी भर रहती है, पर अच्छी देखभाल से रोज़ की ज़िंदगी ज़्यादा मज़बूत और आसान हो सकती है।

A section of the spinal cord with a nerve running to the thigh and calf muscles; two magnified circles compare healthy motor nerve cells and a full muscle with damaged nerve cells and a thin, weak muscle
रीढ़ की नस को आड़ा काटकर दिखाया गया है, साथ में वह नस जो उससे टाँग की मांसपेशियों तक जाती है। बायाँ घेरा: नस के अगले हिस्से में स्वस्थ चलाने वाली नस-कोशिकाएँ, और भरी हुई मज़बूत मांसपेशी। दायाँ घेरा: पोलियो — चलाने वाली नस-कोशिकाएँ ख़राब हो गई हैं, मांसपेशी तक कम संदेश पहुँचते हैं, और मांसपेशी पतली व कमज़ोर हो गई है। महसूस करने का काम दूसरी नसें करती हैं, इसलिए अक्सर महसूस होना बना रहता है।
मुख्य बातें
  • पोलियो के लगभग 200 में से 1 संक्रमण से लंबे समय तक रहने वाला लकवा होता है
  • यह मुख्य रूप से 5 साल से छोटे उन बच्चों को होता है जिन्हें टीका नहीं लगा
  • हर 100 में से 25 से 40 बचे हुए लोगों में 15 से 40 साल बाद नई कमज़ोरी आती है (पोस्ट-पोलियो सिंड्रोम)

स्रोत: World Health Organization; CDC; NHS

पोलियो और उसके बाद के असर क्या है?

पोलियो (पोलियोमाइलाइटिस) एक वायरस से होता है, जो एक इंसान से दूसरे में फैलता है — ज़्यादातर संक्रमित मल से गंदे हुए हाथ, खाने या पानी से। ज़्यादातर संक्रमित लोगों में कोई लक्षण नहीं दिखता। लगभग 4 में से 1 को कुछ दिन फ़्लू जैसी बीमारी होती है।

कुछ लोगों में यह वायरस रीढ़ की नस में सूजन-जलन पैदा करता है और मांसपेशियों को चलाने वाली नस-कोशिकाओं को नुक़सान पहुँचाता है। जिन मांसपेशियों को ये कोशिकाएँ चलाती थीं, वे कमज़ोर और ढीली हो जाती हैं, और समय के साथ पतली। कोई दवा ख़त्म हुई नस-कोशिकाओं को वापस नहीं ला सकती, इसलिए देखभाल फ़िज़ियोथेरेपी, कसरत, ब्रेस और कभी-कभी ऑपरेशन पर टिकी होती है। टीका पोलियो से बचाता है।

इसके लक्षण क्या हैं?

  • शुरुआत में: बुख़ार, थकान, सिरदर्द, उल्टी, गर्दन में अकड़न और मांसपेशियों में दर्द
  • टाँग या बाँह में अचानक कमज़ोरी या ढीलापन
  • बाद में: पतला, कमज़ोर अंग, लँगड़ाना, या मुड़ता हुआ पैर
  • ज़्यादा ज़ोर पड़ने से जोड़ों में दर्द और थकान
  • सालों बाद: नई कमज़ोरी, थकान या दर्द (पोस्ट-पोलियो सिंड्रोम)

यह क्यों होता है, और किसे होने की संभावना ज़्यादा है?

वायरस

  • पोलियो वायरस, जो मल से गंदे हाथ, खाने या पानी से फैलता है
  • कभी-कभी खाँसी और छींक से भी

किसे ख़तरा है

  • 5 साल से छोटे बच्चे
  • जिसे टीके की सारी ख़ुराकें नहीं लगीं

पोलियो के सालों बाद

इसका पता कैसे चलता है?

