फ़ाइब्रॉइड (बच्चेदानी की गाँठ)
फ़ाइब्रॉइड मांसपेशी के ऊतक की गाँठें हैं, जो बच्चेदानी के अंदर या उसके ऊपर बनती हैं। ये लगभग कभी कैंसर नहीं होतीं। बहुत-सी महिलाओं को पता भी नहीं चलता कि उन्हें फ़ाइब्रॉइड है, पर कुछ को ज़्यादा या दर्द वाली माहवारी, पेट के निचले हिस्से में दबाव, या गर्भ ठहरने में मुश्किल होती है।

- 50 साल की उम्र तक हर 100 में से 20 से 80 महिलाओं में फ़ाइब्रॉइड बन जाते हैं
- ये सबसे ज़्यादा 30 से 50 साल की उम्र के बीच मिलते हैं
- लगभग हमेशा बिना नुक़सान वाली गाँठें — 1,000 में से 1 से भी कम कैंसर निकलती है
स्रोत: US Office on Women's Health; Cleveland Clinic; StatPearls
फ़ाइब्रॉइड क्या है?
बच्चेदानी की दीवार मोटी मांसपेशी की होती है। फ़ाइब्रॉइड तब शुरू होता है, जब उस दीवार की एक मांसपेशी-कोशिका ज़रूरत से ज़्यादा बढ़ने लगती है, और रेशों के एक सख़्त जाल में लिपट जाती है। यह बीज जितना छोटा रह सकता है या फल जितना बड़ा हो सकता है, और एक महिला में एक या कई हो सकते हैं।
फ़ाइब्रॉइड महिला हार्मोन ईस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन से पलते हैं, इसलिए ये ज़्यादातर उन सालों में बढ़ते हैं जब माहवारी आती है। फ़ाइब्रॉइड कहाँ है, उसी से तकलीफ़ तय होती है: बच्चेदानी के अंदर वाला अक्सर माहवारी ज़्यादा कर देता है; बाहर वाला बड़ा फ़ाइब्रॉइड मूत्राशय या आँत पर दबाव डाल सकता है।
इसके लक्षण क्या हैं?
- ज़्यादा या लंबी माहवारी, कभी-कभी थक्कों के साथ
- माहवारी में दर्द, या दो माहवारी के बीच ख़ून आना
- पेट के निचले हिस्से में भरापन, दबाव या फूलापन
- बार-बार पेशाब आना, या कब्ज़ — जब फ़ाइब्रॉइड मूत्राशय या आँत पर दबाता है
- कमर के निचले हिस्से में दर्द, या संबंध के समय तकलीफ़
- ख़ून की कमी (एनीमिया) से थकान और साँस फूलना, या गर्भ ठहरने में मुश्किल
यह क्यों होता है, और किसे होने की संभावना ज़्यादा है?
हार्मोन
- ईस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन फ़ाइब्रॉइड को बढ़ने में मदद करते हैं — इसलिए ये ज़्यादातर माहवारी वाले सालों में बनते हैं
- बहुत जल्दी (लगभग 10–11 साल से पहले) शुरू हुई माहवारी, या देर से (55 के बाद) मेनोपॉज़
परिवार और उम्र
- माँ या बहन को फ़ाइब्रॉइड होना
- उम्र — ये 30 से 50 के बीच सबसे आम हैं
- कभी गर्भ न ठहरना
शरीर और रोज़ की ज़िंदगी
- ज़्यादा वज़न
- विटामिन D की कमी
इसका पता कैसे चलता है?
