स्पास्टिसिटी (अकड़ी, सख़्त मांसपेशियाँ)
स्पास्टिसिटी का मतलब है मांसपेशियाँ अकड़ी और सख़्त रहती हैं और हिलने-डुलने का विरोध करती हैं। यह मांसपेशी की अपनी बीमारी नहीं है — यह इस बात का संकेत है कि दिमाग़ या रीढ़ की नस को नुक़सान पहुँचा है, जैसे स्ट्रोक, रीढ़ की चोट, या सेरिब्रल पाल्सी और मल्टीपल स्क्लेरोसिस में।

- अपने-आप में बीमारी नहीं — दिमाग़ या रीढ़ की नस में नुक़सान का संकेत
- स्ट्रोक या रीढ़ की नस की चोट के बाद, और सेरिब्रल पाल्सी व मल्टीपल स्क्लेरोसिस में आम
- कब्ज़, पेशाब का संक्रमण, दर्द या थकान इसे बढ़ा सकते हैं
- लंबे समय तक रहे, तो यह जोड़ को मुड़ी हालत में जकड़ सकती है (कॉन्ट्रैक्चर)
स्रोत: MedlinePlus; American Association of Neurological Surgeons (AANS); MS Trust
स्पास्टिसिटी क्या है?
हर मांसपेशी का रीढ़ की नस में एक सीधा-सा रिफ़्लेक्स होता है: जब उसे खींचा जाता है, तो वह ख़ुद को बचाने के लिए थोड़ा कस जाती है। दिमाग़ रीढ़ की नस में लगातार एक 'ब्रेक' संदेश भेजकर इस रिफ़्लेक्स को शांत रखता है।
जब दिमाग़ या रीढ़ की नस को नुक़सान पहुँचता है, तो यह ब्रेक कमज़ोर पड़ जाता है। तब रिफ़्लेक्स बहुत आसानी से और बहुत ज़ोर से चलने लगता है। मांसपेशी सख़्त बनी रहती है, हिलाने पर विरोध करती है, और उसमें झटके या ऐंठन आ सकती है। अगर हाथ-पैर महीनों तक मुड़ा रहे, तो मांसपेशी छोटी हो सकती है और जोड़ जकड़ सकता है।
इसके लक्षण क्या हैं?
- अकड़ी, सख़्त मांसपेशियाँ; धीमी और सीमित हरकतें
- अचानक ऐंठन, या अपने-आप बार-बार होने वाली झटकेदार हरकतें (क्लोनस)
- चलते या लेटते समय टाँगें कैंची की तरह एक-दूसरे पर चढ़ जाना
- अजीब मुद्रा — मुड़ी हुई कोहनी, भिंची मुट्ठी, नीचे की ओर तना हुआ पंजा
- दर्द, मांसपेशियों में थकान, और धीरे-धीरे जकड़ते जोड़
यह क्यों होता है, और किसे होने की संभावना ज़्यादा है?
दिमाग़ को नुक़सान
- स्ट्रोक
- सेरिब्रल पाल्सी — बढ़ते दिमाग़ को चोट
- सिर की चोट, दिमाग़ की गाँठ, या दिमाग़ को ऑक्सीजन की कमी (जैसे डूबते-डूबते बचना)
रीढ़ की नस और नसों को नुक़सान
दूसरे कारण
- दिमाग़ या नसों के संक्रमण
- विटामिन B12, विटामिन E या कॉपर की कमी
- शरीर के रसायन की कुछ जन्मजात गड़बड़ियाँ, जैसे फ़िनाइलकीटोन्यूरिया (PKU)
जो इसे बढ़ाते हैं
- कब्ज़ या शौच की आदत में बदलाव
- पेशाब का संक्रमण, त्वचा का घाव, या कोई भी दर्द
- थकान, तनाव, और बहुत गरमी या बहुत ठंड
इसका पता कैसे चलता है?
