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न्यूरोथेरेपी (LMNT) विषय

खट्टी चीज़ें और जोड़ों का दर्द: खटाई का नियम, और एक-एक चीज़ को परखने का तरीक़ा

जिन्हें शरीर या जोड़ों में दर्द है, उन्हें खट्टी चीज़ों से दूर रहने की सलाह दी जाती है, क्योंकि जोड़ों का दर्द अक्सर ख़ून में एसिड बढ़ने से आता है। पर हर चीज़ का असर हर व्यक्ति पर एक जैसा नहीं होता, इसलिए हर चीज़ को रोगी पर एक-एक करके परखा जाता है।

परिचय

फलों को इस आधार पर बाँटा जाता है कि पकने से पहले उनका स्वाद कैसा होता है, इस पर नहीं कि खाते समय वे कितने खट्टे लगते हैं।

न्यूरोथेरेपी (LMNT) में जोड़ों के दर्द को अक्सर ख़ून में एसिड बढ़ने से जोड़ा जाता है, और आयुर्वेद भी कहता है कि खट्टी चीज़ों से दर्द बढ़ता है। इसलिए जिन्हें शरीर या जोड़ों में दर्द है, उन्हें दही, इमली, टमाटर और नींबू जैसी खट्टी चीज़ें न खाने की सलाह दी जाती है।

फलों का नियम ज़्यादातर लोगों को चौंकाता है। जो फल कच्चे में खट्टे और पकने पर मीठे होते हैं, जैसे संतरा, मौसमी, सेब और आम, उनसे भी दूर रहना है। जो फल कच्चे में कड़वे या फीके होते हैं, जैसे केला, चीकू, पपीता, सीताफल, अमरूद, अंजीर और आँवला, वे मज़े से खाए जा सकते हैं। सूची नहीं, परखने का तरीक़ा याद रखिए, तो आप किसी भी फल को ख़ुद पहचान लेंगे।

किस हालत में खाया जा रहा है, यह भी मायने रखता है। नेचुरोपैथी में उपवास के दौरान नींबू पानी इलाज के रूप में दिया जाता है, पर खाने के साथ लिया गया नींबू दर्द बढ़ा सकता है। कोकम को एसिडिटी के लिए बहुत अच्छा कहा जाता है, फिर भी हर रोगी को देखना होता है कि उससे जोड़ों में दर्द तो नहीं होता।

इसलिए यह नियम हर व्यक्ति पर परखा जाता है। एक चीज़ को लगभग दो हफ़्ते के लिए पूरी तरह बंद करें और देखें कि दर्द कैसा है। कुछ न बदले, तो वह चीज़ वापस खाने में शामिल कर दें। दर्द कम हो, तो उसे बंद रखें और अगली चीज़ परखें। एक बार में एक ही, वरना किसी को पता नहीं चलेगा कि किस बदलाव से फ़ायदा हुआ।

मुख्य बातें

  • खटाई का नियम शरीर या जोड़ों के दर्द वालों के लिए है, सबके लिए नहीं।
  • फलों को पकने से पहले के स्वाद से पहचाना जाता है।
  • एक ही चीज़ एक हालत में फ़ायदा और दूसरी में नुक़सान कर सकती है।
  • एक बार में एक चीज़ परखें, और जिसे हटाने की ज़रूरत नहीं थी उसे वापस दें।

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सावधानी: कब नहीं दिया जाता

  • दही प्रोटीन और कैल्शियम का बड़ा स्रोत है, और टमाटर, नींबू और इमली शरीर को आयरन सोखने में मदद करते हैं। ख़ून की कमी वाले, बुज़ुर्ग, कम वज़न वाले, गर्भवती महिला या बढ़ती उम्र की लड़की के खाने से ये सब एक साथ न हटाएँ। एनीमिया (ख़ून की कमी)
  • बिना कोशिश के वज़न घटना, या किसी पुरुष या रजोनिवृत्ति के बाद की महिला में ख़ून की कमी, डॉक्टर से पूछने की बात है, डाइट बदलने की नहीं।

गुरुजी कहते हैं

“मरीज़ को स्वयं आज़माकर देखना है। हर चीज़ का असर हर व्यक्ति पर एक जैसा नहीं होता।”
— डॉ. लाजपतराय मेहरा

यह पेज बताता है कि न्यूरोथेरेपी (LMNT) का यह ट्रीटमेंट किसलिए है; यह ख़ुद इलाज करने की गाइड नहीं है और जाँच नहीं करता। न्यूरोथेरेपी (LMNT) आपके डॉक्टरी इलाज के साथ काम करती है — डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें।

Neurotherapy.Life टीम द्वारा, डॉ. लाजपतराय मेहरा की शिक्षाओं पर आधारित

समीक्षा: डॉ. दिवाकर शुक्ला, वरिष्ठ न्यूरोथेरेपिस्ट

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