इन्फ़ेक्शन (संक्रमण)
इन्फ़ेक्शन यानी कीटाणुओं — बैक्टीरिया, वायरस, फफूँद या परजीवी — का शरीर में घुसकर बढ़ना। ज़्यादातर इन्फ़ेक्शन शरीर की अपनी रक्षा और सही डॉक्टरी इलाज से ठीक हो जाते हैं; कुछ तेज़ी से गंभीर हो जाते हैं और उनमें तुरंत डॉक्टर ज़रूरी है।

- ज़्यादातर बैक्टीरिया नुक़सान नहीं करते या फ़ायदेमंद होते हैं — आपके शरीर में इंसानी कोशिकाओं से लगभग 10 गुना ज़्यादा बैक्टीरिया की कोशिकाएँ होती हैं
- वायरस वाले इन्फ़ेक्शन पर एंटीबायोटिक काम नहीं करतीं
- 2020 में सेप्सिस — इन्फ़ेक्शन पर शरीर की बेकाबू प्रतिक्रिया — के लगभग 4.89 करोड़ मामले और 1.1 करोड़ मौतें हुईं
स्रोत: MedlinePlus; World Health Organization (sepsis fact sheet)
इन्फ़ेक्शन क्या है?
कीटाणु बहुत छोटे जीव हैं। बैक्टीरिया एक-कोशिका वाले होते हैं; वायरस उनसे भी छोटे होते हैं और सिर्फ़ हमारी अपनी कोशिकाओं के अंदर बढ़ पाते हैं। फफूँद और परजीवी भी इन्फ़ेक्शन कर सकते हैं। जब नुक़सानदेह कीटाणु अंदर घुसकर बढ़ते हैं, तो कोशिकाओं को नुक़सान पहुँचाते हैं या ज़हर छोड़ते हैं — यही इन्फ़ेक्शन है।
शरीर अपनी रक्षा से जवाब देता है: सफ़ेद रक्त कोशिकाएँ उस जगह दौड़कर कीटाणुओं को निगलती और मारती हैं, और अक्सर बुख़ार आता है। कई इन्फ़ेक्शन — ज़ुकाम, पेट ख़राब — आराम और देखभाल से ठीक हो जाते हैं। दूसरे, जैसे निमोनिया, किडनी का इन्फ़ेक्शन या सेप्सिस, में जल्दी डॉक्टर और सही दवा ज़रूरी है।
इसके लक्षण क्या हैं?
- बुख़ार, कभी-कभी ठंड लगकर कँपकँपी के साथ
- थकान और बदन दर्द
- प्रभावित हिस्से के संकेत — खाँसी, पेशाब में जलन, दस्त, या लाल, गरम, सूजी त्वचा
- भूख न लगना
- ख़तरे के संकेत: उलझन, तेज़ साँस, ठंडी-चिपचिपी त्वचा, बहुत कम पेशाब
यह क्यों होता है, और किसे होने की संभावना ज़्यादा है?
हवा और छूने से
- खाँसी और छींक की बूँदें
- गंदी सतह छूकर फिर चेहरा छूना
- बीमार व्यक्ति के क़रीबी संपर्क में आना
भोजन, पानी और काटने से
त्वचा और शरीर से
- कटना और घाव
- यौन संपर्क
- गर्भावस्था में माँ से बच्चे को
इसका पता कैसे चलता है?