स्पास्टिसिटी जाँच से पता चलती है। डॉक्टर पूछते हैं कि यह कब शुरू हुई, कौन-सी मांसपेशियाँ प्रभावित हैं, कितनी ज़्यादा है और किससे बढ़ती है — और फिर दिमाग़ या रीढ़ की नस में इसका कारण ढूँढ़ते हैं।
शारीरिक और नसों की जाँच
डॉक्टर हर हाथ-पैर को हिलाकर मांसपेशियों का कसाव देखते हैं, रिफ़्लेक्स जाँचते हैं, और देखते हैं कि हर जोड़ कितना मुड़ और सीधा हो पाता है।
दिमाग़ या रीढ़ का MRI
बारीक तस्वीरें दिखाती हैं कि दिमाग़ या रीढ़ की नस में कहाँ नुक़सान हुआ है।
बढ़ाने वाली वजहों की खोज
जब स्पास्टिसिटी अचानक बढ़ जाए, तो डॉक्टर कोई छिपी वजह ढूँढ़ते हैं — पेशाब का संक्रमण, कब्ज़, त्वचा का घाव या दर्द।
न्यूरोथेरेपिस्ट डॉक्टर की डायग्नोसिस — स्पास्टिसिटी किस वजह से हुई — और दवाओं की सूची माँगता है। वह पूछता है कि मल कैसा आता है, और क्या भोजन बिना पचे निकलता है; महिला से माहवारी के बारे में पूछता है; और पूछता है कि क्या BP कम रहता है। फिर Liv° और Mu° की तुलना की जाती है, क्योंकि LMNT पद्धति में इलाज जाँच के हिसाब से चलता है, बीमारी के नाम से नहीं।
न्यूरोथेरेपी की नज़र से स्पास्टिसिटी
गुरुजी की शिक्षा शरीर को दो दिशाओं में पढ़ती है — एसिड और अल्कली। एसिड वाला शरीर ढीला और सूखा हो जाता है; अल्कली वाला शरीर कसा हुआ और गीला। LMNT की तालिका में सख़्त और कसी हुई मांसपेशियाँ — यानी स्पास्टिसिटी — अल्कली वाले कॉलम में आती हैं, दौरों और सेरिब्रल पाल्सी के साथ, और दाईं तरफ़ Liv° पर दर्द के साथ। पर LMNT पद्धति चेतावनी देती है कि एक पंक्ति देखकर फ़ैसला न करें: पूरी जाँच ही दिशा तय करती है।
LMNT पद्धति स्पास्टिसिटी को कैसे पढ़ती है
- कसी मांसपेशियाँLMNT की तालिका में सख़्त और कसी मांसपेशियाँ अल्कली वाली तरफ़ आती हैं
- UDF वाला सवालक्या भोजन बिना पचे निकल रहा है? जो पेट अपना एसिड नहीं बना रहा, वह ज़्यादा अल्कली जैसा दिख सकता है
- पहले पाचनकुछ दिन अनपचे भोजन वाला काम दिया जाता है, जब तक मल ठीक से न आने लगे
- फिर ALTFसिर्फ़ तब, जब उसके बाद भी Gal, Liv और Liv° पर दर्द बना रहे
- अकड़न के लिए (4) Kuअल्कली, स्पास्टिसिटी और जोड़ों की अकड़न कम करने के लिए
LMNT में दो तरह के पॉइंट होते हैं। फ़िज़िकल पॉइंट अकड़ी मांसपेशियों, नसों और लिगामेंट को ढीला करते हैं, और जल्दी आराम देते हैं — पर गुरुजी की शिक्षा कहती है कि अकेले इनका असर कुछ घंटों में, या ज़्यादा से ज़्यादा कुछ दिनों में उतर जाता है, क्योंकि शरीर का अंदरूनी काम नहीं बदला। केमिकल पॉइंट अंगों और ग्रंथियों पर काम करते हैं, और उनकी गिनती ठीक-ठीक दी जाती है, हर बार छह सेकंड। इसलिए स्पास्टिसिटी की योजना में ज़्यादातर केमिकल काम होता है, और आराम के लिए कुछ फ़िज़िकल पॉइंट।