पुराना पोलियो आम तौर पर इतिहास से पता चलता है — बचपन में बुख़ार और उसके बाद कमज़ोरी। सालों बाद आई नई कमज़ोरी के लिए डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है, ताकि दूसरी वजहें अलग की जा सकें।

EMG और नर्व कंडक्शन

मांसपेशियों के छोटे-छोटे बिजली के संकेतों की जाँच, और यह कि नसें उन्हें कितनी तेज़ी से ले जाती हैं।

MRI या CT स्कैन

रीढ़ की तस्वीरें, ताकि दूसरी तकलीफ़ें — जैसे घिसी हुई रीढ़ का नसों को दबाना — अलग की जा सकें।

ख़ून की जाँच

पोस्ट-पोलियो सिंड्रोम में आम तौर पर सामान्य रहती है; असामान्य नतीजा किसी दूसरी वजह की ओर इशारा करता है।

पहले ट्रीटमेंट से पहले न्यूरोथेरेपिस्ट इम्यूनिटी (कैंसर, HIV, गंभीर संक्रमण), दिल और पेट के बारे में पूछता है, छूकर देखता है कि दोनों पिंडलियों का तापमान एक-सा है और कोई गरम या सूजी तो नहीं, और जाँचता है कि आपको छूना महसूस होता है और आप दर्द बता सकते हैं।

न्यूरोथेरेपी की नज़र से पोलियो और उसके बाद के असर

LMNT पद्धति सबसे पहले नाम पढ़ती है। पोलियो-माइलाइटिस: मायल यानी रीढ़ की नस, -आइटिस यानी सूजन-जलन। इसलिए पोलियो को सूजन-जलन वाली बीमारी मानकर, सूजन ख़त्म करने वाले पॉइंट से इलाज किया जाता है। LMNT पद्धति लकवे को पलटने या वायरस से लड़ने का दावा नहीं करती। वह हर पॉइंट को एक योजना में उसका अपना काम देती है — और अपनी सीमा साफ़ बताती है।

एक बीमारी, चार काम

  1. सूजन-जलन ख़त्म करना(6) Adr × 3 treatments — हर उस बीमारी का पॉइंट जिसके नाम के आख़िर में -आइटिस हो
  2. कमज़ोर अंग तक ख़ून पहुँचानाBlood Supply to Legs — टाँगों और जाँघों की कमज़ोरी और सुन्नपन के लिए
  3. एक समूह को रोकनाThymus, Thymus + Chest, Armpit, Lymph, Ton 'P' और Ton 'T' नहीं दिए जाते
  4. एक सवाल खुला रखनाSpl — गुरुजी ने इसे सवाल के रूप में लिखा: पोलियो के रोगियों पर आज़माकर देखना है कि फ़ायदा होता है या नहीं

रगड़ने से टाँग चलने को तैयार होती है; इस्तेमाल करने से टाँग मज़बूत होती है। LMNT का सहारा आराम, अकड़न और रोज़ के काम में मदद कर सकता है, और मरीज़ ट्रीटमेंट के बाद बेहतर महसूस करना बताते हैं — पर ताक़त कसरत, फ़िज़ियोथेरेपी और ब्रेस से ही आती है।

गुरुजी कहते हैं
इस थेरेपी में हम बीमारी का इलाज नहीं करते, बल्कि शरीर को सुधारते हैं।
— डॉ. लाजपतराय मेहरा

पोलियो और उसके बाद के असर का न्यूरोथेरेपी इलाज, क़दम-दर-क़दम

  1. पहले जाँच

    थेरेपिस्ट Liv° और Mu° देखता है, इम्यूनिटी और दिल के बारे में पूछता है, और जाँचता है कि दोनों पिंडलियों का तापमान एक-सा हो और कोई गरम, सूजी या दुखती न हो।

  2. सूजन-जलन ख़त्म करना

    (6) Adr × 3 treatments पोलियो में दिया जाता है क्योंकि यह सूजन-जलन वाली बीमारी है — पर सिर्फ़ तब, जब इम्यूनिटी ठीक हो।

  3. टाँगों तक ख़ून पहुँचाना (Blood Supply to Legs)

