जेनेटिक बीमारियाँ (आनुवंशिक रोग)
जेनेटिक बीमारी वह स्वास्थ्य स्थिति है जो व्यक्ति के जीन या क्रोमोसोम में बदलाव से होती है — वे निर्देश जिन्हें हर कोशिका मानती है। बहुत-सी जन्म से होती हैं और ज़िंदगी भर रहती हैं। फिर भी अच्छी देखभाल आराम और रोज़ की ज़िंदगी में सच्चा फ़र्क़ ला सकती है।

- दुनिया भर में हर साल लगभग 2,40,000 नवजात जन्म के 28 दिन के अंदर जन्मजात बीमारियों से मरते हैं — इनमें से बहुत-सी जेनेटिक होती हैं
- गंभीर जन्मजात बीमारी के साथ पैदा होने वाले हर दस में से नौ बच्चे कम और मध्यम आय वाले देशों में होते हैं
- क़रीबी रिश्तेदारों में शादी से नवजात व बच्चे की मौत और बौद्धिक अक्षमता का ख़तरा लगभग दोगुना हो जाता है
स्रोत: World Health Organization (congenital disorders fact sheet); MedlinePlus
जेनेटिक बीमारियाँ क्या है?
जीन शरीर के निर्देश हैं, जो DNA में लिखे होते हैं। ये क्रोमोसोम में बँधे होते हैं — आम तौर पर हर कोशिका में 23 जोड़े। जब कोई जीन बदल जाता है, या कोई क्रोमोसोम कम, ज़्यादा या बदला हुआ होता है, तो शरीर कोई प्रोटीन ग़लत बना सकता है या बिल्कुल नहीं बनाता, और बीमारी हो सकती है।
इनके तीन मुख्य प्रकार हैं। एक-जीन वाली बीमारियाँ किसी एक जीन के बदलाव से होती हैं, जैसे सिकल सेल एनीमिया। क्रोमोसोम वाली बीमारियाँ किसी कम, ज़्यादा या बदले क्रोमोसोम से होती हैं, जैसे डाउन सिंड्रोम। जटिल बीमारियाँ कई जीनों के बदलाव के साथ रहन-सहन और माहौल के मेल से होती हैं।
इसके लक्षण क्या हैं?
- लक्षण बीमारी के हिसाब से बहुत अलग होते हैं — बहुत-से जन्म के समय या बचपन में दिखते हैं
- विकास के पड़ाव देर से आना, सीखने में कठिनाई या बौद्धिक अक्षमता
- कमज़ोर या अकड़ी मांसपेशियाँ, या चलने-फिरने और संतुलन में दिक़्क़त
- बढ़त, सिर के आकार या शरीर की बनावट में फ़र्क़
- कुछ बीमारियों में ख़ून, दिल, सुनने या देखने की समस्याएँ
यह क्यों होता है, और किसे होने की संभावना ज़्यादा है?
जीन में बदलाव
- किसी एक जीन में बदलाव — माता-पिता से आया या नया बना
- कोई कम, ज़्यादा या बदला हुआ क्रोमोसोम
- कई जीनों में बदलाव, रहन-सहन और माहौल के साथ मिलकर
संभावना किससे बढ़ती है
- परिवार में उसी बीमारी का इतिहास
- क़रीबी रिश्तेदारों में शादी
- कुछ क्रोमोसोम वाली बीमारियों में माँ की बड़ी उम्र
गर्भ की सुरक्षा में क्या मदद करता है
इसका पता कैसे चलता है?
डॉक्टर जेनेटिक बीमारियों का पता शारीरिक जाँच, व्यक्ति और परिवार के इतिहास, और लैब की जाँचों से लगाते हैं — जिनमें जेनेटिक टेस्ट भी शामिल है।
जेनेटिक टेस्ट
ख़ून या लार के नमूने में जीन के बदलाव देखे जाते हैं। इससे बीमारी की पुष्टि हो सकती है और परिवार के दूसरे लोगों का ख़तरा भी पता चल सकता है।
गर्भावस्था में स्क्रीनिंग
अल्ट्रासाउंड और माँ के ख़ून की जाँच जन्म से पहले कुछ बीमारियों की संभावना बता सकते हैं।
नवजात की स्क्रीनिंग
जन्म के बाद सरल जाँचें कुछ मेटाबॉलिक और सुनने की बीमारियों को जल्दी पकड़ती हैं।
न्यूरोथेरेपिस्ट डॉक्टर की बताई बीमारी और रिपोर्ट, व्यक्ति की उम्र, और यह पूछता है कि कभी कैंसर तो नहीं हुआ — इन्हीं से तय होता है कि कौन-से पॉइंट दिए जा सकते हैं। फिर थेरेपिस्ट Liv°, Mu° और नाभि के चारों ओर के दर्द देखता है, जिनसे फ़ॉर्मूला चुना जाता है।
न्यूरोथेरेपी की नज़र से जेनेटिक बीमारियाँ