हम किसी एक बीमारी का इलाज नहीं करते; हम उस दिन शरीर की हालत के अनुसार इलाज करते हैं।
स्पास्टिसिटी का न्यूरोथेरेपी इलाज, क़दम-दर-क़दम
पहले जाँच
थेरेपिस्ट डॉक्टर की रिपोर्ट पढ़ता है, Liv° और Mu° की तुलना करता है, पूछता है कि क्या भोजन बिना पचे निकलता है, और माहवारी, कम BP और पेट के किसी अल्सर के बारे में पूछता है — क्योंकि इनमें से हर बात तय करती है कि क्या दिया जा सकता है।
ALTF से पहले UDF वाला सवाल
अगर Gas पर दर्द है या भोजन बिना पचे निकलता है, तो पहले कुछ दिन Gas Only के साथ अनपचे भोजन वाला काम दिया जाता है। LMNT पद्धति स्पास्टिसिटी में इस्तेमाल होने वाले पॉइंट्स में Gas Only का नाम लेती है।
ALTF — सिर्फ़ शर्त पूरी होने पर
जब मल ठीक से आने लगे और Gas का दर्द चला जाए, पर Gal, Liv और Liv° पर दर्द बना रहे, तब अल्कली ट्रीटमेंट फ़ॉर्मूला दिया जाता है — तीन राउंड, दिन में एक या दो बार, हर राउंड के बीच नब्बे सेकंड का आराम। बहुत से मरीज़ों को इसकी ज़रूरत ही नहीं पड़ती।
अकड़न के लिए (4) Ku
(4) Ku रीढ़ के निचले सिरे पर अल्कली, स्पास्टिसिटी और जोड़ों की अकड़न कम करने के लिए दिया जाता है: दो को एक गिना जाता है, इसलिए यह बिना रुके छह-छह सेकंड के आठ दबाव हैं। फिर Mu° देखा जाता है; अगर उसमें अब भी दर्द हो, तो दर्द साफ़ होने तक Round Arrow दिया जाता है।
हर दिन दोबारा जाँच
हर बार, पहले दिन की तरह, Liv° और Mu° दोबारा देखे जाते हैं। जाँच बदलने पर योजना बदलती है — आराम के लिए कुछ फ़िज़िकल पॉइंट जोड़े जा सकते हैं, पर केमिकल पॉइंट्स की गिनती कभी घटाई-बढ़ाई नहीं जाती।
इस्तेमाल होने वाले पॉइंट और फ़ॉर्मूले
ALTF (मुख्य रूप)
अल्कली ट्रीटमेंट फ़ॉर्मूला — शरीर के अल्कली वाले झुकाव को कम करने में मदद करता है; वह रूप जो लगभग सबको फ़ायदा देता है, अनपचे भोजन वाले काम के बाद ही दिया जाता है।
इन पॉइंट्स से काम करता है
खोलें →यह कभी न करें
- (4) Ku माहवारी के दिनों में महिला को, और कम BP वाले किसी भी व्यक्ति को कभी नहीं दिया जाता। सेशन से पहले दोनों बातें पूछी जाती हैं। Ku के बाद भी Mu° में दर्द रहे, तो दर्द साफ़ होने तक Round Arrow दिया जाता है। (4) Ku
- पेट या ड्यूओडेनम में अल्सर हो, तो Gas Only नहीं दिया जाता। कब्ज़, बवासीर या भगंदर हो, तो उसके साथ Gas 'I' दिया जाता है। Gas Only
- ALTF सिर्फ़ अनपचे भोजन वाले काम के बाद दिया जाता है, और जब जाँच एसिड वाली तरफ़ इशारा करे तब कभी नहीं। हर ट्रीटमेंट से पहले Liv° और Mu° देखे जाते हैं। ALTF (मुख्य रूप)
