ट्रीटमेंट के बाद उलटा असर
कभी-कभी किसी सेशन के बाद व्यक्ति को पहले से बुरा लगता है — चक्कर, बेचैनी, या ज़्यादा दर्द। LMNT पद्धति का इसका एक तय जवाब है: रुकिए, थेरेपिस्ट को बताइए, शुरू से दोबारा जाँच कीजिए, जो हुआ उसे लिख लीजिए, और NAN या FAN का एक ट्रीटमेंट दीजिए। गंभीर असर में पहले डॉक्टर।
- बेहोशी दिमाग़ तक ख़ून का बहाव घटने से कुछ पल के लिए होश खोना है; यह आम तौर पर दो मिनट से कम रहती है
- बेहोशी से पहले के चेतावनी संकेत हैं — कमज़ोरी, पसीना, मिचली, आवाज़ें धीमी लगना और नज़र सिकुड़ना
- दर्द, डर, देर तक खड़े रहना या जल्दी खड़े होना — सब बेहोशी ला सकते हैं
स्रोत: MedlinePlus (Fainting)
ट्रीटमेंट के बाद उलटा असर क्या है?
कोई भी इलाज — दवा, इंजेक्शन, मालिश या दबाव वाली थेरेपी — कभी-कभी व्यक्ति को कुछ देर के लिए पहले से बुरा महसूस करा सकता है। ज़्यादातर ऐसे असर हल्के होते हैं और चले जाते हैं; गंभीर असर बहुत कम होते हैं। जो भी हो, उलटा असर एक ज़रूरी जानकारी है, और उसे हमेशा बताना चाहिए।
एक आम असर है चक्कर या बेहोशी जैसा लगना। बेहोशी से पहले व्यक्ति कमज़ोर, पसीने से तर या मिचली जैसा महसूस कर सकता है, आवाज़ें धीमी लगती हैं या नज़र सिकुड़ती है। यह तब होता है जब थोड़ी देर के लिए दिमाग़ तक बहुत कम ख़ून पहुँचता है — और लेटने से यह आम तौर पर जल्दी ठीक हो जाता है।
इसके लक्षण क्या हैं?
- सेशन के दौरान या बाद में चक्कर, कमज़ोरी, पसीना या मिचली
- आवाज़ें धीमी लगना या नज़र सिकुड़ना, जैसे बेहोशी आने वाली हो
- सेशन से पहले की तुलना में ज़्यादा दर्द या दुखन
- बाद में असामान्य थकान या बेचैनी, या कोई नई तकलीफ़ जो ट्रीटमेंट के बाद शुरू हुई
यह क्यों होता है, और किसे होने की संभावना ज़्यादा है?
चक्कर आने के आम कारण
- दर्द, डर या तेज़ भावना
- देर तक खड़े रहना, या बहुत जल्दी उठना
- ब्लड शुगर कम होना — जैसे ख़ाली पेट आना
- कुछ दवाएँ, जैसे ब्लड प्रेशर, घबराहट या डिप्रेशन की; दिल की धड़कन की गड़बड़ी
LMNT में कोई योजना क्यों सूट नहीं करती
- जहाँ शरीर को हल्का ट्रीटमेंट चाहिए था, वहाँ भारी दिया गया — गंभीर या लंबी बीमारी में LMNT पद्धति एक भारी की जगह दो-तीन हल्के ट्रीटमेंट देती है
- कोई पॉइंट जो इस ख़ास व्यक्ति को सूट न करे — जैसे वह रोगी जो बताए कि Adr उसे सूट नहीं हुआ
- उस दिन एसिड या अल्कली वाली तरफ़ न जाँची गई हो — LMNT पद्धति हर ट्रीटमेंट से पहले Mu° और Liv° की जाँच माँगती है
इसका पता कैसे चलता है?
हल्के असर को थेरेपिस्ट वहीं परखता है। गंभीर असर — बेहोशी जो न जाए, सीने में दर्द, साँस फूलना — पहले डॉक्टर जाँचते हैं।
ब्लड प्रेशर और नब्ज़
ब्लड प्रेशर का अचानक गिरना, या असामान्य नब्ज़, चक्कर आने का कारण बता सकती है।
ब्लड शुगर
कम ब्लड शुगर कमज़ोरी और चक्कर का एक आम कारण है, जिसे आसानी से जाँचा जा सकता है।
दिल की जाँच
सीने में दर्द या अनियमित धड़कन हो, तो डॉक्टर सबसे पहले दिल की जाँच करते हैं।
LMNT पद्धति में पहली हिदायत है कि शुरू से दोबारा जाँच कीजिए — Liv° और Mu° और बाक़ी सब कुछ — और लिख लीजिए कि क्या दिया गया, क्या हुआ और कब।
न्यूरोथेरेपी की नज़र से ट्रीटमेंट के बाद उलटा असर
LMNT पद्धति उस रोगी के लिए एक साफ़ नियम देती है जिस पर उसके किसी भी ट्रीटमेंट का उलटा असर हुआ हो। पहले, शुरू से दोबारा जाँच कीजिए, और जो हुआ उसे लिख लीजिए। फिर NAN या FAN का एक ट्रीटमेंट दीजिए। नियम जानबूझकर छोटा है: थेरेपिस्ट अंदाज़ा नहीं लगाता, ऊपर से और ट्रीटमेंट नहीं जोड़ता, और वही योजना बस दोहराता नहीं।
फिर योजना बदली जाती है। गंभीर या लंबी बीमारी में, जहाँ कई ग्रंथियाँ पहले से कमज़ोर हों, LMNT पद्धति हल्का ट्रीटमेंट देती है — एक भारी की जगह दो-तीन हल्के। अगर रोगी बताए कि Adr उसे सूट नहीं हुआ, तो LMNT में एसिड ट्रीटमेंट का एक रूप है जो उसकी जगह Thymus + Chest पर ख़त्म होता है। डायबिटीज़ में Thymus आम तौर पर मना है; यह अकेला मामला है जहाँ वह मनाही खोली जाती है, और थेरेपिस्ट लिखकर रखता है कि ऐसा किया गया।
