अच्छा पाचन हर ग्रंथि की कुंजी क्यों है
हर ग्रंथि अपने रसायन उस कच्चे माल से बनाती है जो पाचन से निकलता है। इसीलिए न्यूरोथेरेपी (LMNT) अक्सर पेट से शुरू होती है: जब पाचन और अवशोषण सुधरते हैं, तो ग्रंथियों को अपना काम करने के लिए ज़रूरी चीज़ें मिलती हैं।
परिचय
यह संस्थापक की अपनी मुख्य खोज है। ग्रंथियाँ और अंग अपने रसायन सही मात्रा में और सही समय पर तभी बना पाते हैं, जब पाचन से बना कच्चा माल उन तक पहुँचे। इसलिए हर ग्रंथि की सेहत पाचन तंत्र पर टिकी है — जिसमें लिवर, पित्ताशय और पैंक्रियाज़ भी शामिल हैं।
सोचिए, एक रसोई सौ घरों को खाना देती है। अगर रसोई आधी ताक़त पर चले, तो कोई घर बर्बाद नहीं होता, पर हर घर को थोड़ी कमी रहती है, और सबसे कमज़ोर घर पहले दिखाता है। इसीलिए कमज़ोर पाचन कोई एक बीमारी नहीं लाता; वह वही बीमारी लाता है जिसकी ओर वह शरीर झुका होता है।
हॉर्मोन कुछ ही कच्चे माल से बनते हैं — जैसे कोलेस्ट्रॉल, अमीनो एसिड टायरोसिन और प्रोटीन। मसलन थायरॉइड अपने हॉर्मोन टायरोसिन से बनाता है, जो प्रोटीन के पचने पर निकलता है। हड्डियों को कैल्शियम चाहिए, जिसे आँत को सोखना होता है। कोलेस्ट्रॉल भी दुश्मन नहीं है; शरीर इससे ज़रूरी हॉर्मोन बनाता है, और ठीक से काम करता लिवर इसका स्तर सही रखने में मदद करता है।
ज़्यादातर विटामिन भी शरीर में नहीं बनते और भोजन से ही आने चाहिए। इसलिए न्यूरोथेरेपी (LMNT) किसी एक ग्रंथि पर जाने से पहले आमतौर पर पाचन और अवशोषण से शुरू करती है।
मुख्य बातें
- हर ग्रंथि पाचन से मिलने वाले कच्चे माल पर टिकी है।
- कमज़ोर पाचन उसी बीमारी के रूप में दिखता है जिसकी ओर शरीर झुका हो।
- प्रोटीन खाना काफ़ी नहीं; उसका पचना और सोखा जाना ज़रूरी है।
- इसीलिए इलाज अक्सर पेट से शुरू होता है।
और गहराई से जानिए
पाचन तंत्र
पाचन तंत्र, अंग-दर-अंग
आँतें
आँतें, जहाँ अवशोषण होता है
थायरॉइड ग्रंथि
थायरॉइड और उसका कच्चा माल
हाइपोथायरॉइडिज़्म (थायरॉइड का धीमा चलना)
कम काम करता थायरॉइड
ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियों का खोखलापन)
पतली होती हड्डियाँ और कैल्शियम का अवशोषण
बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल
बढ़ा कोलेस्ट्रॉल और लिवर
Ajay Normal
बेहतर अवशोषण के लिए एक फ़ॉर्मूला
शरीर का अपना दवाख़ाना: शरीर अपने रसायन कैसे बनाता और संतुलित करता है
शरीर की अपनी दवा-दुकान
पूरी गाइड पढ़िए
यह विषय इस गाइड का हिस्सा है: शरीर का अपना दवाख़ाना: शरीर अपने रसायन कैसे बनाता और संतुलित करता है
सावधानी: कब नहीं दिया जाता
- कोई दवा नहीं दी जाती, और आपको कभी अपनी दवा बंद करने को नहीं कहा जाता। ख़ुराक में कोई भी बदलाव वही डॉक्टर तय करता है जिसने दवा लिखी है।
- ट्यूमर, सिस्ट या फ़ाइब्रॉइड वाला रोगी अपना हर स्कैन, सर्जरी और विशेषज्ञ का अपॉइंटमेंट जारी रखता है। न्यूरोथेरेपी (LMNT) साथ-साथ दी जाती है, उन्हें छोड़ने की वजह कभी नहीं बनती। लाइपोमा और सिस्ट (गाँठ)
गुरुजी कहते हैं
“प्रोटीन खा लेना काफ़ी नहीं है। असली बात यह है कि वह पचे।”
वीडियो
अपच पर एक पॉडकास्ट बातचीत — इसके आम लक्षण, जल्दी-जल्दी खाना, तनाव और कुछ दवाइयों जैसे कारण, और न्यूरोथेरेपी (LMNT) शरीर के एसिड–अल्कली संतुलन से पाचन को कैसे देखती है। इसमें कोई पॉइंट नहीं दिखाया गया है।
यह पेज बताता है कि न्यूरोथेरेपी (LMNT) का यह ट्रीटमेंट किसलिए है; यह ख़ुद इलाज करने की गाइड नहीं है और जाँच नहीं करता। न्यूरोथेरेपी (LMNT) आपके डॉक्टरी इलाज के साथ काम करती है — डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें।