आर्थराइटिस और जोड़ों का दर्द (ऑस्टियोआर्थराइटिस)
आर्थराइटिस का मतलब है दुखता, जकड़ा हुआ जोड़। इसका सबसे आम रूप ऑस्टियोआर्थराइटिस है, जिसमें हड्डियों के सिरों पर चढ़ा चिकना कार्टिलेज धीरे-धीरे घिसकर खुरदुरा हो जाता है — सबसे ज़्यादा घुटनों, कूल्हों, हाथों, गर्दन और कमर में।

- 2019 में लगभग 52.8 करोड़ लोगों को ऑस्टियोआर्थराइटिस था — 1990 से 113% ज़्यादा
- सबसे ज़्यादा घुटना प्रभावित होता है (36.5 करोड़ लोग), फिर कूल्हा और हाथ
- इससे प्रभावित लगभग 73% लोग 55 से ज़्यादा उम्र के हैं, और 60% महिलाएँ हैं
- एक्स-रे में दिखने वाला आर्थराइटिस, दर्द देने वाले आर्थराइटिस से कम से कम दोगुना आम है
स्रोत: World Health Organization (Osteoarthritis fact sheet); Sen & Hurley, StatPearls 2023
आर्थराइटिस और जोड़ों का दर्द क्या है?
जोड़ वह जगह है जहाँ दो हड्डियाँ मिलती हैं। उनके सिरों पर चिकना, रबड़ जैसा कार्टिलेज होता है, थोड़ा-सा तरल उन्हें फिसलनदार रखता है, और एक मज़बूत थैली (कैप्सूल) और लिगामेंट उन्हें जोड़े रखते हैं।
ऑस्टियोआर्थराइटिस में कार्टिलेज टूटने लगता है और खुरदुरा हो जाता है। हिलने-डुलने में दर्द होने लगता है, और समय के साथ हड्डियाँ आपस में रगड़ खा सकती हैं। यह सिर्फ़ जोड़ों पर असर करता है। जोड़ों का दर्द दूसरी बीमारियों से भी हो सकता है — रूमेटॉइड आर्थराइटिस, गाउट, चोट या इन्फ़ेक्शन — इसलिए यह जानना ज़रूरी है कि दर्द किस तरह का है।

इसके लक्षण क्या हैं?
- जोड़ हिलाने पर दर्द, जो आराम करने से कम हो जाता है
- सुबह जकड़न, आम तौर पर लगभग आधे घंटे तक
- सूजन, ख़ासकर जोड़ से ज़्यादा काम लेने के बाद
- हिलना-डुलना कम — जोड़ पूरा मुड़ता या सीधा नहीं होता
- जोड़ ढीला या डगमगाता-सा लगना
यह क्यों होता है, और किसे होने की संभावना ज़्यादा है?
उम्र और इस्तेमाल
- 50 से ज़्यादा उम्र — ख़ासकर महिलाओं में
- बरसों तक कूदना, मुड़ना-घूमना, दौड़ना या फेंकने वाले काम
चोट और बनावट
- जोड़ की कोई पुरानी चोट या ऑपरेशन
- टेढ़े या अपनी सीध से हटे जोड़
बोझ और परिवार
- शरीर का ज़्यादा वज़न
- परिवार में आर्थराइटिस
जोड़ों की दूसरी बीमारियाँ
इसका पता कैसे चलता है?
