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पार्किंसन की बीमारी (कंपवात)

पार्किंसन दिमाग़ की एक धीरे-धीरे बढ़ने वाली, लंबी चलने वाली बीमारी है। इसमें हाथ-पैर काँपते हैं, मांसपेशियाँ अकड़ जाती हैं और चाल धीमी हो जाती है, क्योंकि दिमाग़ डोपामाइन नाम का संदेशवाहक रसायन बहुत कम बनाने लगता है।

The brain seen from the side with the brainstem; two magnified circles compare a healthy substantia nigra, dark and full of dopamine cells, with a pale substantia nigra in Parkinson's disease
दिमाग़, बगल से, बीच के हिस्से (मिडब्रेन) को खोलकर। बायाँ घेरा: स्वस्थ — सब्सटैंशिया नाइग्रा गहरा है और डोपामाइन बनाने वाली कोशिकाओं से भरा है, जो बेसल गैंग्लिया तक डोपामाइन भेजती हैं। दायाँ घेरा: पार्किंसन — वही हिस्सा फीका है, कोशिकाएँ बहुत कम और डोपामाइन भी बहुत कम।
मुख्य बातें
  • 2019 में दुनिया भर में 85 लाख से ज़्यादा लोग पार्किंसन के साथ जी रहे थे
  • यह आम तौर पर 60 की उम्र के आसपास शुरू होती है, और पुरुषों में ज़्यादा होती है
  • जब तक इसकी पहचान होती है, दिमाग़ की डोपामाइन बनाने वाली आधी से ज़्यादा — 80% तक — कोशिकाएँ पहले ही ख़त्म हो चुकी होती हैं

स्रोत: WHO; MedlinePlus; Cleveland Clinic; StatPearls (NCBI Bookshelf)

पार्किंसन की बीमारी क्या है?

दिमाग़ के अंदर गहराई में सब्सटैंशिया नाइग्रा नाम का एक छोटा, गहरे रंग का हिस्सा डोपामाइन बनाता है। डोपामाइन एक संदेशवाहक है: यह दिमाग़ को मांसपेशियों तक सधे हुए, सही समय पर संकेत भेजने में मदद करता है, ताकि आप कोई हरकत शुरू कर सकें, रोक सकें और उसे काबू में रख सकें।

पार्किंसन में ये कोशिकाएँ धीरे-धीरे काम करना बंद कर देती हैं और मर जाती हैं। डोपामाइन घटने के साथ हरकतें काँपती हुई, अकड़ी हुई और धीमी हो जाती हैं। यह बदलाव पहले लक्षणों से कई साल पहले शुरू हो जाता है और धीरे-धीरे आगे बढ़ता रहता है — इसलिए देखभाल का लक्ष्य है कि व्यक्ति जितना हो सके उतने लंबे समय तक चलता-फिरता, आराम से और अपने पैरों पर रहे।

इसके लक्षण क्या हैं?

  • काँपना (कंपन), अक्सर एक हाथ में, जब हाथ आराम की हालत में हो
  • बाँहों, पैरों या धड़ में अकड़न
  • धीमी हरकतें, छोटे-छोटे घिसटते क़दम, संतुलन बिगड़ना
  • चेहरे पर कम हाव-भाव, और धीमी आवाज़
  • सूँघने की ताक़त कम होना, कब्ज़ और ख़राब नींद — अक्सर काँपने से कई साल पहले
  • बाद में: निगलने या चबाने में दिक़्क़त, उदासी, याददाश्त की परेशानी

यह क्यों होता है, और किसे होने की संभावना ज़्यादा है?

डोपामाइन कोशिकाओं का ख़त्म होना

  • सब्सटैंशिया नाइग्रा की कोशिकाएँ धीरे-धीरे काम करना बंद कर देती हैं — यह क्यों शुरू होता है, आम तौर पर पता नहीं होता

उम्र और लिंग

  • 60 से ज़्यादा उम्र
  • पुरुष होना

जीन

  • परिवार में किसी को होना — हालाँकि ज़्यादातर मामले विरासत में नहीं मिलते

आसपास का माहौल

  • कीटनाशकों के संपर्क में रहना, या मैंगनीज़ जैसी धातुओं के बीच लंबे समय तक काम करना

इसका पता कैसे चलता है?

पार्किंसन की कोई एक जाँच नहीं होती। न्यूरोलॉजिस्ट आपकी बातों और आपकी हरकतों की ध्यान से जाँच करके इसकी पहचान करते हैं। जाँचें मुख्य रूप से दूसरे कारणों को अलग करने के लिए होती हैं।

नसों और दिमाग़ की जाँच

डॉक्टर आपकी चाल देखते हैं, और कंपन, अकड़न, संतुलन और छोटी हरकतों की रफ़्तार जाँचते हैं।

दिमाग़ का MRI

दिमाग़ की तस्वीरें, ताकि स्ट्रोक या गाँठ जैसे दूसरे कारण देखे जा सकें।

डैट-स्कैन (DaTscan)

एक ख़ास स्कैन, जो दिखाता है कि दिमाग़ का डोपामाइन तंत्र कितना ठीक काम कर रहा है — जब तस्वीर साफ़ न हो।

खून की जाँच

ऐसे लक्षण देने वाली दूसरी बीमारियों को अलग करने के लिए।

न्यूरोथेरेपिस्ट पार्किंसन की पहचान नहीं करता — यह न्यूरोलॉजिस्ट का काम है। थेरेपिस्ट उँगलियों के नीचे की तस्वीर देखता है: Liv° और Mu°, पिंडलियों पर Gas 'I' पॉइंट पर दर्द, मल — सख़्त है या पतला — और क्या व्यक्ति कुछ पीते समय खाँसता या अटकता है।

न्यूरोथेरेपी की नज़र से पार्किंसन की बीमारी

LMNT पद्धति उसी बात से शुरू होती है जिससे मेडिकल साइंस: पार्किंसन डोपामाइन की कमी से होता है। शरीर से डोपामाइन माँगने के लिए यह दो रास्ते जानती है — गर्दन के पीछे (20) Medulla, और पिंडलियों पर (12) Gas 'I'। दूसरा रास्ता इसलिए काम करता है क्योंकि आँत की दीवार की नस-कोशिकाएँ, कम मात्रा में, वही रसायन बनाती हैं जो दिमाग़ बनाता है। पार्किंसन उन पुरानी बीमारियों में भी गिना जाता है जिनमें अक्सर अनपचा भोजन (UDF) मिलता है, इसलिए पाचन और कब्ज़ का भी ध्यान रखा जाता है।

न्यूरोथेरेपी पार्किंसन को पलट नहीं सकती। इसका लक्ष्य है आराम, चलने-फिरने और रोज़ की ज़िंदगी को सहारा देना — कंपन, अकड़न, चेहरे के हाव-भाव, कब्ज़ — न्यूरोलॉजिस्ट के इलाज और दवाओं के साथ-साथ, उनकी जगह कभी नहीं।

गुरुजी कहते हैं
जहाँ भी प्रश्नचिह्न लगा है, वह इस बात का संकेत है कि यह मेरी अपनी सोच है, जिस पर अब दूसरे लोग रिसर्च कर सकते हैं।
— डॉ. लाजपतराय मेहरा

पार्किंसन की बीमारी का न्यूरोथेरेपी इलाज, क़दम-दर-क़दम

  1. पहले जाँच

    थेरेपिस्ट Liv° और Mu° देखता है, पिंडलियों पर Gas 'I' पॉइंट दबाकर देखता है, मल के बारे में पूछता है, और परिवार से पूछता है कि क्या व्यक्ति पानी पीते समय खाँसता है, पीने के बाद आवाज़ गीली लगती है, या बार-बार छाती में संक्रमण हुआ है।

  2. गर्दन पर (20) Medulla

    कानों के नीचे गर्दन के दोनों तरफ़, आम तौर पर बिठाकर, डोपामाइन के लिए दिया जाता है। LMNT पद्धति पार्किंसन में इससे बड़ा फ़ायदा बताती है। जो व्यक्ति बहुत कमज़ोर हो या बैठ न सके, उसे यह लिटाकर भी दिया जा सकता है।

  3. (12) Gas 'I', जहाँ दर्द हो

    जहाँ Gas 'I' पर दर्द हो, वहाँ पीठ के बल लिटाकर पिंडलियों पर (12) Gas 'I' दिया जाता है — यह (20) Medulla की तरह काम करता है। हर जगह ठीक छह सेकंड: गिनती ही इलाज है।

  4. चेहरा और बोली

    चेहरे के हाव-भाव के लिए (7) Medulla दिया जाता है, और LMNT पद्धति कहती है कि पार्किंसन में इसे इस्तेमाल करना चाहिए। (2) Medulla भी पार्किंसन के लिए बताया गया है।

  5. पाचन और कब्ज़

    अगर मल में अनपचा भोजन आता है, तो UDF ट्रीटमेंट दिया जाता है। पार्किंसन की सख़्त कब्ज़ के लिए Const पॉइंट दिया जाता है — जिसे नाभि के ऊपर-बाईं ओर के दर्द से चुना जाता है।

इस्तेमाल होने वाले पॉइंट और फ़ॉर्मूले

(20) Medulla

डोपामाइन का पहला रास्ता — गर्दन के पीछे, कानों के नीचे दोनों तरफ़; LMNT पद्धति पार्किंसन में इससे बड़ा फ़ायदा बताती है।

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(12) Gas 'I'

डोपामाइन का दूसरा रास्ता — पिंडलियों पर, आँत की नस-कोशिकाओं के ज़रिए; जहाँ Gas 'I' पर दर्द हो वहाँ दिया जाता है, हर जगह छह सेकंड।

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(2) Medulla

LMNT पद्धति में यह भी पार्किंसन के लिए बताया गया है।

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यह कभी न करें

  • पतले मोशन हों, तो Gas 'I' नहीं दिया जाता — यह छोटी आँत की रफ़्तार बढ़ाता है। तब इसकी जगह (20) Medulla दिया जाता है: एक रास्ता बंद हो, तो दूसरा बंद नहीं होता। Gas 'I'
  • (12) Gas 'I' में हर जगह सिर्फ़ छह सेकंड। ज़्यादा देर रोकने से यह Gas 'I' की सीढ़ी का कोई दूसरा ट्रीटमेंट बन जाता है। Gas 'I' की सीढ़ी
  • जो व्यक्ति तरल पीते समय खाँसे या अटके, पीने के बाद जिसकी आवाज़ गीली लगे, या जिसे बार-बार छाती का संक्रमण हो, उसे निगलने की ठीक-ठीक जाँच के लिए भेजा जाता है — हो सकता है खाना साँस की नली में जा रहा हो। खाना बैठकर, छोटे-छोटे कौर में खाएँ, पास में पानी का गिलास हो, और कोई आवाज़ सुनने लायक़ दूरी पर हो। निगलने में दिक़्क़त
  • मैट पर कंपन कम हो जाए, तो भी पार्किंसन की दवाएँ न बंद की जाती हैं, न घटाई जाती हैं। उन्हें सिर्फ़ वही डॉक्टर बदलते हैं जिन्होंने उन्हें लिखा है।
  • दम घुटने, अचानक एक तरफ़ या चेहरे में कमज़ोरी या सुन्नपन, अचानक बोलने में दिक़्क़त, या गिरकर सिर में चोट — इनमें पहले तुरंत आपातकालीन मदद लें।
  • कैंसर: अगर व्यक्ति को कैंसर है, तो (10) Pan, Thymus, Pit, Lu + Sh, Rt. Ov / Lt. Ov और (30) Medulla कभी नहीं दिए जाते — थेरेपिस्ट योजना बदल देता है।
  • डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें। न्यूरोथेरेपी आपके इलाज के साथ काम करती है, उसकी जगह नहीं।

वीडियो देखें

LMNT 1 Gas I Point Practical Training | Dr. Diwakar Shukla |Clinical Guide & Positioning for Student

पिंडलियों पर Gas 'I' पॉइंट कहाँ है, मरीज़ को कैसे लिटाया जाता है, और छह-छह सेकंड का दबाव कैसे दिया जाता है — इसका प्रैक्टिकल प्रदर्शन।

वीडियो में (1) Gas 'I' की गिनती है। पार्किंसन में गिनती (12) Gas 'I' है — फिर भी हर जगह ठीक छह सेकंड, और पतले मोशन हों तो कभी नहीं।

UDF (Anpacha Khaana) ka Neurotherapy Ilaaj | 40+ Bimariyon ki Jad | LMNT

इस वीडियो में UDF (अनपचा खाना) ट्रीटमेंट पूरे क्रम से दिखाया गया है — 15 Medulla, दोनों कूल्हों पर Parkhoo, Half Kundli, 10 Medulla के साथ 1 Gas Only और 1 Gas 'I', फिर जाँघ और बाँह पर Gal, Spleen, Liver, Mucus के पॉइंट और Ajay Normal। जब खाना ठीक से नहीं पचता, तब पाचन को सहारा देने के लिए यह दिया जाता है।

पिंडलियों पर Gas 'I' पॉइंट कहाँ है और कैसे दबाया जाता है, और अनपचे भोजन के लिए UDF ट्रीटमेंट।

अभ्यास से

वह मरीज़, जिसके हाथ का काँपना कम हो गया

थेरेपी के अपने लेखे में दर्ज — गुरुजी के अभ्यास का केस; मरीज़ का नाम दर्ज नहीं है

एक वयस्क · पार्किंसन, साथ में पिंडलियों पर Gas 'I' पॉइंट पर काफ़ी दर्द

क्या मिला
Gas 'I' का दर्द उसकी बीमारी को देखकर नहीं खोजा गया था — बस यही जाँच में मिला, और LMNT में इलाज उसी का होता है जो जाँच में मिले।
क्या किया गया
उसी दर्द की वजह से (12) Gas 'I' दिया गया, और देखा गया कि उसके हाथ का काँपना काफ़ी कम हो गया। सवाल बाद में आया: पार्किंसन डोपामाइन की कमी से होता है, तो क्या यह पॉइंट शरीर को डोपामाइन बनाने में मदद कर रहा है? यही सवाल आगे चलकर Gas 'I' की सीढ़ी बना — एक पॉइंट, अलग गिनतियाँ, अलग ट्रीटमेंट।
इससे सीख
पॉइंट उँगलियों की जाँच से चुना गया, बीमारी के नाम से नहीं। अनपेक्षित नतीजा एक सवाल है, निष्कर्ष नहीं। और मैट पर हाथ का शांत होना पार्किंसन की दवाओं को छेड़ने की वजह कभी नहीं — उन्हें सिर्फ़ लिखने वाले डॉक्टर बदलते हैं।

आयुर्वेद और रसोई से

ख़ुद को परखें

1. पार्किंसन दिमाग़ के किस रसायन की कमी से होता है?

2. (12) Gas 'I' कब नहीं दिया जाता?

3. इलाज के बाद कंपन काफ़ी कम है। पार्किंसन की दवाओं का क्या होगा?

शोध क्या कहता है

  • मज़बूत प्रमाण

    पार्किंसन सब्सटैंशिया नाइग्रा की डोपामाइन कोशिकाओं के ख़त्म होने से होता है। पहचान होने तक इनमें से 50–80% जा चुकी होती हैं। बीमारी की प्रक्रिया दस साल या उससे भी पहले शुरू हो जाती है — आँत की नस-कोशिकाओं में भी — इसीलिए कब्ज़ और सूँघने की ताक़त कम होना अक्सर सबसे पहले आते हैं।

    Zafar S, Lui F, Yaddanapudi SS. Parkinson Disease. StatPearls. 2025.

  • शुरुआती प्रमाण

    इस अध्ययन ने मापा कि पाचन के अंग कितना डोपामाइन बनाते हैं, और यह शरीर के कुल डोपामाइन का लगभग आधा निकला। डोपामाइन बनाने वाला एंज़ाइम आमाशय और ड्यूओडिनम की परत में मिला। इससे पता चलता है कि आँत सचमुच डोपामाइन बनाती है — (12) Gas 'I' के पीछे यही सोच है। यह अध्ययन यह नहीं दिखाता कि किसी पॉइंट को दबाने से डोपामाइन बढ़ता है।

    Eisenhofer G, Åneman A, Friberg P, Hooper D, Fåndriks L, Lonroth H, Hunyady B, Mezey E. Substantial production of dopamine in the human gastrointestinal tract. The Journal of Clinical Endocrinology & Metabolism. 1997.

पार्किंसन में न्यूरोथेरेपी का कोई क्लिनिकल ट्रायल अभी तक प्रकाशित नहीं हुआ है। न्यूरोथेरेपिस्ट जो सुधार बताते हैं, वे क्लिनिकल अवलोकन हैं।

आपके लिए

परिवार और देखभाल करने वाले

खाने पर नज़र रखें। पानी पीते समय खाँसी, पीने के बाद गीली आवाज़, या बार-बार छाती का संक्रमण — इनमें निगलने की जाँच ज़रूरी है। ज़रूरत हो तो खाना नरम रखें, और किसी को लिटाकर कभी न खिलाएँ।

अकेले रहने वाले बुज़ुर्ग

किसी के आवाज़ सुनने लायक़ पास रहते हुए खाएँ, और पास में पानी का गिलास रखें। जिसका दम घुट रहा हो, वह आवाज़ नहीं दे सकता।

पार्किंसन वाले हर व्यक्ति के लिए

रोज़ चलते-फिरते रहें — टहलना, स्ट्रेचिंग और संतुलन के व्यायाम मदद करते हैं। अपनी हर दवा के बारे में थेरेपिस्ट को बताएँ, और न्यूरोलॉजिस्ट के पास जाना जारी रखें।

यह पेज समझाता है, जाँच नहीं करता। न्यूरोथेरेपी आपके डॉक्टरी इलाज के साथ काम करती है — डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें, और कोई नया या गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर को दिखाएँ।

Neurotherapy.Life टीम द्वारा, डॉ. लाजपतराय मेहरा की शिक्षाओं पर आधारित

समीक्षा: डॉ. दिवाकर शुक्ला, वरिष्ठ न्यूरोथेरेपिस्ट

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