कमज़ोर और बुज़ुर्ग रोगी (हल्की देखभाल)
कमज़ोर, बुज़ुर्ग या लंबे समय से बीमार शरीर के पास ताक़त का भंडार कम होता है। LMNT पद्धति ऐसे व्यक्ति का इलाज धीरे से शुरू करती है — Mild Kidney Clear से, जो Kidney Clear फ़ॉर्मूले का सबसे छोटा दर्जा है, और लंबे ट्रीटमेंट के हल्के रूपों से — और आगे तभी बढ़ती है जब शरीर साथ दे।
- कमज़ोरी (फ़्रेल्टी) बुढ़ापे का ऐसा हिस्सा नहीं है जिससे बचा न जा सके
- 65 से ऊपर के लगभग हर 10 में से 1 व्यक्ति फ़्रेल्टी के साथ जीता है
- गंभीर फ़्रेल्टी वाले लोगों में अस्पताल में भर्ती, केयर-होम जाने या मृत्यु का सालाना ख़तरा चार गुना से ज़्यादा होता है
स्रोत: Royal Free London NHS Foundation Trust (patient leaflet: Frailty); NHS England (Supporting people living with frailty)
कमज़ोर और बुज़ुर्ग रोगी क्या है?
डॉक्टर फ़्रेल्टी शब्द ऐसे शरीर के लिए इस्तेमाल करते हैं जो किसी बीमारी, गिरने या किसी दूसरे तनाव को झेलने और उससे उबरने में कम सक्षम हो। यह धीरे-धीरे बनती है, जब सालों में शरीर के कई तंत्र थोड़ी-थोड़ी ताक़त खोते जाते हैं, और आख़िर एक छोटी-सी बात — हल्का संक्रमण, कोई नई दवा — बड़ा झटका दे सकती है।
फ़्रेल्टी बुढ़ापे में आम है, पर यह सिर्फ़ उम्र की बात नहीं। कोई लंबी, गंभीर बीमारी कम उम्र के शरीर को भी इसी हालत में ला सकती है। अच्छी बात यह है कि इसे जल्दी पहचाना जा सकता है, और व्यायाम, अच्छा भोजन, और सेहत व दवाओं की ध्यान से समीक्षा — सब मदद करते हैं।
इसके लक्षण क्या हैं?
- बिना किसी साफ़ कारण के वज़न घटना
- ऐसी थकान जिसका कोई साफ़ कारण न हो
- कमज़ोर मांसपेशियाँ, जिनसे चलना या उठना मुश्किल हो — जैसे मैट पर धीरे-धीरे, रुक-रुककर बैठना
- धीरे-धीरे कम काम करना — बाहर जाना, चलना या लोगों से मिलना कम होना
- याददाश्त कमज़ोर होना, और छोटी बीमारियों से उबरने में लंबा समय लगना
यह क्यों होता है, और किसे होने की संभावना ज़्यादा है?
फ़्रेल्टी किससे बनती है
- ज़िंदगी भर में शरीर के कई तंत्रों का धीरे-धीरे ताक़त खोना
- कोई लंबी या गंभीर बीमारी, जिसने शरीर को थका दिया हो
- कम सक्रियता, और कम भूख या ख़राब भोजन
कमज़ोर शरीर को क्या झटका दे सकता है
- हल्का संक्रमण, गिरना या अस्पताल में रहना
- कोई नई दवा, या दवा में बदलाव
- ऐसा ट्रीटमेंट जो उस दिन शरीर के लिए बहुत भारी हो
LMNT का नज़रिया
- लंबी बीमारी में कोई ग्रंथि पहले से बिगड़ी हो सकती है — गुरुजी की शिक्षा कहती है कि उसे पहले कम उकसाया जाए, ताकि वह धीरे-धीरे काम करने लगे
इसका पता कैसे चलता है?
फ़्रेल्टी की कोई एक जाँच नहीं है। डॉक्टर पूरे व्यक्ति को देखते हैं — वह कैसे चलता है और रोज़ का काम कैसे सँभालता है, उसका वज़न, याददाश्त, बीमारियाँ और दवाएँ।
फ़्रेल्टी स्कोर
स्वास्थ्य टीम व्यक्ति को फ़िट, हल्का, मध्यम या गंभीर रूप से कमज़ोर आँक सकती है, ताकि देखभाल ज़रूरत के हिसाब से हो।
सेहत और दवाओं की समीक्षा
डॉक्टर या नर्स हर बीमारी और हर दवा को देखते हैं, और नर्सिंग, थेरेपी या सामुदायिक सेवाओं के पास भेज सकते हैं।
किडनी की रिपोर्ट
ख़ून में क्रिएटिनिन बताता है कि किडनी कितनी अच्छी तरह काम कर रही है — किडनी का कोई भी ट्रीटमेंट चुनने से पहले यह ज़रूरी है।
न्यूरोथेरेपिस्ट Liv° और Mu° जाँचता है, देखता है कि व्यक्ति मैट पर कैसे बैठता-लेटता है, रिपोर्ट पढ़ता है, और किडनी फ़ेल्योर, किडनी के कैंसर और फेफड़ों के कैंसर के बारे में पूछता है — क्योंकि इनमें Kidney Clear के कुछ क़दम मना हैं।
न्यूरोथेरेपी की नज़र से कमज़ोर और बुज़ुर्ग रोगी
Kidney Clear दोनों किडनी के लिए LMNT का फ़ॉर्मूला है। इसके चार दर्जे हैं, I से IV, और दर्जा उस दिन रोगी की हालत देखकर चुना जाता है। गुरुजी की शिक्षा साफ़ है: पुराने रोगी, बुज़ुर्ग और कमज़ोर व्यक्ति में कम से शुरू कीजिए। दर्जा I को Mild Kidney Clear कहते हैं — (1) Liv° (1) Mu° (2) Ch. Only (5) Round Arrow। इसमें पूरे दर्जे वाले वही चार क़दम हैं, उसी क्रम में, कुछ भी छोड़ा नहीं गया — बस छोटे।
आख़िरी दो क़दम क्यों? गुरुजी की शिक्षा कहती है कि सिर्फ़ Liv° और Mu° पर काम करने से कुछ रोगियों को परेशानी हो सकती है, इसलिए एसिड–अल्कली का संतुलन बनाए रखने के लिए Ch. Only और Round Arrow दिए जाते हैं — हर दर्जे पर हमेशा 2 : 5 के एक ही अनुपात में। Mild Kidney Clear, Jeevan Dhara के हल्के रूप का भी हिस्सा है, जिसे LMNT पद्धति बुज़ुर्ग रोगी के लिए देती है। दर्जा तभी बढ़ाया जाता है जब शरीर दिखा दे कि वह ज़्यादा ले सकता है।
हम किसी एक बीमारी का इलाज नहीं करते; हम उस दिन शरीर की हालत के अनुसार इलाज करते हैं।
कमज़ोर और बुज़ुर्ग रोगी का न्यूरोथेरेपी इलाज, क़दम-दर-क़दम
पहले जाँच
थेरेपिस्ट Liv° और Mu° जाँचता है, किडनी की रिपोर्ट पढ़ता है, देखता है कि व्यक्ति कैसे हिलता-डुलता है, और हर बीमारी व दवा के बारे में पूछता है।
डॉक्टर को जानकारी
व्यक्ति के अपने डॉक्टर को न्यूरोथेरेपी की जानकारी रहती है, और हर दवा वैसे ही चलती है जैसे लिखी गई है।
दर्जा I से शुरुआत — Mild Kidney Clear
(1) Liv° (1) Mu° (2) Ch. Only (5) Round Arrow — सबसे छोटा दर्जा, जिसके संतुलन वाले क़दम अनुपात में रखे जाते हैं।
हल्के, छोटे सेशन
जहाँ लंबा ट्रीटमेंट चाहिए, वहाँ उसका हल्का रूप चुना जाता है — जैसे हल्का Jeevan Dhara — ताकि सेशन छोटा रहे और व्यक्ति बिना सहारे उठ सके।
धीरे-धीरे आगे
Kidney Clear का दर्जा II, III या IV तभी, जब शरीर दिखा दे कि वह ज़्यादा ले सकता है — यह हर दिन दोबारा तय होता है।
इस्तेमाल होने वाले पॉइंट और फ़ॉर्मूले
Mild Kidney Clear
Kidney Clear का दर्जा I — कमज़ोर, बुज़ुर्ग या लंबे समय से बीमार व्यक्ति के लिए हल्का रूप।
इन पॉइंट्स से काम करता है
खोलें →Kidney Clear
दोनों किडनी का मूल फ़ॉर्मूला, चार दर्जों में — दर्जा उस दिन शरीर की हालत देखकर चुना जाता है।
इन पॉइंट्स से काम करता है
खोलें →यह कभी न करें
- सिर्फ़ हल्का इलाज: कमज़ोर या बुज़ुर्ग व्यक्ति को हल्का ट्रीटमेंट और छोटे सेशन दिए जाते हैं, प्रशिक्षित थेरेपिस्ट के हाथों, और उनके डॉक्टर को जानकारी रहती है।
- किडनी फ़ेल्योर या किडनी के कैंसर में Liv° और Mu° को सक्रिय नहीं किया जाता। जिसे सिर्फ़ Liv° पर दर्द हो, उसे Mu° नहीं दिया जाता। Mu°
