स्किज़ोफ़्रीनिया
स्किज़ोफ़्रीनिया दिमाग़ की एक गंभीर, लंबी चलने वाली बीमारी है, जो व्यक्ति के सोचने, महसूस करने और दुनिया को देखने का ढंग बदल देती है। लगातार डॉक्टरी इलाज और परिवार के साथ से बहुत-से लोग भरपूर ज़िंदगी जीते हैं, और हर तीन में से कम से कम एक व्यक्ति पूरी तरह ठीक हो जाता है।

- दुनिया भर में लगभग हर 300 में से 1 व्यक्ति स्किज़ोफ़्रीनिया के साथ जी रहा है
- लक्षण आम तौर पर 16 से 30 साल की उम्र के बीच शुरू होते हैं
- स्किज़ोफ़्रीनिया वाले हर 3 में से कम से कम 1 व्यक्ति पूरी तरह ठीक हो सकता है — फिर भी साइकोसिस वाले हर 3 में से 2 से ज़्यादा लोगों को विशेषज्ञ इलाज नहीं मिलता
स्रोत: World Health Organization (schizophrenia fact sheet); MedlinePlus
स्किज़ोफ़्रीनिया क्या है?
स्किज़ोफ़्रीनिया में दिमाग़ को यह पहचानने में मुश्किल होती है कि क्या असली है और क्या नहीं। व्यक्ति को ऐसी आवाज़ें सुनाई दे सकती हैं जो किसी और को नहीं सुनाई देतीं, वह ऐसी बातों पर पक्का विश्वास कर सकता है जो सच नहीं हैं, या उसके विचार और बातें उलझ सकती हैं। बहुत-से लोगों में दिलचस्पी, ताक़त और भावनाओं की गर्माहट भी कम हो जाती है।
यह 'दोहरा व्यक्तित्व' नहीं है, और स्किज़ोफ़्रीनिया वाले ज़्यादातर लोग हिंसक नहीं होते। यह जीन, दिमाग़ के रसायन और ज़िंदगी की घटनाओं — सबके मेल से आता है। इसमें किसी का दोष नहीं है, और इसका इलाज होता है: दवाएँ, बातचीत वाली थेरेपी, परिवार का साथ और हुनर की ट्रेनिंग — सब मदद करते हैं।
इसके लक्षण क्या हैं?
- ऐसी चीज़ें सुनना या देखना जो वहाँ नहीं हैं (हैलुसिनेशन)
- ऐसे पक्के विश्वास जो सच नहीं हैं, जैसे कि कोई निगरानी या क़ाबू कर रहा है (डिल्यूज़न)
- उलझी सोच, और ऐसी बातें जिन्हें समझना मुश्किल हो
- लोगों से दूर होना; बहुत कम बोलना या भावनाएँ कम दिखाना
- रोज़ की ज़िंदगी और अपनी देखभाल में दिलचस्पी खो देना
- ध्यान लगाने, याद रखने और फ़ैसले लेने में मुश्किल
यह क्यों होता है, और किसे होने की संभावना ज़्यादा है?
परिवार और जीन
- किसी क़रीबी रिश्तेदार को स्किज़ोफ़्रीनिया हो तो ख़तरा बढ़ता है
ट्रिगर
- ज़िंदगी की बहुत तनाव भरी घटनाएँ
- ज़्यादा गांजा-भांग या दूसरे नशे का सेवन
इसका पता कैसे चलता है?
स्किज़ोफ़्रीनिया के लिए कोई एक जाँच नहीं होती। मनोचिकित्सक (साइकियाट्रिस्ट) या कोई दूसरा मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ व्यक्ति से, और अक्सर परिवार से भी, ध्यान से बात करके इसका निदान करता है।
मानसिक स्वास्थ्य का आकलन
विचारों, विश्वासों, आवाज़ों, मूड, नींद, नशे और रोज़ की ज़िंदगी में आए बदलाव के बारे में सवाल।
मेंटल स्टेटस जाँच
मुलाक़ात के दौरान डॉक्टर बोलचाल, ध्यान, याददाश्त और समझ को परखते हैं।
न्यूरोथेरेपिस्ट स्किज़ोफ़्रीनिया का निदान नहीं करता और उसका इलाज नहीं बदलता। पहली मुलाक़ात में, कोई भी ट्रीटमेंट शुरू करने से पहले, थेरेपिस्ट कार्ड पर वह पॉइंट चिह्नित करता है जो कभी नहीं देना है — Pan — और पूरा सेशन उसी नियम के अंदर रहकर तय करता है।
न्यूरोथेरेपी की नज़र से स्किज़ोफ़्रीनिया
स्किज़ोफ़्रीनिया पर LMNT की शिक्षा सबसे पहले सावधानी की शिक्षा है। गुरुजी ने दर्ज किया कि जब Pan — पैंक्रियास का पॉइंट — दिया गया, तो स्किज़ोफ़्रीनिया के कुछ रोगियों को कानों में आवाज़ें या घंटियों की आवाज़ सुनाई देने लगी। इसलिए स्किज़ोफ़्रीनिया वाले व्यक्ति को Pan कभी नहीं दिया जाता। थेरेपिस्ट पहले ही दिन यह रोक कार्ड पर लिख देता है, ताकि कोई इसे भूले नहीं।
इस शिक्षा का दूसरा हिस्सा ख़ुद स्पर्श के बारे में है। स्किज़ोफ़्रीनिया वाले व्यक्ति को थेरेपिस्ट का बहुत पास बैठना, या पैर से दिया गया प्रेशर, सिर्फ़ असहज नहीं, डरावना लग सकता है। इसलिए थेरेपिस्ट छूने से पहले समझाता है, शरीर के हर हिस्से से पहले पूछता है, और ज़रा भी घबराहट दिखे तो रुक जाता है। यहाँ न्यूरोथेरेपी मनोचिकित्सक के इलाज के साथ एक नरम सहारा है — उसकी जगह कभी नहीं।