LMNT पद्धति का अपना ब्यौरा साफ़ बताता है कि Genes फ़ॉर्मूले कैसे शुरू हुए। कुछ पुरानी बीमारियों में सामान्य ट्रीटमेंट से थोड़ी ही राहत मिलती थी। तब विचार आया कि परेशानी कोशिका के अंदर, जीन के काम में हो सकती है — और गुरुजी ने पढ़ा था कि 1,25 DCC (विटामिन D का सक्रिय रूप) और विटामिन B₁₂ जीन के काम की देखभाल करते हैं। इसी से Genes फ़ॉर्मूलों का परिवार बना। ये शरीर को सहारा देने के लिए दिए जाते हैं; ये किसी के जीन नहीं बदलते, और LMNT पद्धति इस काम को अभी जारी रिसर्च मानती है।
LMNT पद्धति में Genes फ़ॉर्मूलों का परिवार
- पहले पाचनज़रूरत के हिसाब से बीच-बीच में UDF, और आमाशय व पाचन ठीक करने वाले ट्रीटमेंट
- विटामिन B₁₂ और फ़ोलिक एसिडजीन की बीमारियों में LMNT पद्धति B₁₂ और फ़ोलिक एसिड के पॉइंट — Lt. और Rt. Parkhoo — उत्तेजित करती है
- नाभि से चुनावBlack ट्रीटमेंट, Pure Folic Black या Large Folic Black — नाभि के चारों ओर के दर्द देखकर
- एक फ़ॉर्मूला, लगातारGenes फ़ॉर्मूले एक दिन से दूसरे दिन आपस में मिलाए नहीं जाते
- रोज़ की ज़िंदगी देखिएव्यक्ति अब क्या कर पाता है — खाना, बैठना, सोना, चलना — कोई वादा नहीं
LMNT पद्धति New Genes फ़ॉर्मूला, Oxygen-Hormonal ट्रीटमेंट और — अभी जारी रिसर्च के रूप में — New Star Modified फ़ॉर्मूला भी गिनाती है, जिसके बाद न्यूरोथेरेपिस्ट ने देखा कि B₁₂ और फ़ोलिक एसिड दोनों पॉइंट का दर्द अक्सर चला जाता है। इस परिवार का सबसे तेज़ फ़ॉर्मूला, Pure Genes, बहुत कम इस्तेमाल के लिए रखा जाता है।
जहाँ भी प्रश्नचिह्न है, वह इस बात का संकेत है कि यह मेरी अपनी सोच है, जिस पर अब दूसरे लोग रिसर्च कर सकते हैं।
जेनेटिक बीमारियाँ का न्यूरोथेरेपी इलाज, क़दम-दर-क़दम
पहले जाँच
थेरेपिस्ट डॉक्टर की रिपोर्ट पढ़ता है, व्यक्ति की उम्र और किसी कैंसर के बारे में पूछता है, और Liv°, Mu° और नाभि के चारों ओर के दर्द देखता है। छोटे बच्चे के माता-पिता से मल, भूख और नींद के बारे में पूछा जाता है।
पाचन ठीक करना
ज़रूरत के हिसाब से बीच-बीच में UDF, और आमाशय व पाचन ठीक करने वाले ट्रीटमेंट, Genes वाले काम के साथ चलते हैं।
एक समय में एक Genes फ़ॉर्मूला
Black ट्रीटमेंट, Pure Folic Black या Large Folic Black नाभि के चारों ओर के दर्द से चुना जाता है; New Genes इस परिवार का एक और सदस्य है। चुना गया फ़ॉर्मूला रोज़-रोज़ दूसरे के साथ मिलाया नहीं जाता।
Pure Genes — बहुत कम
Pure Genes बहुत ही तेज़ है और आम तौर पर इस्तेमाल नहीं होता। इसे अनुभवी थेरेपिस्ट के हाथों बहुत कम इस्तेमाल के लिए रखा जाता है।
असली फ़ायदे लिखिए
तरक़्क़ी इस रूप में लिखी जाती है कि व्यक्ति अब क्या कर पाता है जो पहले नहीं कर पाता था — और डॉक्टर की देखभाल व सारी थेरेपी जारी रहती हैं।
इस्तेमाल होने वाले पॉइंट और फ़ॉर्मूले
Black ट्रीटमेंट
Genes परिवार का फ़ॉर्मूला जो विटामिन B₁₂ वाले पॉइंट (Lt. Parkhoo) पर ख़त्म होता है — नाभि के चारों ओर के दर्द देखकर चुना जाता है।
इन पॉइंट्स से काम करता है
खोलें →Large Folic Black
फ़ोलिक एसिड और विटामिन B₁₂ के पॉइंट (Rt. और Lt. Parkhoo) को जोड़ता है — नाभि के चारों ओर के दर्द से चुना जाने वाला विकल्प।
इन पॉइंट्स से काम करता है
खोलें →New Genes फ़ॉर्मूला
Genes फ़ॉर्मूला नंबर 3, जिसे पहले Pan–WD फ़ॉर्मूला कहते थे — LMNT में जन्म से मौजूद तकलीफ़ों के लिए दिया जाता है।
इन पॉइंट्स से काम करता है
खोलें →Pure Genes फ़ॉर्मूला
Pure 1,25 DCC के साथ Lt. Parkhoo (Genes फ़ॉर्मूला नंबर 2) — बहुत तेज़, और बहुत कम इस्तेमाल होता है।
इन पॉइंट्स से काम करता है