फ़ाइब्रॉइड अक्सर संयोग से मिलते हैं — किसी जाँच में या किसी दूसरी वजह से कराए स्कैन में। लक्षण हों, तो डॉक्टर पेट और पेडू की जाँच करते हैं और फिर स्कैन करवाते हैं, ताकि पता चले कि फ़ाइब्रॉइड कितने हैं, कहाँ हैं और कितने बड़े हैं।
पेडू का अल्ट्रासाउंड
सबसे मुख्य जाँच। इससे फ़ाइब्रॉइड की गिनती, आकार और जगह पता चलती है। हर रिपोर्ट सँभालकर रखें — अगला स्कैन उसी से मिलाया जाता है।
स्त्री-रोग विशेषज्ञ की जाँच
डॉक्टर पेट और पेडू को छूकर जाँचते हैं; बड़ा फ़ाइब्रॉइड अक्सर ऐसे ही महसूस हो जाता है।
MRI, या बच्चेदानी के अंदर देखना
जब ज़्यादा जानकारी चाहिए: MRI स्कैन, सलाइन अल्ट्रासाउंड, या हिस्टेरोस्कोपी — एक पतला कैमरा जो बच्चेदानी के अंदर देखता है।
हीमोग्लोबिन
ख़ून की जाँच, यह देखने के लिए कि ज़्यादा माहवारी से ख़ून की कमी तो नहीं हुई।
न्यूरोथेरेपिस्ट अकेले में पूछता है — जहाँ हो सके, कोई महिला पूछती है — माहवारी के बारे में, अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट के बारे में और फ़ाइब्रॉइड किस तरफ़ है। Liv° और Mu° पॉइंट की तुलना होती है, और कुछ भी देने से पहले हीमोग्लोबिन और डॉक्टर का पिछला स्कैन पढ़ा जाता है।
न्यूरोथेरेपी की नज़र से फ़ाइब्रॉइड
LMNT पद्धति में ट्यूमर, फ़ाइब्रॉइड और सिस्ट शरीर के संतुलन की अल्कलाइन तरफ़ रखे जाते हैं — उन हालतों में, जिनमें बढ़ने का झुकाव होता है। इसलिए काम Alkali Treatment Formula (ALTF) से शुरू होता है। फिर (2) Pan, ठीक छह सेकंड, और Anti F. Heparin — Heparin का वह फ़ॉर्मूला, जो बिन-ज़रूरत बढ़त से बनी रुकावट के लिए है। बच्चेदानी में फ़ाइब्रॉइड हो, तो Thymus + Chest जोड़ा जाता है, और फ़ाइब्रॉइड जिस तरफ़ हो, उस तरफ़ का ओवरी पॉइंट — वहाँ ख़ून का बहाव बढ़ाने के लिए।
LMNT पद्धति अपनी सीमा साफ़ बताती है: फ़ाइब्रॉइड वाली महिला पहले से तय हर मुलाक़ात निभाती है — स्कैन, स्त्री-रोग विशेषज्ञ, सर्जन। न्यूरोथेरेपी उस इलाज के साथ शरीर को सहारा देती है। क्या बदला, यह अगला स्कैन दिखाता है — पहले से वादा नहीं किया जाता।
हमारे ट्रीटमेंट से मरीज़ को तुरंत फ़ायदा मिले या न मिले, हमारी लापरवाही से उसे कोई नुक़सान न पहुँचे — इसका ध्यान रखें।
फ़ाइब्रॉइड का न्यूरोथेरेपी इलाज, क़दम-दर-क़दम
पहले जाँच
थेरेपिस्ट Liv° और Mu° की तुलना करता है, और अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट पढ़ता है — कितने फ़ाइब्रॉइड, कितने बड़े, और किस तरफ़ — साथ में हीमोग्लोबिन और पिछली कुछ माहवारी की तारीख़ें।
अल्कली की तरफ़ — ALTF
ALTF तभी दिया जाता है, जब अनपचे भोजन वाला सवाल हल हो चुका हो: अगर मल में खाना वैसा ही निकलता है जैसा खाया था, तो पहले कुछ दिन अनपचे भोजन का ट्रीटमेंट दिया जाता है।