डॉक्टर इन्फ़ेक्शन का पता लक्षणों और शारीरिक जाँच से लगाते हैं, और जब इलाज के लिए ज़रूरी हो, तो जाँचों से कीटाणु की पुष्टि करते हैं।
शारीरिक जाँच और तापमान
बुख़ार, नब्ज़, साँस, और गला, छाती, त्वचा या घाव की जाँच।
ब्लड काउंट (CBC)
सफ़ेद रक्त कोशिकाओं की गिनती और उनके प्रकार से डॉक्टर को पता चलता है कि शरीर किसी इन्फ़ेक्शन से लड़ रहा है या नहीं।
कल्चर, ग्राम स्टेन या PCR
ख़ून, पेशाब, बलग़म या मवाद के नमूने की जाँच से पता चलता है कि कौन-सा कीटाणु है, ताकि सही दवा चुनी जा सके।
CRP जाँच
ख़ून का एक संकेतक जो इन्फ़ेक्शन या सूजन में बढ़ता है — यह बताता है कि कुछ सक्रिय है, पर क्या है — यह नहीं।
सबसे पहले न्यूरोथेरेपिस्ट देखता है कि कहीं ठंड-कँपकँपी के साथ बुख़ार, उलझन, साँस फूलना, खड़े होने पर चक्कर, फैलती लाली या गरम सूजा जोड़ तो नहीं। इनमें से कुछ भी हो, तो सिटिंग होती ही नहीं और व्यक्ति उसी घंटे डॉक्टर के पास जाता है। उसके बाद ही पेट के पॉइंट, मल और जीभ की जाँच होती है।
न्यूरोथेरेपी की नज़र से इन्फ़ेक्शन
LMNT पद्धति इन्फ़ेक्शन और सूजन-जलन को अलग रखती है। इन्फ़ेक्शन यानी बाहर के कीटाणुओं का आना; लक्ष्य है शरीर की रक्षा को मज़बूत करना। सूजन-जलन यानी रक्षा का हद से आगे बढ़ जाना; वहाँ लक्ष्य है उसे रुकने में मदद करना। इसलिए दोनों का इलाज उल्टे तरीक़ों से होता है: इम्यूनिटी बढ़ाने वाला Thymus इन्फ़ेक्शन में मदद करता है, जबकि सूजन शांत करने वाला Adr इसमें मना है।
LMNT की नज़र — कीटाणुओं को मौक़ा कहाँ मिलता है
- पेट का एसिडपहला दरवाज़ा — तेज़ एसिड भोजन के साथ आए कीटाणुओं को मार देता है
- अनपचा भोजनएसिड कम हो, तो कीटाणु बच जाते हैं — LMNT पद्धति मानती है कि तब कई अंगों में इन्फ़ेक्शन आता है
- सफ़ेद रक्त कोशिकाएँरक्षा कोशिकाएँ कीटाणुओं से लड़ती हैं, और लड़ते-लड़ते ख़त्म होती हैं
- थाइमस और लिम्फ़LMNT पद्धति इनके ज़रिए शरीर की रक्षा बढ़ाती है
- पुराना इन्फ़ेक्शनजिसे शरीर ख़त्म न कर पाए, वह सूजन-जलन में बदल जाता है
(½) Ku के बारे में LMNT पद्धति साफ़ कहती है कि वह क्या नहीं जानती: यह ग्रैनुलोसाइट को जगाता है, मोनोसाइट को, या ACTH हार्मोन को — "यह शरीर का काम है, वह देखे।" न्यूरोथेरेपी एंटीबायोटिक या अस्पताल की जगह नहीं लेती; यह डॉक्टरी इलाज के साथ शरीर की अपनी रक्षा को सहारा देती है।
UDF का आना ही बड़ी बीमारियों के आने का मुख्य कारण है।
इन्फ़ेक्शन का न्यूरोथेरेपी इलाज, क़दम-दर-क़दम
पहले ख़तरे की जाँच
ठंड-कँपकँपी के साथ बुख़ार, उलझन, साँस फूलना, चक्कर, फैलती लाली या गरम जोड़: कोई सिटिंग नहीं — उसी घंटे डॉक्टर। वरना थेरेपिस्ट पेट के पॉइंट, मल और जीभ देखता है।
रक्षा बढ़ाना
Thymus या Thymus + Chest — और Th + Ch के साथ Armpits, बिना चूके। इन्फ़ेक्शन में Lymph और (12) Armpits भी दिए जाते हैं।
Ku वाला ट्रीटमेंट