खोलें →यह कभी न करें
- जेनेटिक बीमारियाँ ज़िंदगी भर रहती हैं। न्यूरोथेरेपी जीन नहीं बदलती; यह आराम, ताक़त और रोज़ के कामकाज में सहारा दे सकती है, और सुधार बताए गए हैं। डॉक्टर, जेनेटिक काउंसलिंग, फ़िज़ियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी और स्कूल की मदद जारी रखें — इनकी जगह कभी नहीं।
- बच्चों को बड़ों की आधी खुराक और सिर्फ़ हल्का ट्रीटमेंट दिया जाता है, वह भी प्रशिक्षित थेरेपिस्ट के हाथों।
- Pure Genes बहुत ही तेज़ है और आम तौर पर इस्तेमाल नहीं होता। Genes फ़ॉर्मूले एक दिन से दूसरे दिन आपस में मिलाए नहीं जाते। Pure Genes फ़ॉर्मूला
- (2) Pan ठीक छह सेकंड दिया जाता है, और क़द बढ़ाने का ट्रीटमेंट ले रहे बच्चे को कभी नहीं। (2) Pan
- किशोर उम्र में Lt. Ov, Rt. Ov और WD नहीं दिए जाते — इसलिए New Genes, Black ट्रीटमेंट और Large Folic Black में थेरेपिस्ट को योजना बदलनी होती है। WD
- बच्चे में दौरे, साँस की तकलीफ़, नीले होंठ, ठीक से न खा-पी पाना या असामान्य सुस्ती हो, तो पहले डॉक्टर या अस्पताल।
- कैंसर: अगर व्यक्ति को कैंसर है, तो (10) Pan, Thymus, Pit, Lu + Sh, Rt. Ov / Lt. Ov और (30) Medulla कभी नहीं दिए जाते — थेरेपिस्ट योजना बदल देता है।
- डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें। न्यूरोथेरेपी आपके इलाज के साथ काम करती है, उसकी जगह नहीं।
वीडियो देखें
New Genes फ़ॉर्मूले का हिंदी में क़दम-दर-क़दम प्रदर्शन: जाँघ और कूल्हे के मोड़ पर (8) Pan, दोनों बाँहों पर (6) WD, (8) Ch. Only और Round Arrow — मरीज़ की स्थिति और हर गिनती कैसे रखी जाती है।
इसमें विटामिन B12 ट्रीटमेंट दिखाया गया है — जाँघ और बाँह पर (3) Gal और (7) Liv, फिर करवट लिटाकर बाएँ कूल्हे पर (8) Left Parkhoo। यह शरीर में B12 के अवशोषण को सहारा देने के लिए दिया जाता है।
New Genes फ़ॉर्मूले का प्रदर्शन, और विटामिन B₁₂ ट्रीटमेंट — (3) Gal (7) Liv (8) Lt. Parkhoo — का, जिसके क़दम Black ट्रीटमेंट और Large Folic Black के आख़िर में आते हैं। बच्चे के लिए यही काम हाथों से, हल्के दबाव और आधी खुराक में दिया जाता है।
आयुर्वेद और रसोई से
ख़ुद को परखें
शोध क्या कहता है
- मज़बूत प्रमाण
फ़ोलेट (उसी रास्ते में विटामिन B₁₂ के साथ) वे छोटे रासायनिक निशान देता है जिनसे शरीर जीन को चालू और बंद करता है — इसे DNA मिथाइलेशन कहते हैं, और यह सामान्य विकास के लिए ज़रूरी है। LMNT पद्धति के फ़ोलिक एसिड और B₁₂ पॉइंट्स पर ज़ोर के पीछे शरीर का यही तंत्र है।
जेनेटिक बीमारियों में न्यूरोथेरेपी का कोई क्लिनिकल ट्रायल अभी तक प्रकाशित नहीं हुआ है। न्यूरोथेरेपिस्ट और परिवार जो सुधार बताते हैं, वे क्लिनिकल अवलोकन हैं।
आपके लिए
माता-पिता
डॉक्टर की हर विज़िट और शुरुआती थेरेपी जारी रखें। हर न्यूरोथेरेपी विज़िट पर सारी रिपोर्ट लाएँ और बच्चे के साथ कमरे में रहें।
बच्चे की योजना बना रहे परिवार
अगर परिवार में कोई बीमारी चलती है, तो डॉक्टर से जेनेटिक टेस्ट और काउंसलिंग के बारे में पूछें। गर्भ से पहले और उसके दौरान पर्याप्त फ़ोलिक एसिड ज़रूरी है।
किशोर और वयस्क
थेरेपिस्ट को अपनी उम्र बताएँ — किशोर उम्र में कुछ पॉइंट नहीं दिए जाते, और योजना बदलती है।
यह पेज समझाता है, जाँच नहीं करता। न्यूरोथेरेपी आपके डॉक्टरी इलाज के साथ काम करती है — डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें, और कोई नया या गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर को दिखाएँ।