(2) Pan और Anti F. Heparin
(2) Pan ठीक छह सेकंड दिया जाता है — LMNT पद्धति में यह जो कुछ ज़्यादा सक्रिय हो, उसे शांत करता है। Anti F. Heparin वह Heparin फ़ॉर्मूला है जिसमें Pan घटाकर 2 किया गया है — बिन-ज़रूरत बढ़त से बनी रुकावट के लिए। हर Heparin फ़ॉर्मूले की तरह, ज़्यादा बहाव के दिनों में यह रुकता है।
Thymus + Chest और उस तरफ़ का ओवरी पॉइंट
बच्चेदानी में फ़ाइब्रॉइड हो, तो Thymus + Chest — और जब भी यह दिया जाता है, armpits भी साथ में दिए जाते हैं। बाईं तरफ़ के फ़ाइब्रॉइड के लिए Lt. Ov., दाईं तरफ़ के लिए Rt. Ov. — वहाँ ख़ून का बहाव बढ़ाने के लिए।
ज़्यादा बहाव के दिनों में
अगर माहवारी ज़्यादा है, तो माहवारी के नियम लागू होते हैं: ज़्यादा बहाव के लिए (4) Para, और घर पर रोज़ कम से कम पौन लीटर गुनगुना दूध — इससे ज़्यादा गरम कभी नहीं, क्योंकि गरम से ख़ून और बढ़ सकता है — और रात भर दूध में भिगोया छुहारा, सुबह उसी दूध में उबालकर।
इस्तेमाल होने वाले पॉइंट और फ़ॉर्मूले
ALTF (मुख्य रूप)
Alkali Treatment Formula — अल्कलाइन तरफ़ के लिए; तभी दिया जाता है, जब अनपचे भोजन वाला सवाल निपट चुका हो।
खोलें →(2) Pan
ठीक छह सेकंड का Pan — LMNT पद्धति में यह ज़्यादा सक्रिय चीज़ को शांत करता है; क़द के लिए ट्रीटमेंट ले रहे बच्चों को नहीं।
खोलें →Anti F. Heparin (Anti fibrin)
Pan घटाकर 2 वाला Heparin फ़ॉर्मूला — बिन-ज़रूरत बढ़त से बनी रुकावट के लिए; ज़्यादा बहाव के समय कभी नहीं।
इन पॉइंट्स से काम करता है
खोलें →यह कभी न करें
- जब बहाव ज़्यादा हो, तो कोई भी Heparin फ़ॉर्मूला नहीं दिया जाता — Anti F. Heparin भी नहीं — क्योंकि heparin ख़ून को जमने नहीं देता और बहाव बढ़ जाएगा। कोर्स रुकता है और माहवारी के बाद फिर शुरू होता है। Anti F. Heparin (Anti fibrin)
- (2) Pan ठीक छह सेकंड दिया जाता है, और उन बच्चों को कभी नहीं जिनका क़द कम है या जिनका क़द बढ़ाने का ट्रीटमेंट चल रहा है — उन्हें (4) या (10) Pan। ओवरी पॉइंट (Lt. Ov., Rt. Ov.) कैंसर में और किशोर उम्र में नहीं दिए जाते। (2) Pan
- Thymus + Chest गर्भावस्था, दिल की बीमारी, डायबिटीज़, रूमेटॉइड आर्थराइटिस या दूसरी ऑटोइम्यून बीमारी, किडनी की बीमारी, पोलियो या सूजन वाली बीमारी में नहीं दिया जाता। जब दिया जाए, तो armpits भी देना ज़रूरी है। Th + Ch
- फ़ाइब्रॉइड पर डॉक्टर की नज़र रहती है। हर स्कैन और स्त्री-रोग विशेषज्ञ या सर्जन की हर मुलाक़ात निभाएँ — यह ट्रीटमेंट कभी उसे छोड़ने की वजह नहीं है।