(½) Ku – 20 secs — इन्फ़ेक्शन या सूजन-जलन वाले UDF फ़ॉर्मूले में यह छह सिटिंग तक दिया जाता है, UDF परिवार में Ku की सबसे ज़्यादा ख़ुराक।
लिवर पॉइंट
LMNT पद्धति कहती है कि (1) Liv – 3 points बुख़ार घटाता है और इन्फ़ेक्शन से लड़ता है। जहाँ वायरल फ़ॉर्मूला न दिया जा सके, वहाँ उसकी जगह (1) Single point liver × 6 treatments या (½) Ku – 13 secs दिया जा सकता है।
पाचन ठीक करना
क्योंकि LMNT पद्धति पेट के कमज़ोर एसिड और अनपचे भोजन को कीटाणुओं के लिए खुला दरवाज़ा मानती है, इसलिए पाचन ठीक किया जाता है, ताकि बार-बार के इन्फ़ेक्शन को कम मौक़ा मिले।
इस्तेमाल होने वाले पॉइंट और फ़ॉर्मूले
इन्फ़ेक्शन या सूजन-जलन वाला UDF फ़ॉर्मूला
इन्फ़ेक्शन या सूजन-जलन वाला UDF फ़ॉर्मूला — इसका मुख्य हिस्सा (½) Ku – 20 secs की छह सिटिंग है।
इन पॉइंट्स से काम करता है
Liv – 3 points
लिवर पॉइंट, जिसे LMNT पद्धति बुख़ार घटाने और इन्फ़ेक्शन से लड़ने के लिए देती है।
खोलें →यह कभी न करें
- इन्फ़ेक्शन कुछ ही घंटों में ख़तरनाक हो सकता है। ठंड-कँपकँपी के साथ बुख़ार, उलझन, साँस फूलना या तेज़ साँस, खड़े होने पर चक्कर, ठंडी-चिपचिपी त्वचा, बहुत कम पेशाब, फैलती लाली, या गरम सूजा जोड़: कोई सिटिंग नहीं — तुरंत डॉक्टर या अस्पताल जाएँ। न्यूरोथेरेपी डॉक्टरी इलाज के साथ सहारा है, उसकी जगह कभी नहीं।
- इन्फ़ेक्शन में कभी नहीं: (6) Adr और (30) Medulla — ये रक्षा को शांत करते हैं, जो इन्फ़ेक्शन की ज़रूरत का उल्टा है। (6) Adr
- माहवारी के दौरान या लो ब्लड प्रेशर में Ku कभी नहीं दिया जाता। UDF फ़ॉर्मूले का (10) Medulla डायबिटीज़ या कैंसर में नहीं दिया जाता, और दिल के मरीज़ों को सिर्फ़ (10) Left Medulla। (½) Ku – 20 secs
- ऑटो-इम्यून बीमारी में Thymus वाला हिस्सा निकाल दिया जाता है। डायबिटीज़, ऑटो-इम्यून बीमारी, ज़ुकाम, एलर्जी या अस्थमा में Spl नहीं; ल्यूकेमिया या अस्थमा में Gal नहीं; लिवर में कैंसर हो तो लिवर पॉइंट नहीं। Th. Only
- संक्रमित, घाव वाले या गरम सूजे हिस्से पर कभी दबाव न दें। जाँघ के जोड़ में दुखती गाँठ का मतलब है कि कहीं से कुछ उसमें जा रहा है — कारण खोजें, और बुख़ार या हाथ-पैर में ऊपर चढ़ती लाल लकीर हो, तो उसी दिन डॉक्टर के पास भेजें। लिम्फ़ ग्रंथियाँ
- बच्चों को बड़ों की आधी खुराक और सिर्फ़ हल्का ट्रीटमेंट दिया जाता है, वह भी प्रशिक्षित थेरेपिस्ट के हाथों।
- कैंसर: अगर व्यक्ति को कैंसर है, तो (10) Pan, Thymus, Pit, Lu + Sh, Rt. Ov / Lt. Ov और (30) Medulla कभी नहीं दिए जाते — थेरेपिस्ट योजना बदल देता है।
- डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें। न्यूरोथेरेपी आपके इलाज के साथ काम करती है, उसकी जगह नहीं।
वीडियो देखें