रोगी को हमारे इलाज से तुरंत फ़ायदा मिले या न मिले, पर हमारी लापरवाही से उसे कोई नुक़सान न पहुँचे — इसका ध्यान रखिए।
ट्रीटमेंट के बाद उलटा असर का न्यूरोथेरेपी इलाज, क़दम-दर-क़दम
रुकिए और बताइए
रोगी तुरंत थेरेपिस्ट को बताता है, और सेशन रुक जाता है। कुछ भी गंभीर — बेहोशी जो न जाए, सीने में दर्द, साँस फूलना, तेज़ दर्द — तो पहले 108/112।
शुरू से दोबारा जाँच
Liv°, Mu° और बाक़ी जाँच नए सिरे से की जाती है, और जो हुआ उसे लिख लिया जाता है।
NAN या FAN का एक ट्रीटमेंट
उलटे असर के बाद LMNT पद्धति जो एक ट्रीटमेंट देती है — एक, कई नहीं।
योजना बदलिए, और लिख लीजिए
जहाँ शरीर कमज़ोर हो, वहाँ हल्के ट्रीटमेंट; जहाँ कोई पॉइंट सूट न हुआ हो, वहाँ दूसरा रूप — और हर बदलाव दर्ज।
इस्तेमाल होने वाले पॉइंट और फ़ॉर्मूले
यह कभी न करें
- बेहोशी जो एक-दो मिनट से ज़्यादा रहे, सीने में दर्द या अनियमित धड़कन, साँस फूलना, तेज़ दर्द, दौरा, या अचानक कमज़ोरी, सुन्नपन या बोलने में परेशानी हो, तो तुरंत 108/112 पर कॉल करें। न्यूरोथेरेपी इमरजेंसी इलाज की जगह कभी नहीं लेती।
- अगर चक्कर लगे: लेट जाइए, पैर ऊपर कीजिए, गले के पास जो कसा हो उसे ढीला कीजिए, और 10–15 मिनट आराम करके धीरे-धीरे उठिए।
- उलटे असर को सहते हुए आगे मत बढ़िए। रुकिए और थेरेपिस्ट को बताइए — बताना हमेशा सही है, और उलटा असर कभी रोगी की ग़लती नहीं है।
- हर ट्रीटमेंट से पहले Mu° और Liv° की तुलना कीजिए: अल्कलोसिस में कभी ATF नहीं, एसिडोसिस में कभी ALTF नहीं। एसिडोसिस
- कैंसर: अगर व्यक्ति को कैंसर है, तो (10) Pan, Thymus, Pit, Lu + Sh, Rt. Ov / Lt. Ov और (30) Medulla कभी नहीं दिए जाते — थेरेपिस्ट योजना बदल देता है।
- डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें। न्यूरोथेरेपी आपके इलाज के साथ काम करती है, उसकी जगह नहीं।
वीडियो देखें
Ajay Normal फ़ॉर्मूले का प्रदर्शन: (8) Pan, (3) Gal, (7) Liv और तीन-पॉइंट वाला (6) Gas 'I' — Normal फ़ॉर्मूला, जिसमें Spl छोड़ा गया है।
Ajay Normal — वह हिस्सा जो NAN और FAN दोनों में है। वीडियो में सिर्फ़ Ajay Normal दिखाया गया है; उलटे असर के बाद LMNT पद्धति इसे शुरू से दोबारा जाँच करके, NAN या FAN के एक ट्रीटमेंट के हिस्से के रूप में देती है।
आयुर्वेद और रसोई से
ख़ुद को परखें
शोध क्या कहता है
- मज़बूत प्रमाण
विशेषज्ञों की सहमति, जो शरीर के अपने रिफ़्लेक्स से होने वाली बेहोशी, और कुछ लोगों में खड़े होने पर ब्लड प्रेशर गिरने की परिभाषा तय करती है — यही कारण हैं कि व्यक्ति को ट्रीटमेंट की मेज़ पर या उससे उठते समय चक्कर आ सकता है।
न्यूरोथेरेपी के उलटे असर पर कोई क्लिनिकल ट्रायल अभी तक प्रकाशित नहीं हुआ है। उलटे असर और उन्हें सँभालने के बारे में न्यूरोथेरेपिस्ट जो बताते हैं, वे क्लिनिकल अवलोकन हैं।
आपके लिए
रोगी
ख़ाली पेट मत आइए, सेशन के बाद धीरे-धीरे उठिए, और थेरेपिस्ट को हर दवा के बारे में बताइए — ख़ासकर ब्लड प्रेशर, घबराहट या डिप्रेशन की।
सीखने वाले और थेरेपिस्ट
हर सेशन में जो दिया गया, उसे लिखिए। जब उलटा असर आए, तो यही रिकॉर्ड शुरू से दोबारा जाँचने और योजना बदलने में मदद करता है।
बुज़ुर्ग या लंबे समय से बीमार रोगियों के परिवार
कमज़ोर शरीर पर असर जल्दी होता है। हल्के, छोटे सेशन माँगिए, और बाद में व्यक्ति ठीक न लगे तो तुरंत थेरेपिस्ट को बताइए।
यह पेज समझाता है, जाँच नहीं करता। न्यूरोथेरेपी आपके डॉक्टरी इलाज के साथ काम करती है — डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें, और कोई नया या गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर को दिखाएँ।