    पेट के बल, टाँगें ढीली, पंजे बाहर की ओर। थेरेपिस्ट आपकी एड़ियों की तरफ़ मुँह करके खड़ा होता है और तलवे के नरम बीच वाले हिस्से को हर जाँघ के पीछे कूल्हे से घुटने तक धीरे से सरकाता है — आम तौर पर हर टाँग पर 30 बार।

  4. ITF, दो दिन में

    पहला दिन: (30) Medulla, फिर (6) Adr दो बार। दूसरा दिन: (6) Adr तीन बार। पोलियो उन हालतों में है जिनके लिए यह बताया गया है।

  5. अंग का इस्तेमाल, और पाचन ठीक करना

    रोज़ गिनकर सीढ़ियाँ चढ़ना और उठना-बैठना, जो मरीज़ ख़ुद करे, ताक़त लाता है। कब्ज़ हो, तो उसका इलाज साथ-साथ चलता है।

इस्तेमाल होने वाले पॉइंट और फ़ॉर्मूले

(6) Adr × 3 treatments

सूजन-जलन के लिए LMNT का मुख्य ट्रीटमेंट, तीन अलग-अलग बार दिया जाता है।

इन पॉइंट्स से काम करता है

खोलें →

ITF

(30) Medulla और (6) Adr की दो दिन की योजना, जो दूसरी हालतों के साथ पोलियो के लिए भी बताई गई है।

इन पॉइंट्स से काम करता है

खोलें →

यह कभी न करें

  • पोलियो में Thymus, Thymus + Chest, Armpit, Lymph, Ton 'P' और Ton 'T' नहीं दिए जाते। Th + Ch
  • (6) Adr इम्यूनिटी घटाता है, इसलिए जहाँ इम्यूनिटी पहले से कम हो — सेप्टीसीमिया, HIV/AIDS, कैंसर — वहाँ नहीं दिया जाता। (6) Adr
  • दिल के मरीज़ों को (30) Medulla नहीं दिया जाता; ज़रूरत हो, तो (6) Adr मरीज़ को बिठाकर दिया जाता है। (30) Medulla
  • Blood Supply to Legs धीरे से सरकाया जाता है, ताकि त्वचा को चोट न लगे। गरम, सूजी, दुखती पिंडली को कभी नहीं रगड़ा जाता — तुरंत डॉक्टर को दिखाएँ। Blood Supply to Legs
  • बच्चों को बड़ों की आधी ख़ुराक और सिर्फ़ हल्का ट्रीटमेंट दिया जाता है, वह भी प्रशिक्षित थेरेपिस्ट से।
  • नया बुख़ार, गर्दन में अकड़न और नई कमज़ोरी, या साँस लेने या निगलने में कोई भी तकलीफ़ हो — तुरंत अस्पताल जाएँ।
  • कैंसर: अगर व्यक्ति को कैंसर है, तो (10) Pan, Thymus, Pit, Lu + Sh, Rt. Ov / Lt. Ov और (30) Medulla कभी नहीं दिए जाते — थेरेपिस्ट योजना बदल देता है।
  • डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें, और फ़िज़ियोथेरेपी, कसरत और ब्रेस जारी रखें। न्यूरोथेरेपी आपके इलाज के साथ काम करती है, उसकी जगह नहीं।

अभ्यास से

पतली बाईं टाँग वाला लड़का

सिखाने के लिए केस — अभ्यास से जोड़ा गया, किसी एक मरीज़ की फ़ाइल नहीं

9 साल · अठारह महीने की उम्र में बुख़ार के बाद बाईं टाँग ठीक से नहीं बढ़ी; स्कूल की सीढ़ियों में दिक़्क़त

