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न्यूरोथेरेपी (LMNT) फ़ॉर्मूला

Mauneesh — अल्कली वाला क्रम

दूसरे नाम: Mauneesh alkali treatment, Maunish alkali order

Mauneesh का अल्कली वाला क्रम न्यूरोथेरेपी (LMNT) का एक ट्रीटमेंट है, जो शरीर की लिम्फ़ (lymph) निकासी के रास्ते पर चलते हुए चारों हाथ-पैरों पर धड़ की ओर काम करता है। यह बढ़ी हुई अल्कली घटाने के लिए है, और अकड़न व स्पास्टिसिटी (मांसपेशियों का कसकर अकड़ जाना) में दिया जाता है — जैसे सेरेब्रल पाल्सी और दौरों में।

परिचय

Mauneesh का अल्कली वाला क्रम क्या है?

Mauneesh एक नहीं, दो ट्रीटमेंट की जोड़ी है। दोनों में रोगी की स्थिति एक जैसी है, और बाँहों-पैरों पर किया जाने वाला हल्का काम भी एक जैसा। बदलता है तो बस यह कि चारों अंगों को किस क्रम में लिया जाए — और न्यूरोथेरेपी (LMNT) में यही क्रम असली हिदायत है। एक क्रम अल्कली घटाता है, दूसरा एसिड।

यह पेज अल्कली वाले क्रम के बारे में है। इसका बताया गया काम है बढ़ी हुई अल्कली को नीचे लाना, ताकि अकड़न घटे और मांसपेशियाँ नरम हों। यह कपाल-नस और लिम्फ़ वाले ट्रीटमेंट के समूह का हिस्सा है।

इस ट्रीटमेंट पर गुरुजी के एक पुराने शिष्य, श्री मौनीश व्यास जी, का नाम है — सम्मान के तौर पर। दूसरे नाम वाले ट्रीटमेंट की तरह, यह नाम नहीं बताता कि ट्रीटमेंट क्या करता है, इसलिए इसे सीखना पड़ता है।

Mauneesh चारों अंगों पर धड़ की ओर काम करता है। दो नलिकाएँ लिम्फ़ को वापस ख़ून तक ले जाती हैं, और उनके इलाक़े बहुत असमान हैं।

यह किसलिए है

अल्कली वाला क्रम किस काम आता है?

  • शरीर में बढ़ी हुई अल्कली घटाने के लिए।
  • अकड़न कम करने के लिए, ताकि कसी हुई मांसपेशियाँ नरम हों।
  • सेरेब्रल पाल्सी, दौरे और स्पास्टिसिटी वाले रोगियों के लिए — जैसा स्रोत बताता है।

किन पॉइंट्स से काम करता है

अल्कली वाला क्रम कहाँ काम करता है?

Mauneesh रास्ते पर चलने वाला ट्रीटमेंट है, अलग-अलग पॉइंट्स का समूह नहीं। यह हर बाँह पर हथेली से बग़ल की ओर, और हर पैर पर एड़ी से जाँघ के जोड़ की ओर काम करता है — हमेशा धड़ की ओर, जहाँ लिम्फ़ जाकर मिलती है। अंगों का क्रम और सही तरीक़ा न्यूरोथेरेपी (LMNT) कोर्स में हाथों-हाथ सिखाया जाता है।

Armpit

बग़ल बाँह की निकासी का ठिकाना है। हर बाँह पर काम वहीं जाकर पूरा होता है।

Lymph

मिलता-जुलता विचार: लिम्फ़ पॉइंट भी शरीर की निकासी-व्यवस्था पर काम करता है, पर दूसरे रास्ते से।

स्थिति: रोगी पहले करवट लेता है, फिर पीठ के बल लेटता है — दोनों बाँहें ऊपर उठाकर सिर के पास मोड़ी हुई, और घुटने बाहर की ओर। पैरों पर काम करते समय रोगी को एक-एक करवट पर लिटाया जाता है।

सही तकनीक न्यूरोथेरेपी (LMNT) कोर्स में हाथों-हाथ सिखाई जाती है। कोर्स देखें →

यह कैसे काम करता है

अंगों का क्रम क्यों मायने रखता है?

शरीर के दोनों हिस्सों की लिम्फ़ एक ही तरह ख़ून में वापस नहीं जाती। दाईं ओर एक छोटी नलिका सिर्फ़ दाईं बाँह, सिर के दाएँ हिस्से, दिल, फेफड़े और छाती के दाएँ हिस्से की लिम्फ़ ले जाती है। बाईं ओर एक लंबी नलिका — थोरैसिक डक्ट — दोनों पैरों, बाईं बाँह, सिर और छाती के बाएँ हिस्से, और पेट के हर अंग की लिम्फ़ ले जाती है।

इसलिए दोनों हिस्से एक-दूसरे की हू-ब-हू नक़ल नहीं हैं। न्यूरोथेरेपी (LMNT) इसी बात का इस्तेमाल करती है: जो क्रम एक तरफ़ ख़त्म होता है, वह आख़िर में बड़ी नलिका में खाली होता है, और जो दूसरी तरफ़ ख़त्म होता है, वह छोटी नलिका में। कौन-सा चाहिए, यही तय करता है कि कौन-सा क्रम दिया जाए। अल्कली वाला क्रम वह है जो अल्कली नीचे लाने के लिए चुना जाता है।

लिम्फ़ का सिर्फ़ लगभग एक-चौथाई हिस्सा ही दाईं ओर क्यों जाता है — इस सवाल को न्यूरोथेरेपी (LMNT) ख़ुद खोज के लिए खुला छोड़ती है।

इसका परिवार

कौन-से ट्रीटमेंट इससे जुड़े हैं?

अल्कली वाले क्रम का एक जुड़वाँ है, और दोनों कपाल-नस और लिम्फ़ वाले समूह में दूसरे निकासी वाले ट्रीटमेंट के साथ आते हैं।

  • Mauneesh, एसिड वाला क्रम — वही स्थिति और वही काम, पर अंग अलग क्रम में — एसिड घटाने के लिए।
  • Maunish ट्रीटमेंट — उसी शिष्य के बनाए: हाथ या पैर में इन्फ़ेक्शन या चोट हो, तो बग़ल या जाँघ के जोड़ का इलाज।
  • ALTF (मुख्य रूप) — बढ़ी हुई अल्कली के लिए न्यूरोथेरेपी (LMNT) का मुख्य फ़ॉर्मूला, जो शरीर के सामने वाले पॉइंट्स से दिया जाता है।
  • Subclavian ट्रीटमेंट — इसी समूह का एक और ट्रीटमेंट, जो हँसली के नीचे वहाँ काम करता है जहाँ लिम्फ़ नसों से मिलती है।

किसके लिए

अल्कली वाला क्रम कब दिया जाता है?

स्रोत रोगियों का एक छोटा, साफ़ समूह बताता है। यह क्रम तभी चुना जाता है, जब थेरेपिस्ट उस दिन पाए कि एसिड नहीं, अल्कली बढ़ी हुई है।

मांसपेशियों की अकड़न

एसिड–अल्कली संतुलन

सावधानी: कब नहीं दिया जाता

  • दोनों क्रम उलटे काम करते हैं। क्रम चुनने से पहले थेरेपिस्ट उसी दिन नाभि के पास गुर्दे वाले पॉइंट Liv° और Mu° जाँचता है, ताकि पता चले कि अल्कली बढ़ी है या एसिड। ग़लत क्रम देने से शरीर और ग़लत दिशा में चला जाता है। Liv°
  • न्यूरोथेरेपी (LMNT) एसिडोसिस में अल्कली घटाने वाला फ़ॉर्मूला (ALTF) कभी नहीं देती, और अल्कलोसिस में एसिड घटाने वाला फ़ॉर्मूला (ATF) भी नहीं। Mauneesh के दोनों क्रमों में चुनते समय भी यही सावधानी रहती है। एसिडोसिस (शरीर में एसिड बढ़ना)
  • बच्चों को — और सेरेब्रल पाल्सी के ज़्यादातर रोगी बच्चे ही होते हैं — सिर्फ़ हल्का ट्रीटमेंट दिया जाता है: नरम दबाव, ज़ोर कभी नहीं। बच्चों, बुज़ुर्गों और कमज़ोर लोगों के लिए हल्के फ़ॉर्मूले
  • दौरे वाला बच्चा या बड़ा, डॉक्टर की दी हुई दवा रोज़ लेता रहे। न्यूरोथेरेपी (LMNT) उसके साथ काम करती है, उसकी जगह कभी नहीं। रोगी को डॉक्टर के पास जाने को कैसे कहें

आम सवाल

दोनों Mauneesh ट्रीटमेंट में सिर्फ़ क्रम ही क्यों बदलता है?