- अचानक आई अकड़न या कमज़ोरी — ख़ासकर एक तरफ़, चेहरा लटकने या ज़बान लड़खड़ाने के साथ — में पहले आपातकालीन इलाज ज़रूरी है: यह स्ट्रोक हो सकता है। गिरने, गर्दन या कमर की चोट के बाद की अकड़न, या पेशाब-शौच पर क़ाबू न रहना — इनमें भी पहले अस्पताल। स्पास्टिसिटी लगातार बढ़ रही हो, या कोई जोड़ जकड़ता जा रहा हो, तो डॉक्टर को दिखाएँ। स्ट्रोक, या थोड़ी देर की कमज़ोरी, सुन्नपन या आँखों की रोशनी जाना
- सेरिब्रल पाल्सी, MS या रीढ़ की चोट से हुई स्पास्टिसिटी आम तौर पर लंबे समय तक रहती है। न्यूरोथेरेपी आराम और रोज़ के काम-काज में मदद कर सकती है और सुधार बताए गए हैं, पर यह नसों के नुक़सान को पलटती नहीं — फ़िज़ियोथेरेपी, स्ट्रेचिंग और स्प्लिंट जारी रखें। बच्चों को बड़ों की आधी खुराक और सिर्फ़ हल्का ट्रीटमेंट दिया जाता है, वह भी प्रशिक्षित थेरेपिस्ट के हाथों।
- कैंसर: अगर व्यक्ति को कैंसर है, तो (10) Pan, Thymus, Pit, Lu + Sh, Rt. Ov / Lt. Ov और (30) Medulla कभी नहीं दिए जाते — थेरेपिस्ट योजना बदल देता है।
- डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें। न्यूरोथेरेपी आपके इलाज के साथ काम करती है, उसकी जगह नहीं।
आयुर्वेद और रसोई से
ख़ुद को परखें
शोध क्या कहता है
- मज़बूत प्रमाण
यह समीक्षा समझाती है कि स्पास्टिसिटी क्यों होती है: दिमाग़ के हरकत वाले रास्तों को नुक़सान से रीढ़ की नस तक पहुँचने वाले शांत करने और उत्तेजित करने वाले संदेशों का संतुलन बिगड़ जाता है, इसलिए स्ट्रेच रिफ़्लेक्स ज़्यादा सक्रिय हो जाता है। फिर हाथ-पैर को छोटी, मुड़ी हालत में स्थिर रखने से मांसपेशी ख़ुद भी सख़्त हो जाती है — इसीलिए नियमित हरकत और स्ट्रेचिंग ज़रूरी है।
स्पास्टिसिटी में न्यूरोथेरेपी का कोई क्लिनिकल ट्रायल अभी तक प्रकाशित नहीं हुआ है। न्यूरोथेरेपिस्ट जो सुधार बताते हैं, वे क्लिनिकल अवलोकन हैं।
आपके लिए
स्पास्टिसिटी के साथ जी रहे लोग
रोज़ की स्ट्रेचिंग और फ़िज़ियोथेरेपिस्ट की बताई कसरतें जारी रखें। बढ़ाने वाली वजहों पर नज़र रखें — कब्ज़, पेशाब का संक्रमण, त्वचा का घाव, थकान — और अकड़न अचानक बढ़े तो डॉक्टर को बताएँ।
देखभाल करने वाले
व्यक्ति की करवट बार-बार बदलें, त्वचा साफ़ और सूखी रखें, और शौच नियमित रखें। हर न्यूरोथेरेपी विज़िट पर सारी रिपोर्ट और दवाओं की सूची साथ लाएँ।
स्ट्रोक या रीढ़ की चोट के बाद
डॉक्टर की सलाह से फ़िज़ियोथेरेपी जल्दी शुरू करें। जिस हाथ-पैर को रोज़ हिलाया जाए, उसके जकड़ने की आशंका कम रहती है।
यह पेज समझाता है, जाँच नहीं करता। न्यूरोथेरेपी आपके डॉक्टरी इलाज के साथ काम करती है — डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें, और कोई नया या गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर को दिखाएँ।