सेप्टिसीमिया (सेप्सिस — ख़ून में संक्रमण)
सेप्सिस एक मेडिकल इमरजेंसी है: अभी इमरजेंसी सेवा (108/112) को फ़ोन करें या अस्पताल जाएँ। यह तब होता है, जब किसी संक्रमण पर शरीर की प्रतिक्रिया बेक़ाबू हो जाती है और उसके अपने अंगों को नुक़सान पहुँचाने लगती है। इमरजेंसी में न्यूरोथेरेपी की कोई जगह नहीं है — LMNT सिर्फ़ ठीक होने के दौर में दी जाती है, जब अस्पताल इलाज कर चुका हो।

- सेप्सिस के हर साल अनुमानित 4.89 करोड़ मामले और 1.1 करोड़ मौतें होती हैं — दुनिया की सभी मौतों का 20%
- लगभग आधे मामले — क़रीब 2 करोड़ — 5 साल से छोटे बच्चों में होते हैं
- अस्पताल में भर्ती हर 1,000 में से लगभग 15 मरीज़ों को सेप्सिस हो जाता है
स्रोत: World Health Organization — Sepsis fact sheet; MedlinePlus; NHS
सेप्टिसीमिया क्या है?
आम तौर पर इम्यून सिस्टम संक्रमण से वहीं लड़ता है, जहाँ वह है। सेप्सिस में शरीर की प्रतिक्रिया हद से ज़्यादा हो जाती है: वह पूरे शरीर में फैल जाती है और उसके अपने अंगों को नुक़सान पहुँचाने लगती है। सेप्टिसीमिया का मतलब है कि कीटाणु, आम तौर पर बैक्टीरिया, ख़ून में पहुँच गए हैं; इससे सेप्सिस हो सकता है।
अस्पताल में जल्दी इलाज न मिले, तो सेप्सिस सेप्टिक शॉक तक पहुँच सकता है — ब्लड प्रेशर ख़तरनाक रूप से गिर जाता है और कई अंग काम करना बंद करने लगते हैं। हर घंटा क़ीमती है, इसीलिए पहला क़दम हमेशा अस्पताल है।
इसके लक्षण क्या हैं?
- बहुत तेज़ साँस, या बहुत तेज़ धड़कन
- उलझन, लड़खड़ाती बोली या बेतुकी बातें
- नीली, पीली या धब्बेदार त्वचा, होंठ या जीभ
- बुख़ार या बहुत कम तापमान, कँपकँपी, ठंडी चिपचिपी त्वचा
- ऐसे दाने, जो गिलास से दबाने पर भी फीके न पड़ें
- बहुत कम या बिल्कुल पेशाब न आना; बहुत तेज़ दर्द
यह क्यों होता है, और किसे होने की संभावना ज़्यादा है?
यह किसी संक्रमण से शुरू होता है
जिन्हें ज़्यादा ख़तरा है
- 65 से ज़्यादा उम्र के लोग, 1 साल से छोटे शिशु, और गर्भवती महिलाएँ
- डायबिटीज़, फेफड़ों की बीमारी, किडनी की बीमारी या कैंसर वाले लोग
- कोई भी, जिसका इम्यून सिस्टम कमज़ोर हो
इसका पता कैसे चलता है?
सेप्सिस की पहचान और इलाज अस्पताल में होता है। डॉक्टर व्यक्ति की जाँच करते हैं और टेस्ट से संक्रमण ढूँढते हैं और देखते हैं कि अंग कैसे झेल रहे हैं।
ब्लड कल्चर
पता करता है कि ख़ून में कौन-सा कीटाणु है, ताकि सही दवा चुनी जा सके।
लैक्टेट और प्रोकैल्सिटोनिन
ख़ून की जाँचें, जो बताती हैं कि संक्रमण कितना गंभीर है और अंगों को ऑक्सीजन की कमी तो नहीं।
एक्स-रे या CT स्कैन
पता करता है कि संक्रमण कहाँ से शुरू हुआ, जैसे फेफड़ों में या पेट में।
न्यूरोथेरेपिस्ट छूने से पहले देखता है: गर्म कमरे में कँपकँपी, तेज़ साँस, उलझन, फैलती लाली वाला घाव या बहुत कम पेशाब — ये दरवाज़े पर ही सेशन ख़त्म कर देते हैं। व्यक्ति अभी अस्पताल जाता है, साथ में जो देखा गया उसका छोटा-सा लिखा नोट।
न्यूरोथेरेपी की नज़र से सेप्टिसीमिया
