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न्यूरोथेरेपी (LMNT) विषय

फ़ेदर टच: सबसे कोमल ट्रीटमेंट, उन रोगियों के लिए जो और कुछ सह नहीं सकते

फ़ेदर टच उँगलियों के सिरों से किया जाने वाला बहुत हल्का स्पर्श है, मोर के पंख जितना कोमल। इसे किसी भी स्थिति में दिया जा सकता है, और यह लकवा, अकड़न, दर्द और दिमाग़ की बीमारियों में इस्तेमाल होता है।

परिचय

फ़ेदर टच मोर के पंख जितना हल्का है, फिर भी त्वचा इसे तंत्रिका-तंत्र तक पहुँचा देती है।

फ़ेदर टच न्यूरोथेरेपी (LMNT) का सबसे कोमल ट्रीटमेंट है। थेरेपिस्ट उँगलियों के सिरों से शरीर के ज़रूरी हिस्से पर इतना हल्का हाथ फेरता है, जितना मोर का पंख फेरेगा। इसमें न कोई वज़न है, न झटका, और न ऐसी कोई स्थिति जिसमें रोगी को टिके रहना पड़े।

इसे पूरे शरीर में इम्पल्स, यानी नसों के संकेत, भेजने के लिए दिया जाता है। स्रोत बताता है कि यह लकवा, अकड़न, दर्द और दिमाग़ की सभी बीमारियों में बहुत फ़ायदेमंद है। रोगी किसी भी स्थिति में लेटा, बैठा या गोद में हो सकता है।

इसीलिए यह आख़िरी सहारे का ट्रीटमेंट है। नवजात शिशु, गर्भ के आख़िरी दिनों वाली महिला, जिसकी हड्डियाँ आसानी से टूटती हों, स्ट्रोक के शुरुआती दिनों वाला रोगी, ऐसा बच्चा जो छूने न दे, या इतना दर्द कि हथेली भी सहन न हो — जब बाक़ी सब ट्रीटमेंट बंद हों, तब भी इन्हें यह दिया जा सकता है।

गुरुजी ने सिखाया कि थेरेपिस्ट के मन की हालत भी हाथ के साथ पहुँचती है। शांत ध्यान, रोगी के ठीक होने की कामना और किसी के प्रति बैर न रखना — ये इसे देने के तरीक़े का हिस्सा हैं। जल्दबाज़ी और चिढ़ भी बाँह से होकर पहुँचती है।

शरीर-विज्ञान भी मानता है कि हल्का स्पर्श एक असली संकेत है। त्वचा में ख़ास धीमी नसें होती हैं जो धीमे, कोमल स्पर्श पर सबसे अच्छी तरह जवाब देती हैं, और कोमल स्पर्श शरीर को शांत करता है। फ़ेदर टच देने का सही तरीक़ा न्यूरोथेरेपी (LMNT) कोर्स में हाथों-हाथ सिखाया जाता है।

मुख्य बातें

  • फ़ेदर टच उँगलियों के सिरों का स्पर्श है, मोर के पंख जितना हल्का।
  • इसे किसी भी स्थिति में, बिना वज़न और बिना झटके के दिया जा सकता है।
  • यह लकवा, अकड़न, दर्द और दिमाग़ की बीमारियों में इस्तेमाल होता है।
  • यह उन रोगियों के लिए खुला रहता है जिन्हें और कुछ नहीं दिया जा सकता।
  • शांत और दयालु मन इसे देने के तरीक़े का हिस्सा है।

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पूरी गाइड पढ़िए

यह विषय इस गाइड का हिस्सा है: कम दिखने वाली तकलीफ़ें: एक-एक रोगी से खोजे गए न्यूरोथेरेपी (LMNT) पॉइंट

सावधानी: कब नहीं दिया जाता

  • अचानक कमज़ोरी, चेहरा लटकना या बोली लड़खड़ाना आपातकाल है। तुरंत 108/112 पर फ़ोन करें; फ़ेदर टच बाद में सहारा है, अस्पताल के इलाज की जगह कभी नहीं। लकवा और स्ट्रोक
  • बच्चों और कमज़ोर रोगियों को हमेशा हल्का ट्रीटमेंट दिया जाता है। कमज़ोर और बुज़ुर्ग रोगी (हल्की देखभाल)
  • न्यूरोथेरेपी (LMNT) आपके मेडिकल इलाज के साथ-साथ काम करती है। कोई भी दवा अपने आप बंद या कम न करें; यह उस डॉक्टर से पूछें जिसने दवा लिखी है।

गुरुजी कहते हैं

“जैसे भजिये की ख़ुशबू से ही — या उसका नाम सुनते ही — मुँह में पानी आ जाता है, यानी शरीर अपना काम ख़ुद करने लगता है … यही फ़ेदर टच ट्रीटमेंट का तर्क है।”
— डॉ. लाजपतराय मेहरा

यह पेज बताता है कि न्यूरोथेरेपी (LMNT) का यह ट्रीटमेंट किसलिए है; यह ख़ुद इलाज करने की गाइड नहीं है और जाँच नहीं करता। न्यूरोथेरेपी (LMNT) आपके डॉक्टरी इलाज के साथ काम करती है — डॉक्टर की दी हुई दवाएँ लेते रहें।

Neurotherapy.Life टीम द्वारा, डॉ. लाजपतराय मेहरा की शिक्षाओं पर आधारित

समीक्षा: डॉ. दिवाकर शुक्ला, वरिष्ठ न्यूरोथेरेपिस्ट

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