क्योंकि हर अंग पर किया जाने वाला काम दोनों में एक जैसा है। न्यूरोथेरेपी (LMNT) मानती है कि क्रम कहाँ ख़त्म होता है — बड़ी लिम्फ़ नलिका की तरफ़ या छोटी की तरफ़ — यही तय करता है कि शरीर किस दिशा में जाए।

क्या यह मालिश है?

नहीं। यह तय दिशा — धड़ की ओर — और तय मक़सद वाला दबाव का ट्रीटमेंट है। सही तरीक़ा न्यूरोथेरेपी (LMNT) कोर्स में हाथों-हाथ सिखाया जाता है।

क्या यह दौरों या सेरेब्रल पाल्सी की दवा की जगह ले सकता है?

नहीं। यह इलाज के साथ दिया जाता है। किसी ट्रीटमेंट की वजह से दौरों की दवा कभी बंद या कम नहीं की जाती।

Mauneesh कौन थे?

श्री मौनीश व्यास जी, गुरुजी के एक पुराने शिष्य। बग़ल और जाँघ के जोड़ वाले Maunish ट्रीटमेंट भी उन्हीं के बनाए हैं।

हैरान करने वाली बातें

1आपकी तीन-चौथाई लिम्फ़ एक ही तरफ़ से ऊपर जाती है

थोरैसिक डक्ट दोनों पैरों, पूरे पेट और शरीर के बाएँ ऊपरी हिस्से की लिम्फ़ इकट्ठा करती है और उसे गर्दन की जड़ में बाईं ओर की नसों में ख़ाली करती है। दाईं लिम्फ़ नलिका सिर्फ़ दाईं बाँह, छाती के दाएँ हिस्से और सिर के दाएँ हिस्से की सेवा करती है।

स्रोत: Standard anatomy: Gray's Anatomy, 41st ed., lymphatic system; Moore JE Jr, Bertram CD. Lymphatic system flows. Annu Rev Fluid Mech. 2018;50:459–482.

2लिम्फ़ का अपना कोई दिल नहीं होता

ख़ून को दिल धकेलता है, पर लिम्फ़ ख़ुद लिम्फ़ नलियों के और आसपास की मांसपेशियों के सिकुड़ने से आगे बढ़ती है, और एक-तरफ़ा वाल्व उसे पीछे खिसकने नहीं देते। अंगों की हरकत उसे आगे बढ़ाने में मदद करती है।

स्रोत: Moore JE Jr, Bertram CD. Lymphatic system flows. Annual Review of Fluid Mechanics. 2018;50:459–482.

3हर दिन लीटरों तरल वापस लौटता है

हर दिन कुछ लीटर तरल बारीक ख़ून की नलियों से रिसकर ऊतकों में चला जाता है। लिम्फ़ तंत्र उसे बटोरकर गर्दन की जड़ के पास फिर से ख़ून में लौटा देता है। यह वापसी न हो, तो ऊतक सूज जाएँ।

स्रोत: Guyton and Hall Textbook of Medical Physiology, 14th ed., the lymphatic system (roughly 2–3 litres of lymph per day).

ख़ुद को परखें

1. Mauneesh के अल्कली वाले क्रम का बताया गया काम क्या है?

2. अल्कली और एसिड वाले क्रम में अकेला फ़र्क़ क्या है?

3. दोनों पैरों और पूरे पेट की लिम्फ़ कौन-सी नलिका ले जाती है?

शोध

  • मज़बूत प्रमाण

    यह समीक्षा बताती है कि लिम्फ़ अपनी ही नलियों के सिकुड़ने और आसपास के ऊतकों के दबाव से कैसे आगे बढ़ती है, और आख़िर में कंधे के स्तर पर नसों में कैसे लौटती है। धड़ की ओर काम करने के विचार के पीछे यही शरीर-विज्ञान है।

    Moore JE Jr, Bertram CD. Lymphatic System Flows. Annual Review of Fluid Mechanics. 2018;50:459–482.

और जानिए

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यह पेज बताता है कि न्यूरोथेरेपी (LMNT) का यह ट्रीटमेंट किसलिए है; यह ख़ुद इलाज करने की गाइड नहीं है और जाँच नहीं करता। न्यूरोथेरेपी (LMNT) आपके डॉक्टरी इलाज के साथ काम करती है — डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें।

Neurotherapy.Life टीम द्वारा, डॉ. लाजपतराय मेहरा की शिक्षाओं पर आधारित

समीक्षा: डॉ. दिवाकर शुक्ला, वरिष्ठ न्यूरोथेरेपिस्ट

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