LMNT पद्धति साफ़ कहती है: जिस शरीर के ख़ून में बैक्टीरिया भारी मात्रा में पहुँच चुके हों, वह ट्रीटमेंट के किसी कोर्स के लिए नहीं आया — उसे अस्पताल चाहिए। इसलिए LMNT में इमरजेंसी पूरी तरह डॉक्टरों की है। और एक पॉइंट पर पूरी रोक है: (6) Adr थाइमस और इम्यूनिटी को घटाता है, और सेप्टिसीमिया में ग़लती से दे दिया जाए, तो तुरंत दौरे आ सकते हैं।
जब अस्पताल संक्रमण का इलाज कर चुका हो और डॉक्टर सहमत हों, तब ठीक होने के दौर में LMNT पद्धति शरीर की अपनी रक्षा की ओर मुड़ती है: Thymus, Th + Ch — हमेशा Armpits के साथ — वायरल ट्रीटमेंट फ़ॉर्मूला, और Spl, जिसे LMNT तिल्ली से सफ़ेद कोशिकाएँ और एंटीबॉडी बनवाने में मदद के लिए देती है। यह डॉक्टर के साथ बाद की देखभाल है, अस्पताल के इलाज की जगह कभी नहीं।
रोगी को हमारे ट्रीटमेंट से तुरंत फ़ायदा मिले या न मिले, हमारी लापरवाही से उसे कोई नुक़सान न पहुँचे — इस पर ध्यान दीजिए।
सेप्टिसीमिया का न्यूरोथेरेपी इलाज, क़दम-दर-क़दम
पहले इमरजेंसी — 108/112
तुरंत इमरजेंसी सेवा (108/112) को फ़ोन करें। LMNT आपके मौजूदा डॉक्टरी इलाज के साथ सबसे अच्छा काम करती है — हमेशा पहले इमरजेंसी सेवा को फ़ोन करें। ख़ुद गाड़ी न चलाएँ; किसी को साथ ले जाएँ।
अस्पताल के बाद — पहले जाँच
सिर्फ़ अस्पताल से छुट्टी के बाद, डॉक्टर की सहमति से। थेरेपिस्ट अस्पताल के काग़ज़ पढ़ता है, जाँच वाले पॉइंट Liv° और Mu° देखता है, और हर बार पूछता है: पिछली बार के बाद कुछ नया — कहीं भी?
(6) Adr काटना
कार्ड पर (6) Adr पर रोक लगती है — और उसके साथ ITF पर भी, जिसमें यह होता है — भले ही पहले किसी दूसरी बीमारी में इससे फ़ायदा हो रहा हो।
रक्षा-प्रणाली के संभलने में सहारा
Th + Ch, हमेशा Armpits के साथ; वायरल ट्रीटमेंट फ़ॉर्मूला; और Spl — हल्के हाथ से, सिर्फ़ ठीक होने के दौर में।
इस्तेमाल होने वाले पॉइंट और फ़ॉर्मूले
यह कभी न करें
- तुरंत इमरजेंसी सेवा (108/112) को फ़ोन करें। LMNT आपके मौजूदा डॉक्टरी इलाज के साथ सबसे अच्छा काम करती है — हमेशा पहले इमरजेंसी सेवा को फ़ोन करें।
- बहुत तेज़ साँस, उलझन या लड़खड़ाती बोली, नीली, पीली या धब्बेदार त्वचा, होंठ या जीभ, कँपकँपी के साथ बुख़ार या बहुत कम तापमान, दबाने पर फीके न पड़ने वाले दाने, या बहुत कम पेशाब — तो तुरंत अस्पताल जाएँ। शिशु या छोटे बच्चे में: तेज़ या मुश्किल साँस, असामान्य नींद, दूध न पीना, या कमज़ोर या लगातार रोना।
- सेप्टिसीमिया में (6) Adr कभी नहीं दिया जाता — यह थाइमस और इम्यूनिटी घटाता है, और ग़लती से दे दिया जाए तो तुरंत दौरे आ सकते हैं। ITF भी नहीं दिया जाता, क्योंकि उसमें यह होता है। (6) Adr
- तेज़ बीमारी के दौरान हाथों से कोई ट्रीटमेंट नहीं। LMNT सिर्फ़ ठीक होने के दौर में, अस्पताल के इलाज के बाद और डॉक्टर की सहमति से दी जाती है।
- कोई भी नया घाव, जलन, बुख़ार या संक्रमण हो, चाहे छोटा ही हो, तो थेरेपिस्ट को बताएँ — इससे उस दिन क्या सुरक्षित है, यह बदल सकता है।
- बच्चों को बड़ों की आधी खुराक और सिर्फ़ हल्का ट्रीटमेंट दिया जाता है, वह भी प्रशिक्षित थेरेपिस्ट के हाथों।
- कैंसर: अगर व्यक्ति को कैंसर है, तो (10) Pan, Thymus, Pit, Lu + Sh, Rt. Ov / Lt. Ov और (30) Medulla कभी नहीं दिए जाते — थेरेपिस्ट योजना बदल देता है।
- डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें। न्यूरोथेरेपी आपके इलाज के साथ काम करती है, उसकी जगह नहीं।
अभ्यास से
वह सेशन, जो चार मिनट चला
एक शिक्षण केस — अभ्यास से जोड़ा गया मिश्रित उदाहरण, किसी एक रोगी की फ़ाइल नहीं
47 साल का एक आदमी · पावरलूम ऑपरेटर · रूमेटॉइड आर्थराइटिस के ट्रीटमेंट का कोर्स चल रहा था, और अच्छा चल रहा था
- क्या मिला
- ग्यारहवीं बार वह देर से आया, भाई उसे लेकर आया था। गर्म कमरे में वह शॉल ओढ़े काँप रहा था, तेज़ साँस ले रहा था, और पिछले दिन से सिर्फ़ एक बार पेशाब गया था। आठ दिन पहले पिंडली पर लगी छोटी-सी जलन पट्टी से काफ़ी आगे तक लाल थी। भाई ने कहा: "कल से यह कुछ अलग तरह से बात कर रहा है।"
- क्या किया गया
- कुछ भी नहीं दिया गया। उसके कार्ड पर (6) Adr लिखा था — वही पॉइंट जिसने दस बार उसके आर्थराइटिस में मदद की थी — और सेप्सिस वाले शरीर में यही पॉइंट दौरे ला सकता है। चार मिनट में उसे बिठाया गया, भाई को बताया गया कि इसे आज सुबह ही अस्पताल चाहिए, और एक लिखा नोट साथ भेजा गया। वह भर्ती हुआ और ड्रिप से एंटीबायोटिक दिए गए।
- इससे सीख
- सही योजना का मतलब सुरक्षित सेशन नहीं — दो मुलाक़ातों के बीच नई बीमारी आ सकती है। साथ आए व्यक्ति से पूछिए, और हर बार पूछिए: पिछली बार के बाद कुछ नया, कहीं भी? रुक जाना भी एक इलाज है।
आयुर्वेद और रसोई से
ख़ुद को परखें
शोध क्या कहता है
- मज़बूत प्रमाण
डॉक्टरों की इस्तेमाल की जाने वाली अंतरराष्ट्रीय परिभाषा: सेप्सिस, संक्रमण पर शरीर की बेक़ाबू प्रतिक्रिया से होने वाला जानलेवा अंग-नुक़सान है। इससे समझ आता है कि सेप्सिस को सिर्फ़ संक्रमण से नहीं, बल्कि इस बात से आँका जाता है कि अंग कैसे झेल रहे हैं।
- मज़बूत प्रमाण
2017 में लगभग 4.9 करोड़ लोगों को सेप्सिस हुआ और 1.1 करोड़ की मौत हुई — दुनिया की लगभग हर पाँच में से एक मौत। बोझ सबसे ज़्यादा कम आमदनी वाले इलाक़ों में था, दक्षिण एशिया समेत।
सेप्सिस में, या सेप्सिस से ठीक होने के दौर में, न्यूरोथेरेपी का कोई क्लिनिकल ट्रायल अभी तक प्रकाशित नहीं हुआ है। न्यूरोथेरेपिस्ट जो सुधार बताते हैं, वे क्लिनिकल अवलोकन हैं।
आपके लिए
छोटे बच्चों के माता-पिता
जो शिशु बहुत सुस्त हो, दूध न पी रहा हो, तेज़ साँस ले रहा हो, या जिसके दाने दबाने पर फीके न पड़ें — उसे अभी अस्पताल चाहिए, सुबह का इंतज़ार न करें।
डायबिटीज़, किडनी की बीमारी या कम इम्यूनिटी वाले लोग
घाव और जले हुए हिस्से साफ़ और ढके रखें, और जो भी और लाल, और गर्म या ज़्यादा दर्द वाला हो, उसे डॉक्टर को दिखाएँ।
सेप्सिस से ठीक हो रहा हर व्यक्ति
थकान, कमज़ोरी और कम नींद हफ़्तों तक रह सकती है। हर दवा पूरी करें, फ़ॉलो-अप के लिए जाते रहें, और हल्की देखभाल तभी शुरू करें जब डॉक्टर सहमत हों।
यह पेज समझाता है, जाँच नहीं करता। न्यूरोथेरेपी आपके डॉक्टरी इलाज के साथ काम करती है — डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें, और कोई नया या गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर को दिखाएँ।