ऑस्टियोआर्थराइटिस की कोई एक जाँच नहीं है। डॉक्टर आपके दर्द के बारे में पूछता है, जोड़ों की जाँच करता है, और जोड़ की तस्वीरें करवाता है — कभी-कभी दूसरे तरह के आर्थराइटिस को अलग करने के लिए खून की जाँच भी।
एक्स-रे
हड्डियाँ और उनके बीच की जगह दिखाता है। पर इससे यह पता नहीं चलता कि जोड़ कितना दुखेगा — घिसे दिखने वाले बहुत-से जोड़ बिल्कुल नहीं दुखते।
एमआरआई (MRI)
नरम हिस्से दिखाता है — कार्टिलेज, लिगामेंट और जोड़ की अंदरूनी परत — जब एक्स-रे से दर्द समझ न आए।
खून की जाँच
ख़ुद ऑस्टियोआर्थराइटिस के लिए नहीं, बल्कि रूमेटॉइड आर्थराइटिस या गाउट जैसे दूसरे कारणों को अलग करने के लिए।
न्यूरोथेरेपिस्ट को पहली जाँच के लिए किसी मशीन की ज़रूरत नहीं: दो उँगलियाँ, दो किडनी पॉइंट और सुबह के बारे में एक सवाल। दोनों अनामिका (रिंग फ़िंगर) उँगलियों के बीच वाले जोड़ एक साथ दबाकर मिलाए जाते हैं, और Liv° और Mu° दबाए जाते हैं। किस तरफ़ ज़्यादा दर्द है, इससे फ़ॉर्मूला तय होता है। और मल के बारे में पूछा जाता है, क्योंकि अनपचा भोजन मिले तो पहला काम बदल जाता है।
न्यूरोथेरेपी की नज़र से आर्थराइटिस और जोड़ों का दर्द
न्यूरोथेरेपी पूछती है कि शरीर किस तरफ़ झुका है। जिस जोड़ में ख़ून कम पहुँचता है, वह एक ऐसे छोटे कमरे जैसा है जिसकी खिड़की आधी बंद हो: अंदर के काम से बासी हवा बनती है, और जमा होती जाती है। ट्रीटमेंट खिड़की खोलता है। अनामिका उँगलियाँ और किडनी पॉइंट बताते हैं कि जोड़ एसिड की तरफ़ है या अल्कली की तरफ़ — और हर तरफ़ के लिए अलग फ़ॉर्मूला है।
गुरुजी की 19 अप्रैल 1990 की डायरी में जोड़ों के दर्द, घुटनों के दर्द और हड्डियों-जोड़ों के घिसने को उन बीमारियों में गिना गया है जिनमें अनपचा भोजन मिलता है — इसलिए जहाँ मल में यह दिखे, वहाँ पहले पाचन ठीक किया जाता है। Liv° और Mu° दोनों पर दर्द हो तो Lactic Acid फ़ॉर्मूला। बरसों पुराने जोड़ों के दर्द के लिए (10) Pan, जकड़न के लिए (4) Ku, और Raman।
न्यूरोथेरेपी शरीर की हालत के अनुसार इलाज करती है।
आर्थराइटिस और जोड़ों का दर्द का न्यूरोथेरेपी इलाज, क़दम-दर-क़दम
पहले जाँच
कोई भी फ़ॉर्मूला चुनने से पहले थेरेपिस्ट दोनों अनामिका उँगलियों के बीच वाले जोड़ एक साथ दबाता है, दोनों किडनी पॉइंट Liv° और Mu° देखता है, और मल और सुबह के बारे में पूछता है।
पहले पाचन
जहाँ मल में अनपचा भोजन दिखे, वहाँ जोड़ों के काम से पहले अनपचे भोजन का ट्रीटमेंट दिया जाता है।
जाँच के हिसाब से Star फ़ॉर्मूला चुनना
Mu° पर तेज़ दर्द, और साथ में दोनों अनामिका में बराबर दर्द, या बाईं में ज़्यादा, या Mu° पर Liv° जितना या उससे ज़्यादा दर्द: New Star Modified, उसके बाद All Joints घिसाई। दोनों अनामिका में दर्द और Liv° पर तेज़ दर्द, या दाईं उँगली में ज़्यादा: Alkaline Star।
जो मिले, उसके हिसाब से सहारा
Liv° और Mu° दोनों पर दर्द: Lactic Acid फ़ॉर्मूला। बरसों पुराना जोड़ों का दर्द: (10) Pan। जकड़न: (4) Ku। Raman भी दिया जा सकता है।
खट्टी चीज़ें थाली से दूर
जोड़ों के दर्द वालों को खट्टी चीज़ों — दही, इमली, टमाटर और नींबू — से दूर रहने को कहा जाता है, और ख़ुद देखने को कहा जाता है कि जोड़ों को कैसा लगता है।
इस्तेमाल होने वाले पॉइंट और फ़ॉर्मूले
New Star Modified
एसिड वाली तरफ़ के जोड़ों के दर्द के लिए Star परिवार का मुख्य फ़ॉर्मूला — तब चुना जाता है जब Mu° पर तेज़ दर्द हो और साथ में अनामिका वाली निशानियाँ हों।
खोलें →Alkaline Star
अल्कली वाली तरफ़ से आए जोड़ों के दर्द के लिए — दोनों अनामिका में दर्द और Liv° पर तेज़ दर्द, या दाईं अनामिका में ज़्यादा दर्द।
खोलें →Lactic Acid Conversion
Liv° और Mu° दोनों पर दर्द वाले जोड़ों के दर्द के लिए — शरीर को लैक्टिक एसिड फिर से मांसपेशियों के ईंधन में बदलने में मदद करता है।
इन पॉइंट्स से काम करता है
खोलें →All Joints घिसाई
हर जोड़ पर हथेली से बहुत हल्की घिसाई, उँगलियों से कंधे तक, New Star Modified के बाद — उसके साथ जोड़ी जाती है, उसकी जगह नहीं लेती।
खोलें →यह कभी न करें
- आर्थराइटिस में, जिसे LMNT पद्धति ऑटो-इम्यून बीमारी मानती है, ये पॉइंट नहीं दिए जाते: Th, Th + Ch, Lymph, Armpits, Ton 'P', Ton 'T' और Spl। Th + Ch
- New Star Modified कभी नहीं दिया जाता — न वहाँ, जहाँ दर्द सिर्फ़ दाईं अनामिका में हो, और न वहाँ, जहाँ Liv° पर दर्द हो और Mu° पर बिल्कुल न हो। New Star Modified
- (4) Ku माहवारी के दिनों में और लो ब्लड प्रेशर में नहीं दिया जाता। (4) Ku
- दोनों अनामिका में दर्द, या दोनों तरफ़ सूजे जोड़ और सुबह देर तक जकड़न: एक महीने के अंदर डॉक्टर को दिखाएँ — यह रूमेटॉइड आर्थराइटिस की शुरुआती निशानी हो सकती है। बुख़ार या कँपकँपी के साथ अकेला गरम, सूजा जोड़ — उसी दिन डॉक्टर को दिखाएँ। रूमेटॉइड आर्थ्राइटिस
- कैंसर: अगर व्यक्ति को कैंसर है, तो (10) Pan, Thymus, Pit, Lu + Sh, Rt. Ov / Lt. Ov और (30) Medulla कभी नहीं दिए जाते — थेरेपिस्ट योजना बदल देता है।
- डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें। न्यूरोथेरेपी आपके इलाज के साथ काम करती है, उसकी जगह नहीं।
अभ्यास से
वह सुपरवाइज़र, जिसका कार्ड छोटा होता गया
सिखाने के लिए केस — अभ्यास से जोड़ा गया, किसी एक मरीज़ की फ़ाइल नहीं
58 साल · कोटा · दोनों घुटनों में दर्द, साथ में बारह साल से डायबिटीज़, हाई BP और ठंड में जकड़ने वाली छाती
- क्या मिला