- तुरंत डॉक्टर को दिखाएँ: बहुत ज़्यादा ख़ून के साथ चक्कर या बेहोशी, पेट के निचले हिस्से या पेडू में अचानक तेज़ दर्द, दो माहवारी के बीच ख़ून, या मेनोपॉज़ के बाद किसी भी तरह का ख़ून।
- कैंसर: अगर व्यक्ति को कैंसर है, तो (10) Pan, Thymus, Pit, Lu + Sh, Rt. Ov / Lt. Ov और (30) Medulla कभी नहीं दिए जाते — थेरेपिस्ट योजना बदल देता है।
- डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें। न्यूरोथेरेपी आपके इलाज के साथ काम करती है, उसकी जगह नहीं।
वीडियो देखें
जहाँ फ़ाइब्रॉइड हो, वहाँ माहवारी के दर्द के लिए हिंदी प्रदर्शन: (30) Medulla, फिर दोनों बाँहों पर (3) WD, और Thymus + Chest।
फ़ाइब्रॉइड पर डॉक्टर की नज़र ज़रूरी है। (30) Medulla दिल के रोगियों को नहीं; Thymus + Chest गर्भावस्था, डायबिटीज़, दिल, किडनी या ऑटोइम्यून बीमारी में नहीं; WD कैंसर में नहीं।
@neurotherapylife का हिंदी प्रशिक्षण प्रदर्शन — जहाँ फ़ाइब्रॉइड हो, वहाँ माहवारी के दर्द के लिए। इसमें (30) Medulla और (3) WD हैं, जो इस पेज पर दिए LMNT फ़ाइब्रॉइड ट्रीटमेंट में नहीं हैं — वीडियो के नीचे का नोट पढ़ें।
आयुर्वेद और रसोई से
ख़ुद को परखें
शोध क्या कहता है
- मज़बूत प्रमाण
एक चिकित्सा संदर्भ समीक्षा: फ़ाइब्रॉइड बच्चेदानी की अपनी मांसपेशी-कोशिकाओं से बनते हैं, मुख्य रूप से ईस्ट्रोजन से बढ़ते हैं, और कोलेजन व दूसरे रेशों के घने जाल से भरे होते हैं। मेनोपॉज़ तक 50–70% महिलाओं में ये मिलते हैं, और इनमें से लगभग एक-चौथाई से एक-तिहाई महिलाओं को ऐसे लक्षण होते हैं जिनमें इलाज चाहिए।
फ़ाइब्रॉइड में न्यूरोथेरेपी का कोई क्लिनिकल ट्रायल अभी तक प्रकाशित नहीं हुआ है। न्यूरोथेरेपिस्ट जो सुधार बताते हैं, वे क्लिनिकल अवलोकन हैं।
आपके लिए
ज़्यादा माहवारी वाली महिलाएँ
हीमोग्लोबिन की जाँच और अल्ट्रासाउंड करवाएँ। जिस थकान को घरवाले आलस कहते हैं, वह ख़ून की कमी हो सकती है। ज़्यादा ख़ून आने के दौरान कोई भी Heparin कोर्स रुकता है।
गर्भ ठहराने की चाह रखने वाली महिलाएँ
कुछ फ़ाइब्रॉइड गर्भ ठहरने में मुश्किल करते हैं; अपने फ़ाइब्रॉइड के बारे में स्त्री-रोग विशेषज्ञ से बात करें। अगर गर्भ ठहरा हो सकता है, तो थेरेपिस्ट को तुरंत बताएँ — गर्भावस्था में Thymus + Chest नहीं दिया जाता।
मेनोपॉज़ के पास या बाद की महिलाएँ
फ़ाइब्रॉइड माहवारी वाले सालों के हार्मोन पर टिके होते हैं। माहवारी बंद होने के बाद किसी भी तरह का ख़ून आए, तो किसी भी दूसरे ट्रीटमेंट से पहले डॉक्टर से जाँच ज़रूरी है।
यह पेज समझाता है, जाँच नहीं करता। न्यूरोथेरेपी आपके डॉक्टरी इलाज के साथ काम करती है — डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें, और कोई नया या गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर को दिखाएँ।