हमारे इलाज से मरीज़ को तुरंत फ़ायदा मिले या न मिले, हमारी लापरवाही से उसे कोई नुक़सान न पहुँचे — इसका ध्यान रखें।
स्किज़ोफ़्रीनिया का न्यूरोथेरेपी इलाज, क़दम-दर-क़दम
पहले मनोचिकित्सक का इलाज
थेरेपिस्ट व्यक्ति के डॉक्टर और दवाओं के बारे में पूछता है, और नरमी से यह भी कि कहीं ख़ुद को या दूसरों को नुक़सान का ख़तरा तो नहीं। अगर है, तो सबसे पहले, आज ही, डॉक्टर या हेल्पलाइन से मदद।
कार्ड पर Pan की रोक लिखें
कोई भी योजना बनाने से पहले, कार्ड पर Pan को ऐसे पॉइंट के रूप में घेर दिया जाता है जो नहीं देना है। फिर पूरी योजना इसी रोक के अंदर बनती है — उन फ़ॉर्मूलों समेत जिनमें Pan आता है।
समझाएँ, पूछें, और घबराहट पर रुकें
थेरेपिस्ट छूने से पहले बताता है कि क्या होगा, शरीर के हर हिस्से से पहले पूछता है, अगर डर लगे तो बहुत पास बैठने या पैर का इस्तेमाल करने से बचता है, और डर का ज़रा भी संकेत दिखे तो तुरंत रुक जाता है।
इस्तेमाल होने वाले पॉइंट और फ़ॉर्मूले
यह कभी न करें
- अगर ख़ुद को या दूसरों को नुक़सान का कोई भी ख़तरा हो, तो आज ही तुरंत मदद लें — डॉक्टर, या हेल्पलाइन (भारत: Tele-MANAS 14416, मुफ़्त)। तुरंत ख़तरा हो, तो 112 पर कॉल करें।
- स्किज़ोफ़्रीनिया में Pan कभी नहीं दिया जाता — न अकेले, न किसी फ़ॉर्मूले के अंदर, Heparin फ़ॉर्मूलों समेत, जिन सबमें Pan आता है। Pan
- छूने से पहले समझाएँ, शरीर के हर हिस्से से पहले पूछें, और घबराहट का ज़रा भी संकेत दिखे तो रुक जाएँ। पास बैठना या पैर से प्रेशर देना डरावना लग सकता है।
- मनोचिकित्सा की दवाएँ कभी अपने-आप बंद, कम या टालें नहीं — इन्हें बंद करने से बीमारी लौट सकती है। कोई भी बदलाव डॉक्टर के साथ तय करें।
- कैंसर: अगर व्यक्ति को कैंसर है, तो (10) Pan, Thymus, Pit, Lu + Sh, Rt. Ov / Lt. Ov और (30) Medulla कभी नहीं दिए जाते — थेरेपिस्ट योजना बदल देता है।
- डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें। न्यूरोथेरेपी आपके इलाज के साथ काम करती है, उसकी जगह नहीं।
आयुर्वेद और रसोई से
ख़ुद को परखें
शोध क्या कहता है
- मज़बूत प्रमाण
स्किज़ोफ़्रीनिया लगभग हर 100 में से 1 व्यक्ति को होता है। दिमाग़ के एक रास्ते में डोपामिन के ज़्यादा संकेत आवाज़ों और ग़लत विश्वासों से जुड़े हैं, और दूसरे रास्ते में कम संकेत उत्साह की कमी और सोचने की दिक़्क़तों से। जिनके लक्षण दवा से सुधरते हैं, उन्हें दवा जारी रखने की सलाह दी जाती है।
- मज़बूत प्रमाण
दवाएँ, परिवार का साथ, बातचीत वाली थेरेपी और पुनर्वास — सब असर करते हैं, और हर तीन में से कम से कम एक व्यक्ति पूरी तरह ठीक हो जाता है। कलंक और मानवाधिकारों की अनदेखी आम है, और बहुत-से लोगों को इलाज से दूर रखती है।
स्किज़ोफ़्रीनिया में न्यूरोथेरेपी का कोई क्लिनिकल ट्रायल अभी तक प्रकाशित नहीं हुआ है। न्यूरोथेरेपिस्ट जो सुधार बताते हैं, वे क्लिनिकल अवलोकन हैं।
आपके लिए
परिवार और देखभाल करने वाले
शांत और प्यार से पेश आएँ, आवाज़ों या विश्वासों पर बहस न करें, और व्यक्ति को डॉक्टर की मुलाक़ातें और दवाएँ जारी रखने में मदद करें। अपना भी ध्यान रखें — देखभाल करने वालों को भी सहारा चाहिए।
युवा
ज़्यादा गांजा-भांग का सेवन बढ़े हुए ख़तरे से जुड़ा है। अगर कोई युवा सबसे कटने लगे, नींद ग़ायब हो जाए, या अजीब बातें करे, तो जल्दी डॉक्टर को दिखाएँ — जल्दी इलाज बेहतर काम करता है।
स्किज़ोफ़्रीनिया की दवा लेने वाले
जैसे बताई गई है, वैसे ही लेते रहें — अच्छे दिनों में भी। अपने थेरेपिस्ट को अपनी हर दवा बताएँ, और कोई भी बदलाव करने से पहले डॉक्टर से बात करें।
यह पेज समझाता है, जाँच नहीं करता। न्यूरोथेरेपी आपके डॉक्टरी इलाज के साथ काम करती है — डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें, और कोई नया या गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर को दिखाएँ।