- दोनों घुटनों से आवाज़ आती थी, पर कोई भी गरम नहीं था। जो बात उसने बताई ही नहीं थी, वही सबसे ज़रूरी निकली: उसे दोनों तलवों पर हल्का छूना महसूस नहीं होता था। घुटने के पुराने एक्स-रे से कुछ नहीं बदला; उसकी शुगर और किडनी की रिपोर्ट, और दवाओं के थैले में मिले इनहेलर से बहुत कुछ बदला।
- क्या किया गया
- एक विद्यार्थी ने सिर्फ़ 'किसलिए देना है' वाली सूचियों से एक लंबा कार्ड लिखा। फिर हर पॉइंट का 'कब नहीं देना है' वाला कॉलम ज़ोर से पढ़ा गया — और उसके अस्थमा, डायबिटीज़ और ब्लड प्रेशर की वजह से एक-एक करके पॉइंट हटते गए। बरसों पुराने जोड़ों के दर्द के लिए (10) Pan बना रहा।
- इससे सीख
- 'किसलिए' से पहले 'कब नहीं' वाला कॉलम पढ़िए। पूरे व्यक्ति के लायक़ छोटा कार्ड, सिर्फ़ घुटने के लायक़ लंबे कार्ड से ज़्यादा सुरक्षित है।
आयुर्वेद और रसोई से
पथ्य और अपथ्य — भोजन भी इलाज का हिस्सा
आयुर्वेद के पुराने वैद्य भोजन और आदतों को पथ्य — जो शरीर और रोग के अनुकूल हो — और अपथ्य — जो न हो — में बाँटते थे। उन्होंने खट्टे रस को जोड़ों की तकलीफ़ बढ़ाने वाला बताया — यही बात जोड़ों के दर्द वालों को दही, इमली, टमाटर और नींबू से दूर रखती है। और वे ज़ोर देते थे कि हर चीज़ हर व्यक्ति पर एक जैसा असर नहीं करती।
ख़ुद को परखें
शोध क्या कहता है
- मज़बूत प्रमाण
2019 में लगभग 52.8 करोड़ लोगों को ऑस्टियोआर्थराइटिस था, जो 1990 के दोगुने से ज़्यादा है। सबसे ज़्यादा यह घुटने में होता है, फिर कूल्हे और हाथ में; इससे प्रभावित ज़्यादातर लोग 55 से ऊपर के हैं, और ज़्यादातर महिलाएँ हैं।
- मज़बूत प्रमाण
एक्स-रे के बदलाव इस बात से मेल नहीं खाते कि बीमारी कितनी तकलीफ़ देती है, और शुरू में दिखते भी नहीं। एक्स-रे में दिखने वाला आर्थराइटिस, दर्द देने वाले आर्थराइटिस से कम से कम दोगुना आम है, इसलिए सिर्फ़ एक्स-रे से साबित नहीं होता कि दर्द उसी की वजह से है।
आर्थराइटिस में न्यूरोथेरेपी का कोई क्लिनिकल ट्रायल अभी तक प्रकाशित नहीं हुआ है। न्यूरोथेरेपिस्ट जो सुधार बताते हैं, वे क्लिनिकल अवलोकन हैं।
आपके लिए
50 से ऊपर की महिलाएँ
50 के बाद ऑस्टियोआर्थराइटिस ज़्यादा आम हो जाता है, ख़ासकर महिलाओं में। जो भी गोली और चूर्ण आप लेती हैं, थेरेपिस्ट को बताएँ, और हर कुछ महीनों में दोबारा जाँच करवाएँ।
ज़्यादा वज़न वाले
ज़्यादा वज़न घुटनों, कूल्हों और कमर पर ज़्यादा ज़ोर डालता है। थोड़ा-सा वज़न कम करने से भी बोझ घटता है।
डायबिटीज़, अस्थमा या हाई BP वाले
इनसे तय होता है कि कौन-से पॉइंट दिए जा सकते हैं। पहली मुलाक़ात में अपनी रिपोर्ट और इनहेलर या दवा की पत्तियाँ साथ लाएँ।
यह पेज समझाता है, जाँच नहीं करता। न्यूरोथेरेपी आपके डॉक्टरी इलाज के साथ काम करती है — डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें, और कोई नया या गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर को दिखाएँ।