- फेफड़ों के कैंसर में Ch. Only नहीं दिया जाता। Ch. Only
- पुरानी (क्रॉनिक) बीमारी में सभी Arrow रीढ़ के सिर्फ़ L1–L5 तक ही दिए जाते हैं। Round Arrow
- अगर किडनी की पथरी के साथ दर्द हो, तो Ch. Only और Round Arrow की जगह Th + Ch दिया जाता है — और Th + Ch के साथ उसकी अपनी मनाही भी लागू होती है। Th + Ch
- बेहोशी जो जल्दी न जाए, सीने में दर्द, साँस फूलना, अचानक उलझन, अचानक कमज़ोरी या बोलने में परेशानी, या गिरकर चोट लगने पर तुरंत 108/112 पर कॉल करें या अस्पताल जाएँ। पेशाब बहुत कम आए या नई सूजन दिखे, तो जल्दी डॉक्टर को दिखाएँ।
- कैंसर: अगर व्यक्ति को कैंसर है, तो (10) Pan, Thymus, Pit, Lu + Sh, Rt. Ov / Lt. Ov और (30) Medulla कभी नहीं दिए जाते — थेरेपिस्ट योजना बदल देता है।
- डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें। न्यूरोथेरेपी आपके इलाज के साथ काम करती है, उसकी जगह नहीं।
अभ्यास से
पहले भारी रूप, फिर हल्का
सिखाने के लिए केस — अभ्यास से जोड़ा गया, किसी एक रोगी की फ़ाइल नहीं
71 साल की महिला · रिटायर्ड स्कूल टीचर · बेटी "कुछ ख़ास नहीं" कहकर लाई
- क्या मिला
- उसने मंदिर तक पैदल जाना छोड़ दिया था, नींद ख़राब थी, भूख कम थी, और पेट के बीच में हल्का-सा दर्द रहता था। शौच नियमित था। Liv और Mu पर दर्द था, Gas पर थोड़ा। वह धीरे चलती थी और मैट पर रुक-रुककर बैठी। उसकी रिपोर्टों से फ़ॉर्मूले का चुनाव नहीं बदला।
- क्या किया गया
- बिना पतले मोशन वाले पेट दर्द के लिए Jeevan Dhara चुना गया। पहले सेशन में थेरेपिस्ट ने भारी रूप दिया, जो उसे सबसे अच्छी तरह आता था। उसमें बहुत समय लगा; उसके बाद वह कई मिनट चुपचाप बैठी रही और जाने के लिए सहारा लगा। दूसरे सेशन से उसने हल्का रूप दिया, जो Mild Kidney Clear और Mild Genes पर ख़त्म होता है — बहुत कम बार दबाव — और वह बिना सहारे उठ गई। चौथे सेशन तक उसने बताया कि दर्द चला गया है; छठे तक उसकी बेटी ने बताया कि वह मंदिर तक पैदल जाकर लौट आई।
- इससे सीख
- कमज़ोर, बुज़ुर्ग शरीर में हल्का रूप ही सही है। देखिए व्यक्ति मैट पर कैसे बैठता है — यह उतना ही बताता है जितना उसकी तकलीफ़।
आयुर्वेद और रसोई से
ख़ुद को परखें
शोध क्या कहता है
- मज़बूत प्रमाण
फ़्रेल्टी को समझाने वाली एक बड़ी समीक्षा: ज़िंदगी भर में शरीर के कई तंत्र धीरे-धीरे अपना भंडार खो देते हैं, और आख़िर एक छोटा तनाव — हल्का संक्रमण, कोई नई दवा — सेहत में बड़ा बदलाव ला देता है। कमज़ोर बुज़ुर्गों में गिरने, अपंगता और अस्पताल में रहने का ख़तरा ज़्यादा होता है, इसीलिए देखभाल उतनी ही होनी चाहिए जितना शरीर ले सके।
कमज़ोर या बुज़ुर्ग रोगियों में न्यूरोथेरेपी का कोई क्लिनिकल ट्रायल अभी तक प्रकाशित नहीं हुआ है। न्यूरोथेरेपिस्ट जो सुधार बताते हैं, वे क्लिनिकल अवलोकन हैं।
आपके लिए
परिवार और देखभाल करने वाले
व्यक्ति के साथ आइए, और थेरेपिस्ट को हर दवा, हाल में गिरने, संक्रमण या अस्पताल में रहने के बारे में बताइए। सेशन के बाद वे ठीक न लगें, तो तुरंत बताइए।
बुज़ुर्ग
उम्र के साथ फ़्रेल्टी ज़रूरी नहीं। रोज़ चलते-फिरते रहिए, अच्छा खाइए, और अपनी सेहत व दवाओं की समीक्षा डॉक्टर से करवाते रहिए।
लंबी बीमारी वाले लोग
यही नियम हर उम्र में लागू है: बरसों की बीमारी के बाद LMNT पद्धति सबसे छोटे दर्जे से शुरू करती है और धीरे-धीरे आगे बढ़ती है।
यह पेज समझाता है, जाँच नहीं करता। न्यूरोथेरेपी आपके डॉक्टरी इलाज के साथ काम करती है — डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें, और कोई नया या गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर को दिखाएँ।