क्या मिला
बाईं पिंडली और जाँघ पतली थीं, पैर थोड़ा अंदर मुड़ा था, पर छूना महसूस होता था और दोनों पिंडलियों का तापमान एक-सा था। उसे कब्ज़ भी थी। माँ को पहले ही दिन बता दिया गया: नस का पुराना नुक़सान पलटेगा नहीं, पर बहुत कुछ और सुधर सकता है।
क्या किया गया
Blood Supply to Legs, हर जाँघ पर 30 बार, साथ में कब्ज़ का इलाज। तीसरे हफ़्ते तक वह हर क़दम पर रेलिंग पकड़े बिना सीढ़ियाँ चढ़ने लगा; पतली पिंडली मोटी नहीं हुई। छठे हफ़्ते में रोज़ गिनकर सीढ़ियाँ चढ़ना और उठना-बैठना जोड़ा गया, और आगे का सुधार उसी से आया।
इससे सीख
नौवें हफ़्ते में वह पीछे खिसक गया — एक टीचर ने कह दिया था कि वह कभी कबड्डी नहीं खेल पाएगा, और उसने सीढ़ियाँ छोड़ दीं। सीमा पहले ही साफ़ बताएँ, रगड़ना और इस्तेमाल दोनों दें, और सिर्फ़ माता-पिता से नहीं, बच्चे से भी पूछें।

आयुर्वेद और रसोई से

ख़ुद को परखें

1. पोलियो मुख्य रूप से कैसे फैलता है?

2. बच्चे को पोलियो से क्या बचाता है?

3. LMNT में पोलियो में कौन-से पॉइंट नहीं दिए जाते?

शोध क्या कहता है

  • मज़बूत प्रमाण

    पोलियो मुख्य रूप से 5 साल से छोटे बच्चों को होता है और ज़्यादातर मल-मुँह के रास्ते फैलता है। 200 में से 1 संक्रमण से लंबे समय तक रहने वाला लकवा होता है, और 1988 से अब तक मामले 99% से ज़्यादा घट गए हैं।

    World Health Organization. Poliomyelitis — fact sheet. WHO. 2024.

  • मज़बूत प्रमाण

    पोलियो वायरस रीढ़ की नस में सूजन-जलन पैदा करता है और उसके अगले हिस्से की चलाने वाली नस-कोशिकाओं को नष्ट करता है। कम से कम 15 साल बाद बहुत से बचे हुए लोगों में नई कमज़ोरी, थकान, कम नींद और दर्द आता है — यही पोस्ट-पोलियो सिंड्रोम है।

    Li Hi Shing S, Chipika RH, Finegan E, Murray D, Hardiman O, Bede P. Post-polio Syndrome: More Than Just a Lower Motor Neuron Disease. Frontiers in Neurology. 2019;10:773.

पोलियो या उसके बाद के असर में न्यूरोथेरेपी का कोई क्लिनिकल ट्रायल अभी तक प्रकाशित नहीं हुआ है। न्यूरोथेरेपिस्ट जो सुधार बताते हैं, वे क्लिनिकल अवलोकन हैं।

आपके लिए

माता-पिता

पक्का करें कि बच्चे को पोलियो टीके की हर ख़ुराक लगे। अगर बच्चे को पोलियो हो चुका है, तो फ़िज़ियोथेरेपी और रोज़ की कसरत जारी रखें, और बच्चे से पूछें कि वह कैसा महसूस करता है — हौसला ही योजना को आगे ले जाता है।

जिन बड़ों को बचपन में पोलियो हुआ था

काम धीरे-धीरे करें और बार-बार आराम करें। ताक़त के लिए कसरत करें, पर दर्द या थकावट आने से पहले रुक जाएँ। नई कमज़ोरी डॉक्टर को बताएँ।

घर और रोज़ की ज़िंदगी

जहाँ ज़रूरत हो, पकड़ने की रेलिंग, ऊँची टॉयलेट सीट और चलने का सहारा ताक़त बचाते हैं और गिरने से बचाते हैं।

यह पेज समझाता है, जाँच नहीं करता। न्यूरोथेरेपी आपके डॉक्टरी इलाज के साथ काम करती है — डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें, और कोई नया या गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर को दिखाएँ।

Neurotherapy.Life टीम द्वारा, डॉ. लाजपतराय मेहरा की शिक्षाओं पर आधारित

समीक्षा: डॉ. दिवाकर शुक्ला, वरिष्ठ न्यूरोथेरेपिस्ट

अपडेट:

Ready to begin?

Send COURSE for course details, or your name, age and health issue for a consultation.

Share