इस वीडियो में UDF (अनपचा खाना) ट्रीटमेंट पूरे क्रम से दिखाया गया है — 15 Medulla, दोनों कूल्हों पर Parkhoo, Half Kundli, 10 Medulla के साथ 1 Gas Only और 1 Gas 'I', फिर जाँघ और बाँह पर Gal, Spleen, Liver, Mucus के पॉइंट और Ajay Normal। जब खाना ठीक से नहीं पचता, तब पाचन को सहारा देने के लिए यह दिया जाता है।
पूरा UDF ट्रीटमेंट। इसका (½) Ku – 20 secs वाला हिस्सा वही है जो LMNT पद्धति इन्फ़ेक्शन में देती है; इन्फ़ेक्शन या सूजन-जलन वाला UDF फ़ॉर्मूला इसे छह सिटिंग तक दोहराता है।
अभ्यास से
वह बच्चा जो दूध को दूध की तरह ही उलट देता था
सिखाने के लिए केस — अभ्यास से जोड़ा गया, किसी एक मरीज़ की फ़ाइल नहीं
11 महीने · वज़न नहीं बढ़ रहा · दाँत निकलने के बाद से दस्त और हर महीने बुख़ार या ज़ुकाम
- क्या मिला
- एक चुस्त पर दुबला बच्चा, जीभ पर सफ़ेद परत, और दूध छुड़ाने के बाद से मल में दिखते टुकड़े। फ़ैसला करने वाला सवाल: जब वह दूध उलटता है, तो वह दूध की तरह निकलता है या दही की तरह? दूध की तरह — जिसे LMNT पद्धति ऐसे पेट का संकेत मानती है जो अपना एसिड नहीं बना रहा।
- क्या किया गया
- उसकी उम्र और आकार के हिसाब से ट्रीटमेंट — हाथों से, हल्के से, और थोड़ी देर — और साथ में उसके अपने डॉक्टर का इलाज जारी रहा।
- इससे सीख
- हर महीने के इन्फ़ेक्शन और अनपचा भोजन एक ही तस्वीर थे: पेट का तेज़ एसिड ही भोजन के साथ आए कीटाणुओं को मारता है। माँ से पूछे गए एक आसान सवाल ने वह खुला दरवाज़ा ढूँढ लिया।
आयुर्वेद और रसोई से
ख़ुद को परखें
शोध क्या कहता है
- मज़बूत प्रमाण
सेप्सिस की परिभाषा है: इन्फ़ेक्शन पर शरीर की बेकाबू प्रतिक्रिया से अंगों को जानलेवा नुक़सान — इसीलिए उलझन, तेज़ साँस या कम पेशाब के साथ बुख़ार एक इमरजेंसी है।
- मज़बूत प्रमाण
शरीर में घुसे कीटाणुओं से सबसे पहले सफ़ाई करने वाली सफ़ेद कोशिकाएँ (फ़ैगोसाइट) मिलती हैं, जो उन्हें निगलकर पचा देती हैं; दूसरी रक्षा कोशिकाएँ कीटाणुओं को मारने वाले पदार्थ छोड़ती हैं, और बचा हुआ मलबा मवाद बनता है।
इन्फ़ेक्शन में न्यूरोथेरेपी का कोई क्लिनिकल ट्रायल अभी तक प्रकाशित नहीं हुआ है। न्यूरोथेरेपिस्ट जो सुधार बताते हैं, वे क्लिनिकल अवलोकन हैं।
आपके लिए
जिन्हें हर इन्फ़ेक्शन पकड़ लेता है
पूछिए कि आपका पाचन ठीक है या नहीं — मल में अनपचा भोजन दिखे, तो थेरेपिस्ट को बताएँ। हाथ धोना, साफ़ पानी और टीके जारी रखें।
माता-पिता
बच्चों को हल्का, सिर्फ़ हाथों से, थोड़ी देर का ट्रीटमेंट, बड़ों की आधी ख़ुराक में। बुख़ार, तेज़ साँस या दूध न पीने वाले शिशु को पहले डॉक्टर के पास ले जाएँ।
एंटीबायोटिक लेने वाले
कोर्स ठीक वैसे ही पूरा करें, जैसे डॉक्टर ने कहा है। न्यूरोथेरेपी साथ-साथ चल सकती है।
यह पेज समझाता है, जाँच नहीं करता। न्यूरोथेरेपी आपके डॉक्टरी इलाज के साथ काम करती है — डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें, और कोई नया या गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर को दिखाएँ।