पानी कैसे पिएँ: रोज़ के सात नियम और हर नियम का कारण
न्यूरोथेरेपी (LMNT) पानी पीने के तरीक़े और किस पानी से बचना है, इस पर आसान नियम देती है, और हर नियम के साथ उसका कारण भी। इनमें कोई ख़र्च नहीं है और हर घर इन्हें निभा सकता है।
परिचय
पानी बैठकर पिएँ। कहा गया है कि खड़े होकर पीने से पिंडलियों का ख़ून दूसरी ओर चला जाता है। बैठकर पीने वाला धीरे भी पीता है, और बैठकर पीने वाला बुज़ुर्ग गिरता भी नहीं।
पीने का पानी मटके या सुराही जैसे मिट्टी के बर्तन में रखें, फ़्रिज में नहीं। बहुत ठंडे पानी को शरीर के अंदर गरम करने में शरीर की ऊर्जा बर्बाद होती है। मिट्टी का घड़ा पानी को ठंडा रखता है, बर्फ़ जैसा नहीं बनाता। घड़ा न हो, तो पीने से कुछ देर पहले बोतल फ़्रिज से निकाल लें।
सुबह उठते ही ठंडा पानी न पिएँ, क्योंकि इससे बलगम बनता है; दिन का पहला पानी सामान्य तापमान का या गुनगुना हो। दूध या चाय के तुरंत बाद पानी न पिएँ, क्योंकि इससे शरीर में अल्कली बढ़ती है और मसूड़े कमज़ोर होते हैं। चाय के बाद थोड़ा रुकें, फिर पानी पिएँ। इसी तरह ख़रबूज़ा या तरबूज़ खाने के बाद भी पानी न पिएँ।
जिस पानी में बुलबुले हों, जो गंदला दिखे या जिसमें बदबू हो, उसे न पिएँ। हो सकता है पाइप में गंदे नाले का पानी मिल गया हो, और हैजा व टाइफ़ाइड जैसी बीमारियाँ इसी तरह फैलती हैं। ऐसा पानी उबालें, छानें या साफ़ करें, और घर में बच्चा या बुज़ुर्ग हो तो और भी ज़्यादा सावधानी रखें।
दस्त में सादा पानी सबसे अच्छा पेय नहीं है, क्योंकि इससे दस्त बढ़ सकते हैं। नींबू, नमक और चीनी वाला पानी धीरे-धीरे घूँट-घूँट दें। केमिस्ट से मिलने वाला ORS का पैकेट, ठीक उतने पानी में घोलकर जितना उस पर छपा है, सबसे सुरक्षित तरीक़ा है।
मुख्य बातें
- बैठकर, धीरे-धीरे पानी पिएँ।
- मिट्टी का घड़ा, फ़्रिज नहीं।
- उठते ही ठंडा पानी नहीं; चाय, दूध या ख़रबूज़े के तुरंत बाद पानी नहीं।
- बुलबुले वाला, गंदला या बदबूदार पानी उबालकर या साफ़ करके ही पिएँ।
- दस्त में नमक-चीनी-नींबू का पानी या ORS घूँट-घूँट दें।
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सावधानी: कब नहीं दिया जाता
- इन नियमों में या इस थेरेपी में कुछ भी मिर्गी की दवा की जगह नहीं लेता। डाइट अच्छी चल रही है, इस कारण दौरों की दवा कभी कम, देर से या बंद न करें। मिर्गी (दौरे)
- नमक-चीनी वाला घोल बताए गए से ज़्यादा गाढ़ा न बनाएँ। ज़्यादा नमक या चीनी दस्त को और बढ़ाते हैं, जो छोटे बच्चे में ख़तरनाक है। अगर घोल नमकीन लगे, तो फेंककर दोबारा बनाएँ। दस्त (पतले मोशन)
- शिशु या छोटे बच्चे को दस्त, मल में ख़ून, न रुकने वाली उल्टी, धँसी आँखें, कई घंटों तक पेशाब न आना, या तेज़ बुख़ार हो, तो उसी दिन डॉक्टर को दिखाएँ। रास्ते में भी घोल देते रहें। दस्त (पतले मोशन)
- अगर आपके डॉक्टर ने पानी की मात्रा की सीमा तय की है, तो उसी का पालन करें।
यह पेज बताता है कि न्यूरोथेरेपी (LMNT) का यह ट्रीटमेंट किसलिए है; यह ख़ुद इलाज करने की गाइड नहीं है और जाँच नहीं करता। न्यूरोथेरेपी (LMNT) आपके डॉक्टरी इलाज के साथ